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ओबीओ साहित्योत्सव देहरादून 9 सितम्बर 2017
60 Replies

ओबीओ परिवार के सभी…Continue

Started this discussion. Last reply by Sheikh Shahzad Usmani Sep 9.

एक ज़रूरी सूचना
1 Reply

हमारे ओबीओ से जुड़े एक मित्र श्री अलबेला खत्री जी बहुत गंभीर अवस्था में सूरत के अस्पताल में जिंदगी और मौत के बीच झूल रहे हैं जिस किसी से कोई भी सहायता बने कर सकते हैं भगवान् से प्रार्थना है वो जल्दी…Continue

Started this discussion. Last reply by Saurabh Pandey Apr 5, 2014.

सभी मित्रों को गणतंत्र दिवस की शुभ कामनाएं ,एक खुशखबरी के संग
15 Replies

मुझे गर्व है कि मेरे दामाद (थल सेना कर्नल) को गणतंत्र दिवस के अवसर पर सेना मैडल से सम्मानित किया गया है|…Continue

Started this discussion. Last reply by rajesh kumari Feb 22, 2013.

 

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भले ही आईने धोये हुए हैं (फिल्बदीह ग़ज़ल 'राज')

१२२२  १२२२  १२२चढ़े सूरज तलक सोए हुए हैंकिसी की याद में खोए हुए हैं ग़ज़ल लिक्खी हुई है आंसुओं सेकहें किससे कि हम रोये हुए हैं तभी भीगा हुआ तकिया मिला हैइसे अश्कों से हम धोये  हुए हैं कमर टूटी ज़फ़ा की चोट खाकर मगर फिर भी वफ़ा ढोए हुए हैं वहाँ चर्चा हमारा हो रहा हैन जाने हम कहाँ खोए हुए हैं तुम्हारे दाग ज्यों के त्यों दिखेंगेभले ही  आईने धोए हुए हैं  चुभेंगे तुमको  भी इक दिन ये  कांटेंमेरी राहों में जो बोये हुए हैं  मौलिक एवं अप्रकाशित See More
4 minutes ago

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rajesh kumari commented on Nilesh Shevgaonkar's blog post ग़ज़ल नूर की -जैसे धुल कर आईना फ़िर चमकीला हो जाता है,
"एक बेहतरीन ग़ज़ल... विस्तृत टिप्पणी के लिए दुबारा आऊँगी  ."
2 hours ago

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Sheikh Shahzad Usmani replied to rajesh kumari's discussion ओबीओ साहित्योत्सव देहरादून 9 सितम्बर 2017
"ओबीओ की सातवीं वर्षगांठ और देहरादून महोत्सव आयोजन पर हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं आप सभी सुधीजन को।"
Sep 9
सतविन्द्र कुमार replied to rajesh kumari's discussion ओबीओ साहित्योत्सव देहरादून 9 सितम्बर 2017
"9255532842"
Sep 7
सतविन्द्र कुमार replied to rajesh kumari's discussion ओबीओ साहित्योत्सव देहरादून 9 सितम्बर 2017
"सादर नमन,राजेश दीदी, मैं इसे देरी से देख पाया। मेरी भी आने की दृढ इच्छा है।सादर"
Sep 7
Rajeev Sharma "Raj" commented on rajesh kumari's blog post मेरा कच्चा मकान क्या करता (ग़ज़ल 'राज')
"बाढ़ में ढह गये महल कितने     मेरा कच्चा मकान क्या करता बहुत खूब जी , लाज़वाब "
Sep 6

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rajesh kumari replied to rajesh kumari's discussion ओबीओ साहित्योत्सव देहरादून 9 सितम्बर 2017
"आदरणीय हम आपकी व्यस्तता समझते हैं .इस लिए ही ज्यादा आग्रह भी नहीं कर सकते .आज आपकी एक दिन की शिरकत की हाँ पढ़कर अति संतोष का अनुभव हुआ आपके लिए काफी भाग दौड़ रहेगी किन्तु आप उसके आदि हैं :-)))))) आप आयोजन में रहेंगे सभी को अच्छा लगेगा |बहुत बहुत…"
Sep 4

