For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

Chandresh Kumar Chhatlani
  • Male
  • Udaipur, Rajasthan
  • India
Share

Chandresh Kumar Chhatlani's Friends

  • KALPANA BHATT ('रौनक़')
  • Sheikh Shahzad Usmani
  • jaan' gorakhpuri
  • Archana Tripathi
  • डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव
  • Dr Babban Jee
  • Priyanka singh
  • डॉ नूतन डिमरी गैरोला
  • वेदिका
  • नादिर ख़ान
  • Dr.Prachi Singh
  • rajesh kumari
  • D.K.Nagaich 'Roshan'
  • Pankaj Trivedi
 

Chandresh Kumar Chhatlani! - A Programmer in Udaipur / Rajasthan / India

Latest Activity

Nita Kasar commented on Chandresh Kumar Chhatlani's blog post अस्वीकृत मृत्यु (लघुकथा)
"आज की जवलंत समस्या को बख़ूबी स्पस्ट किया है।आपने ।अपराध बोध ही ऐसे लोगों को कैसे चैन से रहने देगा ।कुल मिलाकर बेहतरीन कथा के लिये बधाई आद० चंद्रेश छतलानी जी।"
Aug 6
Sheikh Shahzad Usmani commented on Chandresh Kumar Chhatlani's blog post खोटा सिक्का (लघुकथा)
"अपने नज़रिए से स्वाभ्यास हेतु  अपने कुछ 'सामान्य पाठकीय' सुझाव पेश कर रहा हूँ। आशा है आदरणीय डॉ.  चन्द्रेश सर जी आपका मार्गदर्शन भी मिल सकेगा : 1- आरंभिक पंक्ति में  //उस सितारे की तीव्र तरंगदैर्ध्य वाली // वाक्यांंश…"
Aug 3
Sheikh Shahzad Usmani commented on Chandresh Kumar Chhatlani's blog post खोटा सिक्का (लघुकथा)
"ग्रहों और उपग्रहों के बीच सूर्य और पृथ्वी की  नियति और विधि-विधान/प्रकृति के विरुद्ध मानव की ग़ुस्ताख़ियां और वर्तमान में धरा और उसके आवरण की दुर्दशा को बाख़ूबी उभारती विचारोत्तेजक वास्तविक मानवेतर लघुकथा सृजन के लिए तहे दिल से बहुत-बहुत मुबारकबाद…"
Aug 3
Chandresh Kumar Chhatlani posted a blog post

खोटा सिक्का (लघुकथा)

"ये लो! मैं बुध ग्रह को जीत गया।" उस सितारे की तीव्र तरंगदैर्ध्य वाली खुशी से भरपूर ध्वनि से आसपास की आकाशगंगाएं गुंजायमान हो उठीं। सूदूर अंतरिक्ष में, जहाँ समय और विस्तार अनंत हैं, चार सितारे अपने ही प्रकार का जुआ खेल रहे थे। दांव पर लग रहे थे, उनके सौरमंडल के विभिन्न छोटे-बड़े ग्रह, उपग्रह, उल्कापिंड आदि। मनुष्यों से प्रेरित हो हमारा सूर्य भी उनमें से एक था। हालांकि उस समय उसका समय सही नहीं था। वह लगातार हार रहा था। शनि के वलय, मंगल का सबसे ऊंचा पर्वत, बृहस्पति का एक चन्द्रमा हारने के बाद उसने…See More
Aug 2
Chandresh Kumar Chhatlani commented on Chandresh Kumar Chhatlani's blog post अस्वीकृत मृत्यु (लघुकथा)
"बहुत-बहुत आभार आदरणीय ओम प्रकाश क्षत्रिय जी सर "
Aug 2
Omprakash Kshatriya commented on Chandresh Kumar Chhatlani's blog post अस्वीकृत मृत्यु (लघुकथा)
"बहुत सुंदर लघुकथा. कुछ अलग ही अंदाज़ में. हार्दिक बधाई"
Aug 1
babitagupta commented on Chandresh Kumar Chhatlani's blog post वैध बूचड़खाना (लघुकथा)
"बेहतरीन रचना द्वारा गौमाता को पूजने वाले देश में गाये  भूख के कारण पोलीथीन को आहार बना लेती हैं, चारागाह व्यवस्था पर सटीक कटाक्ष, हार्दिक बधाई स्वीकार कीजिएगा आदरणीय सर जी. "
Jul 9
Chandresh Kumar Chhatlani commented on Chandresh Kumar Chhatlani's blog post अस्वीकृत मृत्यु (लघुकथा)
"आप सभी आदरणीय सुधीजनों का रचना पर आकर प्रोत्साहित करने हेतु हृदय से आभारी हूँ... निवेदन है कि स्नेह बनाये रखें। सादर, "
Jul 4
Chetan Prakash commented on Chandresh Kumar Chhatlani's blog post अस्वीकृत मृत्यु (लघुकथा)
" Ek damdar laghu katha hai, Aswikrit Mrityuu', Chandresh Kumar Chhatlani sahab, meri Badhaai sweekar kare'n !"
Jul 3
Chandresh Kumar Chhatlani's blog post was featured

