For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

February 2014 Blog Posts (177)

ग़ज़ल..........बृजेश

2122       2122       212 

फाइलातुन   फाइलातुन   फाइलुन

(बहरे रमल मुसद्दस महजूफ)

वृत्ति जग की क्लिष्ट सी होने लगी

सोच सारी लिजलिजी होने लगी

भीड़ है पर सब अकेले दिख रहे 

भावनाओं में कमी होने लगी

चाहना में बजबजाती देह भर 

व्यंजना यूँ प्रेम की होने लगी

धर्म के जब मायने बदले गए 

नीति सारी आसुरी होने लगी

सूखती…

Continue

Added by बृजेश नीरज on February 28, 2014 at 10:31pm — 54 Comments

कुछ कह मुकरियां

१. लगे अंग तो तन महकाए,

जी  भर देखूं  जी में आये,

कभी कभी पर  चुभाये शूल,

का सखी साजन ? ना सखी फूल.

 

 

२. गोदी में सर रख कर सोऊँ,

मीठे मीठे ख्वाब में खोऊँ,

अंक में लूँ, लगाऊं छतिया.

का सखी साजन? ना सखी तकिया .

 

 

३ उससे डर, हर कोई भागे,

बार बार वह लिख कर माँगे.

कहे देकर फिर करो रिलैक्स.

का सखी साजन? ना सखी टैक्स ..

 

४. गाँठ खुले तो इत उत डोले,

जिधर हवा उधर ही हो…

Continue

Added by Neeraj Neer on February 28, 2014 at 8:00pm — 31 Comments


सदस्य कार्यकारिणी
हे माँ श्वेता शारदे , सरस्वती वन्दना (उल्लाला छंद पर आधारित )

सरस्वती वंदना  (उल्लाला छंद पर आधारित )

हे माँ श्वेता शारदे , विद्या का उपहार दे

श्रद्धानत हूँ प्यार दे , मति नभ को विस्तार दे

तू विद्या की खान है ,जीवन का अभिमान है

भाषा का सम्मान है ,ज्योतिर्मय वरदान है

नव शब्दों को रूप दे ,सदा ज्ञान की धूप दे

हे माँ श्वेता शारदे ,विद्या का उपहार दे

कमलं पुष्प विराजती ,धवलं वस्त्रं  शोभती

वीणा कर में साजती ,धुन आलौकिक…

Continue

Added by rajesh kumari on February 28, 2014 at 3:54pm — 13 Comments

मोहब्बत के कलैंडर में कभी इतवार ना आए..

मुक्तक

फकत मेरे ​सिवा तुमको किसी पर प्यार ना आए,

मेरे गीतों में तेरे बिन कोई अशआर ना आए,

मिलन होता रहे तब तक कि जब तक चांद तारे हैं

मोहब्बत के कलैंडर में कभी इतवार ना आए।।

-------------------------------------------

तुम्हारे साथ…

Continue

Added by atul kushwah on February 27, 2014 at 11:00pm — 22 Comments

मैं और मेरा "मन"

मैं आज चिड़ी सी उड़ती फिरती हूँ,

खुद चढ़ अंबर का व्यास नापती हूँ ,

कर दिया किसी ने झन-झन मेरे पर को,

मैं आँखों के दो दीप लिए फिरती हूँ ।

मैं प्रेम-सुधा रस पान किया करती हूँ ,

मैं कभी ना खुद का ध्यान किया करती हूँ ,

जग जाकर पूछे उनसे जो अपनी कहते ,

मैं अपने दिल का गीत सुना करती हूँ ,

मैं सुर- बाला सा, उन्माद लिए फिरती हूँ ,

मैं नए -नए उपहार लिए फिरती हूँ ,

यह मंगलदाई, संसार ना मुझ को भाता ,

मैं खुद की…

Continue

Added by kalpna mishra bajpai on February 27, 2014 at 7:00pm — 4 Comments

ग़ज़ल - जीत गाएगी थोड़ा सबर कीजिए - पूनम शुक्ला

2122. 1221. 2212





जा चुकी यामिनी मुश्तहर कीजिए

हो सके अब तो थोड़ा सहर कीजिए



भेज दें गंध जो भी हो आकाश में

गुलशनों को कहीं तो खबर कीजिए



हर तरफ आग ही आग जलती तो है

तान सीना उसे बेअसर कीजिए



झूठ की आज चारों तरफ जीत है

सत्यता की कहानी अमर कीजिए



जुल्म की रात हरदम डराती हमें

जालिमों का खुलासा मगर कीजिए



तीरगी घेर ले गर कभी राह में.

अश्क से फिर न दामन यूँ तर कीजिए.



