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बसंत कुमार शर्मा
  • Male
  • जबलपुर, मध्यप्रदेश
  • India
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बसंत कुमार शर्मा commented on Madhu Passi 'महक''s blog post लिव इन (लघुकथा)
"आ. मधु जी, - सादर नमस्कार  वाह अत्यंत प्रेरक लघुकथा बधाई आपको "
Jul 28
बसंत कुमार शर्मा commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post भोर का सूरज उजला क्यों है -लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'(गजल)
"आदरणीय लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' जी सादर नमस्कार  लाजबाब ग़ज़ल हुई है , बधाई आपको "
Jul 27
बसंत कुमार शर्मा commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post कुँवारी आँखों में- ग़ज़ल
"आदरणीया Dimple Sharma जी सादर नमस्कार  आपकी हौसलाअफजाई के लिए दिल से शुक्रिया "
Jul 27
Dimple Sharma commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post कुँवारी आँखों में- ग़ज़ल
"आदरणीय बसंत कुमार शर्मा जी नमस्ते, खुबसूरत ग़ज़ल पर बधाई स्वीकार करें आदरणीय।"
Jul 27
बसंत कुमार शर्मा commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post कुँवारी आँखों में- ग़ज़ल
"आदरणीय SURENDRA KUMAR SHUKLA BHRAMAR जी सादर नमस्कार आपकी हौसलाफजाई का दिल से शुक्रिया"
Jul 26
SURENDRA KUMAR SHUKLA BHRAMAR commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post कुँवारी आँखों में- ग़ज़ल
"फंसे पड़े हैं कई इन जुआरी आंखों में , वाह क्या बात है सुन्दर गज़ल, बधाई"
Jul 26
बसंत कुमार शर्मा commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post कुँवारी आँखों में- ग़ज़ल
"आदरणीय  लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' जी सादर नमस्कार  आपकी हौसला अफजाई के लिए दिल से शुक्रिया "
Jul 25
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post कुँवारी आँखों में- ग़ज़ल
"आ. भाई बसंत कुमार जी, सादर अभिवादन । उत्तम गजल हुई है । हार्दिख बधाई ।"
Jul 22
बसंत कुमार शर्मा posted a blog post

कुँवारी आँखों में- ग़ज़ल

1212 1122 1212 22  न नींद है न कहीं चैन प्यारी आँखों में, तमाम ख़्वाब पले हैं कुँवारी आँखों में.  शिकार कैसे हुए हम समझ नहीं पाए,दिखा न तीर न कोई कटारी आँखों में  करीब जा के न कोई भी लौट कर आया,फँसे पड़े हैं कई इन जुआरी आँखों में ये दिल हमारा किसी और का हुआ जब से,  तभी से छाई हुई है खुमारी आँखों में.  तुम्हें कभी भी न ओझल करेंगे आँखों से, तुम एक बार तो आओ हमारी आँखों में. जरा हमें भी बताओ कहाँ छुपा पानी, नदी न झील न सागर तुम्हारी आँखों में. मौलिक एवं अप्रकाशितSee More
Jul 22
बसंत कुमार शर्मा commented on सालिक गणवीर's blog post ग़ज़ल ( सोचता हूँ आज तक ग़ज़लों से क्या हासिल हुआ..)
"आदरणीय सालिक गणवीर जी सादर नमस्कार  बेहतरीन ग़ज़ल के लिए मुबारकबाद आपको "
Jul 21
बसंत कुमार शर्मा commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post न्याय की जब से हुई हैं कच्ची सारी डोरियाँ - लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
"आदरणीय  लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' जी सादर नमस्कार  बहुत सुंदर गजल के लिए मुबारकबाद आपको "
Jul 21
बसंत कुमार शर्मा commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post प्यार से भरपूर हो जाना- ग़ज़ल
"आदरणीय सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप'  जी सादर नमस्कार  आपकी हौसलाफजाई के लिए दिल से शुक्रिया "
Jul 21
बसंत कुमार शर्मा commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post प्यार से भरपूर हो जाना- ग़ज़ल
"आदरणीय अमीरुद्दीन 'अमीर'  जी सादर नमस्कार  आपकी मनभावन प्रतिक्रिया पाकर अभिभूत हूँ , जी नुक्ते मेर्री आदत में अभी नहीं आये हैं, इसी तरह आपके मार्गदर्शन से सीख जाऊंगा, सादर स्नेह बनाये रखें , सादर  नमन "
Jul 21
बसंत कुमार शर्मा commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post आग में जलना नहीं आया.- ग़ज़ल
"आदरणीय सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप'  जी सादर नमस्कार  आपकी मनभावन प्रतिक्रिया पाकर अभिभूत हूँ , सादर नमन "
Jul 21
बसंत कुमार शर्मा commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post आग में जलना नहीं आया.- ग़ज़ल
"आदरणीय  सालिक गणवीर जी सादर नमस्कार  आपकी मनभावन प्रतिक्रिया पाकर अभिभूत हूँ , सादर नमन "
Jul 21
बसंत कुमार शर्मा commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post आग में जलना नहीं आया.- ग़ज़ल
"आदरणीय  Rupam kumar -'मीत' जी सादर नमस्कार  आपकी मनभावन प्रतिक्रिया पाकर अभिभूत हूँ , सादर नमन "
Jul 21

