For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

मन का चन्दन महक उठता है

तन कस्तूरी लगता है

दिल से दिल मिले यदि तो

सारा जग अपना लगता है

 

तुम्हें देख कानन तरूवर

विहँसने का उपक्रम करते

क्यों शाख पे लिपटी लताएं

क्यों पवन मंद मंद बहते

 

मरूस्थल में भी फूल खिलाना

तुमको ही क्यों आते हैं

झरने कैसे इठलाते हैं

पंछी क्यों सुर में गाते हैं

 

दसों दिशाओं से सुरभित

मानव मन की कस्तूरी

मन से मन यदि मिला रहे

तो कहाँ किसी से यह दूरी

 

जीवन का व्यापार यही है

जग की सारी प्रणय कहानी

तुममें ही सब छिपा हुआ है

सकल जगत ने यह जानी

Views: 526

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by MAHIMA SHREE on March 19, 2012 at 10:36am
मरूस्थल में भी फूल खिलाना
तुमको ही क्यों आते हैं
झरने कैसे इठलाते हैं
पंछी क्यों सुर में गाते हैंआदरणीय राजीव सर ,
सादर नमस्कार,
क्या सुंदर अभिव्यक्ति है....... चित प्रसन्न हो गया...बहुत-२ बधाई आपको
Comment by Dr. Shashibhushan on March 18, 2012 at 10:11pm

आदरणीय झा जी,
सादर !
रचना तो भावपूर्ण है ही, चित्र भी बहुत सुन्दर
लगा है ! बधाई !

Comment by RAJEEV KUMAR JHA on March 18, 2012 at 2:25pm

धन्यवाद ! आदरणीय प्रदीप जी.आप सबों के सानिंध्य में बहुत कुछ सीखने को मिल रहा है.

Comment by RAJEEV KUMAR JHA on March 18, 2012 at 2:24pm

धन्यवाद ! संदीप जी.सराहना के लिए आभार.

Comment by RAJEEV KUMAR JHA on March 18, 2012 at 2:23pm

धन्यवाद ! प्रिय आनंद जी.सराहना के लिए आभार.

Comment by RAJEEV KUMAR JHA on March 18, 2012 at 2:19pm

धन्यवाद ! प्रवीण जी. सराहना के लिए आभार.

Comment by praveen singh "sagar" on March 18, 2012 at 11:33am

bahut hi behtarin aur umda prastuti, aabhaar vyakt karta hu.

Comment by संदीप द्विवेदी 'वाहिद काशीवासी' on March 17, 2012 at 12:30pm

आदरणीय राजीव जी,

मनोहारी प्रस्तुति। दसो दिशाओं से सुरभित ... बहुत सुंदर.. वाह..!!

Comment by PRADEEP KUMAR SINGH KUSHWAHA on March 17, 2012 at 10:25am

दसों दिशाओं से सुरभित

मानव मन की कस्तूरी

मन से मन यदि मिला रहे

तो कहाँ किसी से यह दूरी

aadarniya mahoday, saadar abhivadan . 

chitr koot ke ghat pe bhai santan ki bhiir. tulsidas chandan ghisen tilak det raghuvir. 

bahut sundar bhav evam prastuti. badhai.

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Blogs

Latest Activity


सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post देश की बदक़िस्मती थी चार व्यापारी मिले (ग़ज़ल)
"इस सुंदर बुनावट और कहन पर आज नजर पड़ी, आदरणीय धर्मेन्द्र जी.  हार्दिक बधाई   "
Monday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' shared their blog post on Facebook
Sunday
धर्मेन्द्र कुमार सिंह commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post देश की बदक़िस्मती थी चार व्यापारी मिले (ग़ज़ल)
"बहुत बहुत शुक्रिया आदरणीय Ravi Shukla जी"
Sunday
धर्मेन्द्र कुमार सिंह commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post देवता चिल्लाने लगे हैं (कविता)
"बहुत बहुत शुक्रिया आदरणीय Ashok Kumar Raktale जी"
Sunday
Awanish Dhar Dvivedi posted a blog post

माँ

माँ यह शब्द नहींं केवलइस जग की माँ से काया है। हम सबकी खातिर अतिपावन माँ के आँचल की छाया है।१।माँ…See More
May 19
Dayaram Methani replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"अगर आप यों घबरा कर मैदान छोड़ देंगे तो जिन्होने एक जुट होकर षड़यन्त्र किया है वे अपनी जीत मानेंगे।…"
May 19
अजय गुप्ता 'अजेय replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"अब, जबकि यह लगभग स्पष्ट हो ही चुका है कि OBO की आगे चलने की संभावना नगण्य है और प्रबंधन इसे ऑफलाइन…"
May 18
amita tiwari posted a blog post

बहुत सोचती हैं क्यों ये औरतें

बहुत सोचती हैं क्यों ये औरतें बेगुनाही और इन्साफ की बात क्यों सोचती हैं ये औरतें चुपचाप अहिल्या बन…See More
May 15
amita tiwari commented on amita tiwari's blog post गर्भनाल कब कट पाती है किसी की
" मान्य,सौरभ पांडे जीआशीष यादव जी , , ह्रदय से आभारी हूँ. स्नेह बनाए रखियगा | सौरभ जी ने एक…"
May 14

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on amita tiwari's blog post बहुत सोचती हैं क्यों ये औरतें
"आदरणीया अमिताजी, तार्किकता को शाब्दिक कर तटस्थ सवालों की तर्ज में बाँधा जाना प्रस्तुति को रुचिकर…"
May 14

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post हरकत हमें तो वैद की रखती तनाव में -लक्ष्मण धामी 'मुसफिर'
"आदरणीय लक्ष्मण धामी जी, आपकी प्रस्तुति निखर कर सामने आयी है. सभी शेर के कथ्य सशक्त हैं और बरबस…"
May 14

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"आदरणीय नीलेश भाई, आपका स्वागत है.     करेला हो अथवा नीम, लाख कड़वे सही, लेकिन रुधिर…"
May 14

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service