रेत सी जिन्दगी हाथ आती… Continue

Added by Poonam Shukla on February 27, 2014 at 12:05pm — 9 Comments

शिवरात्रि दोहावली

उत्सव भारत देश के ,करें सभी हम गर्व

फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी , महाशिवरात्रि पर्व /



फाल्गुन में शिवरात का होता पर्व विशेष

रंगों भरी फुहार से मिटाओ गिले द्वेष /



मध्यरात अवतरित हो धरा रूप सारंग

गले में सर्प हार औ रमे भस्म से अंग/



रूद्र रूप को देख के भर लो ह्रदय उमंग

शिव शक्ति का मिलनदिवस मनाओ प्रेम संग /



सदा ही मिले आपको शिव का आशीर्वाद

शिव के नित उपवास से मिले दुआ प्रसाद /



धतूरे बेलपत्र से, करना कर्म विशेष…

Continue

Added by Sarita Bhatia on February 26, 2014 at 7:34pm — 14 Comments

आयी चंद्रिका धवल..............( अन्नपूर्णा बाजपेई )

चाँदी के रथ पे सवार लिए जीवन नवल 

चिर प्रीतम संग चंद्रिका आयी धवल .............. 

प्रिय सखी निशा संग 

भरती किलकारियाँ 

गगन से धरा तक 

करती अठखेलियाँ 

रूप किशोरी सी चंद्रिका आयी धवल .........

शशि प्रियतम संग

चमचम सितारों वाली 

श्याम चुनरिया ओढ़े  

धीरे धीरे दबे पाँव 

प्रिय सुंदरी सी चंद्रिका आयी धवल ................ 

दुग्ध अभिसिंचित हये 

सभी तरुवर तड़ाग 

मुसकुराती…

Continue

Added by annapurna bajpai on February 26, 2014 at 4:30pm — 9 Comments

बिटिया [कुण्डलिया]

बिटिया ना अपनी हुई कैसा रहा विधान 

राजा हो या रंक की बिटिया सभी समान /

बिटिया सभी समान रहेंगी सदा बेगानी

छोड़ेगी वो गेह रीत पड़ेगी निभानी 

चाहे गेह अमीर या रही गरीब की कुटिया 

सरिता कहती मान पराई होती बिटिया//…

Continue

Added by Sarita Bhatia on February 26, 2014 at 10:27am — 3 Comments

अतुकांत

बचपन का गाँव

नीम की छांव

छोटा सा कोना

कच्चा सा आँगन

बहुत याद आता है ।

गाँव के मेले 

ढेरों झमेले

दोनें में चाट

बर्फ को गोला

बहुत याद आता है ।

बचपन की सखियाँ

डिब्बे में गुड़ियाँ

छोटा सा गुड्डा

उन से बतयाना

बहुत याद आता है ।

सावन के झूले

हाथों में मेंहदी

काँच की चूड़ी

निवौली की पायल

बहुत याद आते है…

Continue

Added by kalpna mishra bajpai on February 25, 2014 at 8:51pm — 5 Comments

सखि री ! फागुन के दिन आए

सखि री ! फागुन के दिन आए

 

तृषित रूपसी ठगि – ठगि जाए

कलरव  से   गूँजे   अमराई

प्रिय जाने किस  देश  पड़े ?

हर पल , हर क्षण काटे तनहाई ।

सूना – सूना  दिन लागे , साजन  की याद  सताये

सखि री ! फागुन के दिन आए ।

फूली सरसों और पगडंडी –

आज  दिखे सुनसान रे !

करवट लेते रात गुज़र गयी ,

ऐसे  हुयी  विहान  रे !

ऐसे मे कोयलिया रह – रह , हिय  की  आग बढ़ाए

सखि री ! फागुन के दिन आए…

Continue

Added by S. C. Brahmachari on February 25, 2014 at 8:00pm — 6 Comments

तुम बिन प्रिय

कुछ कम रोशन है रोशनी तुम बिन

बरसात कम है गीली तुम बिन

हवाओं में खुश्बू नहीं है तुम बिन

चाँद की कम है चाँदनी तुम बिन

सूरज करे ना उजाला तुम बिन

घर बन गया मकान है तुम बिन

भंवरे नही हैं गुनगुनाते तुम बिन

थम सा गया है वक्त तुम बिन

 

पर मेरी हर ख्वाहिश है तुम से

पर अब भी हर सांस में बसे हो तुम

हर धड़कन में आवाज़ है तुम्हारी

हर पल जैसे छू जाते हो दिल को

हर आहट में अहसास है तुम्हारा

 

पीछे से…

Continue

Added by Sarita Bhatia on February 25, 2014 at 4:00pm — 6 Comments

मेरा विश्वास

जब सब कुछ था

मेरे पास

जो

जीने के लिए काफी था

तुम्हारा प्यार,

तुम्हारा साथ,

तुम्हारा समय

तुम्हारा विश्वास

हमारा साहस

यही सब

मेरी बहुमूल्य पूंजी थी

वो

उड़ान भरते

सुनहरे सपने

जो

हम दोनों ने कभी देखे थे

दुनिया

अपने कदमों में थी

तो किसकी लगी नज़र ?

