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Archana Tripathi
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Archana Tripathi replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-51 (विषय: मुसाफिर)
"शुक्रिया वीर जी , अमूल्य समय निकालने और प्रेरणादायक प्रतिक्रिया देने के लिए"
Jun 30
Archana Tripathi replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-51 (विषय: मुसाफिर)
"हार्दिक धन्यवाद आ. बबिता जी "
Jun 30
Archana Tripathi replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-51 (विषय: मुसाफिर)
"हार्दिक धन्यवाद आ. समीर कबीर जी उत्साहवर्धक प्रतिक्रिया के लिए।"
Jun 30
Archana Tripathi replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-51 (विषय: मुसाफिर)
"कथा के एक महत्वपूर्ण बिंदु को आपने बखूबी पकड़ा हैं , हार्दिक धन्यवाद आ. ओमप्रकाश क्षत्रिय जी"
Jun 30
Archana Tripathi replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-51 (विषय: मुसाफिर)
"हार्दिक धन्यवाद आ. तेज वीर सिंह जी "
Jun 30
Archana Tripathi replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-51 (विषय: मुसाफिर)
"हार्दिक आभार आ. उस्मानी जी कथा पर अमूल्य समय देने के लिए"
Jun 30
Archana Tripathi replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-51 (विषय: मुसाफिर)
"अत्यंत मर्मस्पर्शी कथा , वाकई में शराब ना जाने कितने घरों को उजाड़ रही हैं ।हार्दिक बधाई विरेन्द्र वीर मेहता जी एक नन्ही बच्ची को मुस्कुराहट और एक मुसाफिर को सशक्त मंजिल पर पहुचाने के लिए।"
Jun 30
Archana Tripathi replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-51 (विषय: मुसाफिर)
"ओह ! जबरदस्त लघुकथा ओर जबरदस्त पंच।हार्दिक बधाई आ. तेजवीर सिंह जी "
Jun 30
Archana Tripathi replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-51 (विषय: मुसाफिर)
"जाने वाले कि जीवित रहते सही संस्कार नही मिले तो देहत्याग के पश्चात मिले या ना मिले क्या फर्क पड़ता हैं ।हार्दिक बधाई आपको "
Jun 30
Archana Tripathi replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-51 (विषय: मुसाफिर)
"आपने तो गीतों के शब्दों में हेरफेर को ही लघुकथा कह दिया ।क्या यह उचित स्वरूप हैं ? प्रस्तुति के लिए हार्दिक बधाई आपको आ . शेख शहजाद उस्मानी जी"
Jun 30
Archana Tripathi replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-51 (विषय: मुसाफिर)
"बढिया साहित्यिक कथा , लेकिन शीर्षक को परिभाषित नही कर पा रही हैं।प्रस्तुति के लिए हार्दिक बधाई आपको ।"
Jun 30
Archana Tripathi replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-51 (विषय: मुसाफिर)
"मजा आ गया पढ़ कर की, नारी नारी ही नही चिंगारी भी हैं। हार्दिक बधाई आपको आ. ओमप्रकाश क्षत्रिय जी टंकण की त्रुटियों का भी संज्ञान लीजिये। सादर "
Jun 30
Archana Tripathi replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-51 (विषय: मुसाफिर)
"यकीनन बबिता जी आज भी इस सोच वाले हमारे मध्य अपना अस्तित्व कायम किये हुए हैं।मर्मस्पर्शी कथा के लिए हार्दिक बधाई "
Jun 30
Archana Tripathi replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-51 (विषय: मुसाफिर)
"विषय मुसाफिर मंजिल दरवाजे पर सामना एक लड़के से हुआ निश्चित ही वह अक्षत था ,देखते ही कह उठा, " मैं पापा को बुलाता हूँ ।" निलय (पापा ) व्हील चेयर पर ही बाहर आये। उम्र होने के बावजूद तेज यूँ ही बरकरार था , " कैसे आना हुआ ? " सपाट से…"
Jun 30
Archana Tripathi posted a blog post

लघुकथा

प्रतिफलचन्द दिनों मे ही पर्याप्त नींद लेकर मैं स्वस्थ सी लगने लगी थी। उसमे करना भी कुछ ना था बस एकाग्रचित्त होकर मंत्र का मानसिक जाप करना था। आज पुनः उनके पास जाना था ।निलय किसी भी सूरत चलने को तैयार ना थे।दरअसल उन्हें विश्वास भी ना था इन बातों पर। मेरे अंदर की लालसा ने, कुछ धर्मगुरुओं द्वारा किये गलत आचरण को भी परे कर दिया था।" गुरुजी मेरे विवाह को दस वर्ष हो चुके हैं,लेकिन हम संतान सुख से वंचित हैं और इलाज कराते कराते थक गए हैं।"कुछ गणना के पश्चात , " आपको दवा, दुआ दोनो की आवश्यकता पड़ेगी।…See More
Jun 17
Archana Tripathi replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" स्वर्ण जयंती अंक-50
"प्रस्तुति के लिए हार्दीक बधाई आ. भूपिंदर कौर जी"
May 31

