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देशभक्ति पर वीर रस की कविता

बुझी राख मत हमे समझना, अंगारो के गोले हैं |
देश आन पर मिटने वाले, हम बारूदी शोले हैं ||

हम सब ख़ौफ़ नही खाते हैं, विध्वंसक हथियारों से |
सीख लिया है लड़ना हमने, तुझ जैसे मक्कारो से ||

पहला वार नही हम करते, पहले हम समझाते हैं |
फिर भी कोई आँख दिखाये, महाकाल बन जाते हैं ||

शेरो के हम वंशज सारे, सुन इक बात बताते हैं |
एक झपट्टे में ही पूरा, खाल खींच हम लाते हैं ||

आन बान की रक्षा में हम, हँस कर शीश चढ़ाते हैं |
जिस देश धरा पर जन्म हुआ, उसका कर्ज चुकाते हैं ||

नागफनी के काटो से हम, कभी नहीं घबराते हैं।
सर्पों के फन कुचल कुचल कर, हाथों से लहराते हैं ||

दिल में हल्दी घाटी बैठी, लिए हाथ में भाले हैं |
मातृभूमि पर मिटने वाले, शूरवीर मतवाले हैं||

सिंह गर्जना करते है हम, आग लगाते पानी में |
भाग्य शूरमा का होता गर, हो कुर्बान जवानी में ||

माथे तिलक लगाती हमको, वीर प्रसूता मातायें |
वीर शिवा राणा सुभाष की, भरी पड़ी हैं गाथायें ||

आँख मिचौली बन्द करो तुम, खौफ़ न खाते बिल्ली से|
इक पल में हम चीर फाड़ दें, हुक्म मिले गर दिल्ली से ||

सरहद है महफूज हमारी, अपने वीर जवानों से |
लिखते है इतिहास नया नित, जो अपने बलिदानों से ||

इक बगियाँ के फूल सभी हम, भारत माँ के बच्चे हैं |
हमको अलग समझने वाले, मूर्ख अक्ल के कच्चे हैं ||

गंगा जमुनी तहजीब यहाँ, सारे जग से न्यारी है |
सम्प्रुभता अपने भारत की, हमको जाँ से प्यारी है ||

टोपी भी हमने पहनी है, सर साफा भी बाँधा है
कृष्ण भक्त रसखान कहीं तो, कहीं नाचती राधा है||

बड़ी शान से हम सब मिलकर, देश ध्वजा फहराते हैं |
सकल विश्व को भारत माँ का, हम जयघोष सुनाते हैं ||

(मौलिक व अप्रकाशित)

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Comment by Nivas Shende on November 28, 2017 at 10:59am

आदरणीय सुरेन्द्र नाथ जी, आप की रचना बहुत ही सूंदर है जिस में देश भक्ति भरी हुई है.
क्या हमें इस कविताकी ऑडियो मिल सकती है ?

Comment by नाथ सोनांचली on January 19, 2017 at 3:45pm
आद0 सीमा मिश्रा जी रचना पर हौसला अफजाई के लिए सादर आभार
Comment by नाथ सोनांचली on January 19, 2017 at 3:44pm
आदरणीय नरेंद्र जी हौसला अफजाई के लिए आभार
Comment by नाथ सोनांचली on January 19, 2017 at 3:44pm
आदरणीय श्याम नारायण वर्मा जी रचना पर प्रशंसा के इन शब्दों के लिए आभार
Comment by narendrasinh chauhan on January 19, 2017 at 11:33am

इस देशभक्ति पूर्ण रचना पर हार्दिक बधाई स्वीकार करें

Comment by Shyam Narain Verma on January 19, 2017 at 11:27am
"देशभक्ति के भाव से सजी रचना हेतु सादर बधाई |"
Comment by नाथ सोनांचली on January 19, 2017 at 3:32am
आदरणीय सुशील सरना जी आपकी तारीफ से अभिभूत हूँ, आप की हौसला अफजाई के लिए अतिशय आभार
Comment by Sushil Sarna on January 18, 2017 at 7:21pm

आदरणीय सुरेन्द्र जी इस देशभक्ति पूर्ण रचना पर हार्दिक बधाई स्वीकार करें। 

Comment by नाथ सोनांचली on January 18, 2017 at 4:41pm
आदरणीय समर कबीर साहब प्रणाम, आपकी रचना पर उत्साह बढाती प्रतिक्रिया पाकर लिखना सफल हुआ। हृदय से आभार, सादर
Comment by Samar kabeer on January 18, 2017 at 3:28pm
जनाब सुरेन्द्र नाथ सिंह जी आदाब,बढ़िया रचना हुई,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।

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