For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

कह-मुकरियाँ (१२ से १८) - कल्पना मिश्रा बाजपेई

12-)

तोल-मोल कर जब ये बोले ।

दिल के तालों को ये खोले ।

कभी ना होती इसे थकान,

क्या सखी साजन ?

ना सखि जुवान !

13-)

भारत माँ का सच्चा लाल ।

लंबा कद और ऊँचा भाल ।

इस पर बनते लाखों गान,

क्या सखि साजन ?

ना सखि जवान !

14-)

सर्दी गर्मी या हो बरसात।

हर दम रहता है तैनात ।

कभी ना करता आले बाले ,

क्या सखि छाते ?

ना सखि ताले!

15-)

गर्मी में मिलता ना मान ।

सर्दी में ये सब की जान ।

कम हो या हो ज्यादा आय ,

क्या सखि कम्बल?

ना सखि चाय !

16-)

लंबी छोटी फैली चहुं ओर ।

आते जाते मिलते छोर ।

मिल जाती हें इन में सखियाँ ,

क्या सखि बगियाँ ?

ना सखि गलियाँ !

17-)

आसमान से ऊँचा स्थान ।

सदा रखते हम सब का मान ।

उनके साथ गई थी काबुल ,

क्या सखि साजन ?

ना सखि बाबुल !

18-)

दिखता है नूरानी चेहरा ।

सुंदरियों का इस पर पहरा ।

सब अपने को करते अर्पण ,

क्या सखि साजन ?

ना सखि दर्पण !

कल्पना मिश्रा बाजपेई

मौलिक व अप्रकाशित

Views: 193

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on March 22, 2014 at 11:47pm

प्रस्तुति के लिए हार्दिक शुभकामनाएँ.  आपने आदरणीय योगराजभाईसाहब के सुझावों पर अवश्य ध्यान दिया होगा.

आदरणीया प्रयासरत रहें.

सादर

Comment by kalpna mishra bajpai on February 26, 2014 at 7:01pm

आदरणीया अंजु दी सुधार कि पूरी कोशिश कि है ।सुझाव के लिए बहुत -बहुत  आभार .....

Comment by annapurna bajpai on February 26, 2014 at 6:39pm

कल्पना जी आप अपनी कह मुकरियों को थोड़ा सुधार कर लें , जैसा कि आ0 प्राची जी व आ0 योगराज जी ने बताया है । आपकी कह मुकरियाँ निसंदेह और मुखरित हो जाएंगी । 

Comment by kalpna mishra bajpai on February 26, 2014 at 6:17pm

आदरणीया कल्पना रामानी जी आप सब गुणी जनों की आभारी हूँ ।आप सभी का मार्गदर्शन बना रहा तो हो सकता है ,कि कुछ लिख पाऊँ; वरना अभी मेरी कलम घुटनों के बल चलना सीख रही है सादर .....

Comment by कल्पना रामानी on February 25, 2014 at 10:53pm

आदरणीया कल्पना जी आपका प्रयास बहुत अच्छा है, निश्चित ही आगे उम्दा लिख सकेंगी। बाकी मार्गदर्शन संचालकों का तो मिलता ही रहेगा। शुभकामनाएँ

Comment by kalpna mishra bajpai on February 25, 2014 at 5:57pm

आदरणीय योगराज प्रभाकर जी, प्राची जी और सरिता जी ये हमारा कह मुकरियों में प्रथम प्रयास था और गलतियाँ भी बहुत की लेकिन आप सभी के धैर्य पूर्ण शिक्षण ने मुझे बहुत सहारा दिया। इस के लिए आप सभी को तहे दिल से शुक्रिया!!!     


प्रधान संपादक
Comment by योगराज प्रभाकर on February 25, 2014 at 4:44pm

१२ वीं मुकरी में "जोड़े-बोले", १३वीं में "लाल-नाज़" १५वीं में "मांग-जान" तथा १६वीं में "रोज़-छोर" का तुकांत सही नहीं है आ० कल्पना मिश्रा बाजपेई जी. इन्हें पुन: देखकर सुधारें।

Comment by kalpna mishra bajpai on February 25, 2014 at 3:03pm

आदरनिया सरिता जी आप का सुधार सर आँखों पर और सुझाव के लिए बहुत -बहुत आभार आप का सादर ।

Comment by Sarita Bhatia on February 25, 2014 at 2:41pm

आदरणीय कल्पना जी 

वास्तव में आपकी कह मुकरियां बहुत अच्छी हैं परन्तु उसमें एक कमी जो नज़र आ रही है वो है आप पहेली साजन के बारे में ही सुझा रही हैं मैंने एक कह मुकरिया को ठीक करने की कोशिश की है 

विस्तर पर है सब की माँग ।

सर्दी में ये सब की जान ।

कम हो या हो ज्यादा आय ,

क्या सखि साजन ?

