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Samar kabeer
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Samar kabeer replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-92
"जनाब गंगाधर शर्मा 'हिंदुस्तान' जी आदाब,सुख़न नवाज़ी के लिए शुक्रगुज़ार हूँ ।"
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"जनाब लक्ष्मण धामी 'मुसाफ़िर' जी आदाब,सुख़न नवाज़ी के लिए शुक्रगुज़ार हूँ ।"
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"जनाब मुनीष तन्हा साहिब आदाब,सुख़न नवाज़ी के लिए शुक्रगुज़ार हूँ ।"
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"जनाब यूनुस ख़ान साहिब आदाब,सुख़न नवाज़ी के लिए शुक्रगुज़ार हूँ ।"
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Samar kabeer replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-92
"जनाब शैख़ शहज़ाद यस्मानी जी आदाब,वाह बहुत उम्दा प्रयास,बधाई स्वीकार करें,कोशिश करते रहें,मंज़िल नज़दीक है ।"
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Samar kabeer replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-92
"निलेश जी ज़िंदाबाद,हा हा हा..."
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Samar kabeer replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-92
"ये शब्द निलेश जी ने दिए हैं बहना,इसकी दाद पर उनका हक़ है ।"
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Samar kabeer replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-92
"बहना राजेश कुमारी जी आदाब, सुख़न नवाज़ी के लिए शुक्रगुज़ार हूँ ।"
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Samar kabeer replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-92
"जनाब दंडपानी जी आदाब,ग़ज़ल अभी बहुत समय चाहती है,बहरहाल मुशायरे में सहभागिता के लिए धन्यवाद । ग़ज़ल विधा सिखाने के लिए ओबीओ पर "ग़ज़ल की कक्षा" का लाभ लें ।"
2 hours ago
Samar kabeer replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-92
"जनाब मुकेश कुमार सक्सेना जी आदाब,ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है,लेकिन ग़ज़ल अभी कवाफ़ी समय चाहती है,मुशायरे में सहभागिता के लिए धन्यवाद । नज़रों से वो नज़र न मिलाएँ तो क्या करें हमको भुला के दूर वो जाएँ तो क्या करें वादों पे उनके हमको भरोसा तो था बहुत वादे वो…"
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Samar kabeer replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-92
"जनाब रवि शुक्ला जी आदाब,सुख़न नवाज़ी के लिए शुक्रगुज़ार हूँ ।"
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Samar kabeer replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-92
"जनाब नादिर ख़ान साहिब आदाब,सुख़न नवाज़ी के लिए शुक्रगुज़ार हूँ ।"
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"जनाब शैख़ शहज़ाद उस्मानी जी आदाब,सुख़न नवाज़ी के लिए शुक्रगुज़ार हूँ ।"
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Samar kabeer replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-92
"जनाब आशीष श्रीवास्तव जी आदाब,सुख़न नवाज़ी के लिए शुक्रगुज़ार हूँ ।"
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"जनाब तस्दीक़ अहमद साहिब आदाब,सुख़न नवाज़ी के लिए शुक्रगुज़ार हूँ ।"
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Samar kabeer replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-92
"जनाब निलेश 'नूर' साहिब आदाब, 'अशआर से ही करते हैं उनको सनन भनन सर पर चपत लगा नहीं पाएं तो क्या करें' सुख़न नवाज़ी के लिए शुक्रगुज़ार हूँ ।"
3 hours ago

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Samar kabeer's Blog

तरही ग़ज़ल

मफ़ऊल फ़ाइलातुन मफ़ऊल फ़ाइलातुन

ख़ुशियों का इस जहाँ में फ़ुक़दान हो न जाये

ग़म अपनी ज़िन्दगी का उन्वान हो न जाये

नफ़रत का आज कंकर जो तेरी आँख में है

इक रोज़ बढ़ते बढ़ते चट्टान हो न जाये

मज़लूम की कहानी सुनकर तू हँस रहा है

तेरा भी हाल ऐसा नादान हो न जाये

सारे अदू लगे हैं,यारो इसी जतन में

पूरा हमारे दिल का अरमान हो न जाये

दोनों तरफ़ की फ़ौजें होने लगीं…

Continue

Posted on February 20, 2018 at 5:55pm — 17 Comments

तरही ग़ज़ल नम्बर 2,कुछ नये क़वाफ़ी के साथ ।

फाइलातून फ़ाइलातुन फाइलुन

दुश्मन-ए-जाँ लरज़ह  बर अंदाम है

जब तलक ज़िन्दा हमारा नाम है

सोचने की क़ुव्वतें मफ़लूज हैं

मुल्क में सबको हुआ सरसाम है

चूस लेती है बदन का ये लहू

शाइरी भी कितनी ख़ूँँ  आशाम है

उसको छूने से भी मुझको डर लगे

इस क़दर नाज़ुक वो गुल अंदाम है

ये तो दीवानों की बस्ती है "समर"

तुम यहां क्यों आ गए क्या काम…

Continue

Posted on December 28, 2017 at 11:12am — 27 Comments

'आपके पास है जवाब कोई'

