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सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप'
  • Male
  • वाराणसी, उत्तर प्रदेश
  • India
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सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप''s Page

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सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-104
"आद0 विवेक पांडेय जी सादर अभिवादन। विषयानुकूल बढ़िया सृजन पर बधाई स्वीकार कीजिये। सक्रियता बनाये रखें। सादर"
Jun 15
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-104
"सुंदर सरसी में परिभाषित, और कथन साकार वाह-वाह ही मुँह से निकले, जय-जय बारम्बार।। भाई राणा जी बहुत बेहतरीन सरसी छंद में गीत सृजित किया आपने। बधाई स्वीकार कीजिये। सादर"
Jun 15
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-104
"आद0 हरिओम श्रीवास्तव जी सादर अभिवादन। आपकी रचना का क्या कहना। बहुत खूब,,  बम-बम बोले लेखनी, विषय करे साकार शब्द चयन भी आपका, दे उसको आकार दे उसको आकार, भाव भी खिलकर आये मुँह से निकले वाह, और पाठक मुस्काये सरस् सरल का मेल, लगे हो जैसे…"
Jun 15
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-104
"आद0 टी आर सुकुल जी सादर अभिवादन। प्रदत्त विषय पर बेहतरीन लेखनी चलाई आपने, बहुत खूब। बधाई स्वीकार कीजिये।सादर"
Jun 15
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' replied to Admin's discussion खुशियाँ और गम, ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार के संग...
"ईश्वर से हमारी विनती है आपकी आँख की समस्या बहुत जल्द दूर हो,, आप अपने स्वास्थ्य का ध्यान रखें। सादर"
Jun 15
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-104
"आद0 दयाराम मैथानी जी सादर अभिवादन। प्रदत्त विषय पर खूबसूरत रचना लिखी आपने,, बहुत बहुत बधाई इस सृजन पर। सादर"
Jun 15
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-104
"आद0 नीलम उपाध्याय जी सादर अभिवादन,, प्रदत्त विषय पर बहुत ही खूबसूरत और भाव पूर्ण रचना पर मेरी कोटिश बधाइयां। सादर"
Jun 15
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-104
"आद0 बासुदेव अग्रवाल जी सादर अभिवादन। प्रदत्त विषय पर सुजान छंद में बेहतरीन सृजन किया आपने, आपको इस प्रस्तुति पर बधाई निवेदित है। एक जिज्ञासा है "क्या सिर्फ मात्रा गणना हेतु हिंदी खड़ी बोली की रचना में नहीं को नहिं लिखना उचित है?""
Jun 15
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-104
"आद0 मनन कुमार सिंह जी सादर अभिवादन। प्रदत्त विषय पर ग़ज़ल के रोओ में बढ़िया सृजन हुआ है। बहुत बहुत बधाई आपको। "
Jun 15
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-104
"आद0 प्रतिभा पांडेय जी सादर अभिवादन। प्रदत्त विषय पर बढ़िया रचना सृजित की है आपने,, आपको बहुत बहुत बधाई प्रेषित करता हूँ। सादर"
Jun 15
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-104
"आद0 श्लेष चंद्राकर जी सादर अभिवादन। प्रदत्त विषय पर बढ़िया कुण्डलिया लिखा आपने, इसके लिए बधाई प्रेषित है। नित्य अब घटते  वन की (यहाँ "वन की" शब्द क्या है।) सादर"
Jun 15
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-104
"आद0 बबिता जी सादर अभिवादन। प्रदत्त विषय पर बढ़िया प्रयास किया है आपने,, जिसके लिए बधाई निवेदित है।कुछ जगहों पर बिंदी की आवश्यकता नहीं पर आपने लगाया है जैसे धरा को रेगिस्तान बनने से बचाना है (आपने हैं लिखा है) पेड़-पौधे रोप कर दुल्हन सा सजाना है (आपने…"
Jun 15
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' replied to Admin's discussion खुशियाँ और गम, ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार के संग...
"आद0 तेजवीर सिंह जी,, बड़ा दुःखद समाचार,, हम दिवंगत आत्मा की शांति की दुआ करते हैं। ॐ शांति"
Jun 11
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप''s blog post महाभुजंगप्रयात छंद में मेरी चतुर्थ रचना
"आ. भाई सुरेंद्र जी, सुंदर छंद हुए हैं । हार्दिक बधाई ।"
May 21
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप''s blog post महाभुजंगप्रयात सवैया में मेरी पंचम रचना
"आ. भाई सुरेंद्र जी, सुंदर रचना हुयी है । हार्दिक बधाई ।"
May 21
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post दोहे - लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
"आद0 लक्ष्मण धामी जी सादर अभिवादन। एक से बढ़कर एक बेहतरीन दोहे लिखे आपने। इन दोहों के लिए बधाई प्रेषित है।सादर"
May 20

