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Ravi Shukla
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Ravi Shukla commented on मंजूषा 'मन''s blog post ग़ज़ल
"आदरणीया मंजूषा जी आपकी गजल से पहली बार मुखातिब है अच्‍छी गजल कही आपने  मुबारक बाद कुबूल करें आदरणीय समर साहब ने काफिये पर कह ही दिया है । बाकी शुभ शुभ  । सादर"
Wednesday
Ravi Shukla commented on बृजेश कुमार 'ब्रज''s blog post ग़ज़ल...हर कदम पर जह्न मेरा आजमाता कौन है-बृजेश कुमार 'ब्रज'
"आदरणीय बृजेश जी हमारे कहे को मान देने के लिये आभार"
Monday
Ravi Shukla commented on santosh khirwadkar's blog post कैसे कहूँ अब तुझसे कुछ कहा भी नहीं जाता,
"आदरणीय संतोष जी आपने जो रचना प्रस्‍तुत की है उसका फार्मेट तो गजल जैसा लग रहा है पर आपने इसकी बहर क्‍या ली है ये नहीं लिखा मंच पर गजल से पहले उसका अरकान लिखने का अनुशासन है जिससे सीखने में आसानी हो  । आ का काफिया हो कर भी मतले के बाद…"
Monday
Ravi Shukla commented on Sushil Sarna's blog post नज़र की हदों से .....
"आदरणीय सुशील जी बहुत ही अच्‍छी अतुकांत रचना हालांकि इस विधा अधिकार नहीं है इसलिये विशेष तो नहीं कह पाएंगे पर आपकी बात संप्रेषित हो रही है यही इसकी सार्थकता है"
Monday
Ravi Shukla commented on MOHD. RIZWAN (रिज़वान खैराबादी)'s blog post जश्न मिल जुल कर मनाओ यौमे आज़ादी है आज - ग़ज़ल
"आदरणीय रिजवान जी बहुत अच्‍छी और प्रासंगिक गजल कही आपने इस सुंदर गजल के लिये बधाई पेश है ।"
Monday
Ravi Shukla commented on C.M.Upadhyay "Shoonya Akankshi"'s blog post आएँगे जी आएँगे, अच्छे दिन यूँ आएँगे ...गीत / शून्य आकांक्षी
"आदरणीय चंद्र मोहन जी बहुत बहुत बधाई इस सुंदर गीत के लिये । अतुकांत के आगे गीतो में भी आपकी कलम चलते देख कर खुशी हुई जितना भी साथ रहा आपके अतुकांत से ही परिचय हो पाया था । सादर"
Monday
Ravi Shukla commented on डॉ.कंवर करतार 'खन्देह्ड़वी''s blog post ग़ज़ल
"आदरणीय कंवर करतार जी  आपकी गजल पढ़ी  बहुत बहुत बधाई आपको  दूसरा शेर देखिये  बहर खारिज हो रही है लफ्ज का उच्‍चारण कर के देखिये उसी के अनुरूप उसका वज्‍न तय होगा नकावें पहन कर जिन पर हैं बरसाते कोई पत्थर , प हन 12  तो…"
Monday
Ravi Shukla commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post कहने को शर्मीली आँखें
"आदरणीय बसंत जी शब्‍द के प्रयोग को लेकर आपकी गजल के हवाले से काफी सार्थक बहस हो गई पढने को काफी कुछ मिला । शब्‍द प्रयोग में आने के बाद शब्‍दकोष में जगह बनाता है कृष्‍ण से किशन और किशन से किसन आज साहित्‍य में प्रयोग हो रहा है और…"
Monday
