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Manan Kumar singh
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Manan Kumar singh commented on Manan Kumar singh's blog post गजल(रात क्या क्या गुनगुनाती...)
"तहे दिल से शुक्रिया आदरणीया डिंपल जी।"
Sep 2
Manan Kumar singh commented on Manan Kumar singh's blog post हवाओं के झोंके....(गजल)
"दिली आभार आदरणीया डिंपल जी।"
Sep 2
Dimple Sharma commented on Manan Kumar singh's blog post गजल(रात क्या क्या गुनगुनाती...)
"आदरणीय मनन कुमार सिंह जी नमस्ते खुबसूरत ग़ज़ल पर बधाई स्वीकार करें आदरणीय।"
Sep 2
Dimple Sharma commented on Manan Kumar singh's blog post हवाओं के झोंके....(गजल)
"आदरणीय मनन कुमार सिंह जी नमस्ते, खुबसूरत ग़ज़ल पर बधाई स्वीकार करें आदरणीय, ग़ज़ल का दुसरा शेर बहुत कमाल हुआ है।"
Sep 2
Manan Kumar singh replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-65 (विषय: "उम्मीद का दामन")
"स्त्री पुरुष के सम्बन्धों को उजागर करती इस लघुकथा में पुरुषों के प्रति अपेक्षा का कटुपन कुछ ज्यादा ही हावी है; बिलकुल बरदाश्त की सीमा से परे। पर उसके व्यवहार में, प्रकृति के दृश्यों/प्रतीकों के सामने आने या लाये जाने पर, जो अकस्मात परिवर्तन…"
Aug 31
Manan Kumar singh replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-65 (विषय: "उम्मीद का दामन")
"काफी लेकर आती हूँ...............फिर कैंसर    डॉक्टर      अस्पताल .................फिर तुरत  स्टेज पर बुलावा ..... घटनाओं में तारतम्य का अभाव लगा मुझे। खैर, अन्य सुधी जन अपने विचार रखेंगे इसपर। फिलवक्त सहभागिता हेतु बधाई…"
Aug 31
Manan Kumar singh replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-65 (विषय: "उम्मीद का दामन")
"विपरीत परिस्थिति में भी उम्मीद जिंदा है,पर कथोपकथन कुछ परस्पर जुड़ता हुआ नहीं लगता।  त्वरितता हावी है, व्याकरण जनित विचलनों पर ध्यान जरूरी है। लघुकथा हेतु बधाई आ॰ विभा जी।   "
Aug 31
Manan Kumar singh replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-65 (विषय: "उम्मीद का दामन")
"उम्मीदें कर्तव्य समर्थित हों, तो  सफलता मिलती ही है। लघुकथा हेतु बधाई आ॰ बबीता जी। "
Aug 31
Manan Kumar singh replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-65 (विषय: "उम्मीद का दामन")
"उम्मीदें जीवन का पर्याय हैं,यह सर्वविदित है।कुर्सी की अपनी उम्मीदें है कि कोई काबिल व्यक्ति उसपर आसीन हो,को उसकी मर्यादा को बरकरार भी रखे,और उससे (कुर्सी से) जुड़ी जवाबदेही का निर्वहन भी करे।उसपर बैठने वाले आदमी की मज़बूरी है कि वह उसपर बरकरार रहने…"
Aug 31
Manan Kumar singh replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-65 (विषय: "उम्मीद का दामन")
"प्रकृति भी यदा कदा मानवीय आकांक्षाओं की पूर्ति को दिशा दिया करती है।उम्मीद के धागे को परिणाम तक पहुंचाती कोरोना का चित्रण ।लघुकथा हेतु बधाई भाई तेजवीर जी।"
Aug 31
Manan Kumar singh replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-65 (विषय: "उम्मीद का दामन")
"ला इलाज बीमारी का इलाज मिल जाने की खुशी अपूर्व होती ही है। विषयानुरूप लघुकथा हेतु बधाई भाई तेजवीर जी।"
Aug 31
Manan Kumar singh replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-65 (विषय: "उम्मीद का दामन")
"आसरा मतदान चालू है।झगरु ने गाय  को चारा दिया।फिर सोचने लगा,जाकर वोट डाल आऊं।पर,किसे दूं?क्या लाला को जो जीतता है,और बेगारी भी कराता है। छठू साव की घरवाली को अपनी बाहरवाली बनाकर रखता है।चुनाव के समय कुछ पैसे, सरकारी दूकानों के राशन बंटवा देता…"
Aug 30
Manan Kumar singh commented on Manan Kumar singh's blog post हवाओं के झोंके....(गजल)
"आदरणीय अमीर जी,शुक्रिया एवं नमस्ते। आपके द्वारा की गई हौसला आफजाई मेरे लिए संबल है।"
Aug 30
अमीरुद्दीन 'अमीर' commented on Manan Kumar singh's blog post हवाओं के झोंके....(गजल)
"मुहतरम जनाब मनन कुमार सिंह जी आदाब, बहुत ख़ूब ग़ज़ल हुई है। दाद के साथ मुबारकबाद पेश करता हूँ। सादर।"
Aug 30
Manan Kumar singh posted a blog post

हवाओं के झोंके....(गजल)

