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TEJ VEER SINGH
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Neelam Upadhyaya commented on TEJ VEER SINGH's blog post चक्रव्यूह - लघुकथा –
"आदरणीय तेजवीर सिंह जी, नमस्कार।  सम-सामयिक विषय पर बढ़िया प्रस्तुति।  बधाई स्वीकार करें। "
16 hours ago
TEJ VEER SINGH replied to Admin's discussion खुशियाँ और गम, ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार के संग...
"जन्म दिन की हार्दिक बधाई आदरणीय डॉ टी आर सुकुल जी।"
18 hours ago
TEJ VEER SINGH commented on TEJ VEER SINGH's blog post चक्रव्यूह - लघुकथा –
"हार्दिक आभार आदरणीय आशा जुगरान जी।"
yesterday
asha jugran commented on TEJ VEER SINGH's blog post चक्रव्यूह - लघुकथा –
"सामयिक घटनाओं को जोडती सुन्दर सर्जना.  "
Sunday
TEJ VEER SINGH commented on TEJ VEER SINGH's blog post चक्रव्यूह - लघुकथा –
"हार्दिक आभार आदरणीय शेख उस्मानी जी।"
Saturday
Sheikh Shahzad Usmani commented on TEJ VEER SINGH's blog post चक्रव्यूह - लघुकथा –
"बेहतरीन समापन के साथ बेहतरीन सृजन। हार्दिक बधाइयां आदरणीय तेजवीर सिंह साहिब।"
Friday
TEJ VEER SINGH commented on TEJ VEER SINGH's blog post चक्रव्यूह - लघुकथा –
"हार्दिक आभार आदरणीय समर क़बीर साहब जी।"
Friday
Samar kabeer commented on TEJ VEER SINGH's blog post चक्रव्यूह - लघुकथा –
"जनाब तेजवीर सिंह जी आदाब,अच्छी लघुकथा हुई है,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।"
Friday
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चक्रव्यूह - लघुकथा –

चक्रव्यूह - लघुकथा –"ए लड़की, क्या झाँक रही हो की होल से अंदर"?सरकारी शाँती बालिका कल्याण संस्थान की व्यस्थापक सुमित्रा देवी  गोमती को चोटी से पकड़ कर लगभग घसीटते हुए अपने कार्यालय ले गयीं। गोमती पीड़ा से बेचेन होकर छटपटा रही थी। वह लगातार रोये जा रही थी।“क्या ताक झाँक कर रही थी वहाँ”? सुमित्रा जी ने लाल आँखें दिखाते हुए पुनः वही प्रश्न दोहराया।"मैडम, मेरी  बहिन को  उस कमरे में एक सफ़ेद कुर्ता धोती वाला नेताओं जैसा आदमी पहले तो बहला फ़ुसला कर ले जाना चाह रहा था। बहिन के मना करने पर वह जबरदस्ती पकड़…See More
Friday
TEJ VEER SINGH commented on Sheikh Shahzad Usmani's blog post 'अभिव्यक्ति की आज़ादी' (लघुकथा)
"हार्दिक बधाई आदरणीय शेख उस्मानी साहब जी।बेहतरीन कटाक्ष पूर्ण लघुकथ। जमीनी हक़ीक़त यही है कि लोग अब भी उसे मुगल सराय ही बुलाते हैं।जैसे गुरुग्राम को आज भी गुड़गाँव कहते हैं।यह बदलाव सिर्फ़ कागजात में है जिसका आम जनता को कोई लाभ नहीं। केवल कुछ नेता अपनी…"
Aug 7
TEJ VEER SINGH commented on Tasdiq Ahmed Khan's blog post ग़ज़ल _ घर की बर्बादी के हालात नज़र आते हैं |0
"हार्दिक बधाई आदरणीय तस्दीक अहमद खान साहब जी।बेहतरीन गज़ल। जिनके वादों ने हसीं ख्वाब दिखाए मुझको उफ़ बदलते हुए वो बात नज़र आ ते हैं |"
Aug 7
TEJ VEER SINGH commented on Naveen Mani Tripathi's blog post ग़ज़ल
"हार्दिक बधाई आदरणीय नवीन मणि जी।बेहतरीन गज़ल। जो ठुकरा दिए थे मेरी बन्दगी को ।मेरे घर का वो भी पता ढूढते हैं ।।"
Aug 7
TEJ VEER SINGH commented on TEJ VEER SINGH's blog post मेरा घर - लघुकथा –
"हार्दिक आभार आदरणीय नीलम उपाध्याय जी।"
Aug 7
Neelam Upadhyaya commented on TEJ VEER SINGH's blog post मेरा घर - लघुकथा –
"आदरणीय तेजवीर सिंह जी, परिवार में स्त्री की स्थिति के यथार्थ को दर्शाती  अच्छी लघुकथा हुयी है।  प्रस्तुति के लिए बधाई। "
Aug 6
TEJ VEER SINGH commented on Naveen Mani Tripathi's blog post ग़ज़ल
"हार्दिक बधाई आदरणीय नवीन मणि जी।बेहतरीन गज़ल। इस तरह घूर के देखा है उन्होंने हमको। उनकी नजरों में हमारी ही ख़ता हो जैसे ।।"
Aug 5
TEJ VEER SINGH replied to Admin's discussion खुशियाँ और गम, ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार के संग...
"जन्म दिन की हार्दिक बधाई आदरणीय तस्दीक अहमद खान साहब जी।"
Aug 5

