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बृजेश कुमार 'ब्रज'
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बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on बृजेश कुमार 'ब्रज''s blog post ग़ज़ल...आँख से लाली गई ना पांव से छाले गये-बृजेश कुमार 'ब्रज'
"हार्दिक आभार आदरणीय त्रिपाठी जी..."
May 7
Naveen Mani Tripathi commented on बृजेश कुमार 'ब्रज''s blog post ग़ज़ल...आँख से लाली गई ना पांव से छाले गये-बृजेश कुमार 'ब्रज'
"वाह  बहुत सुंदर ग़ज़ल हुई बधाई  आपको ।"
May 6
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on Shyam Narain Verma's blog post काल चले ऐसी ही चाल |
"वाह बहुत सुन्दर और उत्तम सृजन आदरणीय.."
May 6
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on babitagupta's blog post कहाँ खो गया??????[कविता]
"वाह सुन्दर कविता.."
May 6
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on Nand Kumar Sanmukhani's blog post ग़ज़ल
"वाह वाह खूब ग़ज़ल कही आदरणीय..सादर"
May 6
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on Manan Kumar singh's blog post गजल(कहूँगा बात मैं....)
"उम्दा ग़ज़ल कही आदरणीय..सादर"
May 6
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on Harash Mahajan's blog post हर कली को अजब शिकायत है,
"अच्छी ग़ज़ल कही है आदरणीय महाजन जी..सादर"
May 6
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on बृजेश कुमार 'ब्रज''s blog post ग़ज़ल...आँख से लाली गई ना पांव से छाले गये-बृजेश कुमार 'ब्रज'
"उत्साहवर्धन के लिए बहुत बहुत शुक्रिया आदरणीय नीलेश जी..सादर"
May 3
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on बृजेश कुमार 'ब्रज''s blog post ग़ज़ल...आँख से लाली गई ना पांव से छाले गये-बृजेश कुमार 'ब्रज'
"स्वागत संग आभार आदरणीय मोहित जी..."
May 3
Nilesh Shevgaonkar commented on बृजेश कुमार 'ब्रज''s blog post ग़ज़ल...आँख से लाली गई ना पांव से छाले गये-बृजेश कुमार 'ब्रज'
"अच्छी ग़ज़ल हुई है आ. बृजेश जी..आप  को बहुत बधाई..सादर "
May 3
Mohit mishra (mukt) commented on बृजेश कुमार 'ब्रज''s blog post ग़ज़ल...आँख से लाली गई ना पांव से छाले गये-बृजेश कुमार 'ब्रज'
"उम्दा गजल आदरणीय, बधाई स्विकार करें। ४वाला बेहतरीन शेर है"
May 3
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on बृजेश कुमार 'ब्रज''s blog post ग़ज़ल...आँख से लाली गई ना पांव से छाले गये-बृजेश कुमार 'ब्रज'
"आभार संग नमन आदरणीय लक्ष्मण धामी जी..."
May 2
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on बृजेश कुमार 'ब्रज''s blog post ग़ज़ल...आँख से लाली गई ना पांव से छाले गये-बृजेश कुमार 'ब्रज'
"आ. भाई ब्रजेश जी, उत्तम गजल हुई है । हार्दिक बधाई ।"
May 2
बृजेश कुमार 'ब्रज' posted blog posts
May 1
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on बृजेश कुमार 'ब्रज''s blog post ग़ज़ल...आँख से लाली गई ना पांव से छाले गये-बृजेश कुमार 'ब्रज'
"आदरणीय समर कबीर जी आपकी टिप्पड़ी से अति प्रसन्नता का अनुभव हुआ..आपका हार्दिक आभार..स्नेह बनाये रखें"
Apr 30
Samar kabeer commented on बृजेश कुमार 'ब्रज''s blog post ग़ज़ल...आँख से लाली गई ना पांव से छाले गये-बृजेश कुमार 'ब्रज'
"जनाब बृजेश कुमार 'ब्रज' साहिब आदाब,अच्छी ग़ज़ल हुई है,बधाई स्वीकार करें ।"
Apr 30

