For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

Atendra Kumar Singh "Ravi"
  • Male
  • Sonebhadra U.P
  • India
Share

Atendra Kumar Singh "Ravi"'s Friends

  • Sheikh Shahzad Usmani
  • Sumit Naithani
  • deepti sharma
  • Sonam Saini
  • SURENDRA KUMAR SHUKLA BHRAMAR
  • Vinay  Kull
  • siyasachdev
  • Vasudha Nigam
  • Shyam Bihari Shyamal
  • monika
  • Tilak Raj Kapoor
  • Rajendra Swarnkar
  • Er. Ambarish Srivastava
  • वीनस केसरी
  • Shashi Ranjan Mishra

Atendra Kumar Singh "Ravi"'s Discussions

हिंदी के वर्णमाला का विकास कहाँ हुआ और किसने खोजा.......

                                                           हिंदी उदभवभारत के संविधान के अनुच्छेद 343 (i) के अनुसार देवनागरी लिपि में लिखी जाने वाली हिंदी भारत संघ की राजभाषा है । यह लिपि संस्कृत के…Continue

Started Jul 24, 2011

 

Atendra Kumar Singh "Ravi"'s Page

Profile Information

Gender
Male
City State
sonebhadra U.P
Native Place
varanasi
Profession
Casual Announcer in A.I.R Obra Sonebhadra, Writer & Student...
About me
I M Open Minded & creative Nature.

Atendra Kumar Singh "Ravi"'s Blog

ग़ज़ल-चादनीं तुम मेरी बनीं हो क्या

दूर है चाँद बंदगी हो क्या

दिल की बस्ती में रौशनी हो क्या 

 

और के ख्वाब को न आने दिये

ख्वाब में ऐसी नौकरी हो क्या 

 

मुड़के देखा हमें न जाते हुये

तल्ख़ इससे भी बेरुखी हो क्या 

 …

Continue

Posted on March 31, 2014 at 6:00pm — 16 Comments

अपने हाथों के लकीरों को बदल जाऊंगा.............

अपने हाथों के लकीरों को बदल जाऊंगा

यूँ लगा है की सितारों पे टहल जाऊंगा ll



जर्रे-जर्रे में इनायत है खुदाया अब तो

तू है दिल में बसा मैं खुद में ही ढल जाऊंगा ll



रो लिया चुपके जरा हस लिया हमनें ऐसे

ज़ख्म तो दिल के दबाकर मैं बहल जाऊंगा ll



प्यार में गम है मिला दिल हो गया ये घायल

ठोकरें खा के मुहब्बत में संभल जाऊंगा ll



है कशिश तीरे नज़र टकरा गयी हमसे जो

इक छुवन से ही जरा उसके मचल जाऊंगा ll



तू खुदा, बंदा मैं हूँ , हाथ जो सर पे रख…

Continue

Posted on February 13, 2014 at 5:30pm — 8 Comments

ग़ज़ल-चल दिया है छोड़, क्या जुल्म ये काफी नहीं

2122     2122      1222       12

चल दिया है छोड़, क्या जुल्म ये काफी नहीं

==============================

अब हमारी याद भी क्यूँ तुम्हें आती नहीं

चल दिया है छोड़,क्या जुल्म ये काफी नहीं //१//

तू हमारे दिल बसा , इसमें है कैसी खता

हो गया हमसे जुदा याद क्यूँ जाती नहीं  //२//

वो हवायें वो फिजायें बुलाती हैं तुम्हें

आ तो जाओ फिर कोई बात यूँ भाती नहीं //३//

मुडके भी देखा नहीं तुम गये जाने…

Continue

Posted on December 8, 2013 at 9:30pm — 7 Comments

ग़ज़ल.....खंज़र चुभा किस धार से

2212/2212/2122/212

 दिल में तुम्हारे है जो मुझको बताना प्यार से

यूँ भूल कर हमको भला क्या मिला संसार से

यूँ जानकर रुसवा किया आज महफ़िल में भला 

जो तोड़कर नाता चले क्यूँ भला इस पार से

चुप सी है धड़कन मेरी अब दिल भी है खामोश तो

घायल हुआ दिल मेरा खंज़र चुभा किस धार से

नादान हूँ मैं या कि अहसान उनका है जरा 

वो रोक देते हैं मुझे शर्त कि दीवार से

वो प्यार के मंजर हमें आज भी भूले नहीं

दिल भी…

Continue

Posted on October 22, 2013 at 9:30pm — 22 Comments

Comment Wall (15 comments)

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

At 11:21pm on August 11, 2013, mrs manjari pandey said…

    अतेन्द्र कुमार जी धन्यवाद रचना पढ्ने एवम टिप्पणी के लिये. वो स्त्री रस्ते मे नईहर है अतः मिलने जाने के लिये कह रही है ! वहां पहुंचाने के लिये नही ! पति के साथ कुछ समय नईहर मे बिताना सुखद लगता है. ! दामाद की भी आवभगत होने से उन्हे भी अच्छा लगता है ! बस इसी भाव से मैने लिखा है.

 

At 11:44am on August 15, 2012, Ranveer Pratap Singh said…

जन्मदिवस की हार्दिक शुभकामनायें...

At 10:52pm on September 7, 2011, आशीष यादव said…

आपकी रचना को महीने की सर्वश्रेष्ठ रचना चुने जाने पर बधाई|

At 8:34pm on September 5, 2011, Abhinav Arun said…
अतेन्द्र 'रवि' जी ! आप की रचना शौक (झलकी) को महीने की सर्वश्रेष्ठ रचना चुने जाने पर हार्दिक बधाई !!
At 12:36pm on September 5, 2011,
सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey
said…

नाटिका ’शौक’ को विगत माह की सर्वश्रेष्ठ रचना चयनित होने पर अतेन्द्रजी को मेरी हार्दिक बधाई. ..