जो छूटा ...

तुम्हारा प्यार

तुम्हारा साथ

क्यों रुकीं

वो सांसें

वो जिन्दगी

टूटीं उम्मीदें

टूटे सपने

और

साथ ही

टूट…

Continue

Added by Sarita Bhatia on February 25, 2014 at 3:03pm — 21 Comments

मगर अहसास पैदा हो - लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'

1222    1222    1222    1222



समझ   लूँ  मैं गुनाहों को भला अतवार1 से कैसे

मगर पूछूँ  तरीका  भी   किसी  अबरार2 से कैसे

**

सभी की थी दुआएं तो जला जब भी यहाँ  दीपक

मिटाया पर गया ना तब  बता अनवार3 से कैसे

**

हमेशा  बोलता  था  तू  नहीं  रिश्ता  रहा   कोई

गले लगती बता कमसिन किसी अगियार4 से कैसे

**

जुटा पाया न मैं साहस अना5 की बात कहने को

उलझ वो  भी  गई  पूछे किसी अफगार6 से कैसे

**

सदा लेते जनम वो तो गलत को ठीक करने…

Continue

Added by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on February 25, 2014 at 7:00am — 7 Comments

बस यूँ ही ……डर ……

बचपन से डरता रहा

दिल में डर बसता रहा 

बहुत अच्छा हुआ जो

मै नहीं हुआ निडर 

माँ हमेशा कहती थी 

चार लोग देखेंगे तो

क्या कहेंगे 

उन चार लोगो का डर 

पिता कि मार का डर 

अपने पैरों पर खड़े ना हो पाने का डर 

खड़े हुए तो दौड़ ना पाने का डर 

दौड़े  तो गिर जाने का डर 

जवान हुए तो पहचान खोने का डर 

मोहब्ब्त में नाकाम होने का डर 

जब हुई तो उसमे खोने का डर 

गृहस्थी ना चला पाने का डर 

बच्चो को ना पढ़ा…

Continue

Added by pawan amba on February 25, 2014 at 7:00am — 3 Comments

कह-मुकरियाँ (१२ से १८) - कल्पना मिश्रा बाजपेई

12-)

तोल-मोल कर जब ये बोले ।

दिल के तालों को ये खोले ।

कभी ना होती इसे थकान,

क्या सखी साजन ?

ना सखि जुवान !

13-)

भारत माँ का सच्चा लाल ।

लंबा कद और ऊँचा भाल ।

इस पर बनते लाखों गान,

क्या सखि साजन ?

ना सखि जवान !

14-)

सर्दी गर्मी या हो बरसात।

हर दम रहता है तैनात ।

कभी ना करता आले बाले ,

क्या सखि छाते ?

ना सखि ताले!

15-)

गर्मी में मिलता ना…

Continue

Added by kalpna mishra bajpai on February 24, 2014 at 11:00pm — 10 Comments

मोहक वसंत

वसंत

 

बीता कटु शीत शिशिर 

मोहक  वसंत आया

 

पुष्प खिले वृन्तो पर

मुस्काये हर डाली

मादक महक चहुँ दिशा

भरमाये मन आली

तरुण हुई धूप खिली

शीत का अंत आया

बीता कटु शीत शिशिर 

मोहक  वसंत आया

 

प्रिया की सांसों सी

मद भरा ऊषा अनिल  

अंग अंग उमंग रस

जग लगे मधुर स्वप्निल

कुहूक  बोले कोयल

कवि नवल छंद गाया

बीता कटु शीत शिशिर 

मोहक  वसंत आया…

Continue

Added by Neeraj Neer on February 24, 2014 at 10:39pm — 8 Comments

ग़ज़ल : परों को खोलकर अपने, जो किस्मत आजमाते हैं

१२२२ १२२२ १२२२ १२२२

 

गगन का स्नेह पाते हैं, हवा का प्यार पाते हैं

परों को खोलकर अपने, जो किस्मत आजमाते हैं

 

फ़लक पर झूमते हैं, नाचते हैं, गीत गाते हैं

जो उड़ते हैं उन्हें उड़ने के ख़तरे कब डराते हैं

 

