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धर्मेन्द्र कुमार सिंह
  • Male
  • Raigarh, CG
  • India
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धर्मेन्द्र कुमार सिंह's Discussions

बहर सारिणी
7 Replies

ग़ज़ल की बहरें समझना बहुत टेढ़ी खीर है। ऐसा इसलिए भी है क्योंकि बहर के बारे में जानकारी तो बहुत ज्यादा मिल जाती है अंतर्जाल पर पर कहीं भी व्यवस्थित ढंग से नहीं मिलती। तो जहाँ सूचना ज्यादा हो वहाँ उसको…Continue

Started this discussion. Last reply by Admin Jan 30, 2011.

 

धर्मेन्द्र कुमार सिंह's Page

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अमीरुद्दीन 'अमीर' commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post अगर हक़ माँगते अपना कृषक, मजदूर खट्टे हैं (ग़ज़ल)
"//क्योंकि सड़े हुए या खराब खाद्य पदार्थों में बैक्टीरिया की वृद्धि के कारण अक्सर खट्टा स्वाद होता है इसी अर्थ का विस्तार आदमी, आँकड़े, दस्तूर इत्यादि के लिए किया गया है// ये ख़याल आपको मुबारक हो।  मैं आपके इस फ़लसफ़े से सहमत नहीं हूँ। सादर। "
4 hours ago
धर्मेन्द्र कुमार सिंह commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post अगर हक़ माँगते अपना कृषक, मजदूर खट्टे हैं (ग़ज़ल)
"जैसा कि कड़वाहट के साथ होता है, खट्टे का पता लगाना अस्तित्व के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। यह उन खाद्य पदार्थों की पहचान करने में मदद कर सकता है जो खतरनाक हो सकते हैं, क्योंकि सड़े हुए या खराब खाद्य पदार्थों में बैक्टीरिया की वृद्धि के कारण अक्सर…"
6 hours ago
अमीरुद्दीन 'अमीर' commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post अगर हक़ माँगते अपना कृषक, मजदूर खट्टे हैं (ग़ज़ल)
"//कवि का काम ही पुराने अर्थों को विस्तार देना है वरना सारी कविता हजार साल पुराने लेखन का दोहराव मात्र होकर रह जाएगी// जी, बहतर है। हम भी अपनी शब्दावली को विस्तार दिये देते हैं ज़रा बताएं कि यहाँ आपने खट्टेपन के अर्थ को विस्तार देकर क्या नया अर्थ…"
7 hours ago
धर्मेन्द्र कुमार सिंह commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post अगर हक़ माँगते अपना कृषक, मजदूर खट्टे हैं (ग़ज़ल)
"हौसला अफजाई का बहुत बहुत शुक्रिया जनाब अमीर साहब, निवेदन है कि कवि का काम ही पुराने अर्थों को विस्तार देना है वरना सारी कविता हजार साल पुराने लेखन का दोहराव मात्र होकर रह जाएगी"
17 hours ago
अमीरुद्दीन 'अमीर' commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post अगर हक़ माँगते अपना कृषक, मजदूर खट्टे हैं (ग़ज़ल)
"जनाब धर्मेंद्र कुमार सिंह जी आदाब, अपने चिर परिचित अंदाज़ में और बेबाक़ी के साथ उम्दा ग़ज़ल का प्रयास है बधाई स्वीकार करें, मगर रदीफ़ "खट्टे हैं'' के कारण कई मिसरों का वाक्य विन्यास सही नहीं है। तीसरा और छठा शे'र अच्छे हैं। आम…"
yesterday
धर्मेन्द्र कुमार सिंह posted a blog post

अगर हक़ माँगते अपना कृषक, मजदूर खट्टे हैं (ग़ज़ल)

१२२२ १२२२ १२२२ १२२२अगर हक़ माँगते अपना कृषक, मजदूर खट्टे हैंतो ख़ुश्बू में सने सब आँकड़े भरपूर खट्टे हैंमधुर हम भी हुये तो देश को मधुमेह जकड़ेगा वतन के वासिते होकर बड़े मज़बूर, खट्टे हैंलगे हैं आसमाँ पर देवताओं को चढ़ेंगे सबतुम्हारे सब्ज़-बागों के सभी अंगूर खट्टे हैंलड़ाकर राज करना तो विलायत की रवायत हैहमारे वासिते सब आपके दस्तूर खट्टे हैंहमेशा बस वही कहना जो सुनना चाहते हैं सबभले ही हो गये हों आप यूँ मशहूर, खट्टे हैंहमारे स्वाद से मत भागिये हैं स्वास्थ्यवर्द्धक हम विटामिन सी बहुत है इसलिये भरपूर खट्टे…See More
yesterday
बसंत कुमार शर्मा commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post काश कहीं से मिल जाती इक जादू की हाथ घड़ी (ग़ज़ल)
"आदरणीय धर्मेन्द्र कुमार सिंह जी सादर नमस्कार  वाह वाह लाजबाब गजल हुई  माथे से होंठों तक का सफर न मैं तय कर पाया रस्ता ऊबड़-खाबड़ था ऊपर से थी नाक बड़ी- क्या कहने  बधाई स्वीकारें "
Jul 17, 2020
धर्मेन्द्र कुमार सिंह posted a blog post

