For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

बसंत कुमार शर्मा
  • Male
  • जबलपुर, मध्यप्रदेश
  • India
Share

बसंत कुमार शर्मा's Friends

  • Ajay Tiwari
  • santosh khirwadkar
  • रोहित डोबरियाल "मल्हार"
  • Ravi Shukla
  • Prakash Chandra Baranwal
  • Samar kabeer
  • C.M.Upadhyay "Shoonya Akankshi"

बसंत कुमार शर्मा's Groups

 

बसंत कुमार शर्मा's Page

Latest Activity

बसंत कुमार शर्मा commented on अमीरुद्दीन 'अमीर''s blog post ग़ज़ल (निगलते भी नहीं बनता उगलते भी नहीं बनता)
"आ. अमीरूद्दीन जी, सादर अभिवादन  अच्छी ग़ज़ल हुई है,  बधाई स्वीकारें    "
Nov 9, 2020
बसंत कुमार शर्मा commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post फूल काँटों में खिला है- ग़ज़ल
"आदरणीय बृजेश कुमार 'ब्रज' जी सादर नमस्कार  आपकी हौसलाअफजाई का दिल से शुक्रिया "
Nov 9, 2020
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post फूल काँटों में खिला है- ग़ज़ल
"बेहतरीन ग़ज़ल कही आदरणीय शर्मा जी...दूसरे शे'र में जो विशेषण दिये वो कमाल हैं..."
Nov 1, 2020
बसंत कुमार शर्मा commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post फूल काँटों में खिला है- ग़ज़ल
"आदरणीय Samar kabeer जी सादर नमस्कार  जी उत्तम जानकारी दी आपने , आपकी इस्लाह से हमेशा ही मेरा मार्गदर्शन होता है. सादर नमन , कुछ और सोचता हूँ "
Oct 31, 2020
Samar kabeer commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post फूल काँटों में खिला है- ग़ज़ल
"जनाब बसंत कुमार शर्मा जी आदाब, ग़ज़ल का अच्छा प्रयास है, बधाई स्वीकार करें । 'गाँव है, कोई जिला है'  इस मिसरे में सहीह शब्द है "ज़ि'लअ" इसका वज़्न ज़रूर 12 है,मगर इसे 'ला' के क़ाफ़िये के साथ नहीं ले सकते,ग़ौर करें…"
Oct 27, 2020
बसंत कुमार शर्मा commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post फूल काँटों में खिला है- ग़ज़ल
"आदरणीय लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' जी सादर नमस्कार  आपकी हौसला अफजाई के लिए दिल से शुक्रिया "
Oct 27, 2020
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post फूल काँटों में खिला है- ग़ज़ल
"आ. भाई बसंत जी, सादर अभिवादन । उत्तम गजल हुई है । हार्दिक बधाई।"
Oct 24, 2020
बसंत कुमार शर्मा commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post उसको भाया भीड़ का होकर खो जाना -लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
"आदरणीय लक्षण धामी जी सादर नमस्कार उम्दा ग़ज़ल के लिए ढेरों बधाइयाँ स्वीकार करें. सादर."
Oct 23, 2020
बसंत कुमार शर्मा commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post जब-जब ख़्वाब सुनहरे देखे - ग़ज़ल
"आदरणीय Rupam kumar -'मीत' जी सादर नमस्कार  आपकी हौसलाअफजाई के लिए दिल से शुक्रिया "
Oct 23, 2020
बसंत कुमार शर्मा posted a blog post

