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Rachna Bhatia
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Rachna Bhatia commented on अजय गुप्ता's blog post ग़ज़ल (और कितनी देर तक सोयेंगें हम)
"आदरणीय अजय गुप्ता जी बेहतरीन ग़ज़ल हुई बधाई स्वीकार करें। मुझे "जुगनुओं जैसा सीख लें" में सीख "कर" अधिक अच्छा लगा। सादर।"
20 hours ago
Rachna Bhatia replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-122
"आदरणीया राणा प्रताप जी सादर नमस्कार।ग़ज़ल तक आने तथा मुझ नौसिखिए का हौसला बढ़ाने के लिए बहुत बहुत धन्यवाद। आदरणीय रदीफ़ के साथ जाते हुए क़ाफ़िया बहुत कम थे। इसलिए कुछ शे'र में रदीफ़ के साथ इंसाफ़ नहीं कर पाई। सादर।"
Aug 29
Rachna Bhatia replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-122
"आदरणीया डिंपल शर्मा जी सादर नमस्कार।ग़ज़ल तक आने तथा हौसला बढ़ाने के लिए बहुत बहुत धन्यवाद।"
Aug 29
Rachna Bhatia replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-122
"आदरणीय दण्डपाणि'नाहक'जी ग़ज़ल तक आने तथा हौसला बढ़ाने के लिए बहुत बहुत आभार।"
Aug 29
Rachna Bhatia replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-122
"आदरणीय समर कबीर सर् ग़ज़ल तक आने तथा अपना कीमती समय देने के लिए आपकी आभारी हूँ। सर् ग़ज़ल परइपर देने के लिए बहुत बहुत आभार। सर् तीसरा शे'र का ऊला बह्र में करने के लिए बहुत बहुत धन्यवाद तथा दोनों शे'र को सुधार कर आपको फिर से दिखाती हूँ।सादर।"
Aug 28
Rachna Bhatia replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-122
"आदरणीय रूपम कुमार'मीत'जी ग़ज़ल तक आने तथा हौसला बढ़ाने के लिए बहुत बहुत आभार। जी आपने ठीक कहा। आवश्यक सुधार करती हूँ।"
Aug 28
Rachna Bhatia replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-122
"आदरणीय अमीरुद्दीन'अमीर' जी ग़ज़ल तक आने तथा हौसला बढ़ाने के लिए बहुत बहुत धन्यवाद। जी, जरूर ।"
Aug 28
Rachna Bhatia replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-122
"आदरणीय अजय गुप्ता जी ग़ज़ल तक आने तथा हौसला बढ़ाने के लिए बहुत बहुत धन्यवाद। "
Aug 28
Rachna Bhatia replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-122
"आदरणीय शिज्जु शकूर जी ग़ज़ल तक आने तथा अपनी राय रखने के लिए बहुत बहुत आभारी हूँ। जी आवश्यक सुधार करती हूँ।"
Aug 28
Rachna Bhatia replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-122
"आदरणीय अनीस अरमान जी ग़ज़ल तक आने तथा अपनी राय रखने के लिए बहुत बहुत आभारी हूँ। जी जरूर आवश्यक सुधार करती हूँ।"
Aug 28
Rachna Bhatia replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-122
"आदरणीय अनीस अरमान जी,तरही मिसरे पर बेहतरीन कही।बधाई स्वीकार करें।"
Aug 28
Rachna Bhatia replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-122
" आदरणीय अमीरुद्दीन 'अमीर' जी नमस्कार।उम्द: ग़ज़ल हुई बधाई स्वीकार करें। केवल जिज्ञासावशक्या पाँचवे में तक़ाबुल-ए-रदीफ़ है।सादर"
Aug 28
Rachna Bhatia replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-122
"221 / 2121 / 1221 / 212 1 ज़िक्र-ए-शहीद जब भी कहानी में आएगा तब तब उबाल लफ़्ज़-ए-बयानी में आएगा 2 ख़ाली किया गया न अगर सब्र का सुबू तो यह भी बह के आँख के पानी में आएगा 3 जब भी निवाला हाथ से माँ मुझको खिलाएगी *"बचपन का दौर फिर से जवानी में…"
Aug 28
Rachna Bhatia replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-122
"आदरणीय दण्डपाणि 'नाहक' जी , नमस्कार। बेहतरीन ग़ज़ल हुई। बधाई स्वीकार करें।"
Aug 28
Rachna Bhatia commented on रवि भसीन 'शाहिद''s blog post बड़ा दिन हो मुबारक
"आदरणीय रवि भसीन'शाहिद' जी बेहतरीन नज़्म लिखी। बधाई स्वीकार करें।"
Aug 15
Rachna Bhatia replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-121
"आदरणीया राजेश कुमारी जी शानदार ग़ज़ल की हार्दिक बधाई।मतला बेहद लाजवाब है।"
Jul 24

Profile Information

Gender
Female
City State
Delhi
Native Place
Delhi
Profession
Teacher
About me
nothing special... just start my journey ....

