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डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव
  • Male
  • Lucknow Uttar Pradesh
  • India
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डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव's Discussions

ओबीओ लखनऊ चैप्टर की साहित्य संध्या माह मई 2019 – एक प्रतिवेदन                                      डॉ. गोपाल नारायन श्रीवास्तव

बैशाख उतर रहा था, ज्येष्ठ की मुद्रा आक्रामक थी I मौसम के इस संधिकाल में जब ग्रीष्म ने अपनी जिह्वा फैलानी शुरू की, तब 19 मई 2019 को सायं 3 बजे ओपन बुक्स ऑन लाइन के साहित्यिक योद्धा 37, रोहतास…Continue

Started yesterday

ओबीओ लखनऊ चैप्टर की साहित्य संध्या माह अप्रैल 2019 – एक प्रतिवेदन                                      डॉ. गोपाल नारायन श्रीवास्तव

ओबीओ लखनऊ-चैप्टर की साहित्य संध्या माह अप्रैल 2019 का आगाज रविवार दिनांक 28अप्रैल 2019 को श्री भूपेन्द्र सिंह ’होश’ के सौजन्य से 37, रोहतास एन्क्लेव, निकट नील गिरि चौराहा, रवींद्र पल्ली (डॉ. शरदिंदु…Continue

Started May 22

पं० चंद्रशेखर पाण्डेय ’चंद्रमणि’ जी की नाट्यधर्मिता :: एक तात्विक विवेचन                  डॉ. गोपाल नारायण श्रीवास्तव

   भारत में नाटक की परंपरा अत्यधिक प्राचीन है I यद्यपि वर्तमान में उपलब्ध भरत मुनि का नाटयशास्त्र ही सबसे पुराना है जो पाश्चात्य विद्वानों की इस धारणा को ध्वस्त करने के लिए पर्याप्त है कि ग्रीस या…Continue

Started Apr 18

ओबीओ लखनऊ चैप्टर की साहित्य संध्या माह मार्च 2019 – एक प्रतिवेदन - डॉ. गोपाल नारायन श्रीवास्तव

ओबीओ लखनऊ-चैप्टर की साहित्य संध्या माह मार्च रविवार दिनांक 17 मार्च 2019 को श्री मृगांक श्रीवास्तव के सौजन्य से उनके आवास डी-343, सेक्टर एफ. जानकीपुरम में सायं 3 बजे प्रारम्भ हुयी । कार्यक्रम की…Continue

Started Apr 17

 

डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव's Page

Latest Activity

डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव commented on डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव's blog post प्रतीक्षा
"आ० समर कबीर जी  आपने हिम्मत बढ़ाई  शुक्रि, सादर "
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डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव commented on डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव's blog post प्रतीक्षा
"आ० अग्रज निकोर जी. आपके शब्द बहुमूल्य हैं मेरे लिए . सादर "
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डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव commented on डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव's blog post प्रतीक्षा
"आ० भाई सुशील सरना जी , आपकी  हौसला अफजाई से आश्वस्त हुआ "
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डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव commented on डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव's blog post प्रतीक्षा
"आ० रक्षिता सिंह . सादर आभार "
yesterday
डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव posted a discussion

ओबीओ लखनऊ चैप्टर की साहित्य संध्या माह मई 2019 – एक प्रतिवेदन                                      डॉ. गोपाल नारायन श्रीवास्तव

बैशाख उतर रहा था, ज्येष्ठ की मुद्रा आक्रामक थी I मौसम के इस संधिकाल में जब ग्रीष्म ने अपनी जिह्वा फैलानी शुरू की, तब 19 मई 2019 को सायं 3 बजे ओपन बुक्स ऑन लाइन के साहित्यिक योद्धा 37, रोहतास एन्क्लेव, लखनऊ में परिचर्चा और काव्य-पाठ का दुन्दुभि-नाद करने हेतु कविता के प्रांगण में समवेत हुए – ‘कर्मक्षेत्रे समवेता युयुत्सव: Iकार्यक्रम की सदारत डॉ. शरदिंदु मुकर्जी ने की I संचालन युवा कवि मनोज शुक्ल ‘मनुज’ द्वारा किया गया Iप्रथम चरण में डॉ. अशोक शर्मा के उपन्यास ‘सीता के जाने के बाद राम’ का अंश-पाठ (…See More
yesterday
Samar kabeer commented on डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव's blog post प्रतीक्षा
"जनाब डॉ. गोपाल नारायण श्रीवास्तव जी आदाब,बहुत ही गम्भीर,भावपूर्ण रचना हुई है,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।"
Monday
डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव posted an event