काश कहीं से मिल जाती इक जादू की हाथ घड़ी (ग़ज़ल)

काश कहीं से मिल जाती इक जादू की हाथ घड़ीमैं दस साल घटा लेता तू होती दस साल बड़ीमाथे से होंठों तक का सफर न मैं तय कर पायारस्ता ऊबड़-खाबड़ था ऊपर से थी नाक बड़ीप्यार मुहब्बत की बातें सारी भूल चुका था मैंकिस मनहूस घड़ी में फिर तुझसे मेरी आँख लड़ीलाइलाज है रोग मगर कम हो जायेगी पीड़ागर तू माथे पर रख दे लब की बूटी और जड़ीइस दुनिया की नज़रों में है बदनाम बड़ा ‘सज्जन’ तू भी हो जायेगी सुन मत हो मेरे साथ खड़ी--------(मौलिक एवं अप्रकाशित)See More
Jul 13, 2020
Samar kabeer commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post दुनिया में सब इश्क़ करें तो कितना अच्छा हो (ग़ज़ल)
"जनाब धर्मेन्द्र कुमार सिंह जी आदाब,ग़ज़ल का अच्छा प्रयास हुआ है,बधाई स्वीकार करें । 'अपने साहब इश्क़ करें तो कितना अच्छा हो' इस मिसरे में क़ाफ़िया दोष है,सहीह शब्द है "साहिब",देखियेगा "
Jan 28, 2020
Shyam Narain Verma commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post दुनिया में सब इश्क़ करें तो कितना अच्छा हो (ग़ज़ल)
"आदरणीय धर्मेंद्र सिंह जी, बहुत ही सुंदर प्रस्तुति, हार्दिक बधाई l सादर"
Jan 22, 2020
Manoj kumar Ahsaas commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post दुनिया में सब इश्क़ करें तो कितना अच्छा हो (ग़ज़ल)
"बड़ी रदीफ़ क्या आपने अच्छी गजल पेश की है मित्र हार्दिक शुभकामनाएं"
Jan 21, 2020
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post दुनिया में सब इश्क़ करें तो कितना अच्छा हो (ग़ज़ल)
"वाह..वाह..क्या कहने इस बेहतरीन गजल के लिए हार्दिक बधाई, आ. भाई सर्मेन्द्र जी .."
Jan 21, 2020
धर्मेन्द्र कुमार सिंह posted a blog post

दुनिया में सब इश्क़ करें तो कितना अच्छा हो (ग़ज़ल)

बह्र : २२ २२ २२ २२ २२ २२ २जब चाहें तब इश्क़ करें तो कितना अच्छा होदुनिया में सब इश्क़ करें तो कितना अच्छा होये दुनिया बेहतर हो दिन भर ऐसे काम करें फिर सारी शब इश्क़ करें तो कितना अच्छा होअट्ठारह घंटे खटते जो पूँजी की ख़ातिरअपने साहब इश्क़ करें तो कितना अच्छा होजैसे बचपन में करते थे बिन सोचे समझे फिर बेमतलब इश्क़ करें तो कितना अच्छा होनफ़रत का विष पी-पीकर जो जॉम्बी बन फिरतेवो भी यारब इश्क़ करें तो कितना अच्छा हो‘सज्जन’ इक दिन सदियों की नफ़रत से तंग आकर सारे मज़हब इश्क़ करें तो कितना अच्छा…See More
Jan 19, 2020
धर्मेन्द्र कुमार सिंह commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post फुलवारी बन रहना (नवगीत)
"बहुत बहुत शुक्रिया आदरणीय  लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' जी,  Dr. Geeta Chaudhary जी, Samar kabeer साहब और  Mahendra Kumar जी"
Jan 18, 2020
Mahendra Kumar commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post फुलवारी बन रहना (नवगीत)
"बढ़िया नवगीत है आदरणीय धर्मेन्द्र जी। हार्दिक बधाई स्वीकार कीजिए। सादर।"
Dec 4, 2019
Samar kabeer commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post फुलवारी बन रहना (नवगीत)
"जनाब धर्मेन्द्र कुमार सिंह जी आदाब,बहुत सुंदर नवगीत लिखा आपने,बधाई स्वीकार करें ।"
Nov 28, 2019