Profile Information

Gender
Female
City State
Tanakpur, Uttarakhand
Native Place
Allahabad
Profession
housewife
About me
चलना ही जिंदगी है।

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लघुकथा

प्रतिफल

चन्द दिनों मे ही पर्याप्त नींद लेकर मैं स्वस्थ सी लगने लगी थी। उसमे करना भी कुछ ना था बस एकाग्रचित्त होकर मंत्र का मानसिक जाप करना था। आज पुनः उनके पास जाना था ।निलय किसी भी सूरत चलने को तैयार ना थे।दरअसल उन्हें विश्वास भी ना था इन बातों पर। मेरे अंदर की लालसा ने, कुछ धर्मगुरुओं द्वारा किये गलत आचरण को भी परे कर दिया था।

" गुरुजी मेरे विवाह को दस वर्ष हो चुके हैं,लेकिन हम संतान सुख से वंचित हैं और इलाज कराते कराते थक गए हैं।"

कुछ गणना के पश्चात , " आपको दवा, दुआ…

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Posted on June 17, 2019 at 3:18am

औपचारिक्ता की दरकार

औपचारिक्ता की दरकार "

" पागलों की तरह भागते हुए लेक्चरर शिल्पी ने कॉलेज में आये उस नवयुवक को आलिंगन में यूँ जकड़ लिया जैसे वह भाग ना पाये।यह बात पुरे कालेज में जंगल में आग की तरह फैल गयी।जितने मुँह उतनी बातें और उतने ही लांछन!

अपने ऊपर लगते लांछनों ने उसे भीतर तक तोड़ दिया और आज तो उनकी पराकाष्ठा हो गयी थी ।लेकिन कभी-भी हार ना मानने वाली शिल्पी सभ्य सहयोगियों से दो-चार हो ली।



" मैं क्यों बदचलन आवारा हूँ कोई बताएगा मुझे ? क्योकि मैं सबसे हँसकर बात करती हूँ? क्योकि मैंने… Continue

Posted on February 18, 2016 at 3:34pm — 8 Comments

कंगली (लघुकथा )

साक्षी ने सारी सीमाएं विवाह पूर्व ही तोड़ दी थी ।विवश हो उसके प्रेम विवाह को सहमति देनी पड़ी लेकिन विवाह के मात्र आठ माह बाद तीन माह की पुत्री को लेकर लौट आयी थी । बिटिया तीन वर्ष की हो गयी थी ।साक्षी ने पुनः विवाह कर लिया बेटी ननिहाल में ही पल रही थी।इसी बात से संतोष था की वह ससुराल में रम जाय लेकिन -

" माँ अब मैं उस घर नहीं जाउंगी।"



"क्यों ? अब क्या हो गया ?"



"उसे पत्नी नहीं माँ के लिए नौकरानी चाहिए थी और वह तो पूरा कंगला हैं ,मैंने तो उसकी चमक देख ब्याह किया… Continue

Posted on October 27, 2015 at 11:52pm — 13 Comments

वंश वृद्धि (लघुकथा)

कवि सम्मेलन के आगाज़ के साथ ही नवांकुर कवि के कविता पाठ करते ही मरघट सा सन्नाटा पसर गया।बामुश्किल नामी कवी ने बात आगे बढ़ाते हुए कहा -

" इन्हें कलम चलानी तो आती नहीं फिर माहौल खराब करने के लिए यहाँ किसने आमन्त्रित किया हैं ?"

" अरे , शर्मा जी इन नवांकुरों को मैंने आमन्त्रित किया हैं ।इन्हें सिखाना भी तो जरुरी हैं।"

" ये केवल नाम बटोरना चाहते हैं ,लगन मेहनत से कोई वास्ता नहीं इनका।इन्हें मंच से हटाया जाय "

"शर्मा जी, ये हमे अपना आदर्श मानते हैं "

" तो हम ही मंच छोड़ देते…

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Posted on September 14, 2015 at 12:46am — 24 Comments

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At 11:04am on November 4, 2018, TEJ VEER SINGH said…

जन्म दिन की हार्दिक बधाई आदरणीय अर्चना त्रिपाठी जी।

At 6:31pm on August 23, 2015, brajesh kumar tripathi said…

Dhanyavad priy archana ji .Aapke sneh ke liye aabhari hain.kshama karengi,kyonki aaj mera vah computer khrab hai jispar Devnagari me likha ja sakta hai.

punah anekashah abhar.

 main samprati Faizabad Ayodhya me nivas kar raha hun.Allahabad bank se sewanivritt hua hun.

mera mob.9935802996,8576884809 hain

 brajesh kumar tripathi

 
 
 

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"जनाब नवीन मणि त्रिपाठी जी आदाब,ग़ज़ल का अच्छा प्रयास हुआ है,बधाई स्वीकार करें । 'नौकरी मत …"
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