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gumnaam pithoragarhi
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gumnaam pithoragarhi commented on Rachna Bhatia's blog post ग़ज़ल-अपना है कहाँ
"वाह बहुत खूब गजल हुई है है .। बहुत खूब .. "
yesterday
gumnaam pithoragarhi commented on Rachna Bhatia's blog post ग़ज़ल-अपना है कहाँ
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gumnaam pithoragarhi commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post तन-मन के दोहे - लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"
"वाह मुसाफिर जी वाह । शानदार दोहे हुए हैं । "
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gumnaam pithoragarhi commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post रक्त से भीगा है आगन आज तक भी -लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"
"वाह मुसाफिर साहब शानदार गजल हुई है । बधाई"
May 14
gumnaam pithoragarhi commented on Sushil Sarna's blog post बुझते नहीं अलाव. . . . (दोहा गज़ल )
"वाह सुशील जी वाह अच्छी गजल हुई है । बधाई"
May 13
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on gumnaam pithoragarhi's blog post अब क्या करें
"वाह वाह खूब ग़ज़ल कही आदरणीय गुमनाम जी...बधाई"
Mar 3, 2021
Samar kabeer commented on gumnaam pithoragarhi's blog post अब क्या करें
"जनाब गुमनाम पिथौरगढ़ी जी आदाब, ग़ज़ल का अच्छा प्रयास है, बधाई स्वीकार करें । 'इश्क़ पहला जो हुआ वो इश्क़ था इश्क़ तो है गुमशुदा अब क्या करें' इस शैर के दोनों मिसरों में रब्त नहीं है, देखियेगा ।"
Feb 24, 2021
gumnaam pithoragarhi commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post रातें तमस भरी हैं उलझन भरे दिवस हैं-लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' (गजल)
"वाह बहुत खूब ग़ज़ल हुई है बधाई ......"
Feb 24, 2021
gumnaam pithoragarhi commented on Krish mishra 'jaan' gorakhpuri's blog post ग़ज़ल~ 'इश्क मुहब्बत चाहत उल्फत'
"वाह बहुत खूब ग़ज़ल हुई है बधाई ......"
Feb 24, 2021
gumnaam pithoragarhi commented on Krish mishra 'jaan' gorakhpuri's blog post ग़ज़ल: 'नेह के आँसू'
"भाई जी वाह अच्छी ग़ज़ल हुई है बधाई।"
Feb 20, 2021
gumnaam pithoragarhi commented on gumnaam pithoragarhi's blog post अब क्या करें
"शुक्रिया दोस्तो , कोशिशों को आपने सराहा।"
Feb 20, 2021
Krish mishra 'jaan' gorakhpuri commented on gumnaam pithoragarhi's blog post अब क्या करें
"बहुत खूबसूरत ग़ज़ल हुई है आ. भाई गुमनाम जी तहेदिल से बधाई। और मेरे सक्रियता बढ़ाने के अनुरोध को सुनने हेतु बहुत बहुत आभार।"
Feb 20, 2021
अमीरुद्दीन 'अमीर' commented on gumnaam pithoragarhi's blog post अब क्या करें
"जनाब गुमनाम पिथौरागढ़ी जी आदाब, अच्छी ग़ज़ल हुई है मुबारकबाद पेश करता हूँ, रदीफ़ 'अब क्या करें' को 'तो क्या करें' कर लें तो ग़ज़ल में और रवानी आएगी। सादर। "
Feb 20, 2021
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on gumnaam pithoragarhi's blog post अब क्या करें
"आ. भाई गुमनाम जी, सादर अभिवादन । बेहतरीन गजल हुई है । हार्दिक बधाई ।"
Feb 20, 2021
gumnaam pithoragarhi posted a blog post

अब क्या करें

२१२२ २१२२ २१२जिस्म चाँदी का हुआ अब क्या करें उम्र निकली बेवफा अब क्या करेंइश्क़ पहला जो हुआ वो इश्क़ था इश्क़ तो है गुमशुदा अब क्या करेंयाद की अल्बम पलटकर देख ली दिन हुए वो लापता अब क्या करेंकिस तरह बच पाएगी अस्मत यहाँ हर तरफ है खौफ सा अब क्या करेंउम्र की सारी तहें भी खोल दीं खत मिले कुछ बेपता अब क्या करेंगुमनाम पिथौरगढ़ीस्वरचित व अप्रकाशितSee More
Feb 19, 2021
gumnaam pithoragarhi commented on बृजेश कुमार 'ब्रज''s blog post ग़ज़ल-और तुम हो
"वाह शानदार ग़ज़ल हुई है बधाई। अच्छी लगी वाह। ...... "
Feb 19, 2021

Profile Information

Gender
Male
City State
pithoragarh
Native Place
pithoragarh
Profession
teaching
About me
sahity ki dunia me jana pahachana naam hona chahta hoon............

gazal

धड़कता है गुनगुनाता है बतियाता है लेकिन

ख़त कि तरह मोबईल महकता नहीं है

--------------------------------------------------------------

मज़हब की किताबों के पैगाम बदल देते हैं

नानक और ईसा के नाम बदल देते हैं

फिर न होगी शिकायत किसी को ज़माने में

लाओ पैगम्बर से राम बदल देते हैं

----------------------------------------------------------------------------

ऐ वाइज़ तू क्यों फिकर में रहता है

सारा निज़ाम उसकी नज़र में रहता है

सिर्फ दैरो हरम नहीं ठिकाना उसका

हर जर्रे में वो हर बशर में रहता है

 

