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बृजेश कुमार 'ब्रज'
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बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post एक गीत -सब कुछ पाना हमें यहाँ है
"आदरणीय शर्मा जी अच्छा गीत हुआ..सादर"
Jul 29
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on Arpana Sharma's blog post *" गुरु पूर्णिमा "* - कविता/अर्पणा शर्मा, भोपाल
"उत्तम गुरु वंदना है  आदरणीया..सादर"
Jul 29
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on Pradeep Devisharan Bhatt's blog post मैं अभी भी मुस्कुराता हूँ “
"अच्छी कविता है आदरणीय..कुछ वर्तनीगत अशुद्धियाँ हैं..देखिएगा"
Jul 29
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on rajesh kumari's blog post मेघदूत गीत (राज )
"वाह आदरणीया बहुत ही सुन्दर और सरस विरह गीत हुआ है..."
Jul 29
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on मोहन बेगोवाल's blog post मुजरिम : लघुकथा
"विषय की सार्थकता को लेकर लघुकथा अच्छी लगी आदरणीय..बाकी आदरणीय समर जी और आदरणीय तेजवीर सिंह जी से मैं भी सहमत हूँ.."
Jul 29
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post गजल- जहाँ ईमान का पौधा नहीं है
"वाह बड़ी अच्छी ग़ज़ल कही है आदरणीय शर्मा जी...सादर"
Jul 29
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on surender insan's blog post "दर्द वो इस तरह छुपाता है"
"अच्छी ग़ज़ल कही है आदरणीय...बधाई"
Jul 29
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on Arpana Sharma's blog post लघुकथा- " छद्म- संवेदना"/ अर्पणा शर्मा, भोपाल
"बहुत ही सही ढंग से और कटु सत्य का यथार्थ चित्रण किया है आदरणीया...बधाई"
Jul 29
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on Sushil Sarna's blog post परछाईयाँ (२ क्षणिकाएं ) ....
"वाह आदरणीय सुन्दर क्षणिकाएं..बधाई"
Jul 29
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on santosh khirwadkar's blog post दिल के नज़दीक से ....”संतोष”
"वाह बड़ी ही खूबसूरत ग़ज़ल कही है आदरणीय..बधाई"
Jul 29
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on डॉ छोटेलाल सिंह's blog post श्रद्धांजलि
"वाह वाह सुन्दर सरस श्रद्धा सुमन अर्पित किये हैं आपने परम आदरणीय नीरज जी को.."
Jul 29
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on TEJ VEER SINGH's blog post साँझा चूल्हा - लघुकथा –
"लघुकथा तो बड़ी अच्छी है आदरणीय...बटवारे का दंश वाकई चुभन देता ही रहता है..."
Jul 29
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on Mirza Hafiz Baig's blog post दर्द (लघुकथा)
"बहुत बढ़िया मिर्ज़ा साहब...बड़ी ही सार्थकता से आपने अपनी बात कही है लघुकथा में..बधाई"
Jul 29
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on सतविन्द्र कुमार राणा's blog post डायरी का अंतिम पृष्ठ (लघुकथा)
"आदरणीय सतविंद्र जी बड़ी खूबसूरती से अपने बहुत ही सटीक विषय को उठाया है लघुकथा में..माता पिता को ये समझना होगा कि एक परीक्षा की असफलता का मतलब योग्य या अयोग्य होने से नहीं है.."
Jul 29
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on Arpana Sharma's blog post लघुकथा- रिसते खूनी नासूर
"बहुत ही संवेदनशील विषय का चुनाव किया है आपने आदरणीया और कोशिश अच्छी की है उसके लिए बधाई..."
Jul 29
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on दिनेश कुमार's blog post ग़ज़ल --- ख़ुद-परस्ती का दायरा क्या था / दिनेश कुमार
"बहुतखूब बहुतखूब आदरणीय..बेहतरीन ग़ज़ल"
Jul 13

Profile Information

Gender
Male
City State
noida
Native Place
jhansi

बृजेश कुमार 'ब्रज''s Blog

ग़ज़ल...यादों के सरमाये-बृजेश कुमार 'ब्रज'