Profile Information

Gender
Male
City State
noida
Native Place
jhansi

बृजेश कुमार 'ब्रज''s Blog

ग़ज़ल...आँख से लाली गई ना पांव से छाले गये-बृजेश कुमार 'ब्रज'

2122 2122 2122 212

दर्द दिल के आशियाँ में इस क़दर पाले गये

आँख से लाली गई ना पांव से छाले गये

रोटियों से भूख की इतनी अदावत बढ़ गई

पेट में सूखे निवाले ठूंस के डाले गये

इस क़दर उलझे हुये हैं आलम-ए-तन्हाई में

मकड़ियां यादों की चल दी भाव के जाले गये

मुफ़लिसी की आँधियाँ थीं याद के थे खंडहर

नीव भी कमजोर थी सो टूट सब आले गये

ख़्वाब की आँखों से 'ब्रज' घटती नहीं हैं दूरियां

बात दीगर है सभी पलकों तले पाले गये…

Continue

Posted on April 30, 2018 at 4:00pm — 10 Comments

ग़ज़ल...परेशां रहा हूँ मैं अहल-ए-सितम से-बृजेश कुमार 'ब्रज'

122 122 122 122

गम-ए-दिल उठाऊँ,अज़ीमत नहीं है

मगर बच निकलने की सूरत नहीं है

सुनो बख़्श दो मुझको वादों वफ़ा से

यहाँ अब किसी की जरुरत नहीं है

परेशां रहा हूँ मैं अहल-ए-सितम से

तुम्हारी भी क़ुर्बत की नीयत नहीं है

ओ महताब तू है तो ग़ज़लें हैं रौशन

वगरना सुख़नवर की अज़्मत नहीं है

सरेआम  'ब्रज' की ग़ज़ल गुनगुनाना

ये है और क्या गर मुहब्बत नहीं है

अज़ीमत-इरादा

अहल-ए-सितम-तानाशाह…

Continue

Posted on April 8, 2018 at 1:30pm — 20 Comments

ग़ज़ल...कभी तो दिल को करार आये-बृजेश कुमार 'ब्रज'

121 22 121 22 121 22 121 22

कभी जरा सा मैं मुस्कुरा लूँ कभी तो दिल को करार आये

कभी तो भूले से इस चमन में उतर के फ़स्ल-ए-बहार आये

कि इससे पहले ये साँस टूटे सफ़ीना डूबे ये ज़िन्दगी का

चले भी आओ सनम कहीं से कहाँ कहाँ हम पुकार आये

बड़ी अदा से नजर झुकाये वो पूछते हैं कहाँ थे अब तक

सुनाये कैसे वो आपबीती वो ज़िन्दगी जो गुजार आये

हजार लम्हे हजार बातें जिन्हें तड़पता ही छोड़ आया

वो शाम वो गेसुओं के साये वो याद फिर बेशुमार…

Continue

Posted on March 26, 2018 at 10:00am — 24 Comments

विश्व कविता दिवस पर एक कविता मंच को समर्पित

विश्व कविता दिवस पर महाभारत युद्धकाल में भगवान के वचनों को अपने शब्दों में पिरोने की कोशिश

​​रे रे पार्थ ये क्या करते हो?

धनु धरा पर क्यों धरते हो?

ओ शूरवीर मत हो अधीर

नैनों में क्यों भरते हो नीर

जीवन तो आना जाना है

चिरकाल किसे रह जाना है

मन में यूँ न मोह धरो

गांडीव उठाओ कर्म करो

मृत्यु बंन्धन से मुक्ति है

किस बात की आसक्ति है

धर्म विमुख हो पाप न कर

रक्षा कर संताप न कर

हे धनंजय हे महारथी

मत भूलो 'मैं' तेरा…

Continue

Posted on March 21, 2018 at 4:30pm — 12 Comments

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At 6:59pm on October 24, 2017, डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव said…

स्वागत है आदरणीय ,  आपको मित्र के रूप में पाना मेरा सौभाग्य है .

At 11:43pm on November 17, 2015,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आपका अभिनन्दन है.

ग़ज़ल सीखने एवं जानकारी के लिए

 ग़ज़ल की कक्षा 

 ग़ज़ल की बातें 

 

भारतीय छंद विधान से सम्बंधित जानकारी  यहाँ उपलब्ध है

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