For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

दूर क्षितिज प्राची की लाली ,

अरे बावरी ओ मतवारी ,

उस पल को तूँ विस्मृत कर दे ,

जीवन मे विष को जो भर दे ,

इंद्रव्रज्या नही  बन दधीचि तूँ ,

परम दंभ का ना बन प्रतीक तूँ ,