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Rachna Bhatia
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Rachna Bhatia replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-125
"आदरणीय समर कबीर सर् ग़ज़ल तक आने और हौसला बढ़ाने के लिए आपकी आभारी हूँ। आदरणीय, आपके कहे अनुसार सुधार कर लेती हूँ  और मतला फिर से कहने की कोशिश करती हूँ। बेहद शुक्रिय:।"
Nov 28
Rachna Bhatia replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-125
"आदरणीय समर कबीर सर् नमस्कार। जी, सर् समझ गई। संज्ञान के लिए आपकी बेहद आभारी हूँ। सादर। "
Nov 28
Rachna Bhatia replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-125
"आदरणीय रूपम कुमार 'मीत ' जी  ग़ज़ल तक आने तथा अपनी राय देने के लिए आभारी हूँ। आदरणीय 'बेवज्ह'  सोच कर ऊला लिखा था। लगता है यहीं चूक हो गई। बाकी सुधार आदरणीय समर कबीर सर् की इस्लाह आने के बाद कर लेती हूँ। सादर। "
Nov 28
Rachna Bhatia replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-125
"आदरणीया राजेश कुमारी जी बेहतरीन ग़ज़ल की बधाई स्वीकार करें। "
Nov 28
Rachna Bhatia replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-125
"आदरणीया अंकिता जी बेहतरीन ग़ज़ल की बधाई। मतला बहुत ख़ूब कहा आपने। "
Nov 28
Rachna Bhatia replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-125
"आदरणीया ॠचा यादव जी, सर् की इस्लाह के बाद आपकी ग़ज़ल लाजवाब हो गई है। बधाई स्वीकार करें। "
Nov 28
Rachna Bhatia replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-125
"आदरणीय लक्ष्मण धामी "मुसाफिर जी, नमस्कार। बेहतरीन ग़ज़ल की बधाई स्वीकार करें। "
Nov 28
Rachna Bhatia replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-125
"आदरणीय तस्दीक अहमद जी बहुत अच्छी ग़ज़ल कही आपने। हार्दिक बधाई। "
Nov 28
Rachna Bhatia replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-125
"आदरणीय अनिल कुमार सिंह जी बेहतरीन ग़ज़ल हुई। बधाई। "
Nov 28
Rachna Bhatia replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-125
"आदरणीय सालिक गणवीर जी बेहतरीन ग़ज़ल की बधाई स्वीकार करें,।"
Nov 28
Rachna Bhatia replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-125
"आदरणीय, ग़लत टिप्पणी के लिए क्षमा चाहती हूँ। पर सच में मैंने समझने की बहुत कोशिश की पर समझ नहीं पाई कि  आजिश और अंजिश  किस तरह से हमक़ाफ़िया हुए और फिर आगे किस तरह से हम इश क़ाफ़िया ले सकते हैं।कृपया थोड़ी वजाहत कर दें। सादर।"
Nov 28
Rachna Bhatia replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-125
"2122 1122 1122 22 1 देख बे-वजह तो तेरी आँखों ने बारिश नहीं की दिल से मिल कर तो कहीं माज़ी ने साज़िश नहीं की 2 देखिए हक़ से जियाद: तो कभी भी हमने इस ज़माने से तो क्या ख़ुद से भी ख़्वाहिश नहीं की 3 दिल के सहरा के लिए किससे करें शिकवा हम ख़ुद की…"
Nov 28
Rachna Bhatia replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-125
"आदरणीय सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' जी बेहतरीन ग़ज़ल की बधाई स्वीकार करें।"
Nov 27
Rachna Bhatia replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-125
"आदरणीय चेतन प्रकाश जी नमस्कार। आदरणीय बेहतरीन ग़ज़ल हुई । इस रदीफ़ के साथ तंग क़ाफ़िया होने के बावजूद आपने अच्छी ग़ज़ल कही। आदरणीय,ज़ब्र-ओ-ज़ुल्म के वज़्न पर शंका है। सादर।"
Nov 27
Rachna Bhatia replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-125
"आदरणीय दण्डपाणि 'नाहक' जी नमस्कार। बेहतरीन ग़ज़ल हुई बधाई स्वीकार करें। आदरणीय मतले में क़ाफ़िया सही नहीं हैं शायद। सादर।"
Nov 27
Rachna Bhatia commented on Rachna Bhatia's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय समर कबीर सर्, आदाब।  सर् हौसला अफ़ज़ाई के लिए तथा इस्लाह  के लिए आपकी बेहद आभारी हूँ।  सर् आपकी इस्लाह के अनुसार सुधार कर लेती हूँ। सादर। "
Nov 24

Profile Information

Gender
Female
City State
Delhi
Native Place
Delhi
Profession
Teacher
About me
nothing special... just start my journey ....

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ग़ज़ल

2122-1212-22

1

 आदमी कब ख़ुदा से डरता है

अपनी हर बात से मुकरता है

2

जब सर-ए-शाम ग़म सँवरता है

आइना टूटकर बिखरता है

3

आज का काम आज ख़त्म करें

वक़्त किसके लिए ठहरता है

4

ताबिश-ए-ख़्वाब के लिए दिलबर

रंग मेरे लहू से भरता…

Continue

Posted on November 20, 2020 at 12:00pm — 4 Comments

ग़ज़ल

212 212 212 212

1

दोस्तों के बिना ज़िन्दगी दोस्तो

इक कहानी उदासी भरी दोस्तो

2

बीच में फ़ासले ला के दौलत के क्यों

आज़माने लगी दोस्ती दोस्तो

3

हाथ में हाथ डाले खड़ी दोस्ती

गर्दिश-ए-दौराँ से लड़ के भी दोस्तो

4

कारवाँ अज़्म का रोके रुकता नहीं

राह चाहे हो मुश्किल भरी दोस्तो

5

हार बैठे हैं दिल कू-ए-उल्फ़त में हम

अब न खेलेंगे बाजी नई दोस्तो

6

सुब्ह होते ही बेहिस जहाँ के सितम

ढूँढ लेंगे हमारी गली…

Continue

Posted on November 9, 2020 at 1:00pm — 7 Comments

ग़ज़ल

,12122 12122 12122 12122

1

लगा के ठोकर वो पूछते हैं उठा के सर क्या चला करेंगे

पलट दी बाजी ये कह के हमने ख़ुदा के दम पर बढ़ा करेंगे

2

सजा के महफ़िल मेरी तबाही की पूछते हैं कि क्या करेंगे…

Continue

Posted on October 31, 2020 at 3:47pm — 3 Comments

दरवाजा (लघुकथा)

" माँ,रोटी पर मक्खन तो रखा नहीं।हाँ,देती हूँ।" 

बेटे की रोटी पर मक्खन रखते हुए अचानक बर्तन माँजती बारह साल की बेटी छुटकी को देख सुधा के हाथ पल को ठिठके और फिर चलने लगे।वापसी में छुटकी की पीठ थपथपा काम में लग गई ।

माँ बेटी अभी थाली लेकर बैठीं थी कि पति की आवाज़ आई,

" कहां हो?पानी तो पिलाओ।खाने का कोई समय है कि नहीं जब तब थाली लिए बैठ जाती हो।यही छुटकी सीख रही है।" 

पिता की आवाज़ सुनते ही छुटकी ने जल्दी से थाली वापिस सरका दी।

सुधा ने भी जवाब के लिए तैयार होठों…

Continue

Posted on October 27, 2020 at 11:00pm — 6 Comments

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