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बसंत कुमार शर्मा
  • Male
  • जबलपुर, मध्यप्रदेश
  • India
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बसंत कुमार शर्मा posted a blog post

गजल - वो अक्सर कुछ नहीं कहता

गजल मापनी १२२२ १२२२ १२२२ १२२२ सभी कुछ झेल लेता है, वो’ अक्सर कुछ नहीं कहतानचाता है मदारी पर, ये’ बंदर कुछ नहीं कहता बड़ा है कद, बड़ी बातें, दहाड़े मंच पर भारी  मगर जब घर पहुँचता कवि, तो घर पर कुछ नहीं कहता मिला जब सिन्धु से जाकर, नदी का जल हुआ खाराखुराफातें ये किसकी हैं, समंदर कुछ नहीं कहता किसी की मुस्कुराहट पर, फिदा तो हो गया है दिलकभी वो सामने आयें, तो’ खुलकर कुछ नहीं कहता बिना पानी, नदी व्याकुल, कुएँ, तालाब, सब प्यासे  हरी है घास आँगन की, सिकंदर कुछ नहीं कहता "मौलिक एवं अप्रकाशित"See More
21 hours ago
बसंत कुमार शर्मा commented on Nilesh Shevgaonkar's blog post ग़ज़ल नूर की -जो किताबों ने दिया वो फ़लसफ़ा अपनी जगह.
"वाह लाजबाब एक से बढ़कर एक शेर, बधाई हो आपको , क्या कहने "
Apr 19
बसंत कुमार शर्मा commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post लल्ला गया विदेश
"आदरणीय   बृजेश कुमार 'ब्रज'  जी आपका ह्रदय से आभार "
Apr 19
बसंत कुमार शर्मा commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post लल्ला गया विदेश
"आदरणीय  Nilesh Shevgaonkar  जी आपका ह्रदय से आभार "
Apr 19
बसंत कुमार शर्मा commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post लल्ला गया विदेश
"आदरणीय Shyam Narain Verma जी आपका ह्रदय से आभार "
Apr 19
बसंत कुमार शर्मा commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post लल्ला गया विदेश
"आदरणीय Shyam Narain Verma  जी आपका ह्रदय से आभार "
Apr 19
बसंत कुमार शर्मा commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post लल्ला गया विदेश
"आदरणीया Neelam Upadhyaya  जी आपका ह्रदय से आभार "
Apr 19
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post लल्ला गया विदेश
"वाह क्या खूब गीत रचा है आदरणीय शर्मा जी..बहुत सुन्दर"
Apr 18
Nilesh Shevgaonkar commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post लल्ला गया विदेश
"आ.  बसंत जी,एक और उम्दा गीत हुआ है ..ईश्वर आप की लेखनी को यूँ ही समृद्ध   करता रहे सादर "
Apr 18
Shyam Narain Verma commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post लल्ला गया विदेश
"बहुत सुन्दर मनभावन गीत .. बधाई "
Apr 18
Neelam Upadhyaya commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post लल्ला गया विदेश
"आदरणीय बसंत कुमार शर्मा जी, नमस्कार । बढ़िया कविता हुयी है । हार्दिक बधाई ।"
Apr 18
बसंत कुमार शर्मा commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post लल्ला गया विदेश
"आदरणीयSamar kabeer जी बहुत बहुत आभार दिल से आपका  "
Apr 18
Samar kabeer commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post लल्ला गया विदेश
"जनाब बसंत कुमार शर्मा जी आदाब, बहुत बढ़िया गीत हुआ है,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।"
Apr 17
बसंत कुमार शर्मा posted a blog post

लल्ला गया विदेश

लल्ला गया विदेश© बसंत कुमार शर्माउसको जब अपनी धरती का,जमा नहीं परिवेश.ताक रही दरवाजा अम्मा,लल्ला गया  विदेश.खेत मढैया बिका सभी कुछ,हैं जेबें खाली.बैठी चकिया पीस रही है,घर छोटी लाली.बिना फीस के विद्यालय में,मिला न उसे प्रवेशनई बहुरिया आई घर में,स्वप्न नये पाले.दिखे यहाँ तो हर कोने में,मकड़ी के जाले.जाने कैसे कब सुलझेंगे,उलझ गए जो केशबुधिया के हुक्के की गुड़गुड़,कहे कथा न्यारी.कौन समझ पाया है उसकी,क्या है बीमारी.सूखी हुई पसुरियाँ दिखतीं,   नरकंकाली वेश."मौलिक एवं अप्रकाशित"See More
Apr 17
बसंत कुमार शर्मा commented on Naveen Mani Tripathi's blog post ग़ज़ल
"वाह क्या कहने , बहुत सुंदर मनभावन गजल "
Apr 17
बसंत कुमार शर्मा commented on Manan Kumar singh's blog post गजल(हारकर बैठे जुआरी....)
"बहुत खूब "
Apr 17

Profile Information

Gender
Male
City State
जबलपुर (मध्यप्रदेश)
Native Place
धौलपुर
Profession
भारतीय रेल यातायात सेवा
About me
बोन्साई एवं कविता लेखन में रूचि

बसंत कुमार शर्मा's Blog

गजल - वो अक्सर कुछ नहीं कहता

गजल 

मापनी १२२२ १२२२ १२२२ १२२२ 

सभी कुछ झेल लेता है, वो’ अक्सर कुछ नहीं कहता

नचाता है मदारी पर, ये’ बंदर कुछ नहीं कहता

 

बड़ा है कद, बड़ी बातें, दहाड़े मंच पर भारी  

मगर जब घर पहुँचता कवि, तो घर पर कुछ नहीं कहता

 

मिला जब सिन्धु से जाकर, नदी का जल हुआ खारा

खुराफातें ये किसकी हैं, समंदर कुछ नहीं कहता

 

किसी की मुस्कुराहट…

Continue

Posted on May 27, 2018 at 5:06pm

लल्ला गया विदेश

लल्ला गया विदेश

© बसंत कुमार शर्मा

उसको जब अपनी धरती का,

जमा नहीं परिवेश.

ताक रही दरवाजा अम्मा,

लल्ला गया  विदेश.

खेत मढैया बिका सभी कुछ,

हैं जेबें…

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Posted on April 17, 2018 at 9:12am — 11 Comments

नवगीत- चल दिया लेकर तगारी -बसंत

चल दिया लेकर तगारी

© बसंत कुमार शर्मा

 

सिर्फ रोटी के लिए बस,

खट रही है उम्र सारी.

सूर्य निकला भी नहीं, वह,

चल दिया लेकर तगारी.

 

ठण्ड, बारिश, धूप तीखी,

वार…

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Posted on April 13, 2018 at 9:30am — 16 Comments

गीत में ढलता रहा

स्वप्न मनभावन हृदय में,

रात-दिन पलता रहा.

गीत पग-पग साथ मेरे,

हर समय चलता रहा

 

पीर लिख कर कागजों में

रोज दिल अपना दुखाया.

प्रेम के दो शब्द लिखकर,…

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Posted on April 9, 2018 at 10:00am — 10 Comments

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At 2:23pm on September 28, 2015,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आपका अभिनन्दन है.

ग़ज़ल सीखने एवं जानकारी के लिए

 ग़ज़ल की कक्षा 

 ग़ज़ल की बातें 

 

भारतीय छंद विधान से सम्बंधित जानकारी  यहाँ उपलब्ध है

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