Profile Information

Gender
Male
City State
रायगढ़, छत्तीसगढ़
Native Place
प्रतापगढ़
Profession
अभियांत्रिकी

धर्मेन्द्र कुमार सिंह's Blog

अगर हक़ माँगते अपना कृषक, मजदूर खट्टे हैं (ग़ज़ल)

१२२२ १२२२ १२२२ १२२२

अगर हक़ माँगते अपना कृषक, मजदूर खट्टे हैं

तो ख़ुश्बू में सने सब आँकड़े भरपूर खट्टे हैं

मधुर हम भी हुये तो देश को मधुमेह जकड़ेगा 

वतन के वासिते होकर बड़े मज़बूर, खट्टे…

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Posted on April 12, 2021 at 10:28pm — 5 Comments

काश कहीं से मिल जाती इक जादू की हाथ घड़ी (ग़ज़ल)

काश कहीं से मिल जाती इक जादू की हाथ घड़ी

मैं दस साल घटा लेता तू होती दस साल बड़ी

माथे से होंठों तक का सफर न मैं तय कर पाया

रस्ता ऊबड़-खाबड़ था ऊपर से थी नाक बड़ी

प्यार मुहब्बत की बातें सारी भूल चुका था मैं

किस मनहूस घड़ी में…

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Posted on July 12, 2020 at 11:29pm — 1 Comment

दुनिया में सब इश्क़ करें तो कितना अच्छा हो (ग़ज़ल)

बह्र : २२ २२ २२ २२ २२ २२ २

जब चाहें तब इश्क़ करें तो कितना अच्छा हो

दुनिया में सब इश्क़ करें तो कितना अच्छा हो

ये दुनिया बेहतर हो दिन भर ऐसे काम करें 

फिर सारी शब इश्क़ करें तो कितना अच्छा हो

अट्ठारह घंटे खटते जो…

Continue

Posted on January 18, 2020 at 11:25pm — 4 Comments

फुलवारी बन रहना (नवगीत)

जब तक रहना जीवन में

फुलवारी बन रहना

पूजा बनकर मत रहना

तुम यारी बन रहना

दो दिन हो या चार दिनों का

जब तक साथ रहे

इक दूजे से सबकुछ कह दें…

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Posted on November 25, 2019 at 7:33pm — 5 Comments

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At 12:19am on September 23, 2015,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आदरणीय बड़े भाई  धर्मेन्द्र कुमार सिंह जी, 

ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार की ओर से आपको जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनायें...

At 8:41pm on September 22, 2013, जितेन्द्र पस्टारिया said…

" जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनायें " आदरणीय धर्मेन्द्र जी

At 11:20am on September 22, 2013,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

At 10:23pm on December 13, 2012, seema agrawal said…

स्वागत है धर्मेन्द्र जी 

At 6:18pm on September 22, 2012,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

At 10:06am on September 22, 2012,
सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey
said…

भाई धर्मेन्द्रजी, 

सरल, सफल, सहज, सुगढ़
सुफल, सुमिल, सुधी
सस्वर.. .
संयत, सुहृद, सुभाव, सशब्द
संभव सदा
सबल-प्रखर.. .
शुभभावना-शुभकामना-सुसंस्मरण संप्रेष्य है !

अनेकानेक बधाइयाँ.

At 9:20am on September 22, 2012, Er. Ambarish Srivastava said…

कविता शुचिता शिल्प से, शोभित मित्र कविन्द्र.

जन्मदिवस    शुभकामना,   भाई   जी   धर्मेन्द्र..    सादर   

At 8:15am on September 22, 2012, कुमार गौरव अजीतेन्दु said…

जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएँ आदरणीय धर्मेन्द्र सर.........

At 12:10pm on September 21, 2012, लक्ष्मण रामानुज लडीवाला said…

जन्म दिन की हार्दिक शुभ कामनाए स्वीकारे आदरणीय धर्मेन्द्र कुमार सिंह जी, 

प्रभु आपको समाज और देश निर्माण में योगदान देने की शक्ति प्रदान करे | आपका 

हमारा स्नेह बना रहे |

At 1:55pm on April 7, 2011, nemichandpuniyachandan said…
aapki zarra-nawazee ke liye sukariya.
 
 
 

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