For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

All Blog Posts (19,179)

चाहत

मेरी चाहत जवां होती है

तेरी हां के इंतजार में

तेरा आना, तेरा जाना

कर देता है बेकरार

मेरी चाहत जवां होती है

तेरी हां के इंतजार में

दिन पर दिन

रात दर रात

गुजरती जा रही

आंखों से नींद

दिल से चैन

गायब हो जाते रहे

अब तो हाल यह है कि

मेरी चाहत भी

मुर्दा होती…

Continue

Added by Harish Bhatt on March 20, 2012 at 11:31am — 3 Comments

प्रतिष्ठा (लघु-कहानी)

जवाहरात व्यवसायी रामकिशन ने अपनी पढ़ी लिखी लड़की सोनाली के लिए अच्छा वर

तलाशने हेतु पांच सितारा होटल में उच्च घर्राने के कई लडके देखने के बाद, आखिरकार  सम्भ्रान्त परिवार के ही डा. राजवंशी के पौत्र एवं योगेश के पुत्र सौरभ के साथ सम्बन्ध तय किया |विवाह में शान-ओ-शौकत में काफी खर्चा किया एवं दहेज़ में भी जेवरात एवं…
Continue

Added by लक्ष्मण रामानुज लडीवाला on March 20, 2012 at 10:00am — 1 Comment

नन्ही लेखिका अक्षिता राष्ट्रीय बाल पुरस्कार लेते हुए

 
ढेर सारा प्यार,बधाई और शुभ् कामनाए
   





"दि. २४ नव. २०११. इंटरनेट पर हिन्दी की सबसे नन्ही लेखिका को भारत सरकार ने राष्ट्रीय बाल पुरस्कार से 
सम्मानित किया है. संभवतः ये पहला मौक़ा है जब भारत सरकार ने किसी प्रतिभा को हिन्दी के चिट्ठे के लिए 
सम्मानित किया है. ये सम्मान…
Continue

Added by लक्ष्मण रामानुज लडीवाला on March 20, 2012 at 9:30am — 6 Comments

मेरी जिंदगी

मेरी जिंदगी एक खुली किताब है

हर पन्ने पे तेरा नाम है ।

मैं रहूँ न रहूँ ,परवाह नहीं है

जिंदगी मेरी तुम्हारे नाम है ।

 

जब कभी ख्यालों की आँधी उठेगी

तन्हाई में मेरी आवाज़ गूँजेगी

परछाईं बनकर…

Continue

Added by kavita vikas on March 19, 2012 at 10:00pm — 5 Comments


मुख्य प्रबंधक
लघु कथा : हाथी के दांत

लघु कथा : हाथी के दांत 

बड़े बाबू आज अपेक्षाकृत कुछ जल्द ही कार्यालय आ गए और सभी सहकर्मियों को रामदीन दफ्तरी के असामयिक निधन की खबर सुना रहे थे. थोड़ी ही देर में सभी सहकर्मियों के साथ साहब के कक्ष में जाकर बड़े बाबू इस दुखद खबर की जानकारी देते है और शोक सभा आयोजित कर कार्यालय आज के लिए बंद करने की घोषणा हो जाती है | सभी कार्यालय कर्मी इस आसमयिक दुःख से व्यथित होकर अपने अपने घर चल पड़ते  है | बड़े बाबू…

Continue

Added by Er. Ganesh Jee "Bagi" on March 19, 2012 at 9:03pm — 68 Comments

सेनानी

बचपन बीता खेलों में 
माँ के सुन्दर सुन्दर गीतों में 
मन मयूर  मचलता फिरता  गलियन में 
भौंरा बन मंडराता छुप जाता  कलियन में 
गावों की नागिन सी  पग डंडियाँ 
बलखाती जा मिली जब हसीं शहरों से 
प्रेम रंग में डूब गया जा टकराया लहरों से 
कुछ मीत यहाँ कुछ मीत वहां 
कुछ साथ रहे  कुछ बिछड  गए 
हमने देखा  उसने पहचाना 
वादा था जीवन साथ निभाना 
वादे करते वो आईने…
Continue

Added by PRADEEP KUMAR SINGH KUSHWAHA on March 18, 2012 at 10:00pm — 15 Comments

इश्क़

इश्क़ की बात चली

रात आँखों में जली

————

मौजूदगी तेरी हर लम्हा मौजूद रहे

तू साथ हो न हो, साथ बावजूद रहे

ख़यालों में गुज़रा ये दिन सारा

शाम यादों में ढली

इश्क़ की बात चली..