ना सखि चाय !

इसे ऐसे कीजिये 

विस्तर पर है सब की माँग ।

सर्दी में ये सब की जान ।

कम हो या हो ज्यादा आय ,

क्या सखि कम्बल  ?

ना सखि चाय !


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Dr.Prachi Singh on February 25, 2014 at 1:10pm

कह मुकरी विधा में आपकी दूसरी रचना देखना का भी अवसर मिला...

कुछ बातों पर अवश्य ही गौर कीजिये :-

जोड़े-बोले , लाल-नाज़ , मांग-जान, रोज़-छोर के तुक मिलान पुनः देख कर दुरुस्त कीजिये..यह तुकांतता क्या मान्य हो सकती है ?

सर्दी गर्मी या हो बरसात।

हर दम  रहता है तैनात ।

कभी ना करता आले बाले ,

क्या सखि साजन ?

ना सखि ताले!..........................यहाँ ताले बहुवचन है और ऊपर तीसरी पंक्ति में वर्णन एक वचन में है , ऐसा क्यों ?

मेल कराती सब का रोज ।......................साजन के लिए कराती क्रिया कैसे ली जा सकती है 

आते जाते मिलते छोर ।

मिल जाती हें इन में सखियाँ ,.....................साजन में सखियाँ मिल जाती हैं .....समझ से बाहर है 

क्या सखि साजन?

ना सखि गलियाँ !

आदरणीया कल्पना मिश्रा जी कृपया इस विधा की नजाकत को समझने का प्रयास करें..अन्य लोगों की कह मुकरियाँ भी पढ़ें समझें, साथ ही उनपर हुई चर्चाओं को भी देखें बहुत कुछ स्पष्ट होगा 

शुभेच्छाएं 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

विनय कुमार commented on विनय कुमार's blog post उसका हक़- लघुकथा
"इस उत्साह बढ़ाने वाली टिप्पणी के लिए बहुत बहुत आभार आ बृजेश कुमार 'ब्रज' साहब"
3 hours ago
Manan Kumar singh posted a blog post

ग़ज़ल(ग़ज़ल बेबहर है...)

122  122  122  122गजल बेबहर है, नदी बिन लहर है कहो,क्या करूँ जब बिखरता जहर है?1कहूँ क्या भला मैं?…See More
8 hours ago
Sushil Sarna posted a blog post

चंद क्षणिकाएँ :

चंद क्षणिकाएँ :मन को समझाने आई है बादे सबा लेकर मोहब्बत के दरीचों से वस्ल का पैग़ाम…See More
8 hours ago
Dr. Geeta Chaudhary posted a blog post

क्षणिकाएं: विछोह

1. ये यादों का अकूत कारवां है,   नित बेहिसाब चला पर वही खड़ाI2. तेरी हाथों की लकीरों का दोष,   या…See More
8 hours ago
Manoj kumar Ahsaas commented on Manoj kumar Ahsaas's blog post अहसास की ग़ज़ल
"आपका जितना आभार मैं प्रकट करू, कम है बस आपको सादर प्रणाम करता हूँ सुझावों पर काम करता हूँ हार्दिक…"
yesterday
Manan Kumar singh commented on Manan Kumar singh's blog post बीरबल की खिचड़ी(लघु कथा)
yesterday
Manan Kumar singh commented on Manan Kumar singh's blog post बातचीत(लघु कथा)
yesterday
Manan Kumar singh commented on Manan Kumar singh's blog post बातचीत(लघु कथा)
yesterday
Manoj kumar Ahsaas commented on Manoj kumar Ahsaas's blog post अहसास की ग़ज़ल
"आपका जितना आभार मैं प्रकट करू, कम है बस आपको सादर प्रणाम करता हूँ सुझावों पर काम करता हूँ हार्दिक…"
yesterday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 102 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय सत्यनारायण जी, आपकी रचना के लिए आपका सादर धन्यवाद.  आपने इस बार की विभीषिका का…"
yesterday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 102 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीया प्रतिभा जी, आयोजन में आपकी उपस्तिथि प्रतीक्षित थी। इस बार के आयोजन के दोनों छंदों में आपकी…"
yesterday
सतविन्द्र कुमार राणा replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 102 in the group चित्र से काव्य तक
"कही बात पूरी सही छन्द है लुभाता हमें देख लो बंद है पढ़ें बिन जिन्हें बस नहीं हम रहें बधाई बधाई बधाई…"
yesterday

© 2019   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service