Rachna Bhatia's Blog

ग़ज़ल

2122 2122 212

.

जो तुम्हारा है हमारा क्यों नहीं

ये किसी ने भी बताया क्यों नहीं



शह्र से मज़दूर आए गांव क्यों

वक़्त पर उनको सँम्हाला क्यों नहीं



लाख तारे आसमाँ पर थे मगर

इक भी मेरी छत पे आया क्यों नहीं



ख़्वाहिशों की भीड़ से ही पूछ लो

मुझको इक पल का सहारा क्यों नहीं



ज़िन्दगी भी दे रही ता'ना हमें

लफ़्ज़ खु़शियों का लिखाया क्यों नहीं



हारते हैं ग़म से "निर्मल" रोज़ ही

जीतना हमको सिखाया क्यों नहीं…



Continue

Posted on June 6, 2020 at 9:00pm — 3 Comments

ग़ज़ल

2122 1122 1122 22

1

गर्म अफ़वाहों का बाज़ार ख़ुदा ख़ैर करे

बिक रहा झूठ का अख़बार ख़ुदा ख़ैर करे

2

चार सिक्कों की ख़नक जेब में क्या होने लगी

हो गए हम भी तलबगार ख़ुदा ख़ैर करे

3

शांत लहरों में भी कश़्ती को सहारा न मिला

डूबी मँझधार में पतवार ख़ुदा ख़ैर करे

4

इश़्क था या कि अज़ीयत ओ फ़ज़ीहत का सफर

है अलम दिल का पुर आज़ार ख़ुदा ख़ैर करे



बाँध रक्खा है किनारों ने संमदर ऐसे

रुक गई लहरों की रफ़्तार ख़ुदा ख़ैर… Continue

Posted on April 2, 2020 at 1:31pm — 4 Comments

ग़ज़ल

212 1212 1212 1212



सिर पे पांव रख हमारे,चढ़ रहे हो सीढ़ियाँ

फैंक दलदलों में यार,मांगते हो माफियाँ



जिंदगी में देख लीं,बहुत सी हमने आंधियाँ

खत्म हो चुके हैं अश्क,बंद सी हैं सिस्कियाँ



दास्ताने जिंदगी, सुना सके न हम कभी

दर खुदा के आ खड़े,ले चंद हम भी अर्जि़याँ



छा रही है तीरगी,न रोशनी दिखे कहीं

मौत है बुला रही,दे जिंदगी भी धमकियाँ



चापलूसी बोलती,न महनतों का मोल है

लग रही जगह जगह, इमान की ही बोलियाँ



साथ छोड़ चल… Continue

Posted on June 10, 2019 at 7:55pm — 5 Comments

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"आदरणीय अजय गुप्ता जी, प्रदत्त चित्र पर चारों छंद सुंदर रचे हैं आपने. हार्दिक बधाई स्वीकारें. फिरभी…"
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Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक-113 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव साहब सादर, प्रदत्त चित्र को परिभाषित करते सुंदर हरिगीतिका छंद रचे…"
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अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक-113 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय अशोक भाईजी तीनों छंद की सभी पंक्तियाँ चित्र को साकार करती और नारियों के उज्जवल भविष्य की…"
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Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक-113 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीया प्रतिभा पांडे जी सादर, प्रदत्त चित्र को नारियों की तरक्की के उत्तम भाव देकर आपने सुन्दरता…"
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अजय गुप्ता replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक-113 in the group चित्र से काव्य तक
"श्री सौरभ जी, आपकी टिप्पणी ने मन को उत्साह दे दिया है। शुक्रिया। बहुत बहुत आभार इस विस्तृत विमर्श…"
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अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक-113 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय सौरभ  भाईजी मुझे भी लगा कि उसी पँक्ति में संशोधन के स्थान पर पूरी  पँक्ति को बदल…"
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Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक-113 in the group चित्र से काव्य तक
"हरिगीतिका   छूने चली हैं औरतें नभ, कम नहीं सच मर्द से । ये हारने वाली नहीं अब, मार से या दर्द…"
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