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Dr. Chandresh Kumar Chhatlani
  • Male
  • Udaipur, Rajasthan
  • India
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Chandresh Kumar Chhatlani! - A Programmer in Udaipur / Rajasthan / India

Latest Activity

vijay nikore commented on Dr. Chandresh Kumar Chhatlani's blog post मेरे ज़रूरी काम / अतुकांत कविता / चंद्रेश कुमार छतलानी
"रचना अच्छी लगी। बधाई, मित्र चंद्रेश जी।"
Mar 5
Samar kabeer commented on Dr. Chandresh Kumar Chhatlani's blog post मेरे ज़रूरी काम / अतुकांत कविता / चंद्रेश कुमार छतलानी
"जनाब चंद्रेश जी आदाब,अच्छी रचना हुई है,बधाई स्वीकार करें ।"
Feb 28
Dr. Chandresh Kumar Chhatlani posted a blog post

मेरे ज़रूरी काम / अतुकांत कविता / चंद्रेश कुमार छतलानी

जिस रास्ते जाना नहींहर राही से उस रास्ते के बारे में पूछता जाता हूँ।मैं अपनी अहमियत ऐसे ही बढ़ाता हूँ। जिस घर का स्थापत्य पसंद नहींउस घर के दरवाज़े की घंटी बजाता हूँ।मैं अपनी अहमियत ऐसे ही बढ़ाता हूँ। कभी जो मैं करता हूं वह बेहतरीन हैवही कोई और करे - मूर्ख है - कह देता हूँ।मैं अपनी अहमियत ऐसे ही बढ़ाता हूँ। मुझे गर्व है अपने पर और अपने ही साथियों परकोई और हो उसे तो नीचा ही दिखाता हूँ।मैं अपनी अहमियत ऐसे ही बढ़ाता हूँ। मेरे कदमों के निशां पे है जो चलताउसे अपने हाथ पकड कर चलाता हूँ।मैं अपनी अहमियत ऐसे…See More
Feb 25
Dr. Chandresh Kumar Chhatlani commented on Manan Kumar singh's blog post कान और कांव कांव(लघुकथा)
"गजब की रचना। बहुत-बहुत बधाई इस सृजन हेतु।"
Feb 25
Dr. Chandresh Kumar Chhatlani updated their profile
Feb 25
Dr. Chandresh Kumar Chhatlani commented on Dr. Chandresh Kumar Chhatlani's blog post नए बीज / कविता
"रचना पसंद करने और अपनी टिप्पणी द्वारा मेरा उत्साहवर्धन करने हेतु बहुत-बहुत आभार आदरणीय  लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'  जी सर।"
Feb 18
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Dr. Chandresh Kumar Chhatlani's blog post नए बीज / कविता
"आ. भाई चंद्रेश जी, अच्छी कविता हुई है । हार्दिक बधाई । "
Feb 17
Dr. Chandresh Kumar Chhatlani commented on Dr. Chandresh Kumar Chhatlani's blog post नए बीज / कविता
"आदाब जनाब समर कबीर जी सर, कविता पर आकर मेरी हौसला अफ़ज़ाई करने के लिए दिली शुक्रिया आपका।"
Feb 17
Dr. Chandresh Kumar Chhatlani commented on Dr. Chandresh Kumar Chhatlani's blog post नए बीज / कविता
"रचना पसंद करने और अपनी टिप्पणी द्वारा मेरा उत्साहवर्धन करने हेतु बहुत-बहुत आभार आदरणीय तेजवीर सिंह जी सर।"
Feb 17
Samar kabeer commented on Dr. Chandresh Kumar Chhatlani's blog post नए बीज / कविता
"जनाब चंद्रेश जी आदाब,अच्छी कविता लिखी आपने,बधाई स्वीकार करें ।"
Feb 16
TEJ VEER SINGH commented on Dr. Chandresh Kumar Chhatlani's blog post नए बीज / कविता
"हार्दिक बधाई आदरणीय चंद्रेश जी। बेहतरीन कविता। काश! तुम साथ होते। हम बुहारते रहते एक-दूसरे के दिल में भरी मिट्टी। हम साथ ही सूंघते स्वप्न-पुष्पों की सुगंध भी। खैर, अब तुम्हारे भी ख्वाब बदल गये और मेरे भी।"
Feb 15
Dr. Chandresh Kumar Chhatlani posted a blog post

