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आशीष यादव
  • 31, Male
  • ghazipur, uttarpradesh
  • India
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आशीष यादव's Discussions

क्या भारत मेँ अन्तर्माध्यमिक तक हिन्दी एक अनिवार्य विषय नही होनी चाहिए
15 Replies

आज जहाँ सुनिये वहीँ भाषा का बिगड़ा स्वरूप सुनाई देता है। किस पुरुष का कर्ता है और कौन सी क्रिया लग गई पता ही नही। यह भी नही की यह युवा पीढ़ी ढंग से आंग्ल भाषा ही जानती हो। तो क्या हमारी और सरकार की यह…Continue

Started this discussion. Last reply by आशीष यादव Jul 28, 2012.

 

Welcome, आशीष यादव!

Latest Activity

Samar kabeer commented on आशीष यादव's blog post स्वयं को आजमाने को तू खुलकर आ जमाने में
"जनाब आशीष यादव जी आदाब,  प्रयास अच्छा है लेकिन रचना अभी समय चाहती है । इन पंक्तियों पर विचार करें:- 'किनारे कुछ न पाओगेमिलेगा डूब जाने में तुम्हारे सामने दुनियासुनो रणभूमि जैसी है' पूरी रचना एक वचन में है,और ये पंक्तियाँ बहुवचन में…"
Jul 6
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on आशीष यादव's blog post स्वयं को आजमाने को तू खुलकर आ जमाने में
"खूबसूरत रचना के लिए बहुत बहुत बधाई आदरणीय यादव जी..."
Jul 4
अमीरुद्दीन 'अमीर' commented on आशीष यादव's blog post स्वयं को आजमाने को तू खुलकर आ जमाने में
"जनाब आशीष यादव जी आदाब,बहुत उम्दा गीत हुआ है, दाद के साथ मुबारकबाद पेश करता हूँ।  सादर।"
Jul 2
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on आशीष यादव's blog post स्वयं को आजमाने को तू खुलकर आ जमाने में
"आ. भाई आशीष जी, सुंदर गीत हुआ है । हार्दिक बधाई..."
Jul 1
आशीष यादव commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post देवता होना नहीं पर दानवों की बात सुन-लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
"बेहतरीन गजल। सामयिक गजल।"
Jul 1
आशीष यादव posted a blog post

स्वयं को आजमाने को तू खुलकर आ जमाने में

स्वयं को आजमाने को तू खुलकर आ जमाने में बहुत अनमोल है जीवन गवाँता क्यों बहाने मेंनदी के पास बैठा है दबा के प्यास बैठा है तुझे मालूम है, तुझमें कोई एहसास बैठा है किनारे कुछ न पाओगे मिलेगा डूब जाने मेंतुम्हारे सामने दुनियासुनो रणभूमि जैसी है स्वयं का…See More
Jul 1
आशीष यादव commented on शुचिता अग्रवाल "शुचिसंदीप"'s blog post माधव मालती छन्द, नारी शौर्य गाथा
"बहुत सुंदर रचना हुई है"
Jun 1
आशीष यादव commented on शुचिता अग्रवाल "शुचिसंदीप"'s blog post लावणी छन्द,संपूर्ण वर्णमाला पर प्रेम सगाई
"बहुत सुंदर। "
Jun 1
आशीष यादव commented on आशीष यादव's blog post वरना पीठ दिखाने से तो अच्छा है तुम मर जाओ
"आदरणीय श्री Chetan Prakash  सर प्रणाम, सर मैंने केवल अपने मनोभावों को कलमबद्ध करने की कोशिश की है। मुझे 'नगमा' इत्यादि के बारे में जानकारी नहीं है। आपसे प्रार्थना है कि कृपया उचित मार्गदर्शन करें।"
May 31
आशीष यादव commented on आशीष यादव's blog post वरना पीठ दिखाने से तो अच्छा है तुम मर जाओ
"आदरणीय श्री Aazi Tamaam सर, बहुत बहुत धन्यवाद। "
May 31
आशीष यादव commented on आशीष यादव's blog post वरना पीठ दिखाने से तो अच्छा है तुम मर जाओ
"आदरणीय श्री लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर  सर कविता पसंद करने के लिए बहुत बहुत धन्यवाद।"
May 31
Samar kabeer commented on आशीष यादव's blog post वरना पीठ दिखाने से तो अच्छा है तुम मर जाओ
"जनाब आशीष जी आदाब, रचना का प्रयास अच्छा है, बधाई स्वीकार करें । ये रचना किस विधा में है? बताने का कष्ट करें ।"
May 31
Chetan Prakash commented on आशीष यादव's blog post वरना पीठ दिखाने से तो अच्छा है तुम मर जाओ
"आदाब, भाई, आशीष  ! रचना  को आप अपने मन से  ही 'नगमा' कह रहे हैं, अथवा कोई  माडल दृष्टिगत  रखकर  आपने अपनी  रचना  का नाम करण 'नगमा  किया  है ! मैंने  कम से कम इस …"
May 29
Aazi Tamaam commented on आशीष यादव's blog post वरना पीठ दिखाने से तो अच्छा है तुम मर जाओ
"सुंदर रचना है सहृदय बधाई आ आशीष जी"
May 28
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on आशीष यादव's blog post वरना पीठ दिखाने से तो अच्छा है तुम मर जाओ
"आ. भाई आशीष जी, वीररस की सुंदर रचना हुई है । हार्दिक बधाई."
May 28
आशीष यादव posted a blog post

