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ओ बी ओ मंच को 12वीं सालगिरह पर समर्पित ग़ज़ल

ओ बी ओ मंच को 12वीं सालगिरह पर समर्पित ग़ज़ल (1222*4)

किये हैं पूर्ण बारह वर्ष ओ बी ओ बधाई है,
हमारे दिल में चाहत बस तेरी ही रहती छाई है।

मिला इक मंच तुझ जैसा हमें अभिमान है इसका,
हमारी इस जहाँ में ओ बी ओ से ही बड़ाई है।

सभी इक दूसरे से सीखते हैं और सिखाते हैं,
हमारी एकता की ओ बी ओ ही बस इकाई है।

लगा जो मर्ज लिखने का, दिखाते ओ बी ओ को ही,
उसी के पास इसकी क्यों कि इकलौती दवाई है।

तुझे शत शत 'नमन' मेरा बधाई फिर से ओ बी ओ,
यहीं मेरी पढ़ाई है यहीं मेरी लिखाई है।

बासुदेव अग्रवाल 'नमन'
तिनसुकिया

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Comment by Awanish Dhar Dvivedi 11 hours ago

वाह वाह सर बहुत ही सटीक और सुन्दर कहा है आपने। बधाइयां 

Comment by बृजेश कुमार 'ब्रज' on April 11, 2022 at 7:51pm

बढ़िया बहुत बढ़िया कहा आदरणीय... बधाई


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by मिथिलेश वामनकर on April 8, 2022 at 1:50am

आदरणीय वासुदेव अग्रवाल नमन जी, ओबीओ की वर्षगांठ सह इस सार्थक प्रस्तुति पर बहुत बहुत बधाई। सादर।

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on April 7, 2022 at 7:25am

आ. भाई बासुदेव जी, सादर अभिवादन व ओबीओ की वर्षगाँठ पर हार्दिक बधाई। इस अवसर पर सुंदर गजल हुई है। हार्दिक बधाई। 

Comment by Deepalee Thakur on April 4, 2022 at 11:45am
बहुत सुंदर ग़ज़ल ओबीओ पर
Comment by बासुदेव अग्रवाल 'नमन' on April 4, 2022 at 7:59am

आदरणीय समर कबीर जी ओ बी ओ के 12 वर्ष पूर्ण करने की बधाई के साथ आपका बहुत बहुत आभार।

Comment by बासुदेव अग्रवाल 'नमन' on April 4, 2022 at 7:57am

आदरणीय सौरभ पांडे जी ओ बी ओ के 12 वर्ष पूर्ण करने की बधाई के साथ आपका आत्मिक आभार।


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on April 4, 2022 at 12:51am

आदरणीय वासुदेव अग्रवाल नमन जी, आपको इस अभिनव मंच, ओबीओ, के बारहवें वर्ष में पदार्पण की अशेष बधाइयाँ. आपने इस मंच की विशिष्टता को सार्थक शब्द दिये हैं. बहुत खूब !

विश्वास है, आदरणीय, आप सपरिनार स्वस्थ एवं सानन्द होंगे. आपकी सक्रियता सतत बनी रहे. .. शुभातिशुभ ..

Comment by Samar kabeer on April 3, 2022 at 7:51pm

जनाब बासुदेव अग्रवाल 'नमन' जी आदाब, बहुत समय बाद आपको ओबीओ पर देख कर प्रसन्नता हुई I 

ओबीओ की बारहवीं सालगिरह के मौक़े पर ग़ज़ल का अच्छा प्रयास हुआ है', बधाई स्वीकार करें  I 

'हमारे दिल में चाहत बस तेरी ही रहती छाई है'

इस मिसरे का वाक्य विन्यास ठीक नहीं है ,सहीह वाक्य है 'छाई रहती है'--देखिएगा I 

'लगा जो मर्ज लिखने का, दिखाते ओ बी ओ को ही'

इस मिसरे में 'मर्ज' ग़लत शब्द है, सहीह शब्द "मरज़" 12 है , इसकी जगह 'रोग' कर सकते हैं I 

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