कविता
जब हो हृदय अतिशय व्यथित
मन में उठें लहरें अमिट।
तब काव्य सरिता का निकलना
शब्द के जल से द्रवित हो
अश्रु से बन धार बहना
है यही कविता का कहना।।काव्य सरिता का...
या परम सुख की घड़ी में
याद करके जिस कड़ी को।
अपने मन मन्दिर से सुंदर
शब्द गुच्छों का निकलना
काव्य सरिता का है बहना।काव्य सरिता का....
या विरह की वेदना का
जब स्वयं वर्णन हो करना।
बिन कहे सब कुछ हो कहना
शब्द की नौका पे चढ़कर
दर्द की दरिया में बहना
है यही कविता का करना।काव्य सरिता का.....
या हृदय की वेदना में
शब्दभावों की तथा सं-
कल्पना से प्राण भरना।
और समुचित छन्दमात्रा रस
गणों से प्रिय का हो श्रृंगार करना।
काव्य सरिता का.....
है यही कविता नदी का
कलकलाते बह निकलना।
और कविता की कली का
फूल सा खिलकर महकना।
काव्य सरिता का है बहना।
मौलिक एवं अप्रकाशित।
अवनीश धर द्विवेदी।।
माँ यह शब्द नहींं केवल
इस जग की माँ से काया है।
हम सबकी खातिर अतिपावन
माँ के आँचल की छाया है।१।
माँ यह विषय अलौकिक है
परब्रह्म जीव के जैसा ही।
माँ इस सृष्टि की अनुपम है
कारक ईश्वर है ऐसा ही।२।
माता बच्चों की होती है
पालक सर्जक शुभ सुखराशी।
माँ की गोदी में पलते हैं
अज विष्णु ईश प्रभु अघनाशी ।३।
हैं शास्त्र सदा से ही कहते
माँ की पद्वी सर्वोत्तम है।
माँ का स्नेहामृत पाने को
जग में…
Posted on May 19, 2026 at 4:42pm
दिल में जो छुपाया है बोलना चाहेंगे
उसे दिल से मिटाया है बोलना चाहेंगे।
करेंगे जतन मिटादें उसकी यादों को
उसे हमने भुलाया है बोलना चाहेंगे।
वो हरगिज़ न रहेगा यादों में मिरी
याद बनके सताया है बोलना चाहेंगे।
बड़ा गुरुर था उसे मुझे अपने प्यार पर
हालात ने मिटाया है बोलना चाहेंगे।
फलक के चाँद से बातें किया रातें जगी मैंने
माहताब भी शर्माया है बोलना चाहेंगे।
अच्छा सिला दिया है मेरे यार ने…
ContinuePosted on August 26, 2022 at 11:09pm — 3 Comments
आज हूं लाचार धीरज मैं दिखाऊँगा
मेहनत से राज करके मैं दिखाऊंगा।।
वक़्त का है काम चलना खुद के ढर्रे पर
ज़िन्दगी को भी मुक़द्दस मैं बनाऊँगा।।
जो भी दुःखियारे हैं उनके दर्द को हूँ जानता
दर्द में हमदर्द बनकर मैं हँसाऊँगा।।
वक्त कब रुकता जहाँ में हो भला या हो बुरा
अनवरत चलता ही रहता मैं बताऊँगा।
हौसलों से ही तो होती हैं उड़ानें आसमां में
बन परिन्दा जोश के पर मैं लगाऊँगा।।
आज के इस दौर में…
ContinuePosted on August 22, 2022 at 9:30pm — 1 Comment
फूलों को दिल से उगाता कोई
फूल खिलते ही फोटो खिंचाता कोई।१।
है बनावट की दुनियाँ जहाँ देख लो
काम बनते ही हक़ को जताता कोई।२।
फूल खिलते हैं गुलशन में हरदम मगर
उनके जैसी खुशी काश लाता कोई।३।
रङ्ग फूलों के होते बहुत से मगर
फूलों सी ताजगी क्या दिलाता कोई।४।
फूल खुद टूट के भी हैं देते खुशी
उनसे कुर्बां होना सीख पाता कोई।५।
फूल होते हैं नाजुक बहुत ही मगर
फूल सा सब्र खुद में ले आता…
ContinuePosted on August 16, 2022 at 10:11pm — 1 Comment
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