वरना पीठ दिखाने से तो अच्छा है तुम मर जाओ

रणभेरी बजने से पहले अच्छा है तुम घर जाओ वरना पीठ दिखाने से तो अच्छा है तुम मर जाओकितनी ही आशाएं तुमसे लगी हुई है, टूटेंगीं कितनी ही तकदीरें तुमसे जुड़ी हुई हैं, रूठेगींतेरे पीछे मुड़ जाने से कितने सिर झुक जाएंगेकितने प्राण कलंकित होंगे कितने कल रुक…See More
May 28

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GHAZIPUR, U.P.
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एक सीधा-सादा इन्सान जो जीवन एवँ मानव की सच्चाईयों को जानने मे लगा हुआ है।

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स्वयं को आजमाने को तू खुलकर आ जमाने में

स्वयं को आजमाने को

तू खुलकर आ जमाने में

बहुत अनमोल है जीवन

गवाँता क्यों बहाने में

नदी के पास बैठा है

दबा के प्यास बैठा है

तुझे मालूम है, तुझमें

कोई एहसास बैठा है

किनारे कुछ न पाओगे

मिलेगा डूब जाने में

तुम्हारे सामने दुनिया

सुनो रणभूमि जैसी है

स्वयं का तू ही दुश्मन है

स्वयं का तू हितैषी है

कहीं पीछे न रह जाना

स्वयं से ही निभाने में

कहाँ दसरथ की दौलत

राम जी के काम…

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Posted on July 1, 2021 at 2:53am — 4 Comments

वरना पीठ दिखाने से तो अच्छा है तुम मर जाओ

रणभेरी बजने से पहले अच्छा है तुम घर जाओ

वरना पीठ दिखाने से तो अच्छा है तुम मर जाओ

कितनी ही आशाएं तुमसे लगी हुई है, टूटेंगीं

कितनी ही तकदीरें तुमसे जुड़ी हुई हैं, रूठेगीं



तेरे पीछे मुड़ जाने से कितने सिर झुक जाएंगे

कितने प्राण कलंकित होंगे कितने कल रुक जाएंगे



उतर गए हो बीच समर तो कौशल भी दिखला जाओ

हिम्मत के बादल बन कर तुम विपदाओं पर छा जाओ

तप कर और प्रबल बनकर तुम शोलों बीच सँवर जाओ

वरना पीठ दिखाने से तो अच्छा है तुम…

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Posted on May 28, 2021 at 12:11am — 7 Comments

याद तुम्हारी

याद तुम्हारी क्या बतलाऊँ

कैसे कैसे आ रही है

चलने का अंदाज़ ठुमक कर

मचल-मचल कर और चहक कर

हाथों को लहरा-लहरा कर

अदा-अदा से और विहँस कर

तेरी सुंदर-सुंदर बातें

मन हर्षित है गाते-गाते

मैं कब से आवाज दे रहा

आ जाते हँसते-मुस्काते

तेरे गालों वाले डिम्पल

याद आते हैं मुझको पल-पल

मिसरी में पागे होठों के

नाज़ुक चुम्बन कोमल-कोमल

एक छवि मुस्कान बटोरे

मुझको अपने परितः घेरे

सुंदर सुखद समीर…

Continue

Posted on April 24, 2021 at 4:36am — 1 Comment

बोलो मैं कैसे बिकता

एक गजल तेरे होठों पर लिख सकता था

इसकी टपक रही लाली पर बिक सकता था

किंतु सामने जब शहीद की पीर पुकारे

जान वतन पर देने वाला वीर पुकारे

जिसने भाई, लाल, कंत कुर्बान किये हों

सूख चुकी उनकी आँखों का नीर पुकारे

कैसे उन क़ातिल मुस्कानों पर बिकता

कैसे कोमल नाजुक होठों पर लिखता



एक गजल तेरी आँखों पर लिख सकता था

चंचल चितवन सी कमान पर बिक सकता था

पर कौरव-पांडव दल आँखें मींच रहा हो

चीर दुःशासन द्रुपद-सुता की…

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Posted on September 6, 2020 at 8:30pm — 8 Comments

Comment Wall (45 comments)

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At 11:15pm on August 6, 2012, कुमार गौरव अजीतेन्दु said…

प्रिय आशीष जी.....मेरी कविता को पसंद करने के लिए आपका हार्दिक आभार.....

At 12:51am on July 13, 2012, Sachchidanand Pandey said…
 शुक्रिया आशीष जी
At 11:26pm on July 2, 2012, कुमार गौरव अजीतेन्दु said…

आशीष जी, प्रोत्साहन हेतु आपका हार्दिक आभार.......

At 10:46am on June 25, 2012, कुमार गौरव अजीतेन्दु said…
आशीष जी, मेरी रचना को पसंद करने के लिए आपका आभार।
At 10:03am on June 6, 2012, अरुण कान्त शुक्ला said…

आशीष जी मित्र बनने का अवसर प्रदान करने के लिए धन्यवाद |

At 10:34am on June 1, 2012, डॉ. सूर्या बाली "सूरज" said…

आशीष जी आपकी शुभकमानयों और बधाइयों के लिए आपका बहुत बहुत धन्यवाद !

At 9:33pm on May 26, 2012, डॉ. सूर्या बाली "सूरज" said…

आशीष जी आपकी दाद के लिए बहुत बहुत शुक्रिया ! अच्छा लिखते हो ! ऐसे ही लिखते रहो और सबका मनोरंजन करते रहो !!

At 8:21pm on May 19, 2012, MAHIMA SHREE said…

swagat hai

At 3:44pm on May 4, 2012,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

Dhanyavaad Ashish Bhai.

At 7:43pm on April 12, 2012, Sarita Sinha said…

thanx ashish ji for liking my post...

 
 
 

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