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Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan"
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Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan" commented on Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan"'s blog post सच क्या है कोई पूछे, मैं श्याम बता दूँगा-----ग़ज़ल पंकज मिश्र
"आदरणीय गिरिराज सर, बहुत दिनों बाद आपका मेरी ग़ज़ल पर आगमन सुखदाई लग रहा....सादर आभार"
Jun 4

सदस्य कार्यकारिणी
गिरिराज भंडारी commented on Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan"'s blog post सच क्या है कोई पूछे, मैं श्याम बता दूँगा-----ग़ज़ल पंकज मिश्र
"आदरनीय पंकज भाई , अच्छी ग़ज़ल कही है , बधाई स्वीकार करें |"
Jun 4
Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan" posted a blog post

इच्छाओं का भार नहीं धर----ग़ज़ल

22 22 22 22इच्छाओं का भार नहीं धररिश्तों के नाज़ुक धागों परपोषित पुष्पित होंगे रिश्तेहठ मनमानी त्याग दिया करऊर्जा से परिपूर्ण रहेगाखुद में शक्ति सहन की तू भरकरनी का फल सन्तति भोगेसो कुकर्म से ए मानव डरदेख निगाहें घुमा-फिरा केकौन नहीं फल भोगे यहाँ परअब वैज्ञानिक भी कहते हैंपाप-प्रलय-भय तू मन में भरगा कर, लिख कर, यूँ ही पंकजहर मन से अवसाद सदा हरमौलिक अप्रकाशितSee More
Jun 1
Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan" commented on Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan"'s blog post सच क्या है कोई पूछे, मैं श्याम बता दूँगा-----ग़ज़ल पंकज मिश्र
"आदरणीय शुशील सर ग़ज़ल को अपनी शुभकामनाएं देने के लिए बहुत बहुत आभार"
May 27
Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan" commented on Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan"'s blog post सच क्या है कोई पूछे, मैं श्याम बता दूँगा-----ग़ज़ल पंकज मिश्र
"आदरणीय प्रदीप जी बहुत बहुत आभार"
May 27
Sushil Sarna commented on Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan"'s blog post सच क्या है कोई पूछे, मैं श्याम बता दूँगा-----ग़ज़ल पंकज मिश्र
"वाह आदरणीय वाह बेहतरीन ग़ज़ल , बेहतरीन अशआर ... इस शानदार ग़ज़ल के लिए दिल से बधाई।"
May 27
प्रदीप देवीशरण भट्ट commented on Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan"'s blog post सच क्या है कोई पूछे, मैं श्याम बता दूँगा-----ग़ज़ल पंकज मिश्र
"जीने के सलीके का मैं अंदाज सिखा दुंगा"
May 27
Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan" posted a blog post

सच क्या है कोई पूछे, मैं श्याम बता दूँगा-----ग़ज़ल पंकज मिश्र

221 1222 221 1222किस्मत की लकीरों पर खुश-रंग चढ़ा दूँगामैं दर्द के सागर में पंकज को खिला दूँगाज्यादा का नहीं केवल छोटा सा है इक दावा ग़र वक्त दो तुम को मैं खुद तुम से मिला दूँगाकुछ और भले जग को दे पाऊँ नहीं लेकिनजीने का सलीका मैं अंदाज़ सिखा दूँगाकंक्रीट की बस्ती में मन घुटता है रोता हैवादा है मैं बागों का इक शह्र बसा दूँगाआभास की बस्ती है, अहसास पे जीती हैजन जन के मनस में मैं यह मंत्र जगा दूँगाये रंग ये दुनिया का हर रूप महज़ भ्रम हैसच क्या है कोई पूछे? मैं श्याम बता दूँगामौलिक अप्रकाशितSee More
May 27
Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan" replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-107
"आदरणीय अनीस जी बहुत बहुत आभार"
May 25
Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan" replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-107
"आदरणीय अमरनाथ सर बहुत बहुत आभार"
May 25
Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan" replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-107
"आदरणीय नवीन सर बहुत बहुत आभार, इंगित कमी पर ध्यान दिया जाएगा"
May 25
Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan" replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-107
"आदरणीय अजय जी बहुत बहुत आभार"
May 25
Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan" replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-107
"आदरणीय अग्रज सौरभ पांडेय जी को सादर प्रणाम आपका आशीर्वाद प्राप्त हुआ, मैं और ग़ज़ल दोनों धन्य हुए। सुझाव के अनुरूप सुधार अवश्य करूँगा"
May 25
Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan" replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-107
"आदरणीय दयाराम सर बहुत बहुत आभार। मैंने मरुथल ही लिखा है"
May 24
Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan" replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-107
"आदरणीया अंजली जी बहुत बहुत आभार"
May 24
Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan" replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-107
"आदरणीय बाऊजी प्रणाम सहित सादर आभार"
May 24

