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इश्क़ की बात चली
रात आँखों में जली

————
मौजूदगी तेरी हर लम्हा मौजूद रहे
तू साथ हो न हो, साथ बावजूद रहे
ख़यालों में गुज़रा ये दिन सारा
शाम यादों में ढली
इश्क़ की बात चली..

————
एक तमन्ना थी इस दिल में भी
आएंगे वो दिल की महफ़िल में भी
बन सकी न फूल तमन्ना की
थी जो मासूम कली
इश्क़ की बात चली..
————

मैं भटकना भी जो चाहूँ तो कहाँ जाऊँगा
हर सू, हर शै में तुझे ही पाऊँगा
बढ़ जाएँ क़दम उस जानिब जो हैं
तेरा कूचा-ओ-गली
इश्क़ की बात चली..
————
सिर्फ़ एक बार मुख़ातिब हुई आवाज़ तेरी
है बड़ी यादगार मेरे लिए एक वो घड़ी
ज़हन में उतर गई इतनी मीठी
जैसे मिसरी की डली
इश्क़ की बात चली..

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Comment by संदीप द्विवेदी 'वाहिद काशीवासी' on April 16, 2012 at 3:52pm

बड़े भईया,

आपकी प्रशंसा सदैव ही अपना अलग स्थान रखती है| आभार आपका,

Comment by Abhinav Arun on April 16, 2012 at 2:52pm

इश्क़ की बात चली
रात आँखों में जली

क्या बात बहुत बहुत खूबसूरत तरीक से कही गयी रचना वाह वाह !!! संदीप जी हार्दिक बधाइयाँ आपको !!

Comment by संदीप द्विवेदी 'वाहिद काशीवासी' on April 16, 2012 at 2:15pm

हार्दिक आभार महिमा जी! :))

Comment by MAHIMA SHREE on April 11, 2012 at 3:37pm
मैं भटकना भी जो चाहूँ तो कहाँ जाऊँगा
हर सू, हर शै में तुझे ही पाऊँगा
बढ़ जाएँ क़दम उस जानिब जो हैं
तेरा कूचा-ओ-गली
इश्क़ की बात चली..
वाहिद साहब नमस्कार क्या कहने है आपके वाह वाह...
गजल की बात ही कुछ और है जब दिल से लिखी हो तो बस लाजवाब ..:) बधाइयाँ स्वीकार करें
Comment by संदीप द्विवेदी 'वाहिद काशीवासी' on April 11, 2012 at 2:30pm

हार्दिक आभार सरिता जी! आपकी  ज़र्रानवाज़ी का शुक्रिया.. :))

Comment by संदीप द्विवेदी 'वाहिद काशीवासी' on April 11, 2012 at 2:29pm

आदरणीय राजीव जी,

हार्दिक आभार सादर,

Comment by संदीप द्विवेदी 'वाहिद काशीवासी' on April 11, 2012 at 2:29pm

भ्रमर जी धन्यवाद.. बात इसी गीत में चली और यहीं खत्म भी हो गई.. :)))

Comment by Sarita Sinha on April 9, 2012 at 1:59pm

bahut khubsurat ghazal sandip ji !!!!!!!

garmi me thandak ka ehsas.......

Comment by RAJEEV KUMAR JHA on April 9, 2012 at 9:02am

बहुत सुन्दर गीत, संदीप जी.

मैं भटकना भी जो चाहूँ तो कहाँ जाऊँगा हर सू, हर शै में तुझे ही पाऊँगा बढ़ जाएँ क़दम उस जानिब जो हैं तेरा कूचा-ओ-गली इश्क़ की बात चली.. लाजबाब !

Comment by SURENDRA KUMAR SHUKLA BHRAMAR on April 7, 2012 at 11:53pm

एक तमन्ना थी इस दिल में भी
आएंगे वो दिल की महफ़िल में भी
बन सकी न फूल तमन्ना की
थी जो मासूम कली
इश्क़ की बात चली..

क्या बात है काशीवासी भाई  जी ...इश्क की बात  चली ..खूब सूरत अब तो देखना है कहाँ तक बढ़ी 
जय बाबा काशीनाथ ...
भ्रमर 5


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