ओबीओ लखनऊ चैप्टर at श्री पी के श्रीवास्तव - ‘द्वीप लोक‘, MDH -5 /1, सेक्टर-H जानकीपुरम

June 30, 2019 from 3pm to 6pm
मासिक साहित्य संध्या  माह जून 2019  See More
Sunday
vijay nikore commented on डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव's blog post प्रतीक्षा
"पढ़ते ही हैरान हूँ, गदगद हूँ, कि आपने इतना गंभीर भाव कैसे शब्दबद्ध किया है। आपको हार्दिक बधाई, भाई गोपाल जी।* *(मेरा हिन्दी font "hai" के लिए ठीक काम नहीं कर रहा)।"
Saturday
Sushil Sarna commented on डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव's blog post प्रतीक्षा
"वाह आदरणीय डॉ गोपाल जी वाह ... एक सूक्ष्म अनुभूति की भावपूर्ण अभिव्यक्ति। हार्दिक बधाई स्वीकारें सर।"
Saturday
Rakshita Singh commented on डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव's blog post प्रतीक्षा
"आदरणीय गोपाल जी, नमस्कार  बहुत सुन्दर  रचना।"
Saturday
डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव posted a blog post

प्रतीक्षा

एक लम्बी प्रतीक्षा के बादहुआ होगा मेरा जन्मफिर एक दीर्घ प्रतीक्षाऔर हुई होगीमेरे बड़े होने कीऔर मेरे बड़े हो जाने परहो गया होगा उनकी सारी प्रतीक्षाओं का अंतजिन्होंने मन्नतें माँगी होंगीदुआयें की होंगीउपवास रखे होंगेमेरे आने की प्रतीक्षा में I  (मौलिक /अप्रकाशित )See More
Saturday
डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव posted a photo

पंडितन केर पिछलगा

मलिक मुहम्मद ‘जायसी’ की प्रसिद्धि हिन्दी साहित्य में एक सिद्ध सूफी संत और प्रेमाश्रयी शाखा के प्रतिनिधि कवि के रूप में हैं I ‘पद्मावत’ महाकाव्य उनकी कालजयी रचना है I इसका ‘नागमती विरह-वर्णन’ आज भी हिन्दी साहित्य में अप्रतिम है I इतने उत्कृष्ट कवि का…
Jun 16
डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव posted a discussion

ओबीओ लखनऊ चैप्टर की साहित्य संध्या माह अप्रैल 2019 – एक प्रतिवेदन                                      डॉ. गोपाल नारायन श्रीवास्तव

ओबीओ लखनऊ-चैप्टर की साहित्य संध्या माह अप्रैल 2019 का आगाज रविवार दिनांक 28अप्रैल 2019 को श्री भूपेन्द्र सिंह ’होश’ के सौजन्य से 37, रोहतास एन्क्लेव, निकट नील गिरि चौराहा, रवींद्र पल्ली (डॉ. शरदिंदु मुकर्जी का आवास) में सायं 3 बजे हुआ । कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ. अनिल मिश्र ने की। संचालन का प्रभार डॉ. गोपाल नारायन श्रीवास्तव को प्रदान किया गया।कार्यक्रम के प्रथम चरण में डॉ. अनिल मिश्र ने ध्यान (Meditation)पर अपने विचार व्यक्त किये I एतदर्थ उन्होंने अपनी प्रस्तावना के बाद उपस्थित लोगों से उनकी…See More
May 22
डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव posted an event

ओबीओ, लखनऊ चैप्टर,लखनऊ at 37, रोहतास एन्क्लेव, निकट नील गिरि चौराहा, रवींद्र पल्ली

May 19, 2019 from 3pm to 6pm
डॉ.अशोक शर्मा द्वारा ‘सीता सोचती थी’ उपन्यास का अंश-पाठ और उस पर चर्चाएवं काव्यपाठ See More
May 10
डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव added a discussion to the group पुस्तक समीक्षा
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निकष पर -ःकिरण किरण रोशनी’            ::   डा. गोपाल नारायन श्रीवास्तव

