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रामबली गुप्ता
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सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on रामबली गुप्ता's blog post मत्तगयंद सवैया-रामबली गुप्ता
"आद0 रामबली जी सादर अभिवादन। बढ़िया भक्ति भाव से भरी छंद रचना की आपने। बधाई स्वीकार कीजिये"
Oct 16
डॉ छोटेलाल सिंह commented on रामबली गुप्ता's blog post मत्तगयंद सवैया-रामबली गुप्ता
"आदरणीय रामबली जी आप तो इस विधा के माहिर हैं आपकी काबिलियत को नमन"
Oct 16
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on रामबली गुप्ता's blog post मत्तगयंद सवैया-रामबली गुप्ता
"आ. भाई रामबली जी, सुंदर छंद हुये हैं । हार्दिक बधाई ।"
Oct 16
Samar kabeer commented on रामबली गुप्ता's blog post मत्तगयंद सवैया-रामबली गुप्ता
"जनाब रामबली गुप्ता जी आदाब,अच्छी छन्द रचना हुई है,बधाई स्वीकार करें ।"
Oct 15
Samar kabeer commented on रामबली गुप्ता's blog post मत्तगयंद सवैया-रामबली गुप्ता
"जनाब बृजेश जी,इतनी छोटी टिप्पणी देना ओबीओ की परिपाटी नहीं है,कृपया इस ओर ध्यान दें ।"
Oct 15
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on रामबली गुप्ता's blog post मत्तगयंद सवैया-रामबली गुप्ता
"बहुत ही उत्तम रचना आदरणीय..."
Oct 14
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on रामबली गुप्ता's blog post छप्पय छंद-रामबली गुप्ता
"आ. भाई रामबली जी, सुंदर कविता हुयी है । हार्दिक बधाई ।"
Oct 14
रामबली गुप्ता posted a blog post

मत्तगयंद सवैया-रामबली गुप्ता

हे! जगदीश! सुनो विनती अब, भक्त तुम्हें दिन-रैन पुकारे।व्याकुल नैन निहार रहे पथ, पावन दर्शन हेतु तुम्हारे।।कौन भला जग में अब हे हरि संकट से यह प्राण उबारे।आ कर दो उजियार प्रभो! हिय, जीवन के हर लो दुख सारे।।रचनाकार-रामबली गुप्तामौलिक एवं अप्रकाशितसूत्र-भगण×7+गुरु गुरु; 211×7+22See More
Oct 14
रामबली गुप्ता commented on रामबली गुप्ता's blog post छप्पय छंद-रामबली गुप्ता
"हृदय से धन्यवाद भाई सुरेन्द्रनाथ जी"
Oct 13
रामबली गुप्ता commented on रामबली गुप्ता's blog post छप्पय छंद-रामबली गुप्ता
"आद०भाई नरेंद्र चौहान जी सादर आभार"
Oct 13
रामबली गुप्ता commented on रामबली गुप्ता's blog post छप्पय छंद-रामबली गुप्ता
"सादर धन्यवाद आद०डॉ छोटेलाल जी"
Oct 13
रामबली गुप्ता commented on रामबली गुप्ता's blog post छप्पय छंद-रामबली गुप्ता
"आद० बसन्त भाई जी सादर धन्यवाद"
Oct 13
रामबली गुप्ता commented on रामबली गुप्ता's blog post छप्पय छंद-रामबली गुप्ता
"हार्दिक आभार आद०समर भाई साहब"
Oct 13
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on रामबली गुप्ता's blog post छप्पय छंद-रामबली गुप्ता
"आद0 रामबली जी सादर अभिवादन। छप्पय छंद में भक्ति रस से सराबोर बेहतरीन रचना पर मेरी हार्दिक बधाई स्वीकार कीजिये। "
Oct 13
narendrasinh chauhan commented on रामबली गुप्ता's blog post छप्पय छंद-रामबली गुप्ता
"खूब सुन्दर रचना "
Oct 12
डॉ छोटेलाल सिंह commented on रामबली गुप्ता's blog post छप्पय छंद-रामबली गुप्ता
"आदरणीय रामबली जी सुंदर एवं आकर्षक छप्पय छन्द पढ़कर आनन्द आ गया बधाई हो "
Oct 11