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Saurabh Pandey replied to rajesh kumari's discussion ओबीओ साहित्योत्सव देहरादून 9 सितम्बर 2017
"आदरणीया राजेश कुमारी जी,  अपनी कार्यालयी व्यस्तता और तदनुरूप प्रशासनिक गतिविधियों के कारण मैं स्वयं ही स्पष्ट नहीं हो पा रहा था, कि आपसे क्या कहूँ. आयोजन की तारीख़ आदि तो हमने ही नियत किया था. खैर. मैंने अपना टिकट आदि करा लिया है. सब कुछ सही और…"
Sep 4
Sheikh Shahzad Usmani replied to rajesh kumari's discussion ओबीओ साहित्योत्सव देहरादून 9 सितम्बर 2017
"सादर नमस्कार। बहुत इच्छा होने के बावजूद कुछ अपरिहार्य कारणों से अंततः मैं 9 सितंबर के देहरादून ओबीओ साहित्यिक महोत्सव में उपस्थित होने में असमर्थ हूं। महोत्सव के लिए अग्रिम हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं आप सभी को।"
Sep 1

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rajesh kumari replied to rajesh kumari's discussion ओबीओ साहित्योत्सव देहरादून 9 सितम्बर 2017
"वैसे तो आपने बहुत लेट बताया किन्तु कोई बात नहीं आपका स्वागत है आवास के विषय में भी स्पष्ट कीजिएगा क्या रूम बुक करवाना है ?तुरंत बताइये वरना रूम सब भर जायेंगे "
Aug 29
अलका 'कृष्णांशी' replied to rajesh kumari's discussion ओबीओ साहित्योत्सव देहरादून 9 सितम्बर 2017
"प्रणाम दी, क्या मैं आ सकती हूँ ,साथ में मेरी बेटी भी आना चाहती है। मेरा मोबाइल नंबर 9818541935    देर से बात करने के लिए के लिए क्षमा। सादर "
Aug 29

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rajesh kumari replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-86
"आद० कंवर करतार जी ,ग़ज़ल अच्छी हुई है,दाद के साथ मुबारकबाद कुबूलें "
Aug 26

Profile Information

Gender
Female
City State
dehradun (uttrakhand)
Native Place
muzaffarnagar
Profession
housewife
About me
ek insaan hoon jo jio aur jeene do me vishvaas rakhti hai.ateet se kuch seekht ihoobhav ishya ko sudharti hoon vartman ke saath bah rahi hoon dekho jaane kahan tak.n hoon

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भले ही आईने धोये हुए हैं (फिल्बदीह ग़ज़ल 'राज')

१२२२  १२२२  १२२

चढ़े सूरज तलक सोए हुए हैं

किसी की याद में खोए हुए हैं

 

ग़ज़ल लिक्खी हुई है आंसुओं से

कहें किससे कि हम रोये हुए हैं

 

तभी भीगा हुआ तकिया मिला है

इसे अश्कों से हम धोये  हुए हैं

 

कमर टूटी ज़फ़ा की चोट खाकर 

मगर फिर भी वफ़ा ढोए हुए हैं

 

वहाँ चर्चा हमारा हो रहा है

न जाने हम कहाँ खोए हुए हैं

 

तुम्हारे दाग ज्यों के त्यों दिखेंगे

भले ही  आईने धोए हुए…

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Posted on September 20, 2017 at 5:00pm

हैं वफ़ा के निशान समझो ना (प्रेम को समर्पित एक ग़ज़ल "राज')

२१२२ १२१२  २२

खामशी की जबान समझो ना

अनकही दास्तान समझो ना

 

सामने हैं मेरी खुली बाहें

तुम इन्हें आस्तान समझो ना

 

ये गुजारिश सही मुहब्बत की

तुम खुदा की कमान समझो ना

 

स्याह काजल बहा जो आँखों से

हैं वफ़ा के निशान  समझो ना 

 

बस  गए हो मेरी इन आँखों में

इनमें  अपना जहान  समझो ना

 

झुक गया है तुम्हारे कदमों में

ये मेरा आसमान समझो…

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Posted on August 21, 2017 at 10:43am — 42 Comments

ये जो इंसान आज वाले हैं (एक ही रदीफ़ पर दो गज़लें ---'राज')

2122  1212  22

(१)

 ये जो इंसान आज वाले हैं

कुछ अलग ही मिजाज वाले हैं

 

रास्तों पर अलग अलग चलते  

एक ही ये समाज वाले हैं

 

दस्तख़त से बनें मिटें रिश्तें   

कागजी ये रिवाज वाले हैं

 

रावणों की मदद करें गुपचुप

लोग ये रामराज वाले हैं

 

