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धर्मेन्द्र कुमार सिंह
  • Male
  • Raigarh, CG
  • India
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धर्मेन्द्र कुमार सिंह's Discussions

बहर सारिणी
7 Replies

ग़ज़ल की बहरें समझना बहुत टेढ़ी खीर है। ऐसा इसलिए भी है क्योंकि बहर के बारे में जानकारी तो बहुत ज्यादा मिल जाती है अंतर्जाल पर पर कहीं भी व्यवस्थित ढंग से नहीं मिलती। तो जहाँ सूचना ज्यादा हो वहाँ उसको…Continue

Started this discussion. Last reply by Admin Jan 30, 2011.

 

धर्मेन्द्र कुमार सिंह's Page

Latest Activity

लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post प्रेम के दोहे
"आ. भाई धर्मेंद्र जी, सादर अभिवादन । दोहों का प्रयास अच्छा हुआ है । हार्दिक बधाई। पर कुछ दोहे सुधार चाहते हैं जैसे कि गुणी जनों ने बताया है।  //जल बिन मछली से कभी, मेरी तुलना ही न।// में तनिक बदलाव कर वही भाव पैदा किया जा सकता है यथा-- जल बिन…"
Aug 25
धर्मेन्द्र कुमार सिंह commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post प्रेम के दोहे
"आदरणीय चेतन प्रकाश जी, सौरभ जी एवं समर कबीर साहब, आपकी बेबाक राय के लिए आपका तह-ए-दिल से शुक्रगुजार हूँ। आप के द्वारा इंगित अशुद्धियों को शीघ्रातिशीघ्र दूर करने का प्रयास करूंगा। "
Aug 24
Samar kabeer commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post प्रेम के दोहे
"जनाब धर्मेन्द्र कुमार सिंह जी आदाब, दोहों पर अच्छा प्रयास हुआ है, जो कमियाँ हैं उन पर जनाब सौरभ साहिब ने इशारों इशारों में बहुत कुछ कह दिया है, ध्यान दें, इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें । कृपया मंच पर सक्रियता बनाएँ ।"
Aug 24

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post प्रेम के दोहे
"आदरणीय धर्मेन्द्र जी, एक अरसे बाद आपकी किसी प्रस्तुति पर अपनी प्रतिक्रिया दे रहा हूँ.  छंदों में प्रयोग किया जाना नया नहीं है. ऐसे-ऐसे प्रयोग हुए हैं कि कई बार दंग हो जाना पड़ता है. केशवदास को ’पद्य का प्रेत’ तक कह दिया गया, जो…"
Aug 23
Chetan Prakash commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post प्रेम के दोहे
" नमस्कार, भाई, धर्मेंद्र कुमार सिंह, तकनीकी दृष्टि से दोहा छंद का प्रयास ठीक जान पड़ता है! प्रस्तुति को पोस्ट करने से पहले आप पढ़ लेते तो प्रयास अपेक्षाकृत बेहतर होता! यथा, ही न, जब कि हीन लिखा जाए, तो ही लय / तुक समान होगी! "
Aug 22
धर्मेन्द्र कुमार सिंह posted a blog post