Ravi Shukla commented on गिरिराज भंडारी's blog post ग़ज़ल - रोशनी है अगर तेरे दिल में- ( गिरिराज भंडारी )
"आदरणीय नीरज जी जहां तक हमें पता है दो अलग भाषा के शब्‍दों में इजाफत सहीनहीं इसलिए चश्‍में बातिल में इजाफत सही प्रयोग होगा चश्‍म और बातिल दोनो ही फारसी के अल्‍फाज है । सादर"
Monday
C.M.Upadhyay "Shoonya Akankshi" commented on Ravi Shukla's blog post गीत : एक भारत श्रेष्ठ भारत
" Ravi Shukla जी,देशभक्ति के जज्बे से ओतप्रोत शानदार गीत के लिए बधाई स्वीकार करें | यूँ तो पूरा गीत ही भावों  और सधे शिल्प का संगम है पर रेल सेवा में कार्य करने और अभी भी ट्रेड यूनियन गतिविधियों में सक्रिय रहने के…"
Aug 11
Ravi Shukla commented on बृजेश कुमार 'ब्रज''s blog post ग़ज़ल...हर कदम मेरे ज़हन को आजमाता कौन है-बृजेश कुमार 'ब्रज'
"आदरणीय सुरेन्‍द्र जी आपकी भावनाओं का हम सम्‍मान करते है पर गुरुदेव जैसा संबोधन हमारे लिये ठीक नहीं हम भी अभी आपकी तरह सीख ही रहे है"
Aug 10
Ravi Shukla commented on rajesh kumari's blog post ये जो इंसान आज वाले हैं (एक ही रदीफ़ पर दो गज़लें ---'राज')
"आदरणीया राजेश जी , दोनों गज़लें अच्छी हुईं है , हार्दिक बधाई स्वीकार करें ।"
Aug 10
Ravi Shukla commented on बृजेश कुमार 'ब्रज''s blog post ग़ज़ल...हर कदम मेरे ज़हन को आजमाता कौन है-बृजेश कुमार 'ब्रज'
"आदरणीय बृजेश कुमार जी बहुत अच्‍छी गजल कही आपने शेर दर शेर के साथ मुबारक बाद पेश करते है मतले के दोनो मिसरों को आपस में बदल कर देखिये उला का सानी करें और सानी को उला उर्दू में जह्न 21 के वज्‍न में है अगर यही मानते है तो मिसरे में सुधार…"
Aug 10
Ravi Shukla commented on surender insan's blog post ग़ज़ल " जिंदगी से जी भर गया कब का "
"आदरणीय सुरेंद्र इंसान जी बहुज बढि़या गजल कही आपने मुबारक बाद  गजल का मक्‍ता बहुत ही अच्‍छा हुआ है दाद हाजिर है मतले के उला मिसरे में जी शब्‍द कीमात्रा गिराने से लय कुछ बाधित लगी । देखियेगा कोई विकल्‍प हो तो । सादर"
Aug 10
Ravi Shukla commented on गिरिराज भंडारी's blog post ग़ज़ल - रोशनी है अगर तेरे दिल में- ( गिरिराज भंडारी )
"आदरणीय गिरिराज भाई जी  बहुत बढि़या गजल कही आपने मुबारक बाद पेश है । सादर"
Aug 10
Ravi Shukla commented on Manan Kumar singh's blog post गजल(आज चढ़ता जा रहा पारा बहुत)
"आदरणीय मनन जी गजल के लिये मुबारक बाद पेश करते है हालांकि अरकान आप ने नहीं लिखे पर प्रवाह के अनुसार इसके अरकान 2122 2122 212 समझ आए। मतले का सानी इस हिसाब से बहर में नहीं है देखियेगा फिर चिरागों ने दबोची रोशनी को  इस मिसरे में चिरागो ने दबोचा…"
Aug 10

