For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

munish tanha
Share

munish tanha's Groups

 

munish tanha's Page

Latest Activity

munish tanha replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-133
"दिल में झांका रब को देखा तो लगे शाहाना हमजां तो ठहरी झूठी रखते ,रब से अब याराना हम जां छिड़कती थी वो हमपे हम भी तो सौदाई थेथे कभी मशहूर दोनों शम्मा वो परवाना हम इक सियासत पर था गुस्सा दूजे थोड़े सादे थे रफ़्ता-रफ़्ता बन गए इस अहद का अफ़साना हम हंस के…"
Jul 28
munish tanha replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-133
"जनाब समर कबीर साहिब अब देखिएगा दिल में झांका रब को देखा तो लगे शाहाना हमजां तो ठहरी झूठी रखते ,रब से अब याराना हम जां छिड़कती थी वो हमपे हम भी तो सौदाई थेथे कभी मशहूर दोनों शम्मा वो परवाना हम इक सियासत पर था गुस्सा दूजे थोड़े सादे थे रफ़्ता-रफ़्ता बन…"
Jul 28
munish tanha replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-133
"दिल में झांका रब को देखा तो लगे शाहाना हमजां तो ठहरी झूठी रखते ,रब से अब याराना हम जां छिड़कती थी वो हमपे हम भी तो थे सौदाईथे कभी मशहूर दोनों शम्मा वो परवाना हम इक सियासत पर था गुस्सा दूजे थोड़े सादे थे रफ़्ता रफ़्ता बन गए इस अहद का अफ़साना हम हंस के…"
Jul 28
munish tanha replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-132
"आदरणीय अजय जी बहुत बेहतरीन ग़ज़ल हुई है बधाई स्वीकार करें"
Jun 26
munish tanha replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-132
"पेट की ख़ातिर सने रहते हैं मिट्टी धूल मेंवक़्त अब मिलता नहीं हमको सँवरने के लिए वाह - वाह आदरणीय मोहम्मद अनीस अरमान जी बहुत बेहतरीन ग़ज़ल हुई है बधाई स्वीकार करें "
Jun 26
munish tanha replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-132
"आदरणीय आज़ी तमाम जी बहुत खूबसूरत गजल हुई है बधाई स्वीकार करें "
Jun 26
munish tanha replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-132
"  बंदिशे होंगी कई सारी अभी कुछ रोज़ तो फिर मिलेंगे लाख मौके भी सँवरने के लिए वाह - वाह  आदरणीय अशोक कुमार रक्ताले जी बहुत बेहतरीन ग़ज़ल हुई है बधाई स्वीकार करें "
Jun 26
munish tanha replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-132
"बैठे बैठे यूँ किनारे पर गुहर मिलते नहींहौसला भी चाहिए गहरे उतरने के लिए वाह - वाह आदरणीया राजेश कुमारी जी बहुत बेहतरीन ग़ज़ल हुई है बधाई स्वीकार करें "
Jun 26
munish tanha replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-132
"आदरणीय मोहम्मद अनीस अरमान जी धन्यवाद ,शुक्रिया"
Jun 26
munish tanha replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-132
"आदरणीया राजेश कुमारी जी मेहरबानी ,शुक्रिया"
Jun 26
munish tanha replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-132
"आदरणीय अशोक कुमार जी मेहरबानी ,शुक्रिया"
Jun 26
munish tanha replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-132
"आदरणीय सालिक गणवीर जी मेहरबानी ,शुक्रिया"
Jun 26
munish tanha replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-132
"आदरणीय संजय शुक्ला जी मेहरबानी ,शुक्रिया"
Jun 26
munish tanha replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-132
"आदरणीय दण्डपाणि नाहक जी मेहरबानी ,शुक्रिया "
Jun 26
munish tanha replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-132
"आदरणीय लक्मण धामी मुसाफिर जी मेहरबानी ,शुक्रिया"
Jun 26
munish tanha replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-132
"आदरणीय आजी तमाम जी मेहरबानी ,शुक्रिया"
Jun 26