प्रेम के दोहे

याद तुम्हारी क्या कहूँ, यूँ करती तल्लीन।घर, दफ़्तर, दुनिया, ख़ुदी, सब कुछ लेती छीन।जल बिन मछली से कभी, मेरी तुलना ही न।मैं आजीवन तड़पता, कुछ पल तड़पी मीन।प्रेम पहेली एक है, हल हैं किन्तु अनेक।दिल नौसिखिया खोजता, इनमें से बस एक।सज्जन हीरा प्रेम का, मिलता है बेमोल।दाम लगाने मैं गया, तो पाया अनमोल।हृदय कूप में जा गिरे, कुछ यादों के साँप। बिन पानी, भोजन बिना, निशिदिन करें विलाप। जादू सच्चे प्रेम का, कौन सका है काट।राजा काँसा ले खड़ा, रंक बना सम्राट।भूलभुलैया प्रेम की, जो भटके सो पार।जो बच निकले, फँस…See More
Aug 21
Chetan Prakash commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post बूढ़ा ट्रैक्टर (नवगीत)
" नमस्कार भाई धर्मेंद्र  कुमार सिंह, 'नवगीत' की भी कोई  विषय वस्तु अनिवार्य  रूप  से  होती है, और  आपका  नवगीत विषय को लेकर अस्पष्ट  है , चूँकि  आप तथाकथित नवगीत  के रचयिता  हैं तो…"
Jun 28
धर्मेन्द्र कुमार सिंह commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post बूढ़ा ट्रैक्टर (नवगीत)
"बहुत बहुत शुक्रिया आदरणीय लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'' साहब "
Jun 27
धर्मेन्द्र कुमार सिंह commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post बूढ़ा ट्रैक्टर (नवगीत)
"बहुत बहुत शुक्रिया आदरणीय अमीरुद्दीन 'अमीर' साहब "
Jun 27
धर्मेन्द्र कुमार सिंह commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post बूढ़ा ट्रैक्टर (नवगीत)
"बहुत बहुत शुक्रिया आदरणीय Samar kabeer साहब"
Jun 27
धर्मेन्द्र कुमार सिंह commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post बूढ़ा ट्रैक्टर (नवगीत)
"आदरणीय  Chetan Prakash  जी, यदि आप बताया दें कि आपने इस नवगीत का क्या अर्थ निकाला है तो जहां अस्पष्टता है मैं उसका स्पष्टीकरण दे दूंगा "
Jun 27
धर्मेन्द्र कुमार सिंह commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post बूढ़ा ट्रैक्टर (नवगीत)
"बहुत बहुत शुक्रिया आदरणीय Rahul Dangi Panchal जी "
Jun 27
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post बूढ़ा ट्रैक्टर (नवगीत)
"आ. भाई धर्मेंद्र जी, सादर अभिवादन । अच्छा गीत हुआ है । हार्दिक बधाई..."
Jun 27
अमीरुद्दीन 'अमीर' commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post बूढ़ा ट्रैक्टर (नवगीत)
"जनाब धर्मेन्द्र कुमार जी आदाब, अच्छा नवगीत सृजित हुआ है, बधाई स्वीकार करें। सादर। "
Jun 27
Samar kabeer commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post बूढ़ा ट्रैक्टर (नवगीत)
"जनाब धर्मेन्द्र कुमार जी आदाब, अच्छा नवगीत लिखा आपने, बधाई स्वीकार करें ।"
Jun 27
Chetan Prakash commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post बूढ़ा ट्रैक्टर (नवगीत)
"बंधु, शिल्प की दृष्टि से आपका नवगीत ठीक है, किन्तु इसकी विषय -वस्तु मुझे स्पष्ट नहीं हो पायी, सादर !"
Jun 27

Profile Information

Gender
Male
City State
रायगढ़, छत्तीसगढ़
Native Place
प्रतापगढ़
Profession
अभियांत्रिकी

धर्मेन्द्र कुमार सिंह's Blog

प्रेम के दोहे

याद तुम्हारी क्या कहूँ, यूँ करती तल्लीन।

घर, दफ़्तर, दुनिया, ख़ुदी, सब कुछ लेती छीन।

जल बिन मछली से कभी, मेरी तुलना ही न।

मैं आजीवन तड़पता, कुछ पल तड़पी मीन।

प्रेम पहेली एक है, हल हैं किन्तु अनेक।

दिल नौसिखिया खोजता, इनमें से बस…

Continue

Posted on August 21, 2021 at 7:00pm — 5 Comments

बूढ़ा ट्रैक्टर (नवगीत)

गड़गड़ाकर

खाँसता है

एक बूढ़ा ट्रैक्टर

डगडगाता

जा रहा है

ईंट ओवरलोड कर

सरसराती कार निकली

घरघराती बस…

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Posted on June 26, 2021 at 9:21pm — 11 Comments