अस्वीकृत मृत्यु (लघुकथा)

अंतिम दर्शन हेतु उसके चेहरे पर रखा कपड़ा हटाते ही वहाँ खड़े लोग चौंक उठे। शव को पसीना आ रहा था और होंठ बुदबुदा रहे थे। यह देखकर अधिकतर लोग भयभीत हो भाग निकले, लेकिन परिवारजनों के साथ कुछ बहादुर लोग वहीँ रुके रहे। हालाँकि उनमें से भी किसी की हिम्मत नहीं हो रही थी कि शव के पास जा सकें। वहाँ दो वर्दीधारी पुलिस वाले भी खड़े थे, उनमें से एक बोला, "डॉक्टर ने चेक तो ठीक किया था? फांसी के इतने वक्त के बाद भी ज़िन्दा है क्या?"दूसरा धीमे कदमों से शव के पास गया, उसकी नाक पर अंगुली रखी और हैरत भरे स्वर में…See More
Jun 18
vijay nikore commented on Chandresh Kumar Chhatlani's blog post अस्वीकृत मृत्यु (लघुकथा)
"बहुत ही सुन्दर लघु कथा के लिए हार्दिक बधाई"
Jun 12
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on Chandresh Kumar Chhatlani's blog post अस्वीकृत मृत्यु (लघुकथा)
"बहुत ही संवेदनशील मार्मिक विषय को चुना है आपने आदरणीय और मुझे लगता है उसके साथ बखूबी न्याय किया..बधाई"
Jun 9
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Chandresh Kumar Chhatlani's blog post अस्वीकृत मृत्यु (लघुकथा)
"बहुत सुंदर कथा हार्दिक बधाई ।"
Jun 8
Mahendra Kumar commented on Chandresh Kumar Chhatlani's blog post अस्वीकृत मृत्यु (लघुकथा)
"क्या कोई पापी ऐसा भी हो सकता है जिसे नर्क में भी जगह न मिले? इस प्रश्न को केंद्र में रख कर एक सशक्त लघुकथा लिखी है आपने आदरणीय चंद्रेश कुमार छ्तलानी जी. शीर्षक भी एकदम सटीक है. मेरी तरफ़ से भी हार्दिक बधाई स्वीकार कीजिए. सादर."
Jun 8
Neelam Upadhyaya commented on Chandresh Kumar Chhatlani's blog post अस्वीकृत मृत्यु (लघुकथा)
"आदरणीय चंद्रेश जी, नमस्कार । समसामयिक विषय और सामाजिक सरोकार से भरपूर महत्वपूर्ण संदेश देती बहुत हे बेहतरीन लघुकथा । प्रस्तुति के हार्दिक बधाई ।"
Jun 8
babitagupta commented on Chandresh Kumar Chhatlani's blog post अस्वीकृत मृत्यु (लघुकथा)
"आदरणीय सर जी, बहुत ही सटीक वाक्यों में संदेश देती लघुकथा कि पापी को नरक में भी जगह नहीं है।हार्दिक बधाई।"
Jun 7

Profile Information

Gender
Male
City State
Udaipur Rajasthan
Native Place
Udaipur Rajasthan
Profession
Lecturer

Chandresh Kumar Chhatlani's Photos

  • Add Photos
  • View All

Chandresh Kumar Chhatlani's Blog

खोटा सिक्का (लघुकथा)

"ये लो! मैं बुध ग्रह को जीत गया।" उस सितारे की तीव्र तरंगदैर्ध्य वाली खुशी से भरपूर ध्वनि से आसपास की आकाशगंगाएं गुंजायमान हो उठीं।

 

सूदूर अंतरिक्ष में, जहाँ समय और विस्तार अनंत हैं, चार सितारे अपने ही प्रकार का जुआ खेल रहे थे। दांव पर लग रहे थे, उनके सौरमंडल के विभिन्न छोटे-बड़े ग्रह, उपग्रह, उल्कापिंड आदि। मनुष्यों से प्रेरित हो हमारा सूर्य भी उनमें से एक था। हालांकि उस समय उसका समय सही नहीं था। वह लगातार हार रहा था।

 

शनि के वलय, मंगल का सबसे ऊंचा पर्वत,…

Continue

Posted on August 2, 2018 at 7:00pm — 2 Comments

अस्वीकृत मृत्यु (लघुकथा)

अंतिम दर्शन हेतु उसके चेहरे पर रखा कपड़ा हटाते ही वहाँ खड़े लोग चौंक उठे। शव को पसीना आ रहा था और होंठ बुदबुदा रहे थे। यह देखकर अधिकतर लोग भयभीत हो भाग निकले, लेकिन परिवारजनों के साथ कुछ बहादुर लोग वहीँ रुके रहे। हालाँकि उनमें से भी किसी की हिम्मत नहीं हो रही थी कि शव के पास जा सकें। वहाँ दो वर्दीधारी पुलिस वाले भी खड़े थे, उनमें से एक बोला, "डॉक्टर ने चेक तो ठीक किया था? फांसी के इतने वक्त के बाद भी ज़िन्दा है क्या?"

