For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

बृजेश कुमार 'ब्रज'
  • Male
  • noida
  • India
Share

बृजेश कुमार 'ब्रज''s Friends

  • DR ARUN KUMAR SHASTRI
  • Afroz 'sahr'
  • सुचिसंदीप अग्रवालl
  • नाथ सोनांचली
  • बासुदेव अग्रवाल 'नमन'
  • सुरेश कुमार 'कल्याण'
  • Samar kabeer
  • डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव
  • SALIM RAZA REWA
  • vijay nikore

बृजेश कुमार 'ब्रज''s Groups

 

बृजेश कुमार 'ब्रज''s Page

Latest Activity

बृजेश कुमार 'ब्रज' posted a blog post

ग़ज़ल-और तुम हो

फ़ाइलातुन फ़ाइलातुन फ़ाइलातुनज़िन्दगी में सिर्फ़ ग़म हैं और तुम हो आज फिर से आँखें नम हैं और तुम होलग रहा है अब मिलन संभव नहीं है वक़्त से लाचार हम हैं और तुम होरात चुप, है चाँद तन्हा, साँस मद्धम इश्क़ में लाखों सितम हैं और तुम होदिल की बस्ती में अकेला तो नहीं हूँ नींद से बोझिल क़दम हैं और तुम होक्या बताऊँ किसलिये है 'ब्रज' परेशां वस्ल के आसार कम हैं और तुम हो(मौलिक एवं अप्रकाशित) बृजेश कुमार 'ब्रज'See More
Wednesday
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on Rachna Bhatia's blog post हमारे वारे न्यारे हो रहे हैं
"वाह बड़ी ही प्यारी ग़ज़ल कही है आदरणीया...बधाई"
Wednesday
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on Krish mishra 'jaan' gorakhpuri's blog post ग़ज़ल: 'नेह के आँसू'
"बहुत ही भावपूर्ण ग़ज़ल कही है आदरणीय..बधाई"
Wednesday
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on gumnaam pithoragarhi's blog post अब क्या करें
"वाह वाह खूब ग़ज़ल कही आदरणीय गुमनाम जी...बधाई"
Wednesday
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post पहरूये ही सो गये हों जब चमन के- लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' (गजल)
"बहुत ही खूब ग़ज़ल कही आदरणीय... बधाई"
Wednesday
बृजेश कुमार 'ब्रज' posted a blog post

ग़ज़ल-और तुम हो

फ़ाइलातुन फ़ाइलातुन फ़ाइलातुनज़िन्दगी में सिर्फ़ ग़म हैं और तुम हो आज फिर से आँखें नम हैं और तुम होलग रहा है अब मिलन संभव नहीं है वक़्त से लाचार हम हैं और तुम होरात चुप, है चाँद तन्हा, साँस मद्धम इश्क़ में लाखों सितम हैं और तुम होदिल की बस्ती में अकेला तो नहीं हूँ नींद से बोझिल क़दम हैं और तुम होक्या बताऊँ किसलिये है 'ब्रज' परेशां वस्ल के आसार कम हैं और तुम हो(मौलिक एवं अप्रकाशित) बृजेश कुमार 'ब्रज'See More
Feb 23
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on बृजेश कुमार 'ब्रज''s blog post ग़ज़ल-और तुम हो
"बहुत बहुत शुक्रिया आदरणीय समर जी संशय दूर करने के लिए।दरअसल पहले आंख रखा था लेकिन वो भी ठीक नही था।सुधार करता हूँ सादर"
Feb 22
Samar kabeer commented on बृजेश कुमार 'ब्रज''s blog post ग़ज़ल-और तुम हो
"जनाब बृजेश कुमार 'ब्रज' जी आदाब, ग़ज़ल का अच्छा प्रयास है, बधाई स्वीकार करें । 'आज फिर से चश्म-ए-नम हैं और तुम हो' इस मिसरे में 'चश्म' एक वचन है,और रदीफ़ का 'हैं' बहुवचन में,इस मिसरे को यूँ कह सकते…"
Feb 22
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on बृजेश कुमार 'ब्रज''s blog post ग़ज़ल-और तुम हो
"आदरणीय अमीरुद्दीन जी आपके खूबसूरत शब्दों से अति प्रसन्नता का अनुभव हुआ..शुक्रिया आपका..सादर"
Feb 20
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on बृजेश कुमार 'ब्रज''s blog post ग़ज़ल-और तुम हो
"आदरणीय धामी जी हार्दिक अभिनंदन एवं आभार..."
Feb 20
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on बृजेश कुमार 'ब्रज''s blog post ग़ज़ल-और तुम हो
"हौसलाफजाई के लिए बहुत बहुत शुक्रिया आदरणीय गुमनाम जी...."
Feb 20
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on बृजेश कुमार 'ब्रज''s blog post ग़ज़ल-और तुम हो
"ग़ज़ल पसंदगी के लिए शुक्रिया भाई कृष मिश्रा जी..."
Feb 20
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on बृजेश कुमार 'ब्रज''s blog post ग़ज़ल-और तुम हो
"ग़ज़ल पे आपकी हौसलाफजाई के लिए शुक्रिया मित्र आजी तमाम जी..."
Feb 20
अमीरुद्दीन 'अमीर' commented on बृजेश कुमार 'ब्रज''s blog post ग़ज़ल-और तुम हो
"जनाब बृजेश कुमार जी आदाब, शानदार ग़ज़ल पेश की है आपने, शे'र दर शे'र दाद के साथ मुबारकबाद पेश करता हूँ। सादर।"
Feb 20
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on बृजेश कुमार 'ब्रज''s blog post ग़ज़ल-और तुम हो
"आ. भाई बृजेश कुमार जी, सादर अभिवादन । उत्तम गजल हुई है । हार्दिक बधाई ।"
Feb 19
gumnaam pithoragarhi commented on बृजेश कुमार 'ब्रज''s blog post ग़ज़ल-और तुम हो
"वाह शानदार ग़ज़ल हुई है बधाई। अच्छी लगी वाह। ...... "
Feb 19