122 122 122 12 हवाओं के' झोंके मचलने लगे,अदाओं के' आंचल सरकने लगे।1दबे दिल के' कोने में ' जो थे कभीपरत दर परत राज खुलने लगे।2बसाए फिरे जो जिगर में कभीहकीकत बताने से बचने लगे।3कहा था कभी, हम न होंगे जुदा,मिले ही कहां,अब वो ' कहने लगे।4नज़ाकत भरे थे जो लमहे कभी,शरारत जदा आज डंसने लगे।5"मौलिक व अप्रकाशित"@See More
Aug 29
Manan Kumar singh commented on Manan Kumar singh's blog post गजल(रात क्या क्या गुनगुनाती...)
"आदरणीय समर जी!आपका आभार। "सिलसिला है इक गजल भी  और चलती जा रही है।...""
Aug 29

Profile Information

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Male
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Mumbai
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हवाओं के झोंके....(गजल)

122 122 122 12

 हवाओं के' झोंके मचलने लगे,

अदाओं के' आंचल सरकने लगे।1

दबे दिल के' कोने में ' जो थे कभी
परत दर परत राज खुलने लगे।2

बसाए फिरे जो जिगर में कभी
हकीकत बताने से बचने लगे।3

कहा था कभी, हम न होंगे जुदा,
मिले ही कहां,अब वो ' कहने लगे।4

नज़ाकत भरे थे जो लमहे कभी,
शरारत जदा आज डंसने लगे।5

"मौलिक व अप्रकाशित"
@

Posted on August 29, 2020 at 4:36pm — 4 Comments

गजल(रात क्या क्या गुनगुनाती...)

2122  2122  212

रात क्या क्या गुनगुनाती रह गई

आपकी बस याद आती रह गई।1

सर्द मौसम हो गया कातिल बहुत

सांस अपनी सनसनाती रह गई।2

चांद में है दाग़,देखा आपने,

चांदनी यूं मुस्कुराती रह गई।3

सिलसिले सब याद में आते रहे

आरज़ू तो कुनमुनाती रह गई।4

गीत बनता लय पिरोकर,क्या कहूं?

बात दिल की ही लजाती रह गई।5

आंख हरदम जो बिछाती थी हवा,

इस दफा वह भाव खाती रह गई। 6

आशिया रौशन हुआ था बस…

Continue

Posted on August 22, 2020 at 9:44pm — 6 Comments

गजल(शायरी अब क्या रूठेगी...)

2122 2122 2122 212

शायरी अब क्या रूठेगी,सोचता हूं आजकल,

हो रही बुझती अंगीठी,सोचता हूं आजकल।1

शेर मुंहफट हो गए हैं,हर्फ लज्जित हो रहे,

शायरों की सांस फूली,सोचता हूं आजकल।2

मुंह चिढ़ातीं आज बहरें,खुल रहे हैं राज कुछ,

पिट रही कैसी मुनादी? सोचता हूं आजकल।3

राह अब अंधे दिखाते,झूठ ताना दे रहा,

हो रही सच की गवाही, सोचता हूं आजकल।4

शब्द सारे मौन लगते,अर्थ होता गौण है,

चल रही हैं गाली ' - ताली, सोचता हूं…

Continue

Posted on August 21, 2020 at 9:30am — 12 Comments

गजल(मूंदकर आंखें.....)

2122 2122 2122
मूंदकर आंखें अंधेरा वह कहेगा
भौंकना तारी नहीं वह चुप रहेगा।1

आदमी को बांटता है आदमी से
बर्फ की माफिक हमेशा वह ढहेगा।2

आप शीतल होइए, उसको नहीं गम
आग का दरिया बना वह, फिर बहेगा।3

नाज़ नखरे आपने उसके सहे हैं
जुंबिशें कुछ आपकी वह क्यूं सहेगा?4

खा रहा कबसे मलाई मुफ्त की वह
आपका मट्ठा अभी भी वह महेगा।5
"मौलिक व अप्रकाशित"

Posted on August 8, 2020 at 10:23am — 4 Comments

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At 12:51pm on January 23, 2020, TEJ VEER SINGH said…

जन्म दिन की हार्दिक बधाई एवम शुभ कामनायें आदरणीय मनन कुमार सिंह जी।

At 2:33pm on September 28, 2019, dandpani nahak said…
आदरणीय मनन कुमार सिंह जी आदाब बहुत शुक्रिया आपने समय निकाला और मेरा हौसला बढ़ाया मैं ह्रदय से शुक्रगुज़ार हूँ| बहुत शुक्रिया!
At 11:05pm on June 27, 2019, dandpani nahak said…
आदरणीय मनन कुमार सिंह जी बहुत शुक्रिया आपने जो हौसला बढ़ाया है
At 11:03pm on September 17, 2016,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…
आदरणीय
श्री मनन कुमार सिंह जी,
सादर अभिवादन,
यह बताते हुए मुझे बहुत ख़ुशी हो रही है कि ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार में विगत माह आपकी सक्रियता को देखते हुए OBO प्रबंधन ने आपको "महीने का सक्रिय सदस्य" (Active Member of the Month) घोषित किया है, बधाई स्वीकार करें | प्रशस्ति पत्र उपलब्ध कराने हेतु कृपया अपना पता एडमिन ओ बी ओ को उनके इ मेल admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध करा दें | ध्यान रहे मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई है |
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सादर ।
आपका
गणेश जी "बागी"
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक
ओपन बुक्स ऑनलाइन
At 8:47pm on May 24, 2015, kanta roy said…
स्वागत आपका दोस्त
At 5:20pm on April 12, 2015, Manan Kumar singh said…
आदरणीय गोपालजी, आपकी मित्रता मेरे लिए अमूल्य है।
At 8:29pm on April 7, 2015, डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव said…

आ0 मनन जी

आपकी मित्रता मेरा गौरव है . सादर .

 
 
 

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