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सालिक गणवीर
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Rupam kumar -'मीत' commented on सालिक गणवीर's blog post नहीं दो चार लगता है बहुत सारे बनाएगा.( ग़ज़ल :- सालिक गणवीर)
"आ, सालिक सर्, प्रणाम बहुत ख़ूब ग़ज़ल हुई है, और दूसरा शे'र क्या ही कहने वाह!! फ़लक पर वो नये दो-तीन सय्यारे बनाएगा यह मिसरा विज्ञान के हिसाब से ठीक नहीं, क्यों कि प्लैनेट फ़लक में नहीं कहकशाँ में होता है, जैसे हम सब मिल्की वे गैलेक्सी में रहते…"
4 hours ago
सालिक गणवीर posted a blog post

नहीं दो चार लगता है बहुत सारे बनाएगा.( ग़ज़ल :- सालिक गणवीर)

1222 1222 1222 1222नहीं दो-चार लगता है बहुत सारे बनाएगा जहाँ मिलता नहीं पानी वो फव्वारे बनाएगा  (1)ज़रूरत से ज़ियादा है शुगर मेरे बदन में पर मुझे वो देखते ही फिर शकर-पारे बनाएगा  (2)अँधेरी रात के साये यहाँ अब टिक न पाएंगे बनाए जुगनू हैं जिसने वही तारे बनाएगा  (3)नहीं मुमकिन सफ़र करना हवा में आज भी लेकिन वो अपने तिफ़्ल की ख़ातिर तो गुब्बारे बनाएगा  (4)ज़मीं पर पैर रखने की जगह दिखती नहीं उसको फ़लक पर वो नये दो-तीन सय्यारे बनाएगा  (5)बशर जो सो नहीं सकते वहीं पे सेज फूलों की जहाँ बिस्तर नहीं होंगे…See More
yesterday
सालिक गणवीर replied to Saurabh Pandey's discussion ओबीओ परिवार के युवा साहित्यकार अरुन अनन्त की दैहिक विदाई
"दु:खद समाचार ईश्वर उन्हें अपने श्री चरणों में स्थान दें. मेरी संवेदनाएँँ शोक संतप्त परिवार के साथ."
yesterday
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Thursday
सालिक गणवीर commented on सालिक गणवीर's blog post उधर जब तपन है..( ग़ज़ल :- सालिक गणवीर)
"आदरणीय समर कबीर साहिबसादर अभिवादनग़ज़ल पर आपकी उपस्थिती और सराहना के लिए ह्रदय तल से आपका आभारी हूँ.आपकी इस्लाह से ग़ज़ल की ख़ूबसूरती बढ़ गई है मुुुहतरम.शुक्रिय: सलामत रहेंं."
Thursday
सालिक गणवीर commented on सालिक गणवीर's blog post उधर जब तपन है..( ग़ज़ल :- सालिक गणवीर)
"आदरणीया रचना जी अभिवादनग़ज़ल पर आपकी उपस्थिती और सराहना के लिए ह्रदय तल से आपका आभारी हूँ."
Thursday
सालिक गणवीर commented on Rachna Bhatia's blog post ग़ज़ल
"आदरणीया रचना भाटिया जी सादर अभिवादनउम्दा  ग़ज़ल के लिए ढेरों बधाइयाँ स्वीकार करें. सादर. मतले पर मैं भी अमीर साहब से इत्तेफाक रखता हूँ. देखिएगा. "
Thursday
सालिक गणवीर commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post उसको भाया भीड़ का होकर खो जाना -लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
"आदरणीय लक्षण धामी जीसादर अभिवादनउम्दा ग़ज़ल के लिए ढेरों बधाइयाँ स्वीकार करें. सादर."
Thursday
सालिक गणवीर commented on सालिक गणवीर's blog post रुठ जाते हैं कभी दिन के उजाले मुझसे..( ग़ज़ल :- सालिक गणवीर)
"आदरणीय अमीरूद्दीन 'अमीर' साहिबसादर अभिवादनग़ज़ल पर आपकी उपस्थिती और सराहना के लिए ह्रदय तल से आपका आभारी हूँ."
Thursday
अमीरुद्दीन 'अमीर' commented on सालिक गणवीर's blog post रुठ जाते हैं कभी दिन के उजाले मुझसे..( ग़ज़ल :- सालिक गणवीर)
"आदरणीय सालिक गणवीर जी आदाब, अच्छी ग़ज़ल हुई दिली मुबारकबाद क़ुबूल फ़रमाएं। सादर।"
Wednesday
सालिक गणवीर commented on सालिक गणवीर's blog post सूखी हुई है आज मगर इक नदी है तू...( ग़ज़ल :- सालिक गणवीर)
"आदरणीया दीपाली ठाकुर जीसादर अभिवादनग़ज़ल पर आपकी उपस्थिती और सराहना के लिए ह्रदय तल से आपका आभारी हूँ."
Wednesday
Deepalee Thakur commented on सालिक गणवीर's blog post सूखी हुई है आज मगर इक नदी है तू...( ग़ज़ल :- सालिक गणवीर)
"बहुत ही सुन्दर ग़ज़ल कही ,बधाई स्वीकारें।"
Wednesday
सालिक गणवीर commented on सालिक गणवीर's blog post रुठ जाते हैं कभी दिन के उजाले मुझसे..( ग़ज़ल :- सालिक गणवीर)
"आदरणीय कबीर साहिब सानी कुछ यूँ लिखा है.... अब नहीं जाते अँधेरे ये सँभाले मुझसे...."
Wednesday
सालिक गणवीर commented on सालिक गणवीर's blog post सूखी हुई है आज मगर इक नदी है तू...( ग़ज़ल :- सालिक गणवीर)
"भाई जवाहर लाल सिंह जी सादर अभिवादनग़ज़ल पर आपकी उपस्थिती और सराहना के लिए ह्रदय तल से आपका आभारी हूँ."
Wednesday
सालिक गणवीर commented on Nilesh Shevgaonkar's blog post ग़ज़ल नूर की- ख़ूब इतराते हैं हम अपना ख़ज़ाना देख कर
"आदरणीय भाई निलेश 'नूर' जी आदाब बहुत उम्दा ग़ज़ल के लिए दाद और मुबारक़बाद क़ुबूल कीजिये।"
Wednesday
सालिक गणवीर commented on सालिक गणवीर's blog post रुठ जाते हैं कभी दिन के उजाले मुझसे..( ग़ज़ल :- सालिक गणवीर)
"आदरणीय भाई लक्ष्मण धामी जी आदाब ग़ज़ल पर आपकी उपस्थिती और हौसला अफ़ज़ाई के लिए तह-ए -दिल से शुक्रिया ।"
Wednesday

