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munish tanha replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-126
"आदरणीया राजेश कुमारी जी बहुत अच्छी ग़ज़ल हुई है बधाई स्वीकार करें  "
Dec 26, 2020
munish tanha replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-126
"आदरणीय दण्डपाणि नाहक जी बहुत अच्छी ग़ज़ल हुई है बधाई स्वीकार करें "
Dec 26, 2020
munish tanha replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-126
"आदरणीय अनिल जी बहुत अच्छी ग़ज़ल हुई है बधाई स्वीकार करें "
Dec 26, 2020
munish tanha replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-126
"आदरणीय सालिक गणवीर जी  बहुत अच्छी ग़ज़ल हुई है बधाई स्वीकार करें "
Dec 26, 2020
munish tanha replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-126
"आदरणीय नवीन जी  बहुत अच्छी ग़ज़ल हुई है बधाई स्वीकार करें"
Dec 26, 2020
munish tanha replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-126
"आदरणीय लक्ष्मण धामी मुसाफिर जी बहुत अच्छी ग़ज़ल हुई है बधाई स्वीकार करें"
Dec 25, 2020
munish tanha replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-126
"आदरणीया डिम्पल शर्मा जी बहुत अच्छी ग़ज़ल हुई है बधाई स्वीकार करें"
Dec 25, 2020
munish tanha replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-126
" आदरणीय अमीरुद्दीन 'अमीर' साहब  जी बहुत अच्छी ग़ज़ल हुई है बधाई स्वीकार करें"
Dec 25, 2020
munish tanha replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-126
"दिल धड़कता मेरा पैग़ाम से पहले - पहले क्या बताऊं मैं तुम्हें नाम से पहले - पहले दर्दे दिल शोर मचाए कोई कैसे समझे दिल पे गुजरी है छुरी नाम से पहले - पहले गुम हुए होश हमारे जो नज़र भर देखा चढ़ गई आँख की मै जाम से पहले - पहले उम्र भर साथ न छोडूं…"
Dec 25, 2020
munish tanha replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-125
"अम्न कायम रहे हमने कोई कोशिश नहीं की हाथ मंज़िल पे पड़े हमने वो जुम्विश नहीं की इस मुहब्बत ने बनाया है तमाशा सभी को देखिए इश्क़ ने लेकिन कभी लरज़िश नहीं की गम लिपट कर मिले आपस में मुहब्बत से ऐसे देख सोचों मैं ज़ुबाँ ने कैसे लग्ज़िश नहीं की था भरोसा तो…"
Nov 27, 2020
munish tanha replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-124
"बात सबको ये जमाने में बतानी चाहिए दोस्ती की है तो जां देकर निभानी चाहिए ज़ख्म ये नासूर बन जाए न इतना ख्याल कर याद तुमको अब गली भी वो न आनी चाहिए आगे बढ़ने के लिए है ये जरूरी रास्ता ज़िन्दगी में दुश्मनी भी कुछ पुरानी चाहिए गर मिली हक से तुम्हें तो…"
Oct 23, 2020
munish tanha replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-123
"आदरणीय सालिक गणवीर ग़ज़ल पसंद करने के लिए और हौसला अफजाई के लिए शुक्रिया"
Sep 26, 2020
munish tanha replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-123
"आदरणीय  दयाराम मैठानी  जी ग़ज़ल पसंद करने के लिए शुक्रिया"
Sep 26, 2020
munish tanha replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-123
"आदरणीय अजेय  जी  ग़ज़ल पसंद करने के लिए  शुक्रिया"
Sep 26, 2020
munish tanha replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-123
" आदरणीय लक्ष्मण धामी मुसाफिर जी ग़ज़ल पसंद करने के लिए  शुक्रिया"
Sep 26, 2020
munish tanha replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-123
"आदरणीय अमीरुद्दीन अमीर जी ग़ज़ल पसंद करने के लिए और हौसला अफजाई के लिए शुक्रिया"
Sep 26, 2020

Profile Information

Gender
Male
City State
nadaun, himachal
Native Place
india
Profession
govt. service
About me
believes in god and writing is my passion
ग़ज़ल
जिन्दगी में न वन्दगी आई
देख सब से बड़ी ये रुसवाई
राम अल्लाह सच गुरु नानक
बात यीशू ने सच की बतलाई
आखरी वक्त काम आएँगे
सीख रिश्तों की थोड़ी तुरपाई
साथ माँ बाप के नहीं रहता
जिन्दगी कैसे मोड पर लाई
भेष में साधू के छुपा रावण
भेद सीता कहाँ समझ पाई
अब भरोसा करें बात किस पर
यार जिगरी हुआ है हरजाई
काश “तन्हा” मिले पता उसका
फिर बजेगी खुशी की शेहनाई