नए बीज / कविता

कुछ ख्वाबों के बीज लाकरमैंने दिल के गमले में बोये थे।पसीने का पानी पिलाकरपौधे भी उगा दिये।वो बात और है किगमले की मिट्टी मेरे दिल में भर गई।और दिल भर देख भी नहीं पायामैं उन पौधों को - उसके फूलों को।क्योंकि मैं अकेला था...काश! तुम साथ होते।हम बुहारते रहते एक-दूसरे के दिल में भरी मिट्टी।हम साथ ही सूंघते स्वप्न-पुष्पों की सुगंध भी।खैर, अब तुम्हारे भी ख्वाब बदल गयेऔर मेरे भी।मैं नए बीज ले आया हूँ,नए गमले में बो रहा हूँ।स्वप्न-पुष्पों की महक से परहेज़ के साथ-साथ,डॉक्टर ने मुझे बिना मिट्टी के गमलों का…See More
Feb 13
Dr. Chandresh Kumar Chhatlani replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-55 (विषय: घर संसार)
"गंभीर विषय पर सृजित इस रचना हेतु सादर बधाई स्वीकार करें आदरणीया कल्पना दी। बेहतरीन संवादों ने इस रचना पर चार चाँद लगा दिए हैं। अंत और मध्य में रचना के प्रस्तुतिकरण में थोड़े से और बेहतर होने की गुंजाइश है। हालाँकि शीर्षक वैसे भी अच्छा ही है, लेकिन…"
Oct 30, 2019
Dr. Chandresh Kumar Chhatlani replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-55 (विषय: घर संसार)
"समाज की सही तस्वीर दिखाई है आपने आदरणीय शेख शहज़ाद उस्मानी जी साहिब। सेल्फी के चरणों का प्रयोग भी उत्तम है। इस सृजन हेतु हार्दिक बधाई स्वीकार करें। रचना थोड़ी सी कसावट और मांग रही है।"
Oct 30, 2019
Dr. Chandresh Kumar Chhatlani replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-55 (विषय: घर संसार)
"दोनों भाइयों की अपनी-अपनी परेशानी। विषय ज़रूर पुराना है लेकिन प्रस्तुतिकरण के अंत में जो बात बड़ा भाई स्पष्ट कह रहा है, वह एक वर्ग की परेशानी की तरफ इंगित कर रहा है, जिस पर सृजन आवश्यक प्रतीत होता है।  सादर बधाई स्वीकार करें आदरणीय तेजवीर सिंह जी…"
Oct 30, 2019
Dr. Chandresh Kumar Chhatlani replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-55 (विषय: घर संसार)
"बहुत ही बढ़िया रचना कही है अजय गुप्ता जी। खास तौर पर अंतिम पंक्ति पढ़ते ही रचना का मर्म जैसे ही समझ में आता है, वह सराहनीय है। सादर बधाई स्वीकार करें, इस सृजन हेतु।"
Oct 30, 2019

Profile Information

Gender
Male
City State
Udaipur Rajasthan
Native Place
Udaipur Rajasthan
Profession
Lecturer

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Dr. Chandresh Kumar Chhatlani's Blog

मेरे ज़रूरी काम / अतुकांत कविता / चंद्रेश कुमार छतलानी

जिस रास्ते जाना नहीं

हर राही से उस रास्ते के बारे में पूछता जाता हूँ।

मैं अपनी अहमियत ऐसे ही बढ़ाता हूँ।

 

जिस घर का स्थापत्य पसंद नहीं

उस घर के दरवाज़े की घंटी बजाता हूँ।

मैं अपनी अहमियत ऐसे ही बढ़ाता हूँ।

 

कभी जो मैं करता हूं वह बेहतरीन है

वही कोई और करे - मूर्ख है - कह देता हूँ।

मैं अपनी अहमियत ऐसे ही बढ़ाता हूँ।

 

मुझे गर्व है अपने पर और अपने ही साथियों पर

कोई और हो उसे तो नीचा ही दिखाता…

Continue

Posted on February 25, 2020 at 12:40pm — 2 Comments

नए बीज / कविता

कुछ ख्वाबों के बीज लाकर

मैंने दिल के गमले में बोये थे।

पसीने का पानी पिलाकर

पौधे भी उगा दिये।

वो बात और है कि

गमले की मिट्टी मेरे दिल में भर गई।

और दिल भर देख भी नहीं…

Continue

Posted on February 13, 2020 at 1:38pm — 6 Comments

आपका दिन (लघुकथा)

"मैं केक नहीं काटूँगी।" उसने यह शब्द कहे तो थे सहज अंदाज में, लेकिन सुनते ही पूरे घर में झिलमिलाती रोशनी ज्यों गतिहीन सी हो गयी। उसका अठारहवाँ जन्मदिन मना रहे परिवारजनों, दोस्तों, आस-पड़ौसियों और नाते-रिश्तेदारों की आँखें अंगदी पैर की तरह ताज्जुब से उसके चेहरे पर स्थित हो गयीं थी।

वह सहज स्वर में ही आगे बोली, "अब मैं बड़ी हो गयी हूँ, इसलिए सॉलिड वर्ड्स में यह कह सकती हूँ कि अब से यह केक मैं नहीं मेरी मॉम काटेगी।" कहते हुए उसके होठों पर मुस्कुराहट तैर गयी।

वहाँ खड़े अन्य सभी के…

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Posted on July 8, 2019 at 1:00pm — 3 Comments

पत्ता परिवर्तन / लघुकथा

वह ताश की एक गड्डी हाथ में लिए घर के अंदर चुपचाप बैठा था कि बाहर दरवाज़े पर दस्तक हुई। उसने दरवाज़ा खोला तो देखा कि बाहर कुर्ता-पजामाधारी ताश का एक जाना-पहचाना पत्ता फड़फड़ा रहा था। उस ताश के पत्ते के पीछे बहुत सारे इंसान तख्ते लिए खड़े थे। उन तख्तों पर लिखा था, "यही है आपका इक्का, जो आपको हर खेल जितवाएगा।"

 

वह जानता था कि यह पत्ता इक्का नहीं है। वह खीज गया, फिर भी पत्ते से उसने संयत स्वर में पूछा, "कल तक तो तुम अपनी गड्डी छोड़ गद्दी पर बैठे थे, आज इस खुली सड़क में फड़फड़ा…

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Posted on April 23, 2019 at 10:20pm — 3 Comments

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At 10:20pm on October 15, 2018, Sheikh Shahzad Usmani said…

आदाब।

आपकी अद्वितीय लघुकथा ''सत्यव्रत" भी मंच पर "फ़ीचर" किये जाने पर तहे दिल से बहुत-बहुत मुबारकबाद मुहतरम जनाब डॉ. चन्द्रेश कुमार छतलानी  साहिब।

At 4:37pm on April 2, 2015, डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव said…

आपका स्वागत है मित्र

 
 
 

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