For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

ओ बी ओ मंच को 12वीं सालगिरह पर समर्पित ग़ज़ल

ओ बी ओ मंच को 12वीं सालगिरह पर समर्पित ग़ज़ल (1222*4)

किये हैं पूर्ण बारह वर्ष ओ बी ओ बधाई है,
हमारे दिल में चाहत बस तेरी ही रहती छाई है।

मिला इक मंच तुझ जैसा हमें अभिमान है इसका,
हमारी इस जहाँ में ओ बी ओ से ही बड़ाई है।

सभी इक दूसरे से सीखते हैं और सिखाते हैं,
हमारी एकता की ओ बी ओ ही बस इकाई है।

लगा जो मर्ज लिखने का, दिखाते ओ बी ओ को ही,
उसी के पास इसकी क्यों कि इकलौती दवाई है।

तुझे शत शत 'नमन' मेरा बधाई फिर से ओ बी ओ,
यहीं मेरी पढ़ाई है यहीं मेरी लिखाई है।

बासुदेव अग्रवाल 'नमन'
तिनसुकिया

Views: 261

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by बृजेश कुमार 'ब्रज' on April 11, 2022 at 7:51pm

बढ़िया बहुत बढ़िया कहा आदरणीय... बधाई


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by मिथिलेश वामनकर on April 8, 2022 at 1:50am

आदरणीय वासुदेव अग्रवाल नमन जी, ओबीओ की वर्षगांठ सह इस सार्थक प्रस्तुति पर बहुत बहुत बधाई। सादर।

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on April 7, 2022 at 7:25am

आ. भाई बासुदेव जी, सादर अभिवादन व ओबीओ की वर्षगाँठ पर हार्दिक बधाई। इस अवसर पर सुंदर गजल हुई है। हार्दिक बधाई। 

Comment by Deepalee Thakur on April 4, 2022 at 11:45am
बहुत सुंदर ग़ज़ल ओबीओ पर
Comment by बासुदेव अग्रवाल 'नमन' on April 4, 2022 at 7:59am

आदरणीय समर कबीर जी ओ बी ओ के 12 वर्ष पूर्ण करने की बधाई के साथ आपका बहुत बहुत आभार।

Comment by बासुदेव अग्रवाल 'नमन' on April 4, 2022 at 7:57am

आदरणीय सौरभ पांडे जी ओ बी ओ के 12 वर्ष पूर्ण करने की बधाई के साथ आपका आत्मिक आभार।


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on April 4, 2022 at 12:51am

आदरणीय वासुदेव अग्रवाल नमन जी, आपको इस अभिनव मंच, ओबीओ, के बारहवें वर्ष में पदार्पण की अशेष बधाइयाँ. आपने इस मंच की विशिष्टता को सार्थक शब्द दिये हैं. बहुत खूब !

विश्वास है, आदरणीय, आप सपरिनार स्वस्थ एवं सानन्द होंगे. आपकी सक्रियता सतत बनी रहे. .. शुभातिशुभ ..

Comment by Samar kabeer on April 3, 2022 at 7:51pm

जनाब बासुदेव अग्रवाल 'नमन' जी आदाब, बहुत समय बाद आपको ओबीओ पर देख कर प्रसन्नता हुई I 

ओबीओ की बारहवीं सालगिरह के मौक़े पर ग़ज़ल का अच्छा प्रयास हुआ है', बधाई स्वीकार करें  I 

'हमारे दिल में चाहत बस तेरी ही रहती छाई है'

इस मिसरे का वाक्य विन्यास ठीक नहीं है ,सहीह वाक्य है 'छाई रहती है'--देखिएगा I 

'लगा जो मर्ज लिखने का, दिखाते ओ बी ओ को ही'

इस मिसरे में 'मर्ज' ग़लत शब्द है, सहीह शब्द "मरज़" 12 है , इसकी जगह 'रोग' कर सकते हैं I 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Blogs

Latest Activity

अमीरुद्दीन 'अमीर' बाग़पतवी commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post एक अनबुझ प्यास लेकर जी रहे हैं -लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"
"आदरणीय लक्ष्मण धामी भाई मुसाफ़िर जी आदाब, अच्छी ग़ज़ल हुई है मुबारकबाद क़ुबूल फ़रमाएं। 'एक…"
7 hours ago
Chetan Prakash commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post एक अनबुझ प्यास लेकर जी रहे हैं -लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"
"आदाब, भाई, लक्ष्मण लिंह धामी मुसाफिर साहब, बह्र रमल मुसद्दस सालिम (2122 2122 2122 ) में कहीं अचछी…"
8 hours ago
अमीरुद्दीन 'अमीर' बाग़पतवी posted blog posts
8 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' posted a blog post

एक अनबुझ प्यास लेकर जी रहे हैं -लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"

२१२२/२१२२/२१२*जो नदी की  आस  लेकर जी रहे हैंएक अनबुझ प्यास लेकर जी रहे हैं।१।*है बहुत धोखा सभी की…See More
11 hours ago
Chetan Prakash posted a blog post

गज़ल

गज़ल 221 2121 1221 212अख़लाक पर मुहब्बत  भरोसा रहा नहीं हमदम रहा कोई कहाँ जानाँ हुआ नहींदिल जानता…See More
12 hours ago
Manan Kumar singh replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-87 (विषय: मार्गदर्शन)
"लघुकथा गोष्ठी का आज अंतिम दिन उम्मीदों से पूर्ण है।"
14 hours ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Saurabh Pandey's blog post खत तुम्हारे नाम का.. लिफाफा बेपता रहा // सौरभ
"आदरणीय चेतनप्रकाशजी, आपका रचना पर स्वागत है.  आपके बिंदु विचारणीय हैं.  आप भी तनिक और…"
yesterday
नाथ सोनांचली commented on नाथ सोनांचली's blog post मदिरा सवैया आधारित दो छन्द
"आद0 सौरभ पाण्डेय जी सादर प्रणाम रचना पर आपकी उपस्थिति किसी पुरस्कार से कम नहीं। हृदयतल से आभार…"
yesterday
Chetan Prakash commented on Saurabh Pandey's blog post खत तुम्हारे नाम का.. लिफाफा बेपता रहा // सौरभ
". पुनश्च ः आदरणीय सौरभ साहब नमन बहुतअच्छी गज़ल हुई है। हाँ मुझे आपके मतले के ऊला चाहता रहा उसे मगर…"
yesterday
Chetan Prakash commented on Saurabh Pandey's blog post खत तुम्हारे नाम का.. लिफाफा बेपता रहा // सौरभ
"आदरणीय सौरभ साहब नमन बहुतअच्छी गज़ल हुई है। हाँ मुझे आपके मतले के ऊला चाहता रहा उसे मगर न बोल पा…"
yesterday
अमीरुद्दीन 'अमीर' बाग़पतवी commented on Saurabh Pandey's blog post खत तुम्हारे नाम का.. लिफाफा बेपता रहा // सौरभ
"//भाइयो, जुट जाओ/ भाइयो, जुट जा..  तकनीकी रूप से उपर्युक्त दोनों वाक्य समूहवाचक संज्ञा के…"
yesterday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Saurabh Pandey's blog post खत तुम्हारे नाम का.. लिफाफा बेपता रहा // सौरभ
"भाइयो, जुट जाओ/ भाइयो, जुट जा..  तकनीकी रूप से उपर्युक्त दोनों वाक्य समूहवाचक संज्ञा के एकवचन…"
yesterday

© 2022   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service