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रामबली गुप्ता's Blog

मत्तगयंद सवैया-रामबली गुप्ता

हे! जगदीश! सुनो विनती अब, भक्त तुम्हें दिन-रैन पुकारे।
व्याकुल नैन निहार रहे पथ, पावन दर्शन हेतु तुम्हारे।।
कौन भला जग में अब हे हरि संकट से यह प्राण उबारे।
आ कर दो उजियार प्रभो! हिय, जीवन के हर लो दुख सारे।।

रचनाकार-रामबली गुप्ता

मौलिक एवं अप्रकाशित

सूत्र-भगण×7+गुरु गुरु; 211×7+22

Posted on October 13, 2018 at 9:48pm — 6 Comments

छप्पय छंद-रामबली गुप्ता

ज्योतिपुंज जगदीश! रहो नित ध्यान हमारे।
कलुष-द्वेष-दुर्भाव, हृदय-तम हर लो सारे।।
सत्य-स्नेह-सद्भाव, समर्पण का प्रभु! वर दो।
जला ज्ञान का दीप, प्रभा-शुचि हिय में भर दो।
दो बल-पौरुष-सद्बुद्धि हरि! मार्ग चुनेें सद्कर्म का।
हर जनजीवन के त्रास हम, फहरायें ध्वज धर्म का।।

मौलिक एवं अप्रकाशित

रचनाकार-रामबली गुप्ता

शिल्प-प्रथम चार पद रोला छंद और अंतिम दो पद उल्लाला छंद के संयोग से छप्पय छंद की निष्पत्ति होती है।

Posted on October 9, 2018 at 11:30pm — 11 Comments

पिया का पत्र-रामबली गुप्ता

आज खुशी से झूमूँ सखि री पत्र पिया का आया है

भाव भरे अक्षर-अक्षर ने तन-मन को हर्षाया है



लिखते, प्रिये! तुम्हीं से सब कुछ, सुख-दुख की सहभागी तुम

सतरंगी स्वप्नों सा सुंदर जीवन तुमसे पाया है



रहता था निर्वासित सा मन जीवन के निर्जन वन में

पावन प्यार भरा गृह इसको तुमने ही लौटाया है



कहते- पीर भरा यह जीवन जो तपते मरुथल सा था

होकर सिंचित स्नेह से' तेरे हरा भरा हो…

Continue

Posted on October 1, 2018 at 9:21am — 10 Comments

बन के सूरज सा जमाने में निकलते रहिये-रामबली गुप्ता

ग़ज़ल

2122 1122 1122 22

बन के' सूरज सा' जमाने में' निकलते रहिये

हर अँधेरे को' उजाले मे' बदलते रहिये

जिंदगी एक सफर खुशियों' भरा हो अपना

यूँ ही बस आप मेरे साथ तो चलते रहिये

दिल के' मन्दिर में उजाले की' वज़ह आप ही हैं

अब तो इस दिल में' सदा दीप सा' जलते रहिये

मैं जो' हूँ साथ जमाने से' भला डर कैसा

हो के मायूस न यूँ शाम से ढलते रहिये

मेरे' हर गीत-ग़ज़ल-नज़्म-तरानों में' यूँ ही

बन के' नित…

Continue

Posted on September 14, 2018 at 1:39pm — 13 Comments

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At 11:21am on May 17, 2016, Dr Ashutosh Mishra said…
आदरणीय रामबली जी आपकी इस सफलता पर आपको तहे दिल बधाई ..
At 11:21am on May 17, 2016, Dr Ashutosh Mishra said…
आदरणीय रामबली जी आपकी इस सफलता पर आपको तहे दिल बधाई ..
At 3:10pm on May 16, 2016,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीय रामबली गुप्ता जी.
सादर अभिवादन !
मुझे यह बताते हुए हर्ष हो रहा है कि आपका गीत-हृदय का भ्रमर गुनगुनाता चला है को "महीने की सर्वश्रेष्ठ रचना" सम्मान के रूप मे सम्मानित किया गया है | इस शानदार उपलब्धि पर बधाई स्वीकार करे |

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शुभकामनाओं सहित
आपका
गणेश जी "बागी
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक 
ओपन बुक्स ऑनलाइन

At 10:47am on May 14, 2016, डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव said…

आ०  रामबली जी

आप जैसा सुन्दर कवि -मित्र पाकर आप्यायित हूँ . आपको सदैव शुभ .  

At 10:17pm on February 25, 2016,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आपका अभिनन्दन है.

ग़ज़ल सीखने एवं जानकारी के लिए

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 ग़ज़ल की बातें 

 

भारतीय छंद विधान से सम्बंधित जानकारी  यहाँ उपलब्ध है

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