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अमीरुद्दीन 'अमीर'
  • Male
  • बाग़पत, उत्तर प्रदेश.
  • India
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अमीरुद्दीन 'अमीर' posted a blog post

ग़ज़ल (निगाहों-निगाहों में क्या माजरा है)

122-122-122-122निगाहों-निगाहों में क्या माजरा हैन उनको ख़बर है न हमको पता हैन  तुमने  कहा  कुछ न  मैंने  सुना है निगाहों  से  ही  सब  बयाँ  हो रहा हैख़ुमारी फ़ज़ा में ये छाई है कैसी  ख़िरामा ख़िरामा नशा छा रहा है मुहब्बत की  ऐसी  हवा चल  पड़ी येमुअत्तर  महब्बत  में सब  हो गया है मिलाकर निगाहें तेरा मुस्कुराना मेरे दिल पे जानाँ ग़ज़ब ढा गया है निगाहें  तुम्हारी   हैं  मयख़ाना  जैसे तुम्हें  देखा  जब  से नशा हो गया है ये मिलना मिलाना हमारा तुम्हाराज़माने की आँखों में चुभने लगा हैज़माने  से …See More
4 hours ago
अमीरुद्दीन 'अमीर' commented on Rachna Bhatia's blog post ग़ज़ल-क्या करे कोई
"मुहतरमा रचना भाटिया जी आदाब, ग़ज़ल का अच्छा प्रयास है बधाई स्वीकार करें। ग़ज़ल के मतले के लिए जनाब लक्ष्मण धामी जी के शे'र का ऊला और आज़ी तमाम साहिब के शे'र का सानी मिसरा ले लिया जाए तो उम्दा मतला खल्क़ हो सकता है- ''यूँ दूर से न…"
7 hours ago
अमीरुद्दीन 'अमीर' commented on Krish mishra 'jaan' gorakhpuri's blog post ग़ज़ल~ 'इश्क मुहब्बत चाहत उल्फत'
"जनाब जान गोरखपुरी साहिब आदाब, टिप्पणी पर आपकी प्रतिक्रिया देर से देख पाया हूँ, बहरहाल आपकी कुछेक जिज्ञासाओं को शांत करने का प्रयास कर रहा हूँ।  //इश्क मुहब्बत चाहत उल्फत रश्क मुसीबत रंज कयामत। ऊला मिसरे की तरह सानी को भी असरदार बनाने के लिए…"
Tuesday
अमीरुद्दीन 'अमीर' commented on अमीरुद्दीन 'अमीर''s blog post नग़्मा (घटा ग़मों की वही....)
"आदरणीया वीणा गुप्ता जी आदाब, नग़्मा पर आपकी आमद बाइस-ए-शरफ़ है, मशकूर ओ ममनून हूँ। सुख़न नवाज़ी और हौसला अफ़ज़ाई का तह-ए-दिल से शुक्रिया। सादर। "
Tuesday
Veena Gupta commented on अमीरुद्दीन 'अमीर''s blog post नग़्मा (घटा ग़मों की वही....)
" ख़ूबसूरत नग़मा,मुबारकबाद क़ुबूल करें"
Monday
अमीरुद्दीन 'अमीर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-128
"जी हाँ, स्वीकार है, आप सहीह फ़रमा रहे हैं। सादर। "
Feb 26
अमीरुद्दीन 'अमीर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-128
"मुहतरमा रचना भाटिया जी आदाब, ग़ज़ल पर आपकी आमद सुख़न नवाज़ी और हौसला अफ़ज़ाई के लिए बेहद मशकूर व ममनून हूँ। सादर। "
Feb 26
अमीरुद्दीन 'अमीर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-128
"जनाब दण्डपाणि नाहक़ जी आदाब, ग़ज़ल पर आपकी आमद सुख़न नवाज़ी और हौसला अफ़ज़ाई का तह-ए-दिल से शुक्रिया।. सादर।"
Feb 26
अमीरुद्दीन 'अमीर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-128
"जनाब अमित कुमार अमित जी आदाब, ग़ज़ल पर आपकी आमद सुख़न नवाज़ी और हौसला अफ़ज़ाई का तह-ए-दिल से शुक्रिया।  सादर। "
Feb 26
अमीरुद्दीन 'अमीर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-128
"जनाब नादिर ख़ान साहिब आदाब, ग़ज़ल तक आने और हौसला अफ़ज़ाई करने के लिए आपका शुक्रगुज़ार हूँ। सादर। "
Feb 26
अमीरुद्दीन 'अमीर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-128
"//नुमाई शब्द कई शब्दकोषों में देखने को मिला जिसका अर्थ प्रदर्शन दिया गया है।//  जनाब लक्ष्मण धामी भाई मुसाफ़िर जी, यही बात समर सर ने भी कही है, लेकिन इसके बाद जो उन्होंने बताया है उस पर भी ग़ौर कीजियेगा। सादर।"
Feb 26
अमीरुद्दीन 'अमीर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-128
"जनाब तस्दीक़ अहमद साहिब आदाब, तरही मिसरे पर बहुत अच्छी ग़ज़ल कही है आपने मुबारकबाद पेश करता हूँ। सादर।"
Feb 26
अमीरुद्दीन 'अमीर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-128
"जनाब दिनेश कुमार जी आदाब, तरही मिसरे पर अच्छी ग़ज़ल कही है आपने मुबारकबाद पेश करता हूँ। सादर।"
Feb 26
अमीरुद्दीन 'अमीर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-128
"जनाब अमित कुमार जी आदाब, तरही मिसरे पर ग़ज़ल का अच्छा प्रयास है बधाई स्वीकार करें।  सादर। "
Feb 26
अमीरुद्दीन 'अमीर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-128
"जनाब दण्डपाणि नाहक़ जी आदाब, तरही मिसरे पर अच्छी ग़ज़ल कही है आपने मुबारकबाद पेश करता हूँ। सादर।"
Feb 26
अमीरुद्दीन 'अमीर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-128
"जनाब नादिर ख़ान साहिब आदाब, तरही मिसरे पर उम्दा ग़ज़ल कही है आपने मुबारकबाद पेश करता हूँ।  सादर ।"
Feb 26