बह्र-ए-मीर पर आधारित ग़ज़ल

कमबख्त कहाँ से आये इतनी रात गये

उनकी यादों के साये इतनी रात गये

आज उभर के आया है इक दर्द पुराना

बेलौस हवा सहलाये इतनी रात गये

कश्ती कागज की गहरे यादों के दरिया

अब नींद कहाँ से आये इतनी रात गये

गीली मिटटी की सौंधी सौंधी सी खुशबू

अंतस में आग लगाये इतनी रात गये

किस प्रियतम के लिए हुआ बैचैन पपीहा

जो घड़ी घड़ी चिल्लाये इतनी रात गये

दूर उफ़क़ से आती हैं ग़मगीन…

Continue

Posted on July 1, 2018 at 4:30pm — 8 Comments

ग़ज़ल....दिल जला के रौशनी होती नहीं है-बृजेश कुमार 'ब्रज'

फाइलातुन फाइलातुन फाइलातुन

दर्द अपना यूँ सर-ए-बाज़ार कर के

क्या मिलेगा वक़्त से तक़रार कर के

कुछ नहीं हासिल,समझते क्यों नहीं हो

गम उठाना आह भरना प्यार कर के

सामने उस मोड़ पर कुछ अनमना सा

शख़्स इक बैठा है सब न्योछार कर के

बन्दगी उल्फत है मैं था इस गुमां में

वो नहीं आया अना को पार कर के

दिल जला के रौशनी होती नहीं है

ये भी 'ब्रज' ने देखा है सौ बार कर के



(मौलिक एवं अप्रकाशित)…

Continue

Posted on June 25, 2018 at 6:00pm — 24 Comments

लघुकथा-पराकाष्ठा

मोबाइल पर मेल का नोटिफिकेशन देख मोहन की आँखें चमक उठीं।शायद पायल का मेल हो।जल्दी से मेल खोला..हाँ ,ठीक 17 दिन बाद पायल का मेल था।अक्सर मेल नोटिफिकेशन देख खिल जाता है मोहन लेकिन अक्सर मायूसी ही हाथ लगती।खैर देखूं तो सही क्या लिखा है...अपने चश्मे को ठीक करता हुआ मोहन मेल पढ़ने लगा।"56 को हो गईं हूँ मैं और आप भी 60-65 तो होंगे ही,अब तो बता दो क्या मायने रखती हूँ मैं?और क्यों?" पिछले 40 सालों से ये सवाल कई बार पूछा था पायल ने लेकिन "कुछ सवालों को लाजबाब रहने दो" कह कर हर बार टाल गया मोहन।पर…

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Posted on June 22, 2018 at 5:30pm — 20 Comments

ग़ज़ल...पिछले कुछ दिनों से-बृजेश कुमार 'ब्रज'

फाइलातुन फाइलातुन फाइलातुन

हूँ बहुत हैरान पिछले कुछ दिनों से

ज़ीस्त है हलकान पिछले कुछ दिनों से

चाँद भी है आजकल कुछ खोया खोया

रातें हैं वीरान पिछले कुछ दिनों से

आदमी हूँ आदमी के काम आऊँ

है यही अरमान पिछले कुछ दिनों से

कौड़ियों के भाव बिकती हैं अनाएं

मर गया ईमान पिछले कुछ दिनों से

जोश में है भीड़ 'ब्रज' आक्रोश भी है

बस नहीं है जान पिछले कुछ दिनों से

(मौलिक एवं अप्रकाशित)

बृजेश कुमार…

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Posted on June 12, 2018 at 5:00pm — 14 Comments

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At 6:59pm on October 24, 2017, डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव said…

स्वागत है आदरणीय ,  आपको मित्र के रूप में पाना मेरा सौभाग्य है .

At 11:43pm on November 17, 2015,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आपका अभिनन्दन है.

ग़ज़ल सीखने एवं जानकारी के लिए

 ग़ज़ल की कक्षा 

 ग़ज़ल की बातें 

 

भारतीय छंद विधान से सम्बंधित जानकारी  यहाँ उपलब्ध है

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