मुहब्बतनामा (उपन्यास अंश)

दूसरी मुहब्बत के नाम

मेरे दूसरे इश्क़,

तुम मेरे जिंदगी में न आते तो मैं इसके अँधेरे में खो जाता, मिट जाता। तुम मेरी जिन्दगी में तब आये जब मैं अपना पहला प्यार खो जाने के ग़म में पूरी तरह डूब चुका था। पढ़ाई से मेरा मन बिल्कुल उखड़ चुका था। स्कूल बंक करके आवारा बच्चों के साथ इधर-उधर घूमने लगा था। घर वालों से छुपकर सिगरेट और शराब पीने लगा था। आशिकी, पुकार और भी न जाने कौन-कौन से गुटखे खाने लगा था। मेरे घर के पीछे बने ईंटभट्ठे के मजदूरों के साथ जुआ खेलने लगा था। दोस्तों के साथ मिलकर…

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Posted on May 3, 2021 at 10:30pm

किसी रात आ मेरे पास आ मेरे साथ रह मेरे हमसफ़र (ग़ज़ल)

११२१२ ११२१२ ११२१२ ११२१२

किसी रात आ मेरे पास आ मेरे साथ रह मेरे हमसफ़र

तुझे दिल के रथ पे बिठा के मैं कभी ले चलूँ कहीं चाँद पर

तुझे छू सकूँ तो मिले सुकूँ तुझे चूम लूँ तो ख़ुदा मिले

तू जो साथ दे जग जीत लूँ तूझे पी सकूँ तो बनूँ अमर

मेरे हमनशीं मेरे हमनवा मेरे हमक़दम मेरे हमजबाँ 

तुझे तुझ से लूँगा उधार, फिर, भरूँ किस्त चाहे मैं उम्र भर

कहीं धूप है कहीं छाँव है कहीं शहर है कहीं गाँव…

Continue

Posted on April 25, 2021 at 6:10pm — 4 Comments

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At 12:19am on September 23, 2015,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आदरणीय बड़े भाई  धर्मेन्द्र कुमार सिंह जी, 

ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार की ओर से आपको जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनायें...

At 8:41pm on September 22, 2013, जितेन्द्र पस्टारिया said…

" जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनायें " आदरणीय धर्मेन्द्र जी

At 11:20am on September 22, 2013,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

At 10:23pm on December 13, 2012, seema agrawal said…

स्वागत है धर्मेन्द्र जी 

At 6:18pm on September 22, 2012,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

At 10:06am on September 22, 2012,
सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey
said…

भाई धर्मेन्द्रजी, 

सरल, सफल, सहज, सुगढ़
सुफल, सुमिल, सुधी
सस्वर.. .
संयत, सुहृद, सुभाव, सशब्द
संभव सदा
सबल-प्रखर.. .
शुभभावना-शुभकामना-सुसंस्मरण संप्रेष्य है !

अनेकानेक बधाइयाँ.

At 9:20am on September 22, 2012, Er. Ambarish Srivastava said…

कविता शुचिता शिल्प से, शोभित मित्र कविन्द्र.

जन्मदिवस    शुभकामना,   भाई   जी   धर्मेन्द्र..    सादर   

At 8:15am on September 22, 2012, कुमार गौरव अजीतेन्दु said…

जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएँ आदरणीय धर्मेन्द्र सर.........

At 12:10pm on September 21, 2012, लक्ष्मण रामानुज लडीवाला said…

जन्म दिन की हार्दिक शुभ कामनाए स्वीकारे आदरणीय धर्मेन्द्र कुमार सिंह जी, 

प्रभु आपको समाज और देश निर्माण में योगदान देने की शक्ति प्रदान करे | आपका 

हमारा स्नेह बना रहे |

At 1:55pm on April 7, 2011, nemichandpuniyachandan said…
aapki zarra-nawazee ke liye sukariya.
 
 
 

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