Profile Information

Gender
Male
City State
BAGHPAT , UTTAR PRADESH.
Native Place
BARAUT
Profession
Private job
About me
उर्दु शायरी हिन्दी में लिखने और पढ़ने का शौक़ है॥

अमीरुद्दीन 'अमीर''s Blog

ग़ज़ल (निगाहों-निगाहों में क्या माजरा है)

122-122-122-122

निगाहों-निगाहों में क्या माजरा है

न उनको ख़बर है न हमको पता है

न  तुमने  कहा  कुछ न  मैंने  सुना है 

निगाहों  से  ही  सब  बयाँ  हो रहा है

ख़ुमारी फ़ज़ा में ये छाई है कैसी  

ख़िरामा ख़िरामा नशा छा रहा है 

मुहब्बत की  ऐसी  हवा चल  पड़ी ये

मुअत्तर  महब्बत  में सब  हो गया है 

मिलाकर निगाहें तेरा मुस्कुराना 

मेरे दिल पे जानाँ ग़ज़ब ढा गया है 

निगाहें …

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Posted on March 4, 2021 at 10:28pm

नग़्मा (घटा ग़मों की वही....)

1212 - 1122 - 1212 - 22

घटा ग़मों की वही दिल पे छा गई फिर से 

वो दास्तान ज़ुबाँ पर जो आ गई फिर से 

ये उम्र कैसे कटेगी कहाँ बसर होगी 

अँधेरी रात की जाने न कब सहर होगी 

शिकस्त सारी उमीदें मिटा गई फिर से 

घटा ग़मों की वही दिल पे छा गई फिर से 

मुझे गुमाँ भी नहीं था हबीब बदलेगा 

बदल गया है मगर, यूँ नसीब बदलेगा? 

बहार बनके ख़िज़ाँ ही जला गई फिर से 

घटा ग़मों की वही दिल पे छा गई फिर…

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Posted on February 22, 2021 at 8:30am — 6 Comments

ग़ज़ल (कब से बैठे हैं तेरे दर पे सनम)

2122 - 1122 - 112

कब से बैठे हैं तेरे दर पे सनम

अब तो हो जाए महरबान करम......1

ग़ैर समझो न हमें यार सुनो

हम तुम्हारे हैं तुम्हारे ही थे हम....... 2

बात चाहे न मेरी मानो, सुनो! 

कीलें राहों में उगाओ न सनम....... 3

देके हमको भी अज़ीयत ये सुनो

दर्द तुमको भी तो होगा नहीं कम... 4

हम भी इन्सान हैं समझो तो ज़रा

देखो अच्छे नहीं इतने भी सितम....5

जिस्म से जान जुदा होती…

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Posted on February 15, 2021 at 9:32pm — 5 Comments

ग़ज़ल (इक है ज़मीं हमारी इक आसमाँ हमारा)

2212 -  1222 -  212 -  122

इक है ज़मीं हमारी इक आसमाँ हमारा

इक है ये इक रहेगा भारत हमारा प्यारा

हिन्दू हों या कि मुस्लिम सारे हैं भाई-भाई 

होंगे न अब कभी भी तक़्सीम हम दुबारा 

यौम-ए-जम्हूरियत पर ख़ुशियाँ मना रहे हैं 

हासिल शरफ़ जो है ये, ख़ूँ भी बहा हमारा 

अपने शहीदों को तुम हरगिज़ न भूल जाना

यादों को दिल में उनकी रखना जवाँ…

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Posted on February 6, 2021 at 7:27pm — 5 Comments

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At 6:21pm on March 9, 2020, Samar kabeer said…

जनाब अमीरुद्दीन साहिब,ओबीओ पर आपका स्वागत है,मैं हर ख़िदमत के लिए हाज़िर हूँ ।

 
 
 

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" बहुत  अच्छी,सरल और सच्ची भाव रचना "
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amita tiwari commented on Rupam kumar -'मीत''s blog post दिया जला के उसी सम्त फिर हवा न करे (-रूपम कुमार 'मीत')
"  "
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"आदरणीय समर कबीर साहिब, आदाब सृजन के भावों को मान देने का दिल से आभार।"
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"आदरणीय समर कबीर साहिब, आदाब सृजन के भावों को मान देने का दिल से आभार। जी, अवगत हुआ। हार्दिक आभार।"
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"//भाई समर जी, मेरे हिसाब से मतला इस प्रकार करने से कुछ बात बन सकती है// भाई,आपका सुझाव अच्छा…"
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