रोज खबरों में हो रहे उरियाँ

ये बड़े लोकलाज वाले हैं

 

मुंह छुपाते विदेश में…

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Posted on August 9, 2017 at 1:05pm — 29 Comments

छंद – विजया घनाक्षरी(मापनीमुक्त वर्णिक)

छंद – विजया घनाक्षरी(मापनीमुक्त वर्णिक) 

विधान 32 वर्णों के चार समतुकांत चरण, 16 16 वर्णों यति अनिवार्य

8,8,8,8 पर यति उत्तम अंत में ललल अर्थात लघु लघु लघु या नगण अनिवार्य ।

 

सूखे कूप हैं इधर ,गंदे स्रोत हैं उधर,प्यासे वक़्त के अधर,मीठा नीर है किधर|

मैली गंग है उधर,देखें नेत्र ये जिधर,रोयें धरा ये अधर,जाए शीघ्र ये सुधर|

कोई भाव है न रस,कैसे शुष्क हैं उरस,वाणी नहीं है सरस,शोले रहे हैं बरस|   

बातों बात ये…

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Posted on August 1, 2017 at 10:44pm — 4 Comments

Comment Wall (38 comments)

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At 5:08pm on November 22, 2015, Sushil Sarna said…

आदरणीया राजेश कुमारी जी दोहा प्रस्तुति पर आपकी स्नेहिल प्रशंसा का तहे दिल से शुक्रिया। 

At 10:51pm on July 28, 2015, Prashant Priyadarshi said…

धन्यवाद आ. राजेश मैम, आपने अपना बहुमूल्य समय दिया, उत्साहवर्धन के शब्द कहे, मेरी सोच-मेरे नजरिये की तारीफ़ की आपने, आपको पसंद आई मेरी कहानी, इसके लिए ह्रदय से आभार व्यक्त करता हूँ. आप सबों के प्रेरक वाक्य ही मेरी कलम को और धारदार और स्थापित करने में सहायक होंगे. धन्यवाद!!

At 9:26pm on December 15, 2014, डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव said…

आदरणीया

           बिंदु नं 0 2 को ही समझना था  i 'कहते है गोपाल' का  उल्लेख कर आपने मेरे भ्रम का सटीक निवारण किया i आपका स्नेह यूँ ही बना रहे i सादर i

At 5:37pm on December 15, 2014, डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव said…

महनीया

आपसे सदा सीखता रहता हूँ i इसी जिज्ञासा में आपकी  निम्न टिप्पणी पर भी अपनी शंका का निवारण चाहूँगा i

 शैलि ,वैलि में गच्चा खा गए आदरणीय :))) और पकडे भी गए ......       स्वीकार है आदरणीया

अंग्रेजो ने किया     वात-आवरण  कसैला----रोले में विषम             इसे कुछ और स्पष्ट करें महनीया

चरण का गुरु लघु से होना है आपका किया =लघु गुरु 

कुण्डलिया का आरम्भ का शब्द और अंत का शब्द भी एक ही होना    मेरे संज्ञान में अब यह बाध्यता अब

चाहिए                                                                                     समाप्त हो गयी है

                  स म्म्मान आदरणीया i

At 4:43pm on October 23, 2014, Sushil Sarna said…

आपको  सपरिवार ज्योति पर्व की हार्दिक एवं मंगलमय शुभकामनाएं...

At 8:39pm on June 15, 2014, mrs manjari pandey said…
आदरणीया उत्साहवर्धक है आपकी टिप्पणी। मिल कर राह हमें ही है बनानी
At 12:22am on June 10, 2014, जितेन्द्र पस्टारिया said…

जन्मदिन की आपको ढेरों शुभकामनायें  आदरणीया राजेश दीदी

At 10:50am on March 3, 2014, vijay nikore said…

 हे माँ श्वेता शारदे ,  सरस्वती वन्दना (उल्लाला छंद पर आधारित )

इस रचना के feature होने के लिए हार्दिक बधाई, आदरणीया राजेश जी।

 

सादर,

विजय निकोर

At 8:35pm on September 5, 2013, mrs manjari pandey said…

         

       आदरणीया राजेश कुमारी जी साधुवाद गज़ल पर दाद के लिये .

At 11:19am on July 27, 2013, CHANDRA SHEKHAR PANDEY said…

अनुरोध स्वीकार करके आपने मुझे उपकृत किया मैम, नमन

 
 
 

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