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Saurabh Pandey
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Saurabh Pandey's Discussions

ओबीओ परिवार के युवा साहित्यकार अरुन अनन्त की दैहिक विदाई
18 Replies

 पहले सींचा नेह से, बाद सौंप दी पीर ।निकली मेरी प्रेम में, दगाबाज तकदीर ।।अरुन अनन्त …Continue

Started this discussion. Last reply by Sushil Sarna Oct 21, 2020.

कविता की विकास यात्रा : नयी कविता, गीत और नवगीत (भाग -२) // --सौरभ
7 Replies

भाग - २=====’दूसरा सप्तक’ की भूमिका लिखते समय अज्ञेय ने कहा है, कि, ’प्रयोग का कोई वाद नहीं है । हम वादी नहीं रहे, न ही हैं, न प्रयोग अपने आप में इष्ट या साध्य है ।’ वे आगे कहते हैं - ’जो लोग प्रयोग…Continue

Started this discussion. Last reply by Saurabh Pandey Sep 6, 2016.

कविता की विकास यात्रा : नयी कविता, गीत और नवगीत (भाग -१) // --सौरभ
8 Replies

मानवीय विकासगाथा में काव्य का प्रादुर्भाव मानव के लगातार सांस्कारिक होते जाने और संप्रेषणीयता के क्रम में गहन से गहनतर तथा लगातार सुगठित होते जाने का परिणाम है । मानवीय संवेदनाओं को सार्थक अभिव्यक्ति…Continue

Started this discussion. Last reply by Kalipad Prasad Mandal Sep 26, 2016.

ओबीओ, लखनऊ चैप्टर वार्षिकोत्सव-2016
56 Replies

सुपरिचित साहित्यिक-संस्था ओपन बुक्स ऑनलाइन डॉट कॉम (ओबीओ) के लखनऊ चैप्टर ने चैप्टर के संयोजक डॉ. शरदिन्दु मुकर्जी के निर्देशन में दिनांक 22 मई 2016 को स्थानीय डिप्लोमा इंजीनियर्स संघ, लोक निर्माण…Continue

Started this discussion. Last reply by Saurabh Pandey Jun 1, 2016.

 

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Saurabh Pandey replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक 133 in the group चित्र से काव्य तक
"स्वागतम्"
yesterday

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Saurabh Pandey replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक 132 in the group चित्र से काव्य तक
"निशा स्वस्ति शुभातिशुभ"
Apr 25

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Saurabh Pandey replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक 132 in the group चित्र से काव्य तक
"वाह !  आदरणीय अशोक भाईजी, आपकी प्रस्तुति का अर्थबोध तुष्ट कर देता है. यह अनुकरणीय है.  सूरज दादा ने भी आकर,  कोरी चादर तानी .. कोरी चादर तानी से आशय स्पष्ट नहीं हो रहा, आदरणीय.  सूरज दादा ने भी आकर .. इसे सूरज नेभी सर पर आकर…"
Apr 24

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Saurabh Pandey replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक 132 in the group चित्र से काव्य तक
"  सुनसान है  सकल  वातायन, गर्म - गर्म लू बहती । .... सुनसान जैसे शब्द का सार्थक निर्वहन नहीं पाया है अतः लयभंग की दशा बन रही.   खून सोखती काया का वो,  सांस धोंकनी चलती ।।...   शुद्ध शब्द…"
Apr 24

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Saurabh Pandey replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक 132 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय हरिओम श्रीवास्तव जी,  आपकी प्रतिभागिता से यह आयोजन न केवल तुष्ट हो गया है, मेरे सादर निवेदन का भी मान रह गया है.  आप जैसे समृद्ध छंदकारों की निरंतरता आयोजनों को सुगढ़ करेगी, इसमें कोई संशय नहीं. एक अरसे बाद इस पटल पर आपकी उपस्थिति…"
Apr 24