फूल काँटों में खिला है- ग़ज़ल

२१२२ २१२२ फूल काँटों में खिला है, प्यार में सब कुछ मिला है.  है न कुछ परिमाप गम का, गाँव है, कोई जिला है.  झोंपड़ी का देखकर गम,तख़्त कब कोई हिला है.  है कहाँ जाना न मालूम,क्या गजब ये काफिला है.  हो अगर संवाद दिल से,खत्म हर शिकवा गिला है.  तोडना उसको है मुश्किल,ख़्वाहिशों का जो किला है. दर्द सँग किलकारियाँ हैं,जिंदगी का सिलसिला है.मौलिक एवं अप्रकाशित See More
Oct 22, 2020
Rupam kumar -'मीत' commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post जब-जब ख़्वाब सुनहरे देखे - ग़ज़ल
"आदरणीय बसंत कुमार शर्मा जी आदाब, बहतरीन ग़ज़ल हुई है दाद के साथ मुबारकबाद पेश करता हूँ, सादर।"
Oct 20, 2020
बसंत कुमार शर्मा commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post जब-जब ख़्वाब सुनहरे देखे - ग़ज़ल
"आदरणीय Nilesh Shevgaonkar जी सादर नमस्कार  आपका सुझाव अनुकरणीय है , सादर स्वागत है "
Oct 16, 2020
बसंत कुमार शर्मा commented on Nilesh Shevgaonkar's blog post ग़ज़ल नूर की- जिन की ख़ातिर हम हुए मिस्मार; पागल हो गये
"आदरणीय निलेश 'नूर' जी जी सादर नमस्कार  बहुत सुंदर ग़ज़ल हुई, बधाई स्वीकार करें "
Oct 16, 2020
बसंत कुमार शर्मा commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post नेता कम - लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' (गजल)
"आदरणीय लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'  जी सादर नमस्कार  अच्छी ग़ज़ल के लिए बधाई स्वीकारें "
Oct 16, 2020
बसंत कुमार शर्मा posted a blog post

मगर होता नहीं दिखता - गजल

१२२२ १२२२ १२२२ १२२२जमीं पर बीज उल्फत के कोई बोता नहीं दिखता.लगाता प्रेम सरिता में कोई गोता नहीं दिखता. करे अपराध कोई और ही उसकी सजा पाए,वो कहते हैं हुआ इंसाफ़, पर होता नहीं दिखता. झरोखे हैं न आँगन है, न दाना है न गौरैया,सुनाये राम का जो नाम वह तोता नहीं दिखता.  सभी बेटों ने अपनी एक नई दुनिया बसा ली है,कि अब दादी के’ हाथों में यहाँ पोता नहीं दिखता. हुए जंगल नदारद सब, बचे बस ठूँठ पेड़ों के,बुझा दे प्यास वन में जो कहीं सोता नहीं दिखता. लुटे कोई पिटे कोई किसी को कुछ नहीं मतलब,पराये दुख में अब कोई…See More
Oct 16, 2020
बसंत कुमार शर्मा left a comment for Ravi Shukla
"सादर प्रणाम स्वीकारें आदरणीय, सादर स्नेह बनाये रखें, अच्छा लगा आपकी मित्रता रिक्वेस्ट देख करमैं भी रेल परिवार से ही हूँ  वर्तमान में उप मुख्य सतर्कता अधिकारी के पद कार्य कर रहा हूँ.  जबलपुर पश्चिम मध्य रेल "
Oct 16, 2020

Profile Information

Gender
Male
City State
जबलपुर (मध्यप्रदेश)
Native Place
धौलपुर
Profession
भारतीय रेल यातायात सेवा
About me
बोन्साई एवं कविता लेखन में रूचि

बसंत कुमार शर्मा's Blog

फूल काँटों में खिला है- ग़ज़ल

२१२२ २१२२ 

फूल काँटों में खिला है, 

प्यार में सब कुछ मिला है. 

 

है न कुछ परिमाप गम का, 

गाँव है, कोई जिला है. 

 

झोंपड़ी का देखकर गम,

तख़्त कब कोई हिला है. 

 …

Continue

Posted on October 19, 2020 at 11:30am — 6 Comments

जब-जब ख़्वाब सुनहरे देखे - ग़ज़ल

सागर से भी गहरे देखे.

जब-जब ख़्वाब सुनहरे देखे.

 

नए दौर में नई सदी में,

साँसों पर भी पहरे देखे. 

 

गांधी जी के तीनों बंदर, 

अंधे गूँगे बहरे देखे.

 …

Continue

Posted on October 14, 2020 at 12:54pm — 11 Comments

मगर होता नहीं दिखता - गजल

१२२२ १२२२ १२२२ १२२२

जमीं पर बीज उल्फत के कोई बोता नहीं दिखता.

लगाता प्रेम सरिता में कोई गोता नहीं दिखता.

 

करे अपराध कोई और ही उसकी सजा पाए,

वो कहते हैं हुआ इंसाफ़, पर होता नहीं दिखता.

 

झरोखे हैं न आँगन है, न दाना है न गौरैया,…

Continue

Posted on October 5, 2020 at 9:30am — 12 Comments

कश्ती में है मगर नहीं पतवार हाथ में- गजल

 221 2121 1221  212

कश्ती में है मगर नहीं पतवार हाथ में. 