Profile Information

Gender
Male
City State
noida
Native Place
jhansi

बृजेश कुमार 'ब्रज''s Blog

ग़ज़ल-और तुम हो

फ़ाइलातुन फ़ाइलातुन फ़ाइलातुन

ज़िन्दगी में सिर्फ़ ग़म हैं और तुम हो

आज फिर से आँखें नम हैं और तुम हो

लग रहा है अब मिलन संभव नहीं है

वक़्त से लाचार हम हैं और तुम हो

रात चुप, है चाँद तन्हा, साँस मद्धम

इश्क़ में लाखों सितम हैं और तुम हो

दिल की बस्ती में अकेला तो नहीं हूँ

नींद से बोझिल क़दम हैं और तुम हो

क्या बताऊँ किसलिये है 'ब्रज' परेशां

वस्ल के आसार कम हैं और तुम हो

(मौलिक एवं अप्रकाशित)…

Continue

Posted on February 18, 2021 at 9:30pm — 11 Comments

गीत-लोचन लोचन अश्रु बावरे बहते हैं अविराम (सरसी छंद)

विधान – 27 मात्रा, 16,11 पर यति, चरणान्त में 21 लगा अनिवार्य l कुल चार चरण, क्रमागत दो-दो चरण तुकांत l

ह्रदय बसाये देवी सीता

वन वन भटकें राम

लोचन लोचन अश्रु बावरे

बहते हैं अविराम

सुन चन्दा तू नीलगगन से

देख रहा संसार

किस नगरी में किस कानन में

खोया जीवन सार

हे नदिया हे गगन,समीरा 

ओ दिनकर ओ धूप

तृण तृण से यूँ हाथ जोड़कर

पूछ रहे…

Continue

Posted on December 10, 2020 at 7:00pm — 8 Comments

ग़ज़ल-तुमसे ग़ज़ल ने कुछ नहीं बोला?

2122       2122        2122        2

चुप रहीं आँखें सजल ने कुछ नहीं  बोला

इसलिए  मनवा विकल ने कुछ नहीं बोला

भाव जितने हैं सभी को लिख दिया हमदम

क्या कहूँ! तुमसे ग़ज़ल ने कुछ नहीं बोला?

जिस  किनारे  बैठ  के  पहरों  तुम्हें  सोचूँ

उस जलाशय के कमल ने कुछ नहीं बोला?

एक  पत्थर  झील में  फेंका कि जुम्बिश हो

झील के  खामोश जल ने कुछ नहीं  बोला

साथ 'ब्रज' के रात भर पल पल रहे जलते

जुगनुओं  के नेक  दल ने…

Continue

Posted on November 19, 2020 at 9:00pm — 6 Comments

ग़ज़ल..कहीं लौकी कहीं कद्दू कहीं कटहल के ठेले हैं

मुफाईलुन*4

खरीदूँ कौन सी सब्जी बड़े लगते झमेले हैं

कहीं लौकी कहीं कद्दू कहीं कटहल के ठेले हैं

इधर भिन्डी बड़ी शर्मो हया से मुस्कुराती है

अजब नखरे टमाटर के पड़ोसी कच्चे केले हैं

तुनक में मिर्च बोली आ तुझे जलवा दिखाती हूँ

कहे धनिया हमें भी साथ ले लो हम अकेले हैं

शकरकंदी,चुकंदर ने सजाई नाज से महफ़िल

सुनाया राग आलू ने मगन बैगन,करेले हैं

घड़ी भर को जरा पहलु में लहसुन,प्याज आ बैठो

जुदाई में तुम्हारी 'ब्रज' ने…

Continue

Posted on November 1, 2020 at 8:00pm — 7 Comments

Comment Wall (2 comments)

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

At 6:59pm on October 24, 2017, डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव said…

स्वागत है आदरणीय ,  आपको मित्र के रूप में पाना मेरा सौभाग्य है .