Profile Information

Gender
Male
City State
Varanasi
Native Place
Varanasi
Profession
Teacher
About me
I am a simple leaving man, having hobby to write poems

सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप''s Blog

महाभुजंगप्रयात सवैया में मेरी पंचम रचना

गरीबी मिटे औ कटे विघ्न बाधा, तमन्ना! बने स्वर्ग सा देश प्यारा
पले विश्व बंधुत्व की भावना औ, बने आदमी आदमी का सहारा
यहाँ सत्य का ही रहे बोलबाला, सदा के लिये झूठ से हो किनारा
निरोगी प्रतापी प्रभावी सभी हों, बने स्वाभिमानी लगे एक नारा।।

(मौलिक व अप्रकाशित)

Posted on May 10, 2019 at 6:30pm — 5 Comments

महाभुजंगप्रयात छंद में मेरी चतुर्थ रचना

करे वोट से चोट जो हैं लुटेरे, खरे मानकों पे चुनें आप नेता

खड़ा सामने भ्रात हो या भतीजा, भले जो लगे आपको वो चहेता

नहीं वोट देना उसे ज़िन्दगी में, कभी आपको जो नहीं मान देता

सदा जो करे पूर्ण निःस्वार्थ सेवा, उसे ही यहाँ पे बनाएँ विजेता।1।

कहीं जाति की है लड़ाई बड़ी तो, कहीं सिर्फ है धर्म का बोलबाला

इसे मुल्क में भूल जाएं सभी तो, चुनावी लड़ाई बने यज्ञशाला

अकर्मी विधर्मी तथा भ्रष्ट जो है, वही देश का है निकाले दिवाला

चुनें वोट दे के उसी आदमी को, दिखे जो प्रतापी…

Continue

Posted on May 4, 2019 at 9:41pm — 7 Comments

महाभुजंगप्रयात छंद में मेरी तृतीय रचना

खड़ा आपके सामने हाथ जोड़े, लिए स्नेह आशीष की कामना को
करूँ शिल्पकारी सदा छंद की मैं, न छोड़ूँ नवाचार की साधना को
लिखूँ फूल को भी लिखूँ शूल को भी, लिखूँ पूर्ण निष्पक्ष हो भावना को
कभी भूल से भी नहीं राह भूलूँ, लिखूँ मैं सदा राष्ट्र की वेदना को

शिल्प -यगण ×8

(मौलिक व अप्रकाशित)

Posted on May 1, 2019 at 6:38pm — 6 Comments

महाभुजंगप्रयात छंद में मेरी दूसरी रचना

धरें वेशभूषा तपस्वी सरीखा, जियें किन्तु जो ऐश की जिंदगानी
सने हाथ हैं खून से भी उन्हीं के, सदा बोलते जो यहाँ छद्म बानी
पता ही नहीं मूल क्या ज़िन्दगी का, लगे एक सा जिन्हें आग पानी
उन्हें आप यूँ ही मनस्वी न बोलो, जुबाँ से भले वे लगें आत्म ज्ञानी।।

शिल्प -यगण ×8

(मौलिक व अप्रकाशित)

Posted on April 28, 2019 at 2:36pm — 6 Comments

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At 7:03pm on April 11, 2019, Vivek Pandey Dwij said…
आदरणीय सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' जी आभार आप को इस उत्साह वर्धन के लिए।
At 7:39pm on November 20, 2016,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीय सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' जी.
सादर अभिवादन !
मुझे यह बताते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी ग़ज़ल "हाथ से सारे फिसल गए" को "महीने की सर्वश्रेष्ठ रचना" सम्मान के रूप मे सम्मानित किया गया है | इस शानदार उपलब्धि पर बधाई स्वीकार करे |

आपको प्रसस्ति पत्र यथा शीघ्र उपलब्ध करा दिया जायेगा, इस निमित कृपया आप अपना पत्राचार का पता व फ़ोन नंबर admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध कराना चाहेंगे | मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई हो |
शुभकामनाओं सहित
आपका
गणेश जी "बागी
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक 
ओपन बुक्स ऑनलाइन

 
 
 

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