————…

Continue

Added by संदीप द्विवेदी 'वाहिद काशीवासी' on March 18, 2012 at 5:57pm — 22 Comments

कविता- डाक्टर

डाक्टर 

 

मरीजों की भीड़ को-

डाक्टर झट-पट ऐसे निपटाता रहा,

बगैर गर्दन उठाये-

मरीज का हांल-चाल कुछ सुनता रहा

मरीज दर्द से कराहता रहा-…

Continue

Added by लक्ष्मण रामानुज लडीवाला on March 18, 2012 at 3:00pm — 5 Comments

बेबसी

रात्रि का अंतिम प्रहर घूम रहा तनहा कहाँ

थी ये वो जगह आना न चाहे कोई यहाँ

हर तरफ छाया मौत का अजीब सा मंजर हुआ

घनघोर तम देख साँसे थमी हर तरफ था फैला धुआं

नजर पड़ी देखा पड़ा मासूम शिशु शव था

हुआ जो अब पराया वो अपना कब था

कौंधती बिजलियाँ सावन सी थी लगी झड़ी

कौन है किसका लाल है देख लूं दिल की धड़कन बढ़ी

देखा तनहा उसे सर झुकाए समझ गया कि उसकी दुनिया लुटी

जल रही थी चिताएं आस पास ले रही थी वो सिसकियाँ घुटी घुटी

देती कफ़न क्या कैसे…

Continue

Added by PRADEEP KUMAR SINGH KUSHWAHA on March 17, 2012 at 10:00pm — 26 Comments

गजल

वो खुद में इतना सिमटे-सिमटे थे
जैसे वो दिल को पकड़े-पकड़े थे |


उनको देख हुए थे बेसुध हम तो
क्या बात करें अब मुखड़े, मुखड़े थे |…
Continue

Added by dilbag virk on March 17, 2012 at 7:28pm — 12 Comments

जिंदगी ले के चली

जिंदगी ले के चली, एक ऐसी डगर,

राह के उस पार, चलते हैं हम सफ़र. 



रात और दिन, मील के पत्थर जैसे हैं,

मोड़ बन जाते कभी, हैं चारों पहर.

  

फादना पड़ता है, दीवारें अनवरत,

ढूँढना चाहूँ मै, 'उसको' जब भी अगर.

 

शख्शियत में नये, बदलता हूँ धीरे से,

नये चेहरे मिले और, नये से राही जिधर.



द्वार-मंदिर मिले न मिले, पर चाहतें,

बांहों में ही भींचे रहती हैं, ता-उमर.



जिंदगी में लेने आता, एक बार पर-

बैठती हूँ रोज, 'बस्तीवी'…

Continue

Added by राकेश त्रिपाठी 'बस्तीवी' on March 17, 2012 at 9:07am — 13 Comments

मन का चन्दन

मन का चन्दन महक उठता है…

Continue

Added by RAJEEV KUMAR JHA on March 17, 2012 at 9:00am — 9 Comments

एक पैग (कहानी)

बटेश्वरनाथ गाँव के सबसे बड़े आदमी हैं। भगवान का दिया हुआ सबकुछ है उनके पास। माता पिता अभी सलामत हैं। दो लड़के और एक लड़की भी है। बड़ा लड़का गटारीनाथ ८ साल का है। लड़की सुनयनी ६ साल की और सबसे छोटा लड़का मेहुल नाथ अभी ३ साल का है जिसे प्यार से सब मेल्हू कहते हैं।

