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बसंत कुमार शर्मा
  • Male
  • जबलपुर, मध्यप्रदेश
  • India
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  • Prakash Chandra Baranwal

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Sheikh Shahzad Usmani commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post संवाद -एक ग़ज़ल
"समसामयिक परिदृश्य व ज्वलंत मुद्दों पर बेहतरीन अशआर के लिए बहुत बहुत बधाई आपको आदरणीय बसंत कुमार शर्मा जी। ऐसा लगा कि कुछ और अशआर पाठक को चाहिए। समस्याओं के साथ समाधान भी बताना बहुत बढ़िया है, सबसे फरियाद है !"
3 hours ago
बसंत कुमार शर्मा posted a blog post

संवाद -एक ग़ज़ल

मापनी 2122 2122 2122 212 कैद  हैं  धनहीन तो, जो सेठ है, आजाद  हैझुग्गियों की लाश  पर  बनता यहाँ प्रासाद है थाम कर दिल मौन कोयल डाल पर बैठी हुई,तीर लेकर हर  जगह बैठा हुआ सय्याद है भाईचारा प्रेम  सब बातें किताबी हो  गईं,हो रही  बेघर मनुजता, फैलता अतिवाद है जन्म  रोजाना  यहाँ पर ले रहे राक्षस कई,  पल रहीं हैं होलिकाएँ जल रहा प्रहलाद है   है समुन्दर तो लबालब, पर नदी सूखी हुई,और हम सब कह रहे हैं ये धरा आबाद है. घात से प्रतिघात से हल, मित्र निकलेगा नहीं.युद्ध  से  बेहतर  हमेशा ही  रहा  संवाद…See More
yesterday
बसंत कुमार शर्मा commented on MOHD. RIZWAN (रिज़वान खैराबादी)'s blog post जश्न मिल जुल कर मनाओ यौमे आज़ादी है आज - ग़ज़ल
"बहुत बढ़िया ग़ज़ल आदरणीय MOHD.RIZWAN जी "
Monday
बसंत कुमार शर्मा commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post कहने को शर्मीली आँखें
"aआपका ह्रदय से आभार आदरणीय रवि शुक्ला जी , सही कहा आपने. मैं आपकी बात से सहमत हूँ."
Monday
Ravi Shukla commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post कहने को शर्मीली आँखें
"आदरणीय बसंत जी शब्‍द के प्रयोग को लेकर आपकी गजल के हवाले से काफी सार्थक बहस हो गई पढने को काफी कुछ मिला । शब्‍द प्रयोग में आने के बाद शब्‍दकोष में जगह बनाता है कृष्‍ण से किशन और किशन से किसन आज साहित्‍य में प्रयोग हो रहा है और…"
Monday
Niraj Kumar commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post कहने को शर्मीली आँखें
"जनाब समर कबीर साहब, आदाब, 'चर्चा वो सार्थक होती है जो सही बिन्दू पर की जाये,एक ऐसे शब्द पर की गई चर्चा जिसका उर्दू हिन्दी शब्दकोष में दूर दूर तक पता नहीं,समय की बर्बादी है,' शब्द पहले सामान्य व्यवहार में आते है वो शब्दकोश में बाद में…"
Aug 12
Niraj Kumar commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post कहने को शर्मीली आँखें
"आदरणीय बसंत जी, ग़ज़ल की भाषा का आधार शब्दकोशीय शब्द से ज्यादा लोक व्यवहार की भाषा होती है. शब्दकोशों में हज़ारों ऐसे शब्द होते है जो व्याकरणिक संभावनाओं के तहत रख लिए जाते है. जबकि व्यव्हार में नहीं आते. व्याकरणिक संभावनाओं का आधार हरदम उपयुक्त होता…"
Aug 12
बसंत कुमार शर्मा commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post कहने को शर्मीली आँखें
"आदरणीया rajesh kumari जी एवं आदरणीय Samar kabeer जी, आपके उत्तम सुझाव का दिल से शुक्रिया, आभार एवं सादर नमन "
Aug 11