Profile Information

Gender
Male
City State
nadaun, himachal
Native Place
india
Profession
govt. service
About me
believes in god and writing is my passion
ग़ज़ल
जिन्दगी में न वन्दगी आई
देख सब से बड़ी ये रुसवाई
राम अल्लाह सच गुरु नानक
बात यीशू ने सच की बतलाई
आखरी वक्त काम आएँगे
सीख रिश्तों की थोड़ी तुरपाई
साथ माँ बाप के नहीं रहता
जिन्दगी कैसे मोड पर लाई
भेष में साधू के छुपा रावण
भेद सीता कहाँ समझ पाई
अब भरोसा करें बात किस पर
यार जिगरी हुआ है हरजाई
काश “तन्हा” मिले पता उसका
फिर बजेगी खुशी की शेहनाई

 मौलिक व अप्रकाशित 

Munish tanha's Blog

फिर उठीं है जाग देखों शहर में शैतानियाँ

फिर उठीं है जाग देखों शहर में शैतानियाँ

दर्द आहों में बदलने क्यूँ लगी कुर्वानियाँ

जान लेने को खड़े तैयार सारे आदमी

हर जगह बढ़ने लगी है आज कल विरानियाँ

घूमते थे रात दिन हम आपकी ही चाह में

जब समझ आया खुदा तो हो गईं आसानियाँ

जोड़ तिनके है बनाया आशियाँ तुम सोच लो

आबरू इस में छुपी है मत करो नादानियाँ

गंध आने है लगी क्यूँ फिर यहाँ बारूद की

याद कर तू बस खुदा को छोड़ बेईमानियाँ

आदमी मजबूर देखो हो गया इस दौर में

खून में शामिल…

Continue

Posted on March 10, 2019 at 8:00pm — 3 Comments

इस तरह जिन्दगी तमाम करें

इस तरह जिन्दगी तमाम करें
लोग आ कर हमें सलाम करें
झूठ का अब न एहतराम करें
इस तरह का भी इंतिजाम करें
तू वना खुद को इस तरह शीशा
देख चेहरा सभी सलाम करें
इस तरह वख्श बन्दगी दाता
सुबह से शाम राम-राम करें
आप के हाथ अब नहीं बाजी
आप अब और कोई काम करें
आज तौफिक दे खुदा सबको
देश पर जां लुटा के नाम करें
देख नफरत उदास है “तन्हा”
आस्तां में कहीं कयाम करें
मुनीश “तन्हा”
मौलिक व् अप्रकाशित

Posted on November 29, 2018 at 9:30pm — 2 Comments

ग़ज़ल: जिन्दगी में न वन्दगी आई

जिन्दगी में न वन्दगी आई
देख सब से बड़ी ये रुसवाई
राम अल्लाह सच गुरु नानक
बात यीशू ने सच की बतलाई
आखरी वक्त काम आएँगे
सीख रिश्तों की थोड़ी तुरपाई
साथ माँ बाप…
Continue

Posted on October 16, 2017 at 9:30am — 4 Comments

इस प्यार को सदा ही निभाते रहेंगे हम

२२१ – २१२२ -१२२१ -२१२

इस प्यार को सदा ही निभाते रहेंगे हम

दुश्वार रास्ता हो भले पर चलेंगे हम

सच बोलने के साथ में हिम्मत अगर रही

फिर फूल की तरह ही सदा वस खिलेंगे हम

जब सांस थी तो कर्म न अच्छा कभी किया

इक आग जुर्म की है जिसे अब सहेंगे हम

तरकीब जिन्दगी में अगर काम आ गई

मुंह आईने में देख के परदे सिलेंगे हम

है चैन जिन्दगी में कहाँ ढूँढ़ते फिरें

दिन रात के हिसाब में उलझे मिलेंगे हम

मैली करो न सोच खुदा से जरा डरो

टेढ़ी नजर हुई तो…

Continue

Posted on August 31, 2017 at 3:30pm — 6 Comments

Comment Wall (5 comments)