 मौलिक व अप्रकाशित 

Munish tanha's Blog

फिर उठीं है जाग देखों शहर में शैतानियाँ

फिर उठीं है जाग देखों शहर में शैतानियाँ

दर्द आहों में बदलने क्यूँ लगी कुर्वानियाँ

जान लेने को खड़े तैयार सारे आदमी

हर जगह बढ़ने लगी है आज कल विरानियाँ

घूमते थे रात दिन हम आपकी ही चाह में

जब समझ आया खुदा तो हो गईं आसानियाँ

जोड़ तिनके है बनाया आशियाँ तुम सोच लो

आबरू इस में छुपी है मत करो नादानियाँ

गंध आने है लगी क्यूँ फिर यहाँ बारूद की

याद कर तू बस खुदा को छोड़ बेईमानियाँ

आदमी मजबूर देखो हो गया इस दौर में

खून में शामिल…

Continue

Posted on March 10, 2019 at 8:00pm — 3 Comments

इस तरह जिन्दगी तमाम करें

इस तरह जिन्दगी तमाम करें
लोग आ कर हमें सलाम करें
झूठ का अब न एहतराम करें
इस तरह का भी इंतिजाम करें
तू वना खुद को इस तरह शीशा
देख चेहरा सभी सलाम करें
इस तरह वख्श बन्दगी दाता
सुबह से शाम राम-राम करें
आप के हाथ अब नहीं बाजी
आप अब और कोई काम करें
आज तौफिक दे खुदा सबको
देश पर जां लुटा के नाम करें
देख नफरत उदास है “तन्हा”
आस्तां में कहीं कयाम करें
मुनीश “तन्हा”
मौलिक व् अप्रकाशित

Posted on November 29, 2018 at 9:30pm — 2 Comments

ग़ज़ल: जिन्दगी में न वन्दगी आई

जिन्दगी में न वन्दगी आई
देख सब से बड़ी ये रुसवाई
राम अल्लाह सच गुरु नानक
बात यीशू ने सच की बतलाई
आखरी वक्त काम आएँगे
सीख रिश्तों की थोड़ी तुरपाई
साथ माँ बाप…
Continue

Posted on October 16, 2017 at 9:30am — 4 Comments

इस प्यार को सदा ही निभाते रहेंगे हम

२२१ – २१२२ -१२२१ -२१२

इस प्यार को सदा ही निभाते रहेंगे हम

दुश्वार रास्ता हो भले पर चलेंगे हम

सच बोलने के साथ में हिम्मत अगर रही

फिर फूल की तरह ही सदा वस खिलेंगे हम

जब सांस थी तो कर्म न अच्छा कभी किया

इक आग जुर्म की है जिसे अब सहेंगे हम

तरकीब जिन्दगी में अगर काम आ गई

मुंह आईने में देख के परदे सिलेंगे हम

है चैन जिन्दगी में कहाँ ढूँढ़ते फिरें

दिन रात के हिसाब में उलझे मिलेंगे हम

मैली करो न सोच खुदा से जरा डरो

टेढ़ी नजर हुई तो…

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Posted on August 31, 2017 at 3:30pm — 6 Comments

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At 10:04pm on July 27, 2019, dandpani nahak said…
आदरणीय मुनीश तन्हा जी आदाब , बहुत शुक्रिया आपका मेरा प्रयास आपको अच्छा लगा ह्रदय से आभार
At 11:07pm on June 27, 2019, dandpani nahak said…
आदरणीय मुनीस तन्हा जी आदाब , बहुत शुक्रिया तहे दिल से मेरा हौसला बढ़ाने के लिए
At 9:36pm on March 23, 2019, dandpani nahak said…
आदरणीय मुनीश तन्हा जी आदाब
बहुत बहुत शुक्रिया हौसला बढ़ाने का
At 5:29pm on January 10, 2018, dandpani nahak said…
आदरणीय मुनीश तन्हा जी
बहुत बहुत शुक्रिया
At 7:54pm on April 20, 2016,
प्रधान संपादक
योगराज प्रभाकर
said…

ओबीओ परिवार में आपका हार्दिक स्वागत है मोहतरम मुनीष तन्हा जी.

 
 
 

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