परिंदों की नज़र से एक पल गर देख लो दुनिया

न पूछोगे कभी, उड़कर परिंदे क्या कमाते है

 

फ़लक पर सब बराबर हैं यहाँ नाज़ुक परिंदे भी

लड़ें गर सामने से तो विमानों को गिराते हैं

 

जमीं कहती, नई पीढ़ी के पंक्षी…

Continue

Added by धर्मेन्द्र कुमार सिंह on February 24, 2014 at 10:15pm — 21 Comments


सदस्य कार्यकारिणी
सात दोहे –'' रिश्ते ''

सात दोहे – '' रिश्ते ''

*******    ******

नाराजी जो है कहीं , मिल के कर लो बात

खामोशी  देती  रही , हर  रिश्ते  को मात

 

रिश्तों  को  भी चाहिये , इन्जन जैसे तेल

बिना  तेल  देखे बहुत , झटके खाते मेल…

Continue

Added by गिरिराज भंडारी on February 24, 2014 at 9:30pm — 46 Comments

बेटी से खुशनुमा है --नज़्म -सलीम रज़ा

बेटी
बेटी से  खुशनुमा  है  ये  संसार  दोस्तो
रौशन इसी से सारा  है घर-बार  दोस्तो 
.........
बेटी  कही पे माँ  कही  बहना  के  रूप में …
Continue

Added by SALIM RAZA REWA on February 24, 2014 at 9:00pm — 13 Comments

Monthly Archives

2019

2018

2017

2016

2015

2014

2013

2012

2011

2010

1999

1970

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Abha saxena Doonwi updated their profile
4 hours ago
Sushil Sarna posted a blog post

अहसास .. कुछ क्षणिकाएं

अहसास .. कुछ क्षणिकाएंछुप गया दर्द आँखों के मुखौटों में मुखौटे सिर्फ चेहरे पर नहीं हुआ…See More
6 hours ago
Sushil Sarna commented on TEJ VEER SINGH's blog post दूरदृष्टि -  लघुकथा  -
"खुली सोच का प्रदर्शन करती इस सुंदर लघु कथा के लिए हार्दिक बधाई आदरणीय तेज वीर सिंह जी।"
7 hours ago
Sushil Sarna commented on vijay nikore's blog post आज फिर ...
"भटक गई हवायों को पलटने दो आज फिर प्यार के दर्द के पन्ने प्यार जो पागल-सा तैर-तैर दीप्त आँखों में…"
7 hours ago
Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan" commented on Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan"'s blog post ये भँव तिरी तो कमान लगे----ग़ज़ल
"आदरणीय बाऊजी इस ग़ज़ल को सुधारता हूँ, शीघ्र ही"
yesterday
amod shrivastav (bindouri) posted a blog post

उसने इतना कह मुझे मेरी ग़लतियों को रख दिया (ग़जल)

बहर.2122-2122-2122-212एक दिन उसने मेरी खामोशियों को रख दिया ।।मेरे पेश-ए-आईने मे'री' हिचकियों को रख…See More
yesterday
बासुदेव अग्रवाल 'नमन' posted a blog post

बह्र-ए-वाफ़िर मुरब्बा सालिम (ग़ज़ल)

ग़ज़ल (वो जब भी मिली)बह्र-ए-वाफ़िर मुरब्बा सालिम (12112*2)वो जब भी मिली, महकती मिली,गुलाब सी वो, खिली…See More
yesterday
vijay nikore posted a blog post

आज फिर ...

आज फिर ... क्या हुआथरथरा रहादुखात्मक भावों कातकलीफ़ भरा, गंभीरभयानक चेहराआज फिरदुख के आरोह-अवरोह…See More
yesterday
Gurpreet Singh posted a blog post

दो ग़ज़लें (2122-1212-22)

1.शमअ  देखी न रोशनी देखी । मैने ता उम्र तीरगी देखी । देखा जो आइना तो आंखों में, ख़्वाब की लाश तैरती…See More
yesterday
TEJ VEER SINGH commented on TEJ VEER SINGH's blog post दूरदृष्टि -  लघुकथा  -
"हार्दिक आभार आदरणीय समर क़बीर साहब जी।आदाब आदरणीय।"
yesterday
Samar kabeer commented on TEJ VEER SINGH's blog post दूरदृष्टि -  लघुकथा  -
"जनाब तेजवीर सिंह जी आदाब,अच्छी लघुकथा लिखी आपने,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।"
yesterday
Samar kabeer commented on Naveen Mani Tripathi's blog post ग़ज़ल
"जनाब नवीन मणि त्रिपाठी जी आदाब,ग़ज़ल का अच्छा प्रयास हुआ है,बधाई स्वीकार करें । 'नौकरी मत …"
yesterday

© 2019   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service