फ़ाइलातुन मफ़ाइलुन फ़इलुन/फेलुन





मेरे ग़म का है सद्दे बाब कोई

आपके पास है जवाब कोई



सुनके मेरी ग़ज़ल कहा उसने

अपने फ़न में है कामयाब कोई



उतनी भड़केगी आतिश-ए-उल्फ़त

जितना बरतेगा इज्तिनाब कोई



सबसे उनको छुपा के रखता हूँ

तोड़ डाले न मेरे ख़्वाब कोई



पास है जिनके दौलत-ए-ईमाँ

उन पर आता नहीं अज़ाब कोई



कोई उस पर यक़ी नहीं करता

अच्छा बन जाए जब ख़राब कोई



आमने सामने हों जब दोनों

उनको देखे कि माहताब… Continue

Posted on November 12, 2017 at 3:06pm — 30 Comments

"अभी इक आदमी बाक़ी है जो इंकार कर देगा"

मफ़ाईलुन मफ़ाईलुन मफ़ाईलुन मफ़ाईलुन



अगर वो मुफ़लिसी को रौनक़-ए-बाज़ार कर देगा

कई महरुमियों को बर सर-ए-पैकार कर देगा



सभी ने कर लिया इक़रार, लेकिन जानता है वो

अभी इक आदमी बाक़ी है जो इंकार कर देगा



किताबों में लिखा है उसको जन्नत की बशारत है

वफ़ा की राह में क़ुर्बान जो घर बार कर देगा



मिलाएगा अगर हर बात में जो हाँ में हाँ उसकी

उसे नीलाम वो इक दिन सर-ए-बाज़ार कर देगा



हमारे इश्क़ का चर्चा अभी सरगोशियों तक है

जो बाक़ी काम है वो सुब्ह का… Continue

Posted on November 1, 2017 at 11:44am — 62 Comments

Comment Wall (13 comments)

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At 5:21pm on January 10, 2018, dandpani nahak said…
आदरणीय समर कबीर जी
आपका बहुत बहुत शुक्रिया
At 10:54am on October 9, 2016, सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' said…
आदरणीय समर कबीर साहिब प्रणाम आपको।

गजल विधा सिखने का इच्छुक हूँ और मैंने दूसरी गजल आज इस पटल पर रखी है।

आपके आने से मेरा घर जग जगमगाया।

आपक नजर कर मुझे कुछ सुझाव देंगे तो आगे से मुझे कुछ सीखने में मदद मिलेगी। सादर
At 11:29am on September 26, 2016, Kalipad Prasad Mandal said…

आदरणीय समीर कबीर साहिब आदाब , आपको थोड़ा कष्ट दे रहा हूँ क्योंकि ग़ज़ल में जितनी जानकारी आपको है शायद मेरी जानकारी में और कोई नहीं है | मैं कुछ शे'र ग़ालिब के पढ़ रहा था और उनके बहर जांच कर रहा था अपनी जानकारी केलिए | दो शेर में अटक गया हूँ ,नीचे लिखा है :-

बेनिया/जी हद से गुज/री , बन्दा पर/वर कब तलक 

२१२/ २२१ २/           1222        / २२१२ 

हम कहें/गे हाले  दिल, और आ/प फरमाएं/गे क्या 

२१२/     २२१    २ /   २१२ /    १  222   /२२(१२)

गर किया /नासेह ने/ हमको कै/द ,अच्छा यूं स/ही 

२१२/      २२१२/      212     /२२ २१/२ 

ये जुनू/ने -इश्क के /अंदाज़ छुट /जायेंगे क्या 

212/   २२१२/        221२/       2212

कृपया आप इस्नके सही बहर बताने का कष्ट करें |

सादर 

At 11:08pm on September 24, 2016, Samar kabeer said…
सरिता जी आप किस विषय में
पूछ रही हैं ?
At 9:14pm on September 24, 2016, sarita panthi said…
आदरणीय सर क्या मैंने अब सही जगह पोस्ट की है ?
At 3:16pm on September 19, 2016, Dipu mandrawal said…
आदरणीय समीर कबीर जी आपने मेरी कविताओं को पढ़ा और पसंद किया इसके लिए मेरा प्रणाम स्वीकार करें । Dipu Mandrawal
At 12:07pm on July 26, 2016, Dr Ashutosh Mishra said…

आदरणीय समर सर मेरे मित्रता के निवेदन को स्वीकार करके आपने मुझे अपना आशीर्वाद दिया है मेरे तकरीबन हर रचना को आपका मार्गदर्शन मिलता  रहा है इससे अगले रचना में एक नयी सोच मिलती है आपका स्नेह और आशीवाद यूं ही सतत मिलता रहे इस कामना के और सदर प्रणाम के साथ सादर 

At 9:46pm on February 1, 2016,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आदरणीय Samar kabeer जी,

ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार की ओर से आपको जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनायें...

At 11:06am on October 24, 2015, Tasdiq Ahmed Khan said…

janab samar kabeer sahab aadab,    hosla afzayi ke liye shukriya ,  1. ar ka matlab hai agar...aur 2.chhar ka matlab hai  ..khayal.

At 6:40pm on March 18, 2015, pratibha tripathi said…

आदरणीय समर कबीर जी आपको माह कि सर्वश्रेष्ठ रचना के हेतु चुने जाने के लिए बधाई प्रेषित करती हूँ । ये सच है कि ग़ज़ल को लिखना और उसमे खिताब पाना बहुत ही प्रशंशनीय है ,आपको एक बार फिरसे बधाई हो सादर । 

 
 
 

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