दूसरा धीमे कदमों से शव के पास गया, उसकी नाक पर अंगुली रखी और…

Continue

Posted on June 6, 2018 at 6:00pm — 16 Comments

भेड़िया आया था (लघुकथा)

“भेड़िया आया... भेड़िया आया...” पहाड़ी से स्वर गूंजने लगा। सुनते ही चौपाल पर ताश खेल रहे कुछ लोग हँसने लगे। उनमें से एक अपनी हँसी दबाते हुए बोला, “लो! सूरज सिर पर चढ़ा भी नहीं और आज फिर भेड़िया आ गया।“

 

दूसरा भी अपनी हँसी पर नियंत्रण कर गंभीर होते हुए बोला, “उस लड़के को शायद पहाड़ी पर डर लगता है, इसलिए हमें बुलाने के लिए अटकलें भिड़ाता है।“

                                  

तीसरे ने विचारणीय मुद्रा में कहा, “हो सकता है... दिन ही कितने हुए हैं उसे आये हुए। आया था तब…

Continue

Posted on April 18, 2018 at 7:00pm — 10 Comments

शह की संतान (लघुकथा)

तेज़ चाल से चलते हुए काउंसलर और डॉक्टर दोनों ही लगभग एक साथ बाल सुधारगृह के कमरे में पहुंचे। वहां एक कोने में अकेला खड़ा वह लड़का दीवार थामे कांप रहा था। डॉक्टर ने उस लड़के के पास जाकर उसकी नब्ज़ जाँची, फिर ठीक है की मुद्रा में सिर हिलाकर काउंसलर से कहा, "शायद बहुत ज़्यादा डर गया है।"

 

काउंसलर के चेहरे पर चौंकने के भाव आये, अब वह उस लड़के के पास गया और उसके कंधे पर हाथ रख कर पूछा, "क्या हुआ तुम्हें?"

 

फटी हुई आँखों से उन दोनों को देखता हुआ वह लड़का कंधे पर हाथ का स्पर्श…

Continue

Posted on February 3, 2018 at 10:10pm — 10 Comments

Comment Wall (1 comment)

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

At 4:37pm on April 2, 2015, डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव said…

आपका स्वागत है मित्र

 
 
 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

mirza javed baig updated their profile
2 hours ago
अजय गुप्ता replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 88 in the group चित्र से काव्य तक
"उम्दा भाव और विचार के छंद. बधाई रक्ताले जी "
3 hours ago
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 88 in the group चित्र से काव्य तक
"कुण्डलिया छंद   सावन ने जल भर दिया, आया तीर समीप | नदिया फिर रानी बनी , निर्धन बने महीप…"
3 hours ago
अजय गुप्ता replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 88 in the group चित्र से काव्य तक
"उत्तम, दो कुंडलिया, दोनों में अलग अंदाज़ और रस. बेहद पसंद आये. बधाई "
3 hours ago
अजय गुप्ता replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 88 in the group चित्र से काव्य तक
"बुढ़ापे के साथी ------------------- गीत  (कुंडलिया+ताटंक+कुंडलिया+ताटंक) देख हमारी सब दशा,…"
3 hours ago
Mohammed Arif replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 88 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीया अनामिका जी आदाब,                    …"
3 hours ago
Mohammed Arif replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 88 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय छोटे लाल जी आदाब,                    …"
3 hours ago
Mohammed Arif replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 88 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय अखिलेश जी आदाब,                      …"
3 hours ago
Anamika singh Ana replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 88 in the group चित्र से काव्य तक
"कुण्डलिया - -------------- 1- बीवी नदिया घाट पर , बैठी धोये शर्ट ।  रगड़ -रगड़ कर हाथ से ,…"
4 hours ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 88 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीया प्रतिभा जी, आपकी दोनों प्रस्तुतियाँ चित्र को परिभाषित करती हुई तो हैं ही, इनमें सहज…"
5 hours ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey posted a blog post

नवगीत : जग-जगती में // -- सौरभ

आग जला कर जग-जगती की  धूनी तज करसाँसें लेलें ! खप्पर का तो सुख नश्वर है चलो मसानी रोटी बेलें !! जगत…See More
6 hours ago
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 88 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय अजयजी छंदों की प्रशंसा के लिए हृदय से धन्यवाद आभार।"
7 hours ago

© 2018   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service