 बटेश्वरनाथ के पिता कोई ३ साल पहले रिटायरमेन्ट लिये थे जब मेल्हू का जन्म हुआ था। रिटायरमेन्ट के समय खूब सारा पैसा भी मिला था। ये लोग खानदानी रईस भी थे। बटुकनाथ के पिता बहुत सारा पैसा छोड़ गये थे। इनके परिवार की खूबियाँ बहुत…

Continue

Added by आशीष यादव on March 17, 2012 at 9:00am — 16 Comments

जब तुम रहते हो पास मेरे

जब तुम रहते हो पास मेरे,

जग भरा भरा सा लगता है।

व्याकुल करती गर्मी के ऋतु में,

मलय समीर बहा लगता है।



चिलचिल करती कड़क धूप में,

बरगद का छांव मिला लगता है।

बारिस के मौसम में सिर पर,

मजबूत एक छत टिका लगता है।



कई दिनों से प्यासे मुख में,

शीतल नीर पड़ा लगता है।

कई दिनों से भूखे जन को,

मधुर भोज्य मिला लगता है।



एक अंधेरी अंजान गुफा में,

प्रकाश पुंज खिला लगता है।

कई जन्म से बिछड़ा प्रेमी,

इस जन्म में मिला लगता… Continue

Added by विन्ध्येश्वरी प्रसाद त्रिपाठी on March 16, 2012 at 10:29pm — 11 Comments

जरा देखें

खामोश इन निगाहों का इश्तिहार जरा देखें।
टूटे हुए दिलों के पुकार जरा देखें॥
जरूरी नहीं जरूरतमंद की जरूरत पुरी हो।
जरूरत से ज्यादा लम्बी कतार जरा देखें॥
घनानन्द यहां मरता है हरवक्त प्यार में।
मगर सुजान का मौसमी प्यार जरा देखें॥
हर सूं यहां कुबेर का दबदबा बना हुआ है।
और दवताओं के पुरअसरार जरा देखें॥
इस दुनिया में जीने से मर जाना भला है।
पटे मौत की खबर से अखबार जरा देखें॥
दोस्त गर जीने की चाहत अभी बची है।
इकबार चलो चांद के उस पार जरा देखें॥

Added by विन्ध्येश्वरी प्रसाद त्रिपाठी on March 16, 2012 at 9:30pm — 8 Comments

वो आंखें

खिला धूप चेहरा मदमाती वो आंखें।

सुर्ख से अधर, पर शर्माती वो आंखें॥

.

देखूं जो नजर भर चुराती वो आंखें।

हटे जो नजर तो बल खाती वो आंखें॥

.

लगे दर्द दिल में छुपाती वो आंखें।

छुपे राजे दिल को बताती वो आंखे॥

.

क्यों ही न जाने दिल जलाती वो आंखें।

बहा अश्क फिर से बुझाती वो आंखें॥

.

सब्र के अब्र को छेद जाती वो आंखें।

अब्र से आब ले बरसाती वो आंखें॥

.

सुनो दोस्त मेरे मदमाती वो…

Continue

Added by विन्ध्येश्वरी प्रसाद त्रिपाठी on March 16, 2012 at 9:30pm — 9 Comments

गज़ल........उनको हवा नाम दूँ जाने मैं क्या करूँ .............

गज़ल........उनको हवा नाम दूँ जाने मैं क्या करूँ .............

   वो दूर हैं आज यूँ जाने मैं क्या करूँ

  वो मूक हैं आज क्यूँ जाने मैं…

Continue

Added by Atendra Kumar Singh "Ravi" on March 16, 2012 at 1:21pm — 15 Comments

शिक़ायत

शिक़ायत

मेरे दिल के कुछ कांटे
मेरे साथ रहे और चुभते रहे
वोह मुझको छलनी करते रहे
हम उनकी हिफाज़त करते रहे
अपना गुनाह बस इतना था
हम उनको अपना कह बैठे
वह हमसे नफरत करते रहे
हम उनसे मुहब्बत करते रहे
हम दीपक थे जलना ही था
पर वफ़ा की आग में जलते रहे
वह समझ न पाए प्यार मेरा
दुनियाँ से शिक़ायत करते रहे

दीपक शर्मा 'कुल्लुवी'
9350078399
१६.०३.१२.