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

At 10:04pm on July 27, 2019, dandpani nahak said…
आदरणीय मुनीश तन्हा जी आदाब , बहुत शुक्रिया आपका मेरा प्रयास आपको अच्छा लगा ह्रदय से आभार
At 11:07pm on June 27, 2019, dandpani nahak said…
आदरणीय मुनीस तन्हा जी आदाब , बहुत शुक्रिया तहे दिल से मेरा हौसला बढ़ाने के लिए
At 9:36pm on March 23, 2019, dandpani nahak said…
आदरणीय मुनीश तन्हा जी आदाब
बहुत बहुत शुक्रिया हौसला बढ़ाने का
At 5:29pm on January 10, 2018, dandpani nahak said…
आदरणीय मुनीश तन्हा जी
बहुत बहुत शुक्रिया
At 7:54pm on April 20, 2016,
प्रधान संपादक
योगराज प्रभाकर
said…

ओबीओ परिवार में आपका हार्दिक स्वागत है मोहतरम मुनीष तन्हा जी.

 
 
 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity


सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 125 in the group चित्र से काव्य तक
"वाह वाह वाह !  भाई आशीष जी, एक अरसे बाद आपसे दो-चार हो रहा हूँ. आपने अपनी प्रस्तुति से मुग्ध…"
4 hours ago
Samar kabeer replied to Admin's discussion ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 125 in the group चित्र से काव्य तक
"दूसरी प्रस्तुति:- छपा आज है ये समाचार देखोचली एक बालानदी पार देखो तरीक़ा मियाँ ख़ूब है ये निकालाचली…"
4 hours ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 125 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय लक्ष्मण धामी जी, आपकी प्रस्तुति छंद की तुष्टि के साथ प्रदत्त चित्र के गहन भावों को भी पकड़…"
4 hours ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 125 in the group चित्र से काव्य तक
"'नहीं किंतु' का 'अच्छा' जैसे शब्द के पूर्व प्रयुक्त किया जाना, रचना के छांदसिक…"
4 hours ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 125 in the group चित्र से काव्य तक
"वाह.. वाह !  आदरणीय समर साहब, आपकी प्रस्तुति सतत अभ्यास का सुंदर उदाहरण है. जैसा कि अगाह किया…"
5 hours ago
आशीष यादव replied to Admin's discussion ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 125 in the group चित्र से काव्य तक
"यहाँ एक बेटी चली नाँव लेके  करेगी नदी पार कैसे? निरेखे  खिवैया स्वयं है बड़ा फासला…"
5 hours ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 125 in the group चित्र से काव्य तक
"दूसरी या अन्य रचनाओं की रोक तो है ही नहीं. तभी तो आयोजन की भूमिका में छंदबद्ध गीतात्मक रचनाओं के…"
5 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on AMAN SINHA's blog post नास्तिक
"आ. भाई अमन जी, अच्छी रचना हुई है । हार्दिक बधाई।"
6 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on अमीरुद्दीन 'अमीर''s blog post ग़ज़ल (हुस्न तो  मिट जाएगा...)
"आ. भाई अमीरुद्दीन जी, सादर अभिवादन। सुन्दर गजल हुई है । हार्दिक बधाई। "
7 hours ago
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post उस रात ....
"आदरणीय लक्ष्मण धामी जी सृजन आपकी मनोहारी प्रशंसा का दिल से आभारी है सर"
12 hours ago
Samar kabeer replied to Admin's discussion ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 125 in the group चित्र से काव्य तक
"जनाब चेतन प्रकाश जी आदाब, प्रदत्त चित्र पर छंदों का अच्छा प्रयास है, बधाई स्वीकार करें । आपके छंदों…"
12 hours ago
Chetan Prakash replied to Admin's discussion ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 125 in the group चित्र से काव्य तक
"कि रानी कहेगा ज़माना  हमारी फसाना बनेगी लड़ाका  कुँआरी लड़ेगी  लड़ाई …"
15 hours ago

© 2021   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service