Profile Information

Gender
Male
City State
Azamgarh
Native Place
Azamgarh
Profession
Teaching

Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan"'s Blog

इच्छाओं का भार नहीं धर----ग़ज़ल

22 22 22 22

इच्छाओं का भार नहीं धर

रिश्तों के नाज़ुक धागों पर

पोषित पुष्पित होंगे रिश्ते

हठ मनमानी त्याग दिया कर

ऊर्जा से परिपूर्ण रहेगा

खुद में शक्ति सहन की तू भर

करनी का फल सन्तति भोगे

सो कुकर्म से ए मानव डर

देख निगाहें घुमा-फिरा के

कौन नहीं फल भोगे यहाँ पर

अब वैज्ञानिक भी कहते हैं

पाप-प्रलय-भय तू मन में भर

गा कर, लिख कर, यूँ ही पंकज

हर मन से अवसाद सदा…

Continue

Posted on June 1, 2019 at 12:46pm

सच क्या है कोई पूछे, मैं श्याम बता दूँगा-----ग़ज़ल पंकज मिश्र

221 1222 221 1222

किस्मत की लकीरों पर खुश-रंग चढ़ा दूँगा

मैं दर्द के सागर में पंकज को खिला दूँगा

ज्यादा का नहीं केवल छोटा सा है इक दावा

ग़र वक्त दो तुम को मैं खुद तुम से मिला दूँगा

कुछ और भले जग को दे पाऊँ नहीं लेकिन

जीने का सलीका मैं अंदाज़ सिखा दूँगा

कंक्रीट की बस्ती में मन घुटता है रोता है

वादा है मैं बागों का इक शह्र बसा दूँगा

आभास की बस्ती है, अहसास पे जीती है

जन जन के मनस में मैं यह मंत्र जगा…

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Posted on May 27, 2019 at 12:43am — 6 Comments

प्रेम हो जाना अर्थात रात भर जगना------गीत

प्रेम हो जाना अर्थात रात भर जगना।।

भूख प्यास नींद चैन सब गँवा कर

अवधान में एकल उद्दीपक बसा कर

उस तक पहुँचने का सतत यत्न करना

प्रेम हो जाना अर्थात रात भर जगना।।

इच्छित के प्रति समर्पण है प्रेम

उद्देश्य के प्रति अभ्यर्पण है प्रेम

लक्ष्य के प्रति अनवरत गतिशील रहना

प्रेम हो जाना अर्थात रात भर जगना।।

प्रेयसी के अंक पाश तक सीमित नहीं

काम जनित आकर्षण तो किंचित नहीं

कामना के केंद्र-बिंदु पर…

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Posted on May 20, 2019 at 1:01pm

स्वप्न के सीवान में----------गीत

स्वप्न के सीवान में ज़ुल्फ़ों के बादल छा गए

चाँद क्या आया नज़र हम दिल गँवा कर आ गए।।

चूम कर नज़रों से नज़रें, गुदगुदा कर मन गई

रूपसी जादू भरी थी मन की अभिहर* बन गई                      

तन सुरभि का यूँ असर खुद को भुला कर आ गए

चाँद क्या आया नज़र हम दिल गँवा कर आ गए।।

मन्द सी मुस्कान उसके होठों पर जैसे खिली

इस हृदय की बन्द साँकल खुद अचानक से खुली

हम मनस में रूप उसका लो सजा कर आ गए

चाँद क्या आया नज़र हम दिल…

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Posted on May 10, 2019 at 9:00am — 4 Comments

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At 4:23pm on February 28, 2016, kanta roy said…

स्वागत आपका तहेदिल आदरणीय पंकज जी।  

At 6:34pm on October 26, 2015, kanta roy said…

महीने के सक्रीय सदस्य चुने जाने के इस गौरव पल के  लिए ढेरों बधाई आपको आदरणीय पंकज जी।  

At 11:27pm on October 15, 2015,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीय

पंकज कुमार मिश्रा 'वात्स्यायन' जी,
सादर अभिवादन,
यह बताते हुए मुझे बहुत ख़ुशी हो रही है कि ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार में विगत माह आपकी सक्रियता को देखते हुए OBO प्रबंधन ने आपको "महीने का सक्रिय सदस्य" (Active Member of the Month) घोषित किया है, बधाई स्वीकार करें | प्रशस्ति पत्र उपलब्ध कराने हेतु कृपया अपना पता एडमिन ओ बी ओ को उनके इ मेल admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध करा दें | ध्यान रहे मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई है |
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सादर ।
आपका
गणेश जी "बागी"
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक
ओपन बुक्स ऑनलाइन

At 5:35pm on August 7, 2015, Ravi Shukla said…

स्‍वागत है पंकज जी आपका

At 11:39am on July 26, 2015, Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan" said…
सभी लोगों का सादर अभिवादन
 
 
 

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