At 9:23am on September 5, 2011, Admin said…

आदरणीया अतेन्द्र कुमार सिंह "रवि" जी,

सादर अभिवादन !
मुझे यह बताते हुए हर्ष हो रहा है कि आप की रचना शौक (झलकी) को महीने की सर्वश्रेष्ठ रचना (Best Creation of the Month) के रूप मे सम्मानित किया गया है, तथा आप की छाया चित्र को ओ बी ओ मुख्य पृष्ठ पर स्थान दिया गया है |
इस शानदार उपलब्धि पर बधाई स्वीकार करे,धन्यवाद,
आपका
एडमिन
ओपन बुक्स ऑनलाइन

At 8:48am on August 18, 2011,
सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey
said…

आपको मेरी बधाइयाँ.

परन्तु, मुझे उक्त रचना को लेकर आपके इस व्यक्तिगत संदेश का अर्थ समझ में नहीं आया. आप इन पंक्तियों को वहीं चस्पाँ कर दें, बेहतर होगा.

 

दूसरे, आपका ध्यान आपकी रचना के प्रस्तुतिकरण ढंग में हुए परिवर्तन पर गया होगा. इस पर मनन करें और नाटिका शैली तथा प्रस्तुतिकरण की गुणवत्ता में आवश्यक सुधार करने का प्रयास करें.  देखिये नाटिका के प्रस्तुतिकरण के क्रम में और क्या-क्या परिवर्तन हुए दीखते हैं.

 

धन्यवाद.

At 10:13am on August 15, 2011,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

At 6:53pm on August 12, 2011, Abhinav Arun said…

शुक्रिया अतेन्द्र जी ग़ज़ल आपको पसंद आयी आभारी हूँ !!

At 11:08pm on August 2, 2011, Shanno Aggarwal said…

अतेंद्र जी, इतनी सुंदर तरीके से शुभकामना देने के लिये आपको लाखों धन्यबाद. 

 
 
 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Blogs

Latest Activity

गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ' commented on गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ''s blog post मुहब्बत की हमारी आख़री मंज़िल तुम्हीं तो थे (134 )
"भाई लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' जी ,हौसला आफ़जाई का बहुत बहुत शुक्रिया "
9 hours ago
गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ' commented on गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ''s blog post मुहब्बत की हमारी आख़री मंज़िल तुम्हीं तो थे (134 )
"भाई   Nilesh Shevgaonkar जी ,हौसला आफ़जाई का बहुत बहुत शुक्रिया "
9 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post सर पर पिता का हाथ है जिसके बना हुआ - लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
"आ. भाई आज़ी तमाम जी, उत्साहवर्धन के लिए धन्यवाद ।"
10 hours ago
Aazi Tamaam commented on अमीरुद्दीन 'अमीर''s blog post ग़ज़ल ( हो के पशेमाँ याद करोगे)
"सादर प्रणाम आ अमीर जी काफी समय से अनुपस्थित रहे मंच पर सब ठीक तो है काफी अच्छी ग़ज़ल हुई है सहृदय…"
12 hours ago
Aazi Tamaam commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post सर पर पिता का हाथ है जिसके बना हुआ - लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
"सादर प्रणाम आ धामी सर बेहतरीन ग़ज़ल के लिये बधाई"
12 hours ago
Aazi Tamaam commented on Mamta gupta's blog post जो भी ज़िक्रे ख़ुदा नहीं करते
"सादर प्रणाम आ ममता जी अच्छी ग़ज़ल है बाकी गुणीजनों की राय का अनुसरण करें और निखर जायेगी"
12 hours ago
अमीरुद्दीन 'अमीर' commented on Mamta gupta's blog post जो भी ज़िक्रे ख़ुदा नहीं करते
"मुहतरमा ममता गुप्ता 'नाज़' जी आदाब, बहतरीन रवानी के साथ अच्छी ग़ज़ल कही है, आपने उर्दू…"
13 hours ago
Chetan Prakash commented on Mamta gupta's blog post जो भी ज़िक्रे ख़ुदा नहीं करते
" अच्छी साफ-सुथरी ग़ज़ल है, आदरेया, बधाई  !"
16 hours ago
Samar kabeer commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post सत्तर बरस में बचपना इसका गया नहीं-लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
"'फिर भी ये नेता आज का दानी में आयेगा'(पर कर्ण जैसा नाम तो दानी में आयेगा)// इसे छोड़कर…"
16 hours ago
Mamta gupta posted a blog post

जो भी ज़िक्रे ख़ुदा नहीं करते

जो भी ज़िक्रे ख़ुदा नहीं करतेवो किसी के हुआ नहीं करतेनेमतें पा के लोग क्युं आख़िरशुक्रे ख़ालिक़ अदा नहीं…See More
18 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post सत्तर बरस में बचपना इसका गया नहीं-लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
"आ. भाई समर जी, सादर अभिवादन। गजल पर उपस्थिति, सराहना व मार्गदर्शन के लिए आभार । इंगित मिसरों को…"
20 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post सर पर पिता का हाथ है जिसके बना हुआ - लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
"आ. भाई अमीरुद्दीन जी, सादर अभिवादन। गजल पर उपस्थिति और उत्साहवर्धन के लिए हार्दिक धन्यवाद।"
21 hours ago

© 2021   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service