For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

वागीश्वरी सवैया और कलाधर छंद

वागीश्वरी सवैया (122×7 + 12)

दया का महामन्त्र धारो मनों में,दया से सभी को लुभाते चलो।
न हो भेद दुर्भाव कैसा किसी से,सभी को गले से लगाते चलो।
दयाभूषणों से सभी प्राणियों के,मनों को सदा ही सजाते चलो।
दुखाओ मनों को न थोड़ा किसी का,दया की सुधा को बहाते चलो।

कलाधर छंद (गुरु लघु की 15 आवृति के बाद गुरु)

मोह लोभ काम क्रोध वासना समस्त त्याग, पाप भोग को मनोव्यथा बना निकालिए।
ज्ञान ध्यान दान को सजाय रोम रोम मध्य, ध्यान ध्येय पे रखें तटस्थ हो बिराजिए।
ईश भक्ति चित्त राख दृष्टि भोंह मध्य साध, पूर्ण निष्ठ ओम जाप मौन धार कीजिए।
वृत्तियाँ समस्त छोड़ चित्त को अधीन राख, योग पाल रोग शोक त्रास को मिटाइए।


मौलिक व अप्रकाशित

Views: 1534

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by बासुदेव अग्रवाल 'नमन' on October 27, 2016 at 12:04pm
आदरणीय सौरभ सर मेरे इस छोटे से प्रयास पर आपने इतना समय दिया और पग पग पर मेरा मार्ग दर्शन कर रहे हैं में तो धन्य हुवा। आती है उर्दू जबाँ सीखते सीखते की तर्ज़ पर भाषा की ये बारीकियां तो आप रामबली जी और तमाम obo के साथियों की सोहबत से धीरे धीरे जरूर समझ में आएगी। आदरणीय वरद हस्त यूँ ही बनाये रखें।
Comment by बासुदेव अग्रवाल 'नमन' on October 27, 2016 at 11:57am
आदरणीय रामबली जी आपकी समीक्षा से अभिभूत हूँ। मनों में लिखते समय मेरे मन में भी दिलों का विचार आया था पर मैंने दोनों में कोई फर्क नहीं समझते हुए संस्कृत आधारित शब्द को चुन लिया। आपका आशीर्वाद सदैव यूँ ही बना रहे कि इतनी बारीकियों की तरफ ध्यान आकर्षित किया है।

कलाधर में 'कीजिए' शायद आपको खटका होगा। इसका यदि कोई विकल्प सुझा सकें तो आभारी रहूंगा। इसके अलावा भी तुकांतता में कोई चुक है तो कृपया उचित मार्गदर्शन करें। वैसे घनाक्षरी में तो इस तरह की तुकों का धड़ल्ले से प्रयोग होता है।

सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on October 26, 2016 at 10:51pm

मनों का प्रयोग असहज करता हुआ प्रयोग है. आप सही कह रहे हैं, भाई रामबली जी. मैं कहना चाह रहा था.लेकिन टाइप करने के समय इस विन्दु को अंकित करना भूल गया. 

शुभ-शुभ

Comment by रामबली गुप्ता on October 26, 2016 at 6:14pm
वाह आद0 वासुदेव भाई जी पहले तो आप दोनों छंदों के लिए हृदय से बधाई लीजिये। वागीश्वरी, महाभुजंगप्रयात, कलाधर आदि छंद लिखना यदि कठिन नही तो उतना सहज भी नही अतः इन छंदों पर आपके प्रयास को देखकर बहुत ही प्रसन्नता हुई है। शिल्प की बात करें तो कलाधर छंद में तुकांतता के बारे में आद0 सौरभ सर की टिप्पणी से सहमत हूँ। वागीश्वरी में तुकांतता और शिल्प सब ठीक है बस थोड़ा 'मनों' शब्द के प्रयोग पर आशंकित हूँ इस सन्दर्भ में आद0 सौरभ सर का मार्गदर्शन चाहूँगा। वैसे मनों के स्थान पर दिलों का भी प्रयोग किया जा सकता है।पुनः बधाई। सादर
Comment by बासुदेव अग्रवाल 'नमन' on October 26, 2016 at 4:01pm
आदरणीय समर कबीरजी आपने रचना की सराहना की मैं धन्य हो गया। बहुत आभार।
Comment by बासुदेव अग्रवाल 'नमन' on October 26, 2016 at 3:59pm
आदरणीय सौरभ जी आप की प्रेरणा से ही आज कलाधर छंद में दो और पंक्तियाँ जोड़ पाया। आप जैसे गुणीजनों के मध्य बहुत कुछ सीखने को मिल रहा है। आपका बहुत बहुत आभार।

सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on October 26, 2016 at 3:30pm

आदरणीय बासुदेव अग्रवाल नमन जी, मेरे कहे का मान रखने के लिए हार्दिक धन्यवाद. 