At 11:43pm on November 17, 2015,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आपका अभिनन्दन है.

ग़ज़ल सीखने एवं जानकारी के लिए

 ग़ज़ल की कक्षा 

 ग़ज़ल की बातें 

 

भारतीय छंद विधान से सम्बंधित जानकारी  यहाँ उपलब्ध है

|

|

|

|

|

|

|

|

आप अपनी मौलिक व अप्रकाशित रचनाएँ यहाँ पोस्ट (क्लिक करें) कर सकते है.

और अधिक जानकारी के लिए कृपया नियम अवश्य देखें.

ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतुयहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

 

ओबीओ पर प्रतिमाह आयोजित होने वाले लाइव महोत्सवछंदोत्सवतरही मुशायरा व  लघुकथा गोष्ठी में आप सहभागिता निभाएंगे तो हमें ख़ुशी होगी. इस सन्देश को पढने के लिए आपका धन्यवाद.

 
 
 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Aazi Tamaam commented on Aazi Tamaam's blog post ग़ज़ल ~ "ठहर सी जाती है"
"मंच के सभी आदरणीय गुणीजनों को सहृदय प्रणाम गुस्ताखी के लिये दिल से क्षमा चाहूँगा ग़ज़ल में अगर कोई…"
6 hours ago
Rupam kumar -'मीत' commented on Rupam kumar -'मीत''s blog post दिया जला के उसी सम्त फिर हवा न करे (-रूपम कुमार 'मीत')
"आदरणीय समर कबीर साहिब, मैं और प्रयास करता हूँ, दिल से शुक्रिया"
7 hours ago
Samar kabeer commented on Krish mishra 'jaan' gorakhpuri's blog post 'जब मैं सोलह का था'~ग़ज़ल
"जनाब जान गोरखपुरी जी आदाब, ग़ज़ल अभी समय चाहती है,अभ्यासरत रहें ।"
8 hours ago
Samar kabeer commented on amita tiwari's blog post समूची धरा बिन ये अंबर अधूरा है
"मुहतरमा अमिता तिवारी जी आदाब, अच्छी रचना हुई है, बधाई स्वीकार करें ।"
8 hours ago
Samar kabeer commented on Rupam kumar -'मीत''s blog post दिया जला के उसी सम्त फिर हवा न करे (-रूपम कुमार 'मीत')
"'लगा के आग मेरे घर को फिर हवा न करे किया है जो मेरे दुश्मन ने वो सगा न करे' मुझे इनमें भी…"
9 hours ago
Samar kabeer commented on Rachna Bhatia's blog post ग़ज़ल-क्या करे कोई
"//दर पर ख़ुदा के अर्ज़-ए-तमन्ना करे कोई अब और दर्द देने न आया करे कोई'// ये ठीक है ।"
9 hours ago
अमीरुद्दीन 'अमीर' commented on Krish mishra 'jaan' gorakhpuri's blog post 'जब मैं सोलह का था'~ग़ज़ल
"जनाब कृष मिश्रा गोरखपुरी साहिब आदाब, ख़ूबसूरत इन्सानी जज़्बात से लबरेज़ ग़ज़ल की अच्छी कोशिश की है…"
9 hours ago
Rachna Bhatia commented on Krish mishra 'jaan' gorakhpuri's blog post ग़ज़ल: 'नेह के आँसू'
"आदरणीय समर कबीर सर् सादर नमस्कार। सर्,तबीअत सही न होने के बावज़ूद आपका हर रचना पर बारीक़ी से इस्लाह…"
10 hours ago
Rachna Bhatia commented on Krish mishra 'jaan' gorakhpuri's blog post ग़ज़ल: 'नेह के आँसू'
"आदरणीय कृष मिश्रा जी नमस्कार। आपकी ग़ज़ल हमेशा एक अलग क्लेवर के साथ होती है।बधाई।जहाँ तक रवानी को…"
10 hours ago
अमीरुद्दीन 'अमीर' commented on अमीरुद्दीन 'अमीर''s blog post ग़ज़ल (निगाहों-निगाहों में क्या माजरा है)
"जनाब लक्ष्मण धामी भाई 'मुसाफ़िर' जी आदाब, ग़ज़ल पर आपकी आमद बाइस-ए-शरफ़ है, सुख़न…"
11 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on amita tiwari's blog post लो चढ़ आया फिर पूर्वी फेरी वाला
"आ. अमिता जी, सादर अभिवादन । अच्छी रचना हुई है । हार्दिक बधाई।"
12 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on अमीरुद्दीन 'अमीर''s blog post ग़ज़ल (निगाहों-निगाहों में क्या माजरा है)
"आ. भाई अमीरूद्दीन जी, सादर अभिवादन । अच्छी गजल हुई है । हार्दिक बधाई।"
12 hours ago

© 2021   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service