होता कहाँ किसी के ये संसार हाथ में.

कर लो भला गरीब का कुर्सी पे बैठकर,

तुमको मिला है भाग्य से अधिकार हाथ में. 

ईश्वर की चाह है तो अकेले भजन…

Continue

Posted on September 19, 2020 at 6:00pm

Comment Wall (1 comment)

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

At 2:23pm on September 28, 2015,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आपका अभिनन्दन है.

ग़ज़ल सीखने एवं जानकारी के लिए

 ग़ज़ल की कक्षा 

 ग़ज़ल की बातें 

 

भारतीय छंद विधान से सम्बंधित जानकारी  यहाँ उपलब्ध है

|

|

|

|

|

|

|

|

आप अपनी मौलिक व अप्रकाशित रचनाएँ यहाँ पोस्ट (क्लिक करें) कर सकते है.

और अधिक जानकारी के लिए कृपया नियम अवश्य देखें.

ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतुयहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

 

ओबीओ पर प्रतिमाह आयोजित होने वाले लाइव महोत्सवछंदोत्सवतरही मुशायरा वलघुकथा गोष्ठी में आप सहभागिता निभाएंगे तो हमें ख़ुशी होगी. इस सन्देश को पढने के लिए आपका धन्यवाद.

 
 
 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Blogs

Latest Activity

Krish mishra 'jaan' gorakhpuri replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-128
"तेरी वो यादें दिलो जां से मिटाई न गईकोशिशें कर ली बहुत हमने भुलाई न गई कैद तस्वीर तेरी ऐसी हुई…"
14 minutes ago
Richa Yadav replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-128
"आदरणीय राजेश कुमारी जी नमस्कार बहुत खूबसूरत ग़ज़ल हुई बधाई स्वीकार कीजिये।"
17 minutes ago

सदस्य कार्यकारिणी
rajesh kumari replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-128
"वाह बहुत अच्छी ग़ज़ल कही है नीलेश बरई साहब मुबारकबाद कुबूल करें। अंतिम शेर में बोझ को गई कहना ठीक…"
20 minutes ago

सदस्य कार्यकारिणी
rajesh kumari replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-128
"ज़नाब आज़िम साहब अच्छी ग़ज़ल कही है मुबारकबाद छटे शेर के सानी की बहर गड़बड़ हो गई है आख़िरी शेर के सानी को…"
25 minutes ago
Krish mishra 'jaan' gorakhpuri posted a blog post

ग़ज़ल: खिड़की पे माहताब बैठा है।

2122 1212 22आँख में भरके आब बैठा है। खिड़की पे माहताब बैठा है।**रातभर वाट्सऐप पे है लड़ा नोजपिन पे…See More
29 minutes ago

सदस्य कार्यकारिणी
rajesh kumari replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-128
"आद.चेतन जी आपने अच्छी कोशिश की है मगर कई मिसरे बहर से खारिज़ हैं तीसरे शेर का ऊला, चौथे शेर का…"
33 minutes ago
Aazi Tamaam replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-128
"सादर प्रणाम आदरणीय रचना जी सहृदय धन्यवाद ग़ज़ल पर हौसला अफ़ज़ाई के लिये"
39 minutes ago

सदस्य कार्यकारिणी
rajesh kumari replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-128
"हसरत-ए-दीद कभी उनसे जताई न गई;आज तक हम से भी चिलमन ये हटाई न गई। वो समंदर में चलाएंगे सफीने…"
41 minutes ago
Aazi Tamaam commented on Aazi Tamaam's blog post ग़ज़ल ~ " है स्याही सुर्ख़ फिर अपनी क़लम है ख़ूँ-चकाँ अपना "
"सादर प्रणाम गुरु जी गौर फरमायियेगा चले जाता है अक्सर डूबकर मस्ती में कुछ ऐसे नहीं रोके रुका है फिर…"
41 minutes ago
Richa Yadav replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-128
"आदरणीय चेतन जी नमस्कार खूब ग़ज़ल हुई बधाई स्वीकार कीजिए।"
1 hour ago
Richa Yadav replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-128
"आदरणीय आज़ी जी नमस्कार खूब ग़ज़ल हुई बढ़ी स्वीकार कीजिए।"
1 hour ago
Richa Yadav replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-128
"आदरणीय नीलेश जी नमस्कार खूब ग़ज़ल हुई। बधाई स्वीकार कीजिए।"
1 hour ago

© 2021   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service