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Ravi Shukla's Blog

गीत : एक भारत श्रेष्ठ भारत

एक भारत श्रेष्ठ भारत आइये मिलकर बनाएं

देश का  सम्मान गौरव लक्ष्य हासिल कर बढ़ाएं

 

शांति के हम पथ प्रदर्शक ध्वज अहिंसा ले चलेंगे

विश्‍व गुरु बन कर पुन: संस्थापना सच की करेंगे

दें नहीं उपदेश अपने आचरण से  कर दिखाएं

 

धर्म पूजा, जाति भाषा, वेश भूषा, बोलियाँ सब

एकता के सूत्र में बंध कर चली है टोलियाँ सब

संगठन में शक्ति है, ऐसी लिखें फिर से कथाएं

 

रेल का हमको दिखाई दे रहा है पथ समांतर

मूल में इसके छिपा है साथ…

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Posted on July 25, 2017 at 11:00am — 9 Comments

तरही ग़ज़ल

221 2121 1221 212



आए वो बज़्म ए शौक में आ कर चले गए,

फ़ित्ना सा एक दिल में उठा कर चले गए।



महफ़िल में आये जलवः दिखा कर चले गए,

जादू सा एक पल में जगा कर चले गए।



आने का और जाने का होता नहीं यकीन,

कुछ लोग इस तरह से भी आकर चले गए।



आँचल सरक के दोश से पहलू में क्या गिरा,

बैठे भी वो नहीं थे लजा कर चले गए।



पुरसान-ए-हाल के लिये यूँ आये मेरे पास

गोया कि एक रस्म निभा कर चले गए



आये वो दर्द बाँटने लेकिन… Continue

Posted on July 18, 2017 at 1:53pm — 18 Comments

तरही गजल : फूल जंगल में खिले किन के लिये

2122 2122 212

कार्ड काफी था न लॉगिन के लिए

वो हमे भी ले गए पिन के लिए



चाँद पर जाकर शहद वो खा रहे

आप अब भी रो रहे जिन के लिए



शेर को आता है बस करना शिकार

फूल जंगल में खिले किन के लिए



गुठलियों के दाम भी वो ले गया

उसने शीरीं आम जब गिन के लिये



आ गई अब ब्रेड में बीमारियाँ

जी रहे थे क्या इसी दिन के लिए



आये थे जापान से कल लौट कर

फिर उड़े वो रूस बर्लिन के लिए



पास पप्पू एक दिन हो…

Continue

Posted on May 9, 2017 at 11:46am — 27 Comments

तरही गजल : दिन सुहाने हो गये राते सुहीनी हा गईं

2122   2122   2122   212

दिन सुहाने हो गए राते सुहानी हो गईं,

उनके आते ही बहारें जाफ़रानी हो गईं।



रंग और खुशबू की बातें अब कहानी हो गईं,

मुश्किलें लगता है जैसे जाविदानी हो गईं।



आसमाँ ने जब उफ़क पर चूम धरती को लिया,

कमसिनी को छोड़कर ऋतुएं सुहानी हो गईं।



बेकरारी आज जितनी है कभी पहले न थी,

आदतें भी सब्र की जैसे कहानी हो गईं।



मिहनतों को जब मिला तेरा सहारा ए ख़ुदा,

मुश्किलें भी मेरी घट कर दरमियानी हो गईं।



रेत का इक सैल…

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Posted on March 31, 2017 at 11:06am — 17 Comments

Comment Wall (9 comments)

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At 3:39pm on April 5, 2017, Gurpreet Singh said…

आदरणीय रवि शुक्ला जी आपसे बहुत अच्छी चैटिंग हो रही थी... लेकिन ऐन वक़्त पर मेरे नेट ने धोखा दे दिया ( ये अक्सर मेरे साथ ऐसा ही करता है ) और आप से  बात चीत बीच में ही कट गई ,,, खैर फिर मौका मिला तो बात आगे बढ़ांएंगे,,, संपर्क करने के लिए बहुत बहुत धन्यवाद 

At 11:45pm on July 16, 2016,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीय रवि शुक्ल जी.
सादर अभिवादन !
मुझे यह बताते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी  ग़ज़ल - व्यापार होना चाहिए को "महीने की सर्वश्रेष्ठ रचना" सम्मान के रूप मे सम्मानित किया गया है | इस शानदार उपलब्धि पर बधाई स्वीकार करे |

आपको प्रसस्ति पत्र यथा शीघ्र उपलब्ध करा दिया जायेगा, इस निमित कृपया आप अपना पत्राचार का पता व फ़ोन नंबर admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध कराना चाहेंगे | मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई हो |
शुभकामनाओं सहित
आपका
गणेश जी "बागी
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक 
ओपन बुक्स ऑनलाइन

At 8:23pm on December 17, 2015, Nirdosh Dixit said…
प्रणाम स्वीकारें आदरणीय शुक्ल जी, सादर आभार आपका।
At 11:19pm on November 7, 2015, जयनित कुमार मेहता said…
आपका हार्दिक आभार आदरणीय रवि जी..
At 7:31pm on November 4, 2015,
सदस्य टीम प्रबंधन
Dr.Prachi Singh
said…

क्षमा कीजियेगा आ० रवि शुक्ल जी आज ही आपका कमेंट देखा...

