For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

chouthmal jain
  • Male
  • Agar , M . P .
  • India
Share on Facebook MySpace

Chouthmal jain's Friends

  • gumnaam pithoragarhi
 

chouthmal jain's Page

Latest Activity

chouthmal jain replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-139
"धन्यवाद"
May 15, 2022
chouthmal jain replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-139
"धन्यवाद"
May 15, 2022
chouthmal jain replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-139
"धन्यवाद"
May 15, 2022
chouthmal jain replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-139
"धन्यवाद"
May 15, 2022
chouthmal jain replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-139
"धूप और छाँव रोला छंद नफरत की है धूप , प्यार की है छाँव कहाँ | कोई है ना गाँव , मिलता अपनापन जहाँ || परहित परउपकार , करो यहाँ पर तुम सदा | सुख की छाया यार , मिलती रहे यदा -कदा || कर स्वार्थ का त्याग , संग में मिलकर रहना | सब अपनों के साथ , यहाँ…"
May 15, 2022
chouthmal jain replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-139
"आदरणीय बहुत -बहुत बधाई , समायानुकूल सुन्दर मुक्तक |"
May 15, 2022
chouthmal jain replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-139
"आदरणीय धामी जी बहुत सुन्दर दोहे हैं बधाई |"
May 15, 2022
chouthmal jain replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-133
"दोहा छंद  चिड़ियाँ गड़ती नीड़ है , तिनके -तिनके जोड़ |  अण्डे   देती   नीड़  में , सेत   रेन   से   भोर ||  दाने लाती दूर से , पुत्र प्रेम की सोंच |  देती दाने चोंच में ,डाल चोंच…"
Nov 14, 2021

Profile Information

Gender
Male
City State
agar malwa madhy pradsh
Native Place
agar malwa
Profession
teacher

"नारी शिक्षा "
नर ही प्रमुख नहीं है यारों , नारी भी कुछ है जग में |
पुरुष हमेशा रहता अधूरा , यदि न हो नारी संग में ||
उसे क्यों वंचित करते हो तुम ,जीवन के अधिकारों से |
नहीं बनेगा काम ये केवल ,नारी शिक्षा के नारों से ||

कार्य क्षेत्र नहीं है उनका ,केवल चार दीवारी में |
लगा देते क्यों अल्पायु ही ,उसे ग्रहस्ति की गाड़ी में ||
फँसी हुई हे आज वो नारी ,रूढ़ि वादी विचारों में |
कहाँ चलती है उस बैचारी तूती की नक्कारों में ||

नारी इस क्रूर समाज में , ममता की इक मूरत है|
कितानें अत्याचार सहे है ,इस भोली सी सूरत ने ||
माँ,बहिन ,पत्नी और बेटी , बनकर के वह आती है |
सहकर ज़ुल्म हर रूप में वह ,त्याग ही कर जाती है|

शिक्षित होगी यदि नारी तो , जागरूकता भी आएगी|
स्वावलम्बि बन इस समाज में, सम्मान वह भी पाएगी ||
आज के परिवेश में बहुत है ,नारी शिक्षा तो ज़रूरी |
बालिका शिक्षा में ज़रा भी ,करना न अब देरी ||

'मौलिक एवं अप्रकाशित '
चौथमल जैन

chouthmal jain's Photos

  • Add Photos
  • View All

Comment Wall (1 comment)

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

At 1:17am on November 19, 2013, chouthmal jain said…

'' एक प्रश्‍न ''
चिड़ियाँ ची-ची करती क्यों ?
चुन -चुन तिनके लाती क्यों ?
उनसे निड बनाती क्यों ?
निड में अण्डे देती क्यों ?
देती तो फिर सेती क्यों ?
चोंच में दानें लाती क्यों ?
बच्चों को खिलती क्यों ?
उड़ाना भी सिखलाती क्यों ?
सिख गगन में उड़ना बच्चें |
- छोड़ उसे उड़ जाते क्यों ?

Chouthmal jain's Blog

जीवन के तीन कर्त्तव्य

कर्तव्य प्रथम इस जीवन का है ,

मात -पिता की सेवा करना। 

आशीर्वाद उन्हीं का लेकर ,

जीवन पथ पर आगे बढ़ना।।

कर्तव्य दूसरा जगती पर है ,

मानवता की रक्षा करना। 

दया धर्म का भाव सदा ही ,

अपने से छोटों पर रखना।।

कर्तव्य तीसरा यही हमारा ,

देश धर्म के लिये ही जीना। 

बलिदानों के पथ पर बढ़कर ,

मातृ -भूमि की सेवा करना।।

"मौलिक व अप्रकाशित "

Posted on July 7, 2017 at 10:11pm — 3 Comments

एक कवि की पाती वीर जवानों के नाम

एक पुरानी रचना प्रस्तुत कर रहा हूँ ,इस  रचना का जन्म उस समय हुआ जब कारगिल में युद्ध चल रहा था |

" एक कवि की पाती वीर जवानों के नाम "



देश के वीर जवानों प्यारे , मेरी पाती नाम तुम्हारे |

नहीं पहुँचती कलाम ये मेरी , वहाँ खड़ी बन्दूक तुम्हारी ||

नहीं लिखी है ये शाही से , लिखी गई है जिगर लहू से |

जमी हमारी है ये थाती , हो इस दीपक की तुम बाती ||

देश के दुश्मन आए तो , खून उनका तुम बहा देना |

गोली आए दुश्मन की तो , छाती मेरी भी ले लेना ||

कतरा-कतरा…

Continue

Posted on February 10, 2014 at 11:30pm — 6 Comments

"परिश्रम "