Added by Deepak Sharma Kuluvi on March 16, 2012 at 11:46am — 9 Comments

बस!

बस! 
-----

कभी 

प्यादों सी
बेबसी को
जीता!
कभी
ढाई -घर 
उछलती 
अश्व -शक्ति के
जोश में
उफनता!
कभी 
ऊँट की
आडी -तिरछी
तिरपट-चालों का
नशा ढोता !
कभी
कोने में बैठे
हाथी की
कुंद होती
बुद्धिमत्ता का
अहसास झेलता!
कभी
मंत्री…
Continue

Added by AVINASH S BAGDE on March 16, 2012 at 10:25am — 16 Comments

आशा

दूर क्षितिज प्राची की लाली ,

अरे बावरी ओ मतवारी ,

उस पल को तूँ विस्मृत कर दे ,

जीवन मे विष को जो भर दे ,

इंद्रव्रज्या नही  बन दधीचि तूँ ,

परम दंभ का ना बन प्रतीक तूँ ,

कण्ठ गरल मुख पर मुस्कान…

Continue

Added by अश्विनी कुमार on March 16, 2012 at 10:00am — 8 Comments

Monthly Archives

2026

2025

2024

2023

2022

2021

2020

2019

2018

2017

2016

2015

2014

2013

2012

2011

2010

1999

1970

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
" सादर नमस्कार आदरणीय मंच। कुछ अन्य सुझाव: 1- सदस्यों से सहयोग राशि एकत्रित कर ओबीओ की पत्रिका…"
1 hour ago
आशीष यादव replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"अच्छा सुझाव"
3 hours ago
Gajendra shrotriya replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"प्रतिष्ठित मंच के सभी सम्माननीय सदस्यों को सादर प्रणाम🙏ओ बी ओ परिवार के समक्ष बनी इस विषम परिस्थिति…"
16 hours ago
Manjeet kaur replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"ओ बी ओ मंच से बहुत कुछ सीखने को मिला इसके बंद होने की खबर दुखद और पीड़ादाई लगी। अजय गुप्ता जी की…"
yesterday
Manjeet kaur commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post रहना हो भारत में जिंदा, चुप रहिए (ग़ज़ल)
"धर्मेंद्र कुमार जी आज के मुश्किल दौर में इतना जिगरा ! यथार्थ और सटीक वर्णन के लिए बहुत बहुत बधाई"
yesterday
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा सप्तक. . . .मंच

दोहा सप्तक. . . . . मंचअभिनय करते मंच पर, माटी के किरदार ।जीवन की अनुभूतियाँ, करते वो साकार ।।यह जग…See More
yesterday
धर्मेन्द्र कुमार सिंह posted a blog post

रहना हो भारत में जिंदा, चुप रहिए (ग़ज़ल)

बह्र: 22 22 22 22 22 2 रहना हो भारत में जिंदा, चुप रहिएजंगल का कानून है पहला, चुप रहिएमँहगाई से…See More
yesterday
रोहित डोबरियाल "मल्हार" posted a blog post

दास्तां

एक हो दास्तां तो सुनाएं,लंबी है कहानी, फिर कभी।मिले थे जिस जगह इक उम्र पहले,वो धुंधली सी निशानी,…See More
yesterday
Awanish Dhar Dvivedi posted a blog post

समय

समय को दोष देना क्यूँ समय जीना सिखाता है समय की गति सुनिश्चित है समय ही तो विधाता है।। समय का खेल…See More
yesterday
धर्मेन्द्र कुमार सिंह commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post देश की बदक़िस्मती थी चार व्यापारी मिले (ग़ज़ल)
"बहुत बहुत शुक्रिया आदरणीय सौरभ जी"
yesterday
आशीष यादव replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"उम्मीद है कि इस पटल से संबंधित कोई अच्छी खबर आएगी।"
Friday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post देश की बदक़िस्मती थी चार व्यापारी मिले (ग़ज़ल)
"इस सुंदर बुनावट और कहन पर आज नजर पड़ी, आदरणीय धर्मेन्द्र जी.  हार्दिक बधाई   "
May 25

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service