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चक्रव्यूह - लघुकथा –

चक्रव्यूह - लघुकथा –

"ए लड़की, क्या झाँक रही हो की होल से अंदर"?

सरकारी शाँती बालिका कल्याण संस्थान की व्यस्थापक सुमित्रा देवी  गोमती को चोटी से पकड़ कर लगभग घसीटते हुए अपने कार्यालय ले गयीं। गोमती पीड़ा से बेचेन होकर छटपटा रही थी। वह लगातार रोये जा रही थी।

“क्या ताक झाँक कर रही थी वहाँ”? सुमित्रा जी ने लाल आँखें दिखाते हुए पुनः वही प्रश्न दोहराया।

"मैडम, मेरी  बहिन को  उस कमरे में एक सफ़ेद कुर्ता धोती वाला नेताओं जैसा आदमी पहले तो बहला फ़ुसला कर ले जाना चाह रहा था।…

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Posted on August 10, 2018 at 12:40pm — 7 Comments

मेरा घर - लघुकथा –

मेरा घर - लघुकथा –

"हद हो गयी, अभी तीन दिन पहले ही साफ किया था  जाला। फिर बना लिया"।

कमला झाड़ू लेकर मकड़ी के जाले को जैसे ही साफ करने लगी।

मकड़ी गिड़गिड़ाते हुये बोली,"क्या बिगाड़ा है मैंने तुम्हारा। क्यों मेरा घर संसार उजाड़ रही हो"?

"अरे वाह, मेरे ही घर में बसेरा कर लिया और मुझे ही ज्ञान दे रही हो"।

"हर कोई किसी ना किसी पर आश्रित है। संसार की यही रीति है"।

"होगी, पर मुझे तो नहीं पसंद। और यह तुम्हारा घर संसार। क्या है इसमें? जीवन भर की क़ैद। उम्र भर…

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Posted on August 3, 2018 at 4:38pm — 8 Comments

सैलाब - लघुकथा

पिता के बार बार आग्रह करने पर रोहन उनके मित्र की इकलौती बेटी चेतना से एक बार मिलने को राजी हो गया। हालाँकि वह पिता से स्पष्ट कह चुका था कि यदि आपको चेतना पसंद है तो मुझे शादी मंजूर है| इसके बावज़ूद पिता की इच्छा थी कि रोहन एक बार चेतना से अवश्य मिले। शायद वे अकेले निर्णय करने से बचना चाहते थे।

चेतना दिल्ली में एम बी ए कर रही थी अतः हॉस्टल में रहती थी। उन दोनों ने रेस्त्रां में मिलना तय किया। औपचारिक मुलाक़ात के बाद मुद्दे की बात शुरू हुई। पहल चेतना ने की,

"क्या तुम एक बलात्कार…

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Posted on August 1, 2018 at 9:30am — 8 Comments

संताप - लघुकथा –

संताप - लघुकथा –

"माधव, मुझे शाँति चाहिये। मेरा मन बहुत व्याकुल है।इस युद्ध के लिये मेरी अंतरात्मा मुझे कचोट्ती है"?