Profile Information

Gender
Male
City State
जबलपुर (मध्यप्रदेश)
Native Place
धौलपुर
Profession
भारतीय रेल यातायात सेवा
About me
बोन्साई एवं कविता लेखन में रूचि

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कुँवारी आँखों में- ग़ज़ल

1212 1122 1212 22 

 

न नींद है न कहीं चैन प्यारी आँखों में, 

तमाम ख़्वाब पले हैं कुँवारी आँखों में. 

 

शिकार कैसे हुए हम समझ नहीं पाए,

दिखा न तीर न कोई कटारी आँखों में 

 

करीब जा के न कोई भी लौट कर आया,

फँसे पड़े हैं कई इन जुआरी आँखों में

 

ये दिल हमारा किसी और का हुआ जब से,  

तभी से…

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Posted on July 21, 2020 at 8:00pm — 6 Comments

दिल को झिंझोड़ा नहीं कभी- गजल

मापनी 

२२१/२१२१/१२२१/२१२१/२

पकड़ा किसी का हाथ तो छोड़ा नहीं कभी. 

जोड़ा जो रिश्ता प्यार का तोड़ा नहीं कभी. 

  

महँगा पड़ा है झूठ से लड़ना हमें मगर,

घुटनों को उसके सामने मोड़ा…

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Posted on July 17, 2020 at 9:33pm — 4 Comments

आग में जलना नहीं आया.- ग़ज़ल

 मापनी १२२२ १२२२ १२२२ १२२२ 

कभी रुकना नहीं आया कभी चलना नहीं आया. 

हमें हर एक साँचें में कभी ढलना नहीं आया. 

बहारों में ये सहरा भी गुलिस्ताँ बन गया होता,

किसी दरिया समंदर को उसे छलना नहीं आया. 

जो बाहर ख़ूब  फूले हैं…

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Posted on July 15, 2020 at 9:00am — 10 Comments

प्यार से भरपूर हो जाना- ग़ज़ल

 मापनी १२२२ १२२२ १२२२ १२२२ 

बहुत आसान है धन के नशे में चूर हो जाना, 

बड़ा मुश्किल है दिल का प्यार से भरपूर हो जाना.  

 

अगर वो चाहता कुछ और होना तो न था मुश्किल,

मगर मजनूँ को भाया इश्क में मशहूर हो जाना. 

 

भले दो गज जमीं थी गॉंव में अपने मगर खुश…

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Posted on July 13, 2020 at 5:59pm — 6 Comments

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At 2:23pm on September 28, 2015,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आपका अभिनन्दन है.

ग़ज़ल सीखने एवं जानकारी के लिए

 ग़ज़ल की कक्षा 

 ग़ज़ल की बातें 

 

भारतीय छंद विधान से सम्बंधित जानकारी  यहाँ उपलब्ध है

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