यह अवश्य है कि, सवैया छन्द की तुकान्तता जितनी सधी हुई है कलाधर छन्द की तुकान्तता पर वैसा अभ्यास नहीं हो पाया है. सतत अभ्यासकर्म करते रहें. 

हार्दिक शुभेच्छाएँ

 

Comment by Samar kabeer on October 26, 2016 at 3:22pm

जनाब वासुदेव अग्रवाल ',नमन'जी आदाब,अभी मुझे इस छन्द के विधान को समझने में समय लगेगा,बहरहाल आपको जनाब सौरभ पाण्डेय जी मार्गदर्शन दे ही चुके हैं,मेरी तरफ़ से इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें । 


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on October 25, 2016 at 11:17pm

सवैया को चार पंक्तियों में लिखें और कलाधर छन्द चार पंक्तियों का छन्द है. अतः दो पंक्तियाँ और चाहिए अन्यथा आपकी प्रस्तुति अधूरी है. 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity


मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi" posted a blog post

दो शब्द दृश्य (गणेश जी बाग़ी)

प्रथम दृश्य : शांति===========माँ ने लगाया चांटा...मैं सह गयी,पापा ने लगायाथप्पड़..मैं सह गयी,भाई ने…See More
8 minutes ago
vijay nikore commented on vijay nikore's blog post जीवन्तता
"आपका हार्दिक आभार, भाई समर कबीर जी।"
yesterday
रवि भसीन 'शाहिद' commented on रवि भसीन 'शाहिद''s blog post जानता हूँ मैं (ग़ज़ल)
"आदरणीय समर कबीर साहब, सादर प्रणाम। मैं धन्य हो आपसे शाबाशी पाकर। बहुत शुक्रिया सर।"
yesterday
Samar kabeer commented on रवि भसीन 'शाहिद''s blog post जानता हूँ मैं (ग़ज़ल)
"//काफ़िर नहीं शिकार किसी बद-दुआ का हूँ/      शह्र-ए-बुतां की धूल जो अब छानता हूँ…"
yesterday
Dr. Chandresh Kumar Chhatlani posted a blog post

मेरे ज़रूरी काम / अतुकांत कविता / चंद्रेश कुमार छतलानी

जिस रास्ते जाना नहींहर राही से उस रास्ते के बारे में पूछता जाता हूँ।मैं अपनी अहमियत ऐसे ही बढ़ाता…See More
yesterday
Manan Kumar singh commented on Manan Kumar singh's blog post कान और कांव कांव(लघुकथा)
"आपका बहुत बहुत आभार आदरणीय चंद्रेश जी।"
yesterday
Dr. Chandresh Kumar Chhatlani commented on Manan Kumar singh's blog post कान और कांव कांव(लघुकथा)
"गजब की रचना। बहुत-बहुत बधाई इस सृजन हेतु।"
yesterday
रवि भसीन 'शाहिद' commented on रवि भसीन 'शाहिद''s blog post जानता हूँ मैं (ग़ज़ल)
"आदरणीय समर कबीर साहब, सादर प्रणाम। ग़ज़ल को अपने आशीर्वाद से नवाज़ने के लिए आपका बहुत आभारी हूँ। सर,…"
yesterday
Dr. Chandresh Kumar Chhatlani updated their profile
yesterday
Samar kabeer commented on रवि भसीन 'शाहिद''s blog post जानता हूँ मैं (ग़ज़ल)
"जनाब रवि भसीन 'शाहिद' जी आदाब,ग़ज़ल का अच्छा प्रयास अच्छा है,बधाई स्वीकार करें…"
yesterday
Samar kabeer commented on मोहन बेगोवाल's blog post तरही ग़ज़ल
"जनाब मोहन बेगोवाल जी आदाब,ओबीओ के तरही मिसरे पर ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है,बधाई स्वीकार करें…"
yesterday
Usha Awasthi commented on Usha Awasthi's blog post धरणी भी आखिर रोती है
"हार्दिक धन्यवाद आपका"
yesterday

© 2020   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service