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Saurabh Pandey replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक 132 in the group चित्र से काव्य तक
"  आदरणीय दयाराम जी, आपके सौजन्य से मैं सुधीजनों के साथ सार छंद को लेकर एक आवश्यक तथ्य साझा करना चाहता हूँ.  वस्तुतः सभी छंद दो श्रेणियों के होते हैं, वैदिक और अवैदिक या देसी. देसी यानी जिनका विकास वैदिक काल में न हो कर इस भूभाग की भाषा जब…"
Apr 24

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Saurabh Pandey replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक 132 in the group चित्र से काव्य तक
"क्या बात है, क्या बात है !  आदरणीया प्रतिभाजी, आपका रचना-कर्म प्रभावी ही नहीं, प्रेरक भी है. आपने प्रदत्त चित्र के सौजन्य से भारतीय कृषक-नारियों और श्रमजीवियों की दशा का सार्थक बखान कर दिया है. यह गीत अपनी प्रच्छन्न इकाई रखता है.  देख तली…"
Apr 24

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Saurabh Pandey replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक 132 in the group चित्र से काव्य तक
"छन्न पकैया छन्न पकैया, मौसम की है माया| वैशाख जेठ की गर्मी में, झुलस रही है काया || ... चैत-जेठ की गर्मी मेंं अब..  आगे, आपके निवेदन के अनुसार चौथा चरण ’झुलस रही है काया’ कर दिया गया.    छन्न पकैया छन्न पकैया, निर्धन की…"
Apr 24

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Saurabh Pandey replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक 132 in the group चित्र से काव्य तक
"स्वागतम् .. जय-जय !"
Apr 23

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Saurabh Pandey commented on Sushil Sarna's blog post रोला छंद .....
"आदरणीय सुशील सरनाजी,  आपके दो रोले छंद और दोनों भाव के स्तर नितांत प्रच्छन्न ! वैसे दूसरा छंद किसी अतिरेक को ही शाब्दिक कर रहा है. इस तरह के सामान्यीकरण से हमें बचना चाहिए.     एक बात :  अनबोली  वो  बात, प्यार का…"
Apr 18

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Saurabh Pandey replied to Admin's discussion खुशियाँ और गम, ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार के संग...
"वाह वाह पर वाह वा, वाह वा भई वाह.. ओबीओ फिर से जगा, जहाँ चाह तँह राह जय हो.. "
Apr 18

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Saurabh Pandey commented on vijay nikore's blog post वेदना का वज़्न
"आदरणीय विजय सर, आपके सूक्ष्म अनुभवों का शाब्दिक होना गहरे डूब, अनहद की मद्धिम तरंगों का भान कराता है. अव्याख्य एकाकी पीड़ा की दशा, बहुत कुछ छूट जाने के संताप, विभ्रम के ऊहापोह को जीता मन इस प्रकृति को ही उलाहना देता है. सारा संसार अपने वैशिष्ट्य के…"
Apr 4

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Saurabh Pandey commented on मनोज अहसास's blog post अहसास की ग़ज़ल::; मनोज अहसास
"भाई मनोज जी, मात्रिक बहर पर आपकी कोशिश पर बधाई स्वीकार करें.  सुधार की जहाँ आवश्यकता थी, आदरणीय समर साहब ने इंगित कर ही दिया है. मेरा बस इतना ही कहना है कि मिसरों में संबंध और तार्किकता साथ-साथ निभायी जाती हैं. म्रा इशारा आखिरी शेर को लेकर…"
Apr 4

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Saurabh Pandey commented on amita tiwari's blog post युद्ध के विरुद्ध हूँ मैं
"जय-जय "
Apr 4

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Saurabh Pandey commented on Sushil Sarna's blog post यथार्थ के दोहे. . . . . .
"आदरणीय सुशील सरना जी, गहरे पैठे हैं आप. और मोती निकाल लाये हैं. दोहों का भावपक्ष निस्संदेह अत्युन्नत है. अलबत्ता अभिव्यक्ति को एक-दो स्थानों पर कसावट चाहिए प्रतीत होता है.  जैसे, पंक पर नहीं पंक में.  देखो आखिर शाम की जगह आखिर देखो शाम.…"
Apr 4