करवाचौथ पर लिखा गया मेरा गीत मात्रिक गीत नहीं है... इसे फायलुन X 4 की आवृति पर  लिखा गया है..

मात्रिक गीतों में मात्रा को गिराकर पढने का कोई विधान नहीं होता .. 

मात्रिक गीत (गीतिका छंद पर आधारित) के  कुछ  उदाहरण देखिये 

http://www.openbooksonline.com/profiles/blogs/5170231:BlogPost:557225

http://www.openbooksonline.com/profiles/blogs/5170231:BlogPost:518431

मंच पर गीत नवगीत पर एक आलेख देखिये 

http://www.openbooksonline.com/group/chhand/forum/topics/5170231:Topic:358338?commentId=5170231%3AComment%3A359492&xg_source=activity&groupId=5170231%3AGroup%3A156482

At 9:36pm on September 16, 2015, shree suneel said…
आदरणीय रवि शुक्ला जी, हार्दिक बधाई आपको 'महीने का सक्रिय सदस्य' चुने जाने पर, मेरी ओर से. सादर.
At 2:01pm on September 16, 2015,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीय

रवि शुक्ला जी,
सादर अभिवादन,
यह बताते हुए मुझे बहुत ख़ुशी हो रही है कि ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार में विगत माह आपकी सक्रियता को देखते हुए OBO प्रबंधन ने आपको "महीने का सक्रिय सदस्य" (Active Member of the Month) घोषित किया है, बधाई स्वीकार करें | प्रशस्ति पत्र उपलब्ध कराने हेतु कृपया अपना पता एडमिन ओ बी ओ को उनके इ मेल admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध करा दें | ध्यान रहे मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई है |
हम सभी उम्मीद करते है कि आपका सहयोग इसी तरह से पूरे OBO परिवार को सदैव मिलता रहेगा |
सादर ।
आपका
गणेश जी "बागी"
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक
ओपन बुक्स ऑनलाइन

At 4:59pm on July 17, 2015,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आपको दोहा गीत पसंद आया, जानकार मन गद्गद् हो गया. ओबीओ का यह आयोजन "चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" छंदों को ही समर्पित है. यह एक कार्यशाला है जहाँ सभी आपस में एक दुसरे से सीखते है. आप आयोजन में सम्मिलित होंगे तो आपको कुछ नया सीखने मिलेगा और आपके अनुभव का लाभ मंच के अन्य सदस्यों को होगा. आप इस आयोजन में सम्मिलित होंगे तो बहुत ख़ुशी होगी. लिंक साझा कर रहा हूँ - ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव"

At 1:36pm on July 15, 2015,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

स्वागत अभिनन्दन 

ग़ज़ल सीखने एवं जानकारी के लिए

 ग़ज़ल की कक्षा 

 ग़ज़ल की बातें 

 

भारतीय छंद विधान से सम्बंधित जानकारी  यहाँ उपलब्ध है

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आप अपनी मौलिक व अप्रकाशित रचनाएँ यहाँ पोस्ट कर सकते है.

और अधिक जानकारी के लिए कृपया नियम अवश्य देखें.

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ओबीओ पर प्रतिमाह आयोजित होने वाले लाइव महोत्सवछंदोत्सवतरही मुशायरा वलघुकथा गोष्ठी में आप सहभागिता निभाएंगे तो हमें ख़ुशी होगी. इस सन्देश को पढने के लिए आपका धन्यवाद.

 
 
 

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"सतविन्दर जी भाये तुमको,मेरे सरसी छन्द । बाग़ बाग़ ये दिल कर डाला,बहुत मिला आनन्द ।। सदा बनाये रखना…"
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"बेहतरीन सार छंद/छन्नपकैया सृजन के लिए सादर हार्दिक बधाई आपको आदरणीय अरुण कुमार निगम जी"
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