परिश्रम है पारस पत्थर , जीवन को सोना बनाता है।

मेहनत करता जो जीवन में, सबकुछ वह पा जाता है।।

परिश्रम से एक ही पल में ,भाग्य दास बन जाता है।

लक्ष्मी उसके चरण है छूती ,जो मेहनत की खाता है।।

परिश्रम के बल पे टिकी है ,ये दुनियाँ तो सारी।

मेहनत से जिसने आँख चुराई ,ठोंकर उसने खाई।।

गीता के उपदेश ने भी तो ,कर्म की रीत सिखाई।

पाया उसने सभी है जिसने ,कर्म से प्रीत लगाई।।

मेहनत जो भी करता है वो , दुःख नहीं कभी पाता है।

पत्थर खाये यदि मेहनती ,वो भी हजम कर…

Continue

Posted on February 6, 2014 at 3:00am — 3 Comments

स्वार्थ और प्यार

"स्वार्थ और प्यार "



मानव बिकाऊ है जमी पर , मानवता की आड़ में।

ईमान बिकता है यहाँ पर , धर्म जाए भाड़ में ।।

भ्रष्टाचार का खू लगा है ,हर मानव की दाड़ में।

ऐसा बिगाड़ा इंसा जैसे ,बच्चा बिगड़ता लाड़ में।।

स्वार्थ की खातिर बेचा देश , दुनियाँ के बाजार में।

वतन किया नीलाम देखो ,मानव के सरदार ने।।

प्यार कभी न बजता यारों ,खुदगर्जी के साज में।

और कभी न स्वार्थ टिकता ,दिलबर के दरबार में।।

इन दोनों का साथ तो जैसे ,जल पावक के साथ…

Continue

Posted on January 14, 2014 at 10:30pm — 14 Comments

 
 
 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Sushil Sarna posted a blog post

दोहा पंचक. . . . .

दोहा पंचक. . . .साथ चलेंगी नेकियाँ, छूटेगा जब हाथ । बन्दे तेरे कर्म बस , होंगे   तेरे  साथ ।।मिथ्या…See More
16 hours ago
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post दोहा पंचक. . . . .
"जी सृजन के भावों को मान देने और त्रुटि इंगित करने का दिल से आभार । सहमत एवं संशोधित"
17 hours ago
Samar kabeer commented on Rachna Bhatia's blog post सदा - क्यों नहीं देते
"'सच्चाई अभी ज़िन्दा है जो मुल्क़ में यारो इंसाफ़ को फ़िर लोग सदा क्यों नहीं देते' ऊला यूँ…"
18 hours ago
Rachna Bhatia commented on Rachna Bhatia's blog post सदा - क्यों नहीं देते
"आदरणीय समर कबीर सर् सादर नमस्कार। सर्, "बिना डर" डीलीट होने से रह गया।क्षमा चाहती…"
18 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Sushil Sarna's blog post दोहा पंचक. . . . .
"आ. भाई सुशील जी, सादर अभिवादन। अच्छे दोहे हुए है। हार्दिक बधाई। लेकिन यह दोहा पंक्ति में मात्राएं…"
yesterday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Balram Dhakar's blog post ग़ज़ल : बलराम धाकड़ (पाँव कब्र में जो लटकाकर बैठे हैं।)
"आ. भाई बलराम जी, सादर अभिवादन। शंका समाधान के लिए आभार।  यदि उचित लगे तो इस पर विचार कर सकते…"
yesterday
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा पंचक. . . . .

दोहा पंचक. . . .साथ चलेंगी नेकियाँ, छूटेगा जब हाथ । बन्दे तेरे कर्म बस , होंगे   तेरे  साथ ।।मिथ्या…See More
yesterday
Samar kabeer commented on Rachna Bhatia's blog post सदा - क्यों नहीं देते
"//सच्चाई अभी ज़िन्दा है जो मुल्क़ में यारो इंसाफ़ को फ़िर लोग बिना डर के सदा नहीं देते // सानी…"
yesterday
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post दोहा मुक्तक .....
"आदरणीय लक्ष्मण धामी जी सृजन के भावों को मान देने का दिल से आभार आदरणीय जी"
yesterday
Balram Dhakar commented on Balram Dhakar's blog post ग़ज़ल : बलराम धाकड़ (पाँव कब्र में जो लटकाकर बैठे हैं।)
"आदरणीय लक्ष्मण धामी जी, सादर नमस्कार। आपकी शिरकत ग़ज़ल में हुई, प्रसन्नता हुई। आपकी आपत्ति सही है,…"
yesterday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Balram Dhakar's blog post ग़ज़ल : बलराम धाकड़ (पाँव कब्र में जो लटकाकर बैठे हैं।)
"आ. भाई बलराम जी, सादर अभिवादन। बेहतरीन गजल हुई है। हार्दिक बधाई।  क्या "शाइर" शब्द…"
Friday
बृजेश कुमार 'ब्रज' posted a blog post

ग़ज़ल-रफ़ूगर

121 22 121 22 121 22 सिलाई मन की उधड़ रही साँवरे रफ़ूगर सुराख़ दिल के तमाम सिल दो अरे रफ़ूगर उदास रू…See More
Thursday

© 2023   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service