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Saurabh Pandey commented on Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan"'s blog post ओबीओ को एक छोटी सी भेंट---ग़ज़ल
"आदरणीय पंकज जी, इस अभिनव मंच, ओबीओ, के बारहवें वर्ष में प्रवेश करने के शुभ अवसर पर आपको हार्दिक बधाइयाँ. हिंदी के शब्दों को बरतने में इजाफत प्रयुक्त नहीं होता. हालाँकि, हिंदी के पुराने लेखकों, जैसे कि राधा राधिका रमण सिंह जैसों ने, ऐसे कुछ प्रयोग…"
Apr 4

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Saurabh Pandey commented on बासुदेव अग्रवाल 'नमन''s blog post ओ बी ओ मंच को 12वीं सालगिरह पर समर्पित ग़ज़ल
"आदरणीय वासुदेव अग्रवाल नमन जी, आपको इस अभिनव मंच, ओबीओ, के बारहवें वर्ष में पदार्पण की अशेष बधाइयाँ. आपने इस मंच की विशिष्टता को सार्थक शब्द दिये हैं. बहुत खूब ! विश्वास है, आदरणीय, आप सपरिनार स्वस्थ एवं सानन्द होंगे. आपकी सक्रियता सतत बनी…"
Apr 4

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Saurabh Pandey commented on Samar kabeer's blog post ओबीओ की बारहवीं सालगिरह का तुहफ़ा
"आदरणीय समर साहब, आपको सर्वप्रथम ओबीओ मंच की सालगिरह की अशेष बधाइयाँ.   बारह वर्ष ! कुछ कम नहीं होते. इन बारह वर्षों में मंच ने क्या कुछ नहीं देखा, पढ़ा, पढ़ाया.    आपके इन दो अश'आर ने बरबस ध्यान खींचा है जो वस्तुत: ओबीओ की आत्मा…"
Apr 4

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Saurabh Pandey added a discussion to the group भोजपुरी साहित्य
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भोजपुरी नवगीत - जे महाभारत मचल बा // सौरभ

जे महाभारत मचल बा बऽड़-बड़का खेत भइले.. आमजन के बात का ?जजबात का ? नस-धमनियन में बहत माहुर सभन के माथ से चुइ बन पसीना पोर-पोरे खात बा, चल रहल बा जुद्ध के हड़कंप जानीं रात-दिन, ऊऽ.. बेकहल हड़बोङ अस उफिनात बा पढ़ि-गुनत हम मन-महाभारत कहीं तऽ जान गइनीं धैर्य-गरिमा छूटि के भहरात बा ! जीउ बख्ससु रामजी बलु एक मन पत्थर भइल, दोसर.. करेजा भाव से चट्टान बा..धूर्त बेचत बा सपन खुल्लम अन्हरिये..रोशनी का फेर में साँसत फतिंगा-जान बा चित्त में नीसा भरल बा आदमी के बम-धमाका खून-खेला.. घात का ? प्रतिघात का ? घाव का…See More
Apr 4

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Saurabh Pandey commented on मिथिलेश वामनकर's blog post पंख था कतरा हुआ : ग़ज़ल (मिथिलेश वामनकर)
"क्या बात है ! क्या बात है ! आदरणीय मिथिलेश जी, गजल की स्पष्ट दशा मुग्ध कर रही है. देखिए विज्ञापनों का दौर ऐसा आ गयाकाम होने से जरूरी है दिखे होता हुआ। क्या ही सामयिकता उभर आयी है. इस शेर पर बार-बार बधाइयाँ. कुछ हुआ हो ना हुआ हो आंकड़ा अच्छा हुआ कुछ…"
Apr 1

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Male
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Allahabad
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I am a person with heart.