Profile Information

Gender
Male
City State
Bhilai, Chhattisgarh
Native Place
Bhilai
Profession
Retired from SAIL,as a Senior Electrical engineer
About me
Reading,writing and photography were my hobbies and after retirement I am totally indulged to fulfill my dreams.

सालिक गणवीर's Blog

नहीं दो चार लगता है बहुत सारे बनाएगा.( ग़ज़ल :- सालिक गणवीर)

1222 1222 1222 1222

नहीं दो-चार लगता है बहुत सारे बनाएगा

जहाँ मिलता नहीं पानी वो फव्वारे बनाएगा  (1)

ज़रूरत से ज़ियादा है शुगर मेरे बदन में पर

मुझे वो देखते ही फिर शकर-पारे बनाएगा  (2)

अँधेरी रात के साये यहाँ अब टिक न पाएंगे

बनाए जुगनू हैं जिसने वही तारे बनाएगा  (3)

नहीं मुमकिन सफ़र करना हवा में आज भी लेकिन

वो अपने तिफ़्ल की ख़ातिर तो गुब्बारे बनाएगा  (4)

ज़मीं पर पैर रखने की जगह दिखती नहीं…

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Posted on October 19, 2020 at 7:56am — 1 Comment

रुठ जाते हैं कभी दिन के उजाले मुझसे..( ग़ज़ल :- सालिक गणवीर)

2122. 1122. 1122. 22.

रूठ जाते हैं कभी दिन के उजाले मुझसे

अब नहीं जाते अँधेरे ये सँभाले मुझसे (1)

सूख जाता है गला प्यास के मारे जब भी

दूर हो जाते हैं पानी के पियाले मुझसे    (2)

क़ैद रक्खा है मुझे उसने कई सालों से

चाबियों का भी पता पूछ न ताले मुझसे (3)

सामने मेरे बहुत लोग यहाँ भूखे हैं

आज निगले नहीं जाएँगे निवाले मुझसे (4)

हाथ जब मेरे सलीबें ही उठाना चाहें

ख़ार अब माँग रहे पैरों के छाले…

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Posted on October 11, 2020 at 3:30pm — 11 Comments

उधर जब तपन है..( ग़ज़ल :- सालिक गणवीर)

 

122 122

उधर जब तपन है
इधर भी अगन है

अदू साथ तेरे
मुझे क्यों जलन है

ये क्यों मीठी मीठी
सी दिल में चुभन है

वही दुश्मन-ए-जाँ
वही जान-ए-मन है

सुखी वो नहीं पर
दुखी आज मन है

जहाँ फूल थे कल
वहाँ आज गन है

यहाँ झूठ सच है
यही तो चलन है

कहो कुछ भी'सालिक'
तुम्हारा दहन है

*मौलिक एवं अप्रकाशित.

Posted on October 5, 2020 at 9:30pm — 10 Comments

सूखी हुई है आज मगर इक नदी है तू...( ग़ज़ल :- सालिक गणवीर)

221 2121 1221 212

सूखी हुई है आज मगर इक नदी है तू

मैं जानता हूँ रेत के नीचे दबी है तू

मरना है एक दिन ये नई बात भी नहीं

जी लूँ ऐ ज़िंदगी तुझे जितनी बची है तू

आँखों को चुभ रही है अभी तेरी रौशनी

काँटा समझ रहा था मगर फुलझड़ी है तू

ऐ मौत कोई दूसरा दरवाजा खटखटा

आवाज़ मेरे दर पे ही क्यों दे रही है तू

हर बार ये लगा है तुझे जानता हूँ मैं

महसूस भी हुआ है कभी अजनबी है तू

आज़ाद हो रही…

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Posted on September 28, 2020 at 10:00pm — 19 Comments

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