 

 

अप्रकाशित व मौलिक -------------------------------------

Comment Wall (5 comments)

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At 1:22pm on March 24, 2015, Dr Ashutosh Mishra said…

आदरणीय गुमनाम जी ..महेनी का सक्रीय सदस्य चुने जाने पर मेरी तरफ से भी हार्दिक बधाई स्वीकार करें सादर 

At 2:50pm on March 19, 2015, Krish mishra 'jaan' gorakhpuri said…

भाई गुमनाम जी 'महीने का सक्रिय सदस्य' के रूप में आप को देखकर अपार हर्ष हो रहा है! बहुत बहुत बधाईयां!!

At 8:22pm on March 15, 2015, maharshi tripathi said…

आ.गुमनाम पिथौरागढ़ी जी आपको विगत माह का सक्रिय सदस्य चुने जाने पर हार्दिक बधाई |

At 12:40pm on March 15, 2015,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीय
गुमनाम पिथौरागढ़ी जी,
सादर अभिवादन,
यह बताते हुए मुझे बहुत ख़ुशी हो रही है कि ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार में आपकी सक्रियता को देखते हुए OBO प्रबंधन ने आपको "महीने का सक्रिय सदस्य" (Active Member of the Month) घोषित किया है, बधाई स्वीकार करें | प्रशस्ति पत्र उपलब्ध कराने हेतु कृपया अपना पता एडमिन ओ बी ओ को उनके इ मेल admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध करा दें | ध्यान रहे मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई है |
हम सभी उम्मीद करते है कि आपका सहयोग इसी तरह से पूरे OBO परिवार को सदैव मिलता रहेगा |
सादर ।
आपका
गणेश जी "बागी"
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक
ओपन बुक्स ऑनलाइन

At 10:46pm on January 28, 2015, vijay said…
गुमनाम जी इस ग़ज़ल पर कोई काम हो तो बताएं
आपकी पिछली टिप्पणी से साहस मिला
धन्यवाद

Gumnaam pithoragarhi's Blog

अब क्या करें

२१२२ २१२२ २१२

जिस्म चाँदी का हुआ अब क्या करें
उम्र निकली बेवफा अब क्या करें

इश्क़ पहला जो हुआ वो इश्क़ था
इश्क़ तो है गुमशुदा अब क्या करें

याद की अल्बम पलटकर देख ली
दिन हुए वो लापता अब क्या करें

किस तरह बच पाएगी अस्मत यहाँ
हर तरफ है खौफ सा अब क्या करें

उम्र की सारी तहें भी खोल दीं
खत मिले कुछ बेपता अब क्या करें

गुमनाम पिथौरगढ़ी


स्वरचित व अप्रकाशित

Posted on February 19, 2021 at 6:36pm — 6 Comments

ग़ज़ल

2122 2122 2122 212

ज़ख्म मेरे जब कभी तुम पर बयाँ हो जाएंगे 

सामने के सब नज़ारे बेजुबाँ  हो जाएंगे 

हाथ में  पत्थर नहीं कुछ ख्वाब दो कुछ काम दो 

हाथ ये नापाक के  कठपुतलियाँ हो जाएंगे 

खेलने दो आज इनको फ़िक्र सारी छोड़कर 

ज़िन्दगी उलझा ही देगी जब जवाँ हो जायेंगे 

जब कभी अफवाह उठ्ठे तुम यकीं करना नहीं 

झूठ की इस आग में ही घर धुवां हो जायेंगे 

ये सफर तन्हा नहीं है साथ गम यादें तेरी 

गम…

Continue

Posted on July 31, 2018 at 5:00pm — 7 Comments

ग़ज़ल .....

22  22  22  22  

गाता जाए एक दिवाना

दुनिया यारो पागलखाना

परदेश बनाया घर लेकिन

घर मे कम है एक सयाना

इससे आगे सोच ना पाऊं

बीबी बच्चे और ठिकाना

केक खिलाया साल बढ़ाए

भूल गया पर उम्र घटाना

एक शिगूफा छोड़ेगा फिर

अबके राजा भौत सयाना

मौलिक व अप्रकाशित

Posted on June 16, 2018 at 5:52pm — 10 Comments

ग़ज़ल ,,,,,,,,, गुमनाम पिथौरागढ़ी ,,,,,,,

२१२२  २१२२  २१२२  २१२

बेवफा ने जब जफ़ा के दस बहाने रख दिए

हमने भी तब जख्म अपने सब छुपा के रख दिए

भूख भी ये हार बैठी हौसले को देख कर

मुफलिसों ने आज फिर से देख रोजे रख दिए

फोन ने तो चीन डाला बचपना अब बच्चों का

टाक पर दादी के किस्से हमने सारे रख दिए

अब बुजुर्गों की कोई कीमत नहीं संसार में

आश्रमों के द्वार पर बूढ़े बिचारे रख दिए

जालिमों का जोर क्यों बढ़ने लगा है आज कल

यूँ भला सच की जुबां पर…

Continue

Posted on February 25, 2016 at 10:02pm — 3 Comments

 
 
 

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