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"पंजाबी साहित्य"(ਪੰਜਾਬੀ ਸਾਹਿਤ)

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"पंजाबी साहित्य"(ਪੰਜਾਬੀ ਸਾਹਿਤ)

यहाँ पर पंजाबी साहित्य की रचनाओं को लिखा जा सकता है |

Location: विश्व
Members: 26
Latest Activity: Jan 13, 2018

Discussion Forum

ਅਫਸੋਸ ( ਮਿੰਨੀ ਕਹਾਣੀ)

                                 ਅਫਸੋਸ ਅੱਜ ਬਾਪੁ ਸਾਹਿਬ ਸਿੰਘ ਦਾ ਸਸਕਾਰ ਸੀ ,ਸਾਰਾ ਪਿੰਡ ਸਸਕਾਰ ਨਾਲ ਗਿਆ ਹੋਇਆ  ਸੀ ,ਬੜੇ ਰੁਤਬੇ ਵਾਲਾ ਬੰਦਾ ਜੁ ਸੀ ਓਹ \ ਦੇਬੇ ਹਲਵਾਈ ਨੇ ਵੀ ਆਪਦੇ  ਨੌਕਰ ਨੂੰ ਆਖਿਆ , " ਤੂੰ  ਦੁਕਾਨ ਸੰਭਾਲ ,…Continue

Started by Surjit Singh Sirdi Aug 18, 2016.

हुंण मैं की करां ....... 2 Replies

हुंण मैं की करां .......  रुड़ जाणी नूं ले के सौंदा मेरी कदर न जाने आसे पासे लौकी देंदे सौतन दे मैनूं ताने बावाँ विच वी हो के ओ ताँ मेनू न पछाणे ओनू लावे होठां नाल ते मेरी कदर जाने की करां मेरे…Continue

Started by Sushil Sarna. Last reply by Sushil Sarna Jun 18, 2015.

हुण आ गया सावन …… 2 Replies

अम्बराँ विच चमकदी बिजली, देंदी सौ सौ वाजाँ हुण आ गया सावन ओ जोगी घर तूं वी घर आजाइक ताँ अग लगावन बूँदां ते दूजियाँ तेरियां यादाँहुण आ गया सावन ओ जोगी घर तूं वी घर आजा मेनू नींद न आवे, तेरी याद…Continue

Started by Sushil Sarna. Last reply by Sushil Sarna Apr 15, 2015.

नौआं साल

नौएँ  साले  2013 दी सबनिजो लक्ख लक्ख बधाई  नौआं साल  छड्डी चलेया पुराणा साल नौआं आणे यो…Continue

Started by Deepak Sharma Kuluvi Dec 31, 2012.

मामा जीती गेया 2 Replies

मामा जीती गेया जीती गेया मेरा मामा ओ लोकोहुण होई जाणी अपणी मौज छड्ड दिल्लिया असाँ चली जाणा कुल्लूबणाई लैणी अपणी फौज़दिन भर करनी मटरगस्तीकोई कम्म न काज नौइं नौइं गड्डियाँ चलाणियाँलोको असाँ ताँ…Continue

Started by Deepak Sharma Kuluvi. Last reply by Deepak Sharma Kuluvi Dec 26, 2012.

आयी दयाली

आयी दयालीहाई वो लोको आयी दयालीखर्चा बड़ा पर खीसा खाल्लीचाली रपैय्ये होई गयी खंडकियाँ पीणी…Continue

Started by Deepak Sharma Kuluvi Nov 8, 2012.

(जाणा कल्लेयाँ ही पैंदा) 2 Replies

रब्ब दी रज़ा जे मंनेंगा ते सुख भरपूर तू पाँवेंगानहीं ते जीवन भर तू बंदेया कलपदा ही रह जांवेंगा…Continue

Started by Deepak Sharma Kuluvi. Last reply by Deepak Sharma Kuluvi Nov 6, 2012.

करवा चौथे दा लुत्फ़

करवा चौथे दा लुत्फ़ लाड़ी ग्लांदी पैर बंदायी लेयाकरवा चौथे दा लुत्फ़ उठाई लेयाव्रत रख्खी के…Continue

Started by Deepak Sharma Kuluvi Nov 2, 2012.

कैहं नी लगांदे

कैहं नी लगांदे  लाड़ी ग्लांदी चला वो सारे गंगा नौहई औईएसारे मिलिके पापी महापापी रावणे जो फूकी औईएदेया करड़ा है मरदा नी मड़ा हर साल जन्म लेई लैंदासाड़े गरीब मुल्खे दा करोडाँ दा खर्चा कराई दिंदाअसां भी…Continue

Started by Deepak Sharma Kuluvi Oct 9, 2012.

ਤੀਆਂ ਤੀਜ ਦੀਆਂ

ਅੱਜ 9 ਸਾਉਣ ਹੈ।ਤੀਆਂ ਦਾ ਤਿਉਹਾਰ ਸਾਉਣ ਮਹੀਨੇ ਦੀ ਮੱਸਿਆ ਤੋਂ ਬਾਦ ਤੀਜ ਤੋਂ ਸ਼ੁਰੂ ਹੁੰਦਾ ਹੈ  ਤੇ ਪੁੰਨਿਆ ਤੱਕ ਚਲਦਾ ਰਹਿੰਦਾ ਹੈ।ਇਸ ਵਰ੍ਹੇ 4 ਸਾਉਣ (19 ਜੁਲਾਈ) ਦੀ ਮੱਸਿਆ ਸੀ ਤੇ 7 ਸਾਉਣ ਨੂੰ ਤੀਜ ਜਾਣੀ ਕਿ ਤੀਆਂ ਤੀਜ ਦੀਆਂ....…Continue

Started by SS Jul 24, 2012.

 
 
 

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मिथिलेश वामनकर replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 157 in the group चित्र से काव्य तक
"हार्दिक आभार आपका।"
2 hours ago

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"सही कहा आपने "
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"आदरणीय आप और हम आदरणीय हरिओम जी के दोहा छंद के विधान अनुरूप प्रतिक्रिया से लाभान्वित हुए। सादर"
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"सही सुझाव "
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"आभार"
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"जी हार्दिक धन्यवाद "
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"आदरणीय अशोक रक्ताले जी, मैने बस ओ बी ओ के स्वर्णिम काल को याद किया है। बस उन दिनों को फिर से देखना…"
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"आदरणीय अशोक रक्ताले जी, आपको यह प्रयास पसन्द आया, जानकर खुशी हुई। मेरे प्रयास को मान देने के लिए…"
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Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 157 in the group चित्र से काव्य तक
"हो जाता है अस्त जब, सूरज, ढलती शाम। लोग करें सब शाम को, बस ठेके के नाम। बस ठेके के नाम पर, बिक…"
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"पैर पकड़ कर कह रहे चाचा रखना ध्यान।।  चाचा भी हैं जानते, इनके सारे  ढंग।। ..........सही…"
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"जैसे  दोहों  को  मिले, सच्चे जोड़ीदार। ऐसे रचनाकार की, यहाँ बहुत दरकार।। प्रतिउत्तर…"
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Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 157 in the group चित्र से काव्य तक
"   जी! आदरणीय चेतन प्रकाश जी सादर नमन, आपको दोहे चित्ताकर्षक लगे मेरा रचनाकर्म सफल हुआ.…"
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