 समीक्ष्य पुस्तक- किरण किरण रोशनी (कहानी संग्रह)लेखिका-रूबी शर्माप्रकाशन वर्ष- 2017 ई0प्रकाशक- नमन प्रकाशन, स्टेशन रोड, लखनऊ                ‘अब आप हैं ओैर ये कहानियाँ हैं’ यह कहकर लेखिका ने बड़ी ही विनम्रता से अपना संग्रह लोकार्पित किया है। इस संकलन में ‘शुभाशीष’ के अन्तर्गत प्रधान संपादक उत्तर प्रदेश, हिन्दी संस्थान ने कहा कि नयी पीढी के दस्तक को प्रोत्साहित किया जाना समय की माँग है । समय की माँग क्यों ?  यह तो हर काल में हर युग में वरिष्ठो का दायित्व रहा है । रहीम ने कितनी सुन्दर बात कही…See More
Apr 24
डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव posted discussions
Apr 19

Profile Information

Gender
Male
City State
LUCKNOW (UTTAR PRADESH)
Native Place
LUCKNOW
Profession
RETD. GOVT. SERVANT
About me
Ph.D. in Hindi Lit. AND ACTIVE IN CREATIVE HINDI LITERATURE

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डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव's Blog

प्रतीक्षा

एक लम्बी प्रतीक्षा के बाद

हुआ होगा मेरा जन्म

फिर एक दीर्घ प्रतीक्षा

और हुई होगी

मेरे बड़े होने की

और मेरे बड़े हो जाने पर

हो गया होगा उनकी 

सारी प्रतीक्षाओं का अंत

जिन्होंने मन्नतें माँगी होंगी

दुआयें की होंगी

उपवास रखे होंगे

मेरे आने की प्रतीक्षा में I  

(मौलिक /अप्रकाशित )

Posted on June 20, 2019 at 6:00pm — 8 Comments

उम्मीद का पेड़  (लघुकथा )

बूढ़े ने आँखें बंद किये-किये ही करवट ली I उसका ध्यान किचन से आती आवाज की ओर चला गया I

‘कैसा बना है ?’– बहू ने पूछा I

‘बहुत बढ़िया‘- बेटे ने कहा –‘थोड़ा चटनी और डालो I हाँ बस--बस I’

‘अच्छा लगा---? नमक ठीक पड़ा है न ?’

‘हाँ, बहुत मजेदार है I थोडा और कुरकुरा करो I’

‘जल जायेंगे ---‘

‘जलेंगे नहीं, बस थोड़ा लाल हो जाय I ‘- लडके ने उकसाया  I फिर जैसे उसे कुछ याद आया –‘पापा कहाँ हैं ?’

बूढ़े की आँखों में चमक आयी I कम से कम बेटे को तो उसकी फ़िक्र है I उसके…

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Posted on March 18, 2019 at 2:30pm — 7 Comments

बच्चा है तू (लघुकथा )

 न्याय के मंदिर की मेरी पहली परिक्रमा थी i कोर्ट के आदेश के अनुसार मुझे एक कर्मचारी की सैलरी कोर्ट में जमा करनी थी I मैं ठीक दस बजे चेक लेकर कोर्ट पहुंच गया I कैशियर साहब ग्यारह बजे आये और बोले –‘इसे स्टैंडिंग काउंसल से वेरीफाई करा के लाओ I’

स्टैंडिंग काउंसल ने डांट लगाई –‘हाउ यू डेयर कम डायरेक्टली टू मी I कम थ्रू माय आफिस I’  मैं आफिस गया I संबंधित बाबू सीट पर नहीं थे I वह एक घंटे बाद आये और आकर मोबाईल पर बतियाने लगे I दस मिनट बाद खाली हुए तो झुंझलाकर बोले- ‘क्या है…

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Posted on February 9, 2019 at 11:00pm — 4 Comments

कुम्भ स्नान (लघुकथा )

‘अरे राम-राम, संगम से इतनी दूर भी गंगा का किनारा साफ़ नहीं I सब ससुर किनारे में ही निपटान करत है i ऐसे में गंगा नहाय से का फायदा ? मगर हमरे घरैतिन के सिर पर तो कुम्भ सवार रहै I’- पंडित जी ने नाव वाले से कहा I नाव में कुछ और सवारियाँ भी थीं, परन्तु किसी का भी चेहरा धुंधलके और घने कुहरे के कारण साफ़ नजर नही आता था I

