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Anil Kumar Singh
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  • अमीरुद्दीन 'अमीर'
 

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Anil Kumar Singh replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-137
"नाहक जी मतले के ऊला पर नज़र ए सानी हो "
Nov 27
Anil Kumar Singh replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-137
"मान्यवर अप आपने कमेंट को ध्यान से पढ़ें . आपने नुमाया तौर पर अरूज के ऐतबार से 'राह' को 'रह' कहने पर आपत्ति की  है . मतले के सानी की तो आप  नी बात कह रहे हैं..सानी में कहाँ दिक्कत हैं बताएँ .ग़लत होगा तो जरूर सुधार होगा ."
Nov 27
Anil Kumar Singh replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-137
"जी बिल्कुल लिए जा सकता है . शकील बदायूंनी का शेर मैंने सौरभ पाण्डेय जी के प्रतिउत्तर में उद्धरित किया है . धन्यवाद मान्या ."
Nov 27
Anil Kumar Singh replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-137
"ग़ज़ल पर ग़ौर फरमाने का बेहद शुक्रिया मुहतरम दयाराम मैथानी जी  ."
Nov 27
Anil Kumar Singh replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-137
"मुसाफ़िर जी ग़ज़ल पर नज़र ए इनायत का बेहद शुक्रिया मोहतरम. रहे इश्क़ दुरुस्त तजवीज़ हैं जनाब ."
Nov 27
Anil Kumar Singh replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-137
"जी तबसिरात का शुक्रिया . 'कितना ' लफ़्ज़ जरूर बे ख़याली में कहाँ गया मगर मोहतरम 'रहे इश्क़'  बहर के मुताबिक दुरुस्त है. ग़म-ए-आशिक़ी से कह दो रह-ए-आम तक न पहुँचे ... मगर ऐसी बे-रुख़ी क्या कि सलाम तक न पहुँचे.' मतला…"
Nov 27
Anil Kumar Singh replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-137
"गिरह  - नहीं राह कोई सूझे न पता है मंज़िलों का ये कहाँ पहुँच गए हम तेरी बज़्म से निकल के "
Nov 26
Anil Kumar Singh replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-137
"1121 2122 1121 2122रहे इश्क़ में चलें हम कितना सँभल सँभल के न हो साथ गर तुम्हारा रह जाएँगे फ़िसल के ये बड़े शरारती हैं न हैं अश्क मेरे बस में मैंने लाख रोका फिर भी चले आए ये निकल के मेरे ख़ुश्क़ लब तलक तो नहीं आया एक कतरा तेरी महफ़िलों में साक़ी यूँ…"
Nov 26
Anil Kumar Singh replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-136
"ईता की ऐब को सुधार दिया है मोहतरम  दौर ए ख़िज़ाँ में दुनियाँ तुझको हमने ही आबाद किया फ़सल ए बहाराँ में लेकिन कब तू  ने हम को याद किया"
Oct 29
Anil Kumar Singh replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-136
"दंड पाणि जी अच्छी ग़ज़ल की मुबारक़ बाद क़बूल करें ."
Oct 29
Anil Kumar Singh replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-136
"मतले के ईता दोष को सुधार दिया है... दौर ए ख़िज़ाँ में दुनियाँ तुझको हमने ही आबाद किया फ़सल ए बहाराँ में लेकिन कब तू  ने हम को याद किया"
Oct 29
Anil Kumar Singh replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-136
"सालिक जी धन्यवाद . मतला ईता का शिकार हो गया था . इसे मुलाहिजा करें   दौर ए ख़िज़ाँ में दुनियाँ तुझको हमने ही आबाद किया फ़सल ए बहाराँ में लेकिन कब तू  ने हम को याद किया"
Oct 29
Anil Kumar Singh replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-136
"दीपांजलि जी बेहद शुक्रिया मोहतरमा "
Oct 29
Anil Kumar Singh replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-136
"मुसाफ़िर जी बेहद शुक्रिया "
Oct 29
Anil Kumar Singh replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-136
"बेहद शुक्रिया मोहतरम . ईता दोष के कारण मतले में ये तब्दीली कर रहा हूँ .मुलाहिजा हो ... दौर ए ख़िज़ाँ में दुनियाँ तुझको हमने ही आबाद किया फ़सल ए बहाराँ में लेकिन कब तू  ने हम को याद किया"
Oct 29
Anil Kumar Singh replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-136
"मोहतरमा आरजू जी  ईता दोष इंगित करने का शुक्रिया . मतले को यूँ बादल रहा हूँ ... दौर ए ख़िज़ाँ में दुनियाँ तुझको हमने ही आबाद किया फ़सल ए बहाराँ में लेकिन कब तू  ने हम को याद किया"
Oct 29

Profile Information

Gender
Male
City State
Patna Bihar
Native Place
Garhbaruari
Profession
Retired IPS Officer
About me
I compose poetry

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At 4:49pm on May 30, 2020, Anil Kumar Singh said…

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सादर , अनिल कुमार सिंह भा.पु.से (से.नि)

 
 
 

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