सदस्य कार्यकारिणी
rajesh kumari commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post कहने को शर्मीली आँखें
" मतले के उला में शर्मीली कर  लें तथा मक्ते/अंतिम शेर में --- पूछे बिन सब कुछ कह देती  ,आखिरकार पनीली आँखें  --यदि अच्छा लगे तो "
Aug 11
Samar kabeer commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post कहने को शर्मीली आँखें
"'सकुचीली'की जगह 'ज़हरीली'कर सकते हैं,क्योंकि 'ज़ह्र'से नीले होने की तुक भी सही है,देखियेगा ।"
Aug 11
बसंत कुमार शर्मा commented on Manan Kumar singh's blog post गजल(आज चढ़ता जा रहा पारा बहुत)
"बहुत बढ़िया ग़ज़ल हुई आदरणीय, सटीक तंज , वाह वाह , बहुत बहुत बधाई आपको "
Aug 11
बसंत कुमार शर्मा commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post कहने को शर्मीली आँखें
"आदरणीय Mohammed Arif जी,  आदरणीय सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' जी, आदरणीया rajesh kumari जी  , आदरणीय Samar kabeer जी , मंच ने मेरी रचना को इतना समय दिया और ग़ज़ल में शब्दों के प्रयोग…"
Aug 11
Mohammed Arif commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post कहने को शर्मीली आँखें
"आदरणीय बसंत कुमार जी आदाब, वैसे तो मैं आपकी ग़ज़ल पर अपनी प्रतिक्रिया दे चुका हूँ । मुझे वापस इसलिए आना पड़ा क्योंकि यह ओबीओ की सीखने-सिखाने की परंपरा का सवाल था । जो शब्द शब्द कोष में है ही नहीं तो उसका उपयोग आखिर क्यों ? वरिष्ठ विद्वान और अरूज़ी आली…"
Aug 11
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post कहने को शर्मीली आँखें
"मैं समर साहब के बातों से सौ फीसदी इत्तिफ़ाक़ रखता हूँ, ओ बी ओ मंच की यह खूबी है कि यहाँ हम गलत को गलत कहते है, न् कि तर्को के आधार पर गलत को सही ठहराते हैं। मैं इधर कभी कभी पा रहा हूँ कि कुछेक लोग किसी गलत शब्द की भी वकालत करने लगते हैं जबकि वो शब्द…"
Aug 9

सदस्य कार्यकारिणी
rajesh kumari commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post कहने को शर्मीली आँखें
"आद० बसंत कुमार जी,बहुत अच्छी ग़ज़ल कही है शेर दर शेर मुबारकबाद कुबूलें | ग़ज़ल पर चर्चा भी खूब हुई है जिसको पढ़कर मेरा मानना तो यही है की जो शब्द किसी शब्दकोश में ही नहीं है उसको अपनी ग़ज़ल में क्यों इस्तेमाल करें कई बार अनजाने में हो जाता है तो यहाँ मंच…"
Aug 9
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post कहने को शर्मीली आँखें
"आद0 बसंत कुमार शर्मा जी सादर अभिवादन, ग़ज़ल पर दाद और मुबारकबाद क़बूलें, सादर।"
Aug 9

Profile Information

Gender
Male
City State
जबलपुर (मध्यप्रदेश)
Native Place
धौलपुर
Profession
भारतीय रेल यातायात सेवा
About me
बोन्साई एवं कविता लेखन में रूचि

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संवाद -एक ग़ज़ल

मापनी 2122 2122 2122 212

 

कैद  हैं  धनहीन तो, जो सेठ है, आजाद  है

झुग्गियों की लाश  पर  बनता यहाँ प्रासाद है

 

थाम कर दिल मौन कोयल डाल पर बैठी हुई,

तीर लेकर हर  जगह बैठा हुआ सय्याद है

 

भाईचारा प्रेम  सब बातें किताबी हो  गईं,

हो रही  बेघर मनुजता,…

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Posted on August 18, 2017 at 9:01am — 1 Comment

कहने को शर्मीली आँखें

मापनी २२ २२ २२ २२

 

झील सी गहरी नीली आँखें

हैं कितनी सकुचीली आँखें

 

खो देता हूँ  सारी सुध बुध

उसकी देख नशीली आँखें

 

यादों  के सावन  में भीगीं

हो गईं कितनी गीली आँखें

 

मोम बना दें पत्थर को…

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Posted on August 7, 2017 at 4:30pm — 32 Comments

रह गए हम -ग़ज़ल- बसंत कुमार शर्मा

मापनी 2122  2122 212

 

दूर से  नजरें  मिलाते  रह गए हम  

पास उनके आते’ आते रह गए हम

 

कान  पर जूं  तक न रेंगी साहिबों के,

हक़ की खातिर गिड़गिड़ाते रह गए हम   

 

तल्खियाँ हर बात में उनकी रहीं हैं,

प्यार की धुन गुनगुनाते रह गए…

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Posted on July 28, 2017 at 1:25pm — 14 Comments

यहाँ हुजूर - ग़ज़ल- बसंत कुमार शर्मा

मफ़ऊल फ़ाइलात मफ़ाईल फ़ाइलात

मापनी २२१/२१२१/१२२१/२१२

 

करते नहीं हैं’ लोग शिकायत यहाँ हुजूर,

थोड़ी तो’ हो रही है’ मुसीबत यहाँ हुजूर.

बिकने लगे हैं’ राज सरे आम आजकल,

चमकी खबरनबीस की’ किस्मत यहाँ हुजूर.

बिछती कहीं है’ खाट, कहीं टाट हैं बिछे,

हो हर जगह रही है’ सियासत यहाँ हुजूर.

पलते रहे हैं’ देश में जयचंद हर जगह,

पहली नहीं है’ आज ये’…

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Posted on July 26, 2017 at 1:00pm — 6 Comments

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At 2:23pm on September 28, 2015,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आपका अभिनन्दन है.

ग़ज़ल सीखने एवं जानकारी के लिए

 ग़ज़ल की कक्षा 

 ग़ज़ल की बातें 

 

भारतीय छंद विधान से सम्बंधित जानकारी  यहाँ उपलब्ध है

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