"क्या हुआ अर्जुन, तुम इतने निर्बल कैसे हो गये"?

"मित्र, युद्ध की विनाश लीला मुझे धिक्कारती है? मेरी आँखों के सामने उस विनाश की समस्त वीभत्स घटनांयें एक सैलाब की तरह मेरे मस्तिष्क को घेरे रहती हैं। ऐसा प्रतीत होता है जैसे मेरे समूचे अस्तित्व को बहा ले जायेंगी और मुझे नेस्तनाबूद कर देंगी”?

“स्वयं को संभालो अर्जुन। तुम कायरों जैसा व्यवहार कर रहे…

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Posted on July 28, 2018 at 8:06pm — 10 Comments

Comment Wall (6 comments)

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At 1:42pm on July 28, 2018, Dr Ashutosh Mishra said…

आदरणीय तेजवीर जी आपकी लघु कथाओं का नियमित पाठक हूँ और इस विधा पर लिखने का प्रयास भी आप सबकी रचनाएँ पढ़कर करता हूँ / आपके मित्रों की सूची में शामिल होना मेरे लिए सुखद है सादर प्रणाम के साथ 

At 4:09pm on December 8, 2015, Sushil Sarna said…

आदरणीय तेजवीर सिंह जी माह के सक्रिय सदस्य के रूप में चयनित होने पर हार्दिक बधाई स्वीकार करें। 

At 8:19pm on December 4, 2015, kanta roy said…

वाह ! आदरणीय तेजवीर जी , गौरव का ये पल , आपका माह के सक्रीय सदस्य  चुने जाने के उपलक्ष्य में बहुत ख़ुशी महसूस हुई।  बधाई प्रेषित है।  

At 12:21pm on November 29, 2015, amod shrivastav (bindouri) said…
माह का सक्रिय सदस्य चुने जाने के लिए हार्दिक बधाई नमन सर
At 12:57pm on November 16, 2015,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीय

तेज वीर सिंह जी,
सादर अभिवादन,
यह बताते हुए मुझे बहुत ख़ुशी हो रही है कि ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार में विगत माह आपकी सक्रियता को देखते हुए OBO प्रबंधन ने आपको "महीने का सक्रिय सदस्य" (Active Member of the Month) घोषित किया है, बधाई स्वीकार करें | प्रशस्ति पत्र उपलब्ध कराने हेतु कृपया अपना पता एडमिन ओ बी ओ को उनके इ मेल admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध करा दें | ध्यान रहे मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई है |
हम सभी उम्मीद करते है कि आपका सहयोग इसी तरह से पूरे OBO परिवार को सदैव मिलता रहेगा |
सादर ।
आपका
गणेश जी "बागी"
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक
ओपन बुक्स ऑनलाइन

At 11:39pm on May 29, 2015,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

स्वागत अभिनन्दन 

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 ग़ज़ल की बातें 

 

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"आदरणीया नीलम उपाध्याय जी सृजन पर आपकी मन मुदित करती प्रशंसा का दिल से आभार।"
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"सुंदर गीत के लिए .दिल से बधाई  सादर"
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"धन्यवाद, नीलम जी!"
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"आदरणीया Neelam Upadhyaya जी हृदय से आभार आपका "
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बसंत कुमार शर्मा commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post गीत- प्यार के आगे
"आदरणीया Neelam Upadhyaya जी , आपका हृदय से आभार "
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बसंत कुमार शर्मा commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post गीत- प्यार के आगे
"आपकी उपस्थिति को सादर नमन आदरणीय Samar kabeer जी "
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Neelam Upadhyaya commented on Sushil Sarna's blog post गोधूलि की बेला में (लघु रचना ) ....
"आदरणीय सुशील सरना जी,   बहुत ही अच्छी रचना की प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें।  "
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Neelam Upadhyaya commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post गीत- प्यार के आगे
"आदरणीय बसंत कुमार जी,  बहुत ही सूंदर रचना हुई है ।   प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें।"
16 hours ago

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