मल्लाह ने स्वीकार की मुद्रा में धीरे से ‘हूँ------‘ कहा और नाव खेने में मशगूल हो गया I    

‘इनका होश ही नाहीं i’– पंडिताइन ने ठंढी बयार से बचाने के लिए गोद में पड़े अपने…

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Posted on February 3, 2019 at 5:41pm — 3 Comments

Comment Wall (55 comments)

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At 7:06pm on October 30, 2017, Alok Rawat said…

आदरणीय डॉक्टर साहेब
आपके द्वारा रचित खंडकाव्य मेघदूत का कथानक पढ़ा .बड़ा साहसिक कदम उठाया है आपने .आपने मेरी जिज्ञासा बहुत बढ़ा दी है .पूरा मेघदूत पढ़ने के लिए मन लालायित हो उठा है . आशा करता हूँ की बहुत जल्दी आपका खंडकाव्य पढ़ने को मिलेगा .महाकवि कालिदास की रचना का हिंदी काव्यानुवाद कितना बड़ा कार्य है और इसके लिए कितनी हिम्मत चाहिए मैं समझ सकता हूँ .किन्तु आपने इस कार्य को पूर्ण करके सामान्य जनमानस को भी मेघदूत की जो सौगात भेंट की है उसके लिए हिंदी साहित्य सदैव आपका ऋणी रहेगा . आप ऐसे ही पुनीत कार्य करते रहें .हमारी शुभकामनाएं सदैव आपके साथ हैं .

At 9:17pm on June 27, 2016, Sulabh Agnihotri said…

स्वागत है आदरणीय !

At 7:02pm on January 3, 2016, Sushil Sarna said…

नूतन वर्ष 2016 आपको सपरिवार मंगलमय हो। मैं प्रभु से आपकी हर मनोकामना पूर्ण करने की कामना करता हूँ।

सुशील सरना

At 12:44pm on September 23, 2015, gaurav bhargava said…

वह अगले साल आएगा - इस वाक्य में कौन सा कारक है?
1)  कर्म कारक
2) अपादान कारक
3) अधिकरण कारक
4) सम्बन्ध कारक

At 6:35pm on August 6, 2015, Harash Mahajan said…

आदरणीय डा. गोपाल नारायण श्रीवास्तव जी कृतज्ञ हूँ सर !!

At 8:06pm on August 1, 2015, Prashant Priyadarshi said…

आ. गोपाल नारायन सर, ये घटना मेरे सामने की है(मेरे परम मित्र के साथ घटी हुई) इसीलिए मैंने इस पर लिखने का प्रयास किया है. एक प्रयास थी इस संवेदनशील मुद्दे पर लिखने की, काफ़ी कमियाँ रह गई हैं. सुधरा हुआ रूप निकट भविष्य में पुनः आप सभी श्रेष्ठ एवं गुणीजनों के समक्ष प्रस्तुत करूँगा. कहानी पर समय देकर मार्गदर्शन के लिए आपको कोटिशः धन्यवाद. आपके द्वारा इंगित किए गए बिन्दुओं  पर काम करके यह कहानी पुनः पोस्ट करूँगा.

At 12:16am on July 19, 2015, kanta roy said…
नतमस्तक हुई मै पाकर यह सम्मान , आदर में श्री माननीय डा. गोपाल नारायण श्रीवास्तव जी आपके साथ ही ओबीओ की भी करती हूँ गुणगान ।
At 9:23am on June 5, 2015, Manan Kumar singh said…

'

यही है कविता का मर्म

नियम नहीं, धर्म नहीं

बस केवल कर्म'.....आदरणीय गोपाल भाईजी, बहुत बढ़िया, कविता कर्म प्रधान हो यह लक्ष्य होना चाहिए, सादर। 

At 2:07pm on April 16, 2015, jaan' gorakhpuri said…

बहुत बहुत आभार! आदरणीय डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव सर! स्नेह बनाये रक्खे!

At 5:37pm on February 28, 2015, maharshi tripathi said…

आ. डॉ गोपाल नारायण जी ,,,कविता के इस मंच पर ,,अपना मित्र बनाकर  आपने  मुझे पुरस्कार  दिया ,,आपका हार्दिक आभार और आशा है ,यूँ ही हम छोटों को आशीष देते रहेंगे |

 
 
 

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