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गजल - जा तुझे इश्क हो // -- सौरभ

२१२ २१२ २१२ २१२ 
 
पुतलियों ने कहा, जा तुझे इश्क हो

फागुनी है हवा, जा तुझे इश्क हो

 

हैं कई मायने रंग औ’ गंध के

गर नहीं ये पता, जा तुझे इश्क हो

 

चुन रहे थे सदा कौडियाँ, शंख-सीप

फिर समुंदर हँसा, ’जा तुझे इश्क हो’

 

चैत्र-बैसाख की थिर-मदिर साँझ में

टेरती है हवा.. ’जा तुझे इश्क हो’

 

देख कर ये गगन गेरुआ-गेरुआ

गा उठी है धरा, जा तुझे इश्क हो

 

उपनिषद गा रहे सुन सखे,…
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Posted on March 17, 2022 at 8:00pm — 9 Comments

बासंती दोहे // सौरभ

आहट की संभावना, करवट का आभास,
पुलक देह ने भर छुअन, लिया मुग्ध उच्छ्वास

नस-नस झंकृत राग-लय, तन-तन लहर गुँजार
बासंती मनमुग्ध को, प्यार प्यार बस प्यार !

पता नहीं किस ठौर से, आयी अल्हड़ भोर
तन मन से बेसुध मगर, मुग्ध नयन की कोर

तन्वंंगी अल्हड़ लता, बैठी उचक मुँडेर
खेल रही है धूप में, बासंती सुर टेर ।
***

सौरभ
(मौलिक और अप्रकाशित)

Posted on February 5, 2022 at 12:00pm — 11 Comments

गजल : गजल-गीत संवेदना के हैं जाये // सौरभ

122   122   122   122 

  

रजाई में दुबके, कहे सुन छमाछम..

किचन तक गयी धूप जाड़े की पुरनम

 

चकित चौंक उठतीं नवोढ़ा की आँखें

मुई चूड़ियो मत उठा शोर मद्धम

 

तुम्हीं को मुबारक जो ठानी है कुट्टी

नजर तो नजर से उठाती है सरगम

 

गजल-गीत संवेदना के हैं जाये

रखें हौसला पर जमाने का कायम

 

भरी जेब, निश्चिंतता हो मुखर तो

यहाँ सर्दियों का गुलाबी है मौसम

 

निराला जो ताना, तो बाना गजब का

नए नाम-यश का उड़ाना है परचम…

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Posted on December 25, 2021 at 10:52pm — 4 Comments

पाँच दोहे : उच्छृंखल संकोच // -- सौरभ

चकाचौंध की चुप्पियाँ, मौन शोर का देश
अँधियारे के गाँव में, सूरज करे प्रवेश ।।
 
रोम-रोम में चाँदनी, घटता-बढ़ता ज्वार 
मधुर-मदिर खनकार का कितना चुप संसार !…
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Posted on September 21, 2021 at 5:03pm — 13 Comments

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At 11:19am on January 25, 2022, Hiren Arvind Joshi said…
आदरणीय
प्रणाम!
एक गीत ब्लॉग में प्रेषित किया है। अनुमोदन करने की कृपा कीजिए।
At 1:58pm on January 24, 2022, Hiren Arvind Joshi said…
आदरणीय सौरभ जी
सादर प्रणाम!

मैंने चित्र से काव्य 129 में अपनी रचना प्रेषित की थी परन्तु रचना एवं उसके कमेंट नहीं देख पा रहा हूँ। जैसा की आपका कमेंट था की आ. अशोक जी के प्रश्न का उत्तर दूँ पर देख नहीं पा रहा हूँ। कृपया उचित मार्गदर्शन कीजिए।
At 2:28pm on December 3, 2020, लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' said…

आदरणीय बन्धु सादर अभिवादन । जन्मदिन की असीम हार्दिक शुभकामनाएँ ।

At 11:47am on December 3, 2020, TEJ VEER SINGH said…

जन्म दिन की हार्दिक बधाई आदरणीय सौरभ पांडे जी।

At 9:22am on December 3, 2019, TEJ VEER SINGH said…

आदरणीय सौरभ पांडे जी को जन्म दिवस की हार्दिक बधाई एवम असीमित शुभ कामनायें।

At 1:00pm on May 26, 2019, dandpani nahak said…
परम आदरणीय सौरभ पाण्डेय जी आदाब मैं बता नहीं सकता कितना खुश हूँ कि मेरी रचना को आपने सराहा बहुत शुक्रिया आगे भी आपका स्नेह मिलता रहेगा ऐसी आशा करता हूँ
At 8:21pm on October 22, 2017, Ramkunwar Choudhary said…
आप को सादर प्रणाम, मैं पहली बार कुछ लिखने का प्रयास कर रहा हूँ। मैंने भुजंगप्रयात छंद के आधार पर कुछ लिखने का प्रयास किया है। भाव, सौंदर्य, मात्राओं आदि की त्रुटियां बताकर मेरा मार्गदर्शन करें। मैं आपका आभारी रहूँगा..................
जहाँ ये दिलों की दगा का अखाड़ा,
किसी ने मिलाया किसी ने पछाड़ा;
यहाँ प्यार है बेसहारा बगीचा,
किसी ने बसाया किसी ने उजाड़ा;
At 7:09pm on January 3, 2016, Sushil Sarna said…

नूतन वर्ष 2016 आपको सपरिवार मंगलमय हो। मैं प्रभु से आपकी हर मनोकामना पूर्ण करने की कामना करता हूँ।

सुशील सरना

At 5:11pm on December 3, 2015, मोहन बेगोवाल said…

आदरणीय सौरभ जी, आप जी को जन्मदिन की बहुत बहुत बधाई हो 

At 3:57am on December 3, 2015,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

 
 
 

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Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post गज़ल - ज़ुल्फ की जंजीर से ......
"आदरणीय अमीरुद्दीन साहिब, आदाब - सृजन पर आपकी समीक्षात्मक प्रशंसा का एवं मार्गदर्शन का दिल से आभार…"
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अमीरुद्दीन 'अमीर' commented on Sushil Sarna's blog post गज़ल - ज़ुल्फ की जंजीर से ......
"आदरणीय सुशील सरना जी आदाब, ग़ज़ल विधा में भी अपनी काव्यात्मक योग्यता साबित करने के लिए हार्दिक बधाई…"
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अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक 133 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय दिनेश  भाई इस लम्बी और सार्थक छंद के लिए हार्दिक बधाई स्वीकार करें|  इस जगत का सार…"
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अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक 133 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय दिनेश  भाई हार्दिक धन्यवाद आभार आपका"
2 hours ago
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक 133 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय दयाराम  भाई हार्दिक धन्यवाद आभार आपका"
2 hours ago
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक 133 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय लक्षमण भाई हार्दिक धन्यवाद आभार आपका"
2 hours ago
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक 133 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय लक्षमण भाई सुन्दर छंद  के लिए हार्दिक बधाई स्वीकार करें|  १ अंतिम छंद के दूसरे चरण…"
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ग़ज़ल: सुरूर है या शबाब है ये

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4 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक 133 in the group चित्र से काव्य तक
"आ. भाई दयाराम जी, सादर अभिवादन। छंदों पर उपस्थिति व प्रशंसा के लिए हार्दिक धन्यवाद।"
5 hours ago
DINESH KUMAR VISHWAKARMA replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक 133 in the group चित्र से काव्य तक
"सादर अभिवादन धामी जी। छंद पर प्रोत्साहित करने हेतु बहुत बहुत आभार आपका।"
5 hours ago
DINESH KUMAR VISHWAKARMA replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक 133 in the group चित्र से काव्य तक
"सादर नमन आपको आदरणीय । बहुत बहुत आभार आपका ।"
5 hours ago
DINESH KUMAR VISHWAKARMA replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक 133 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय धामी sir। सादर अभिवादन स्वीकार करें। चित्र अनुरूप छंद पर बहुत अच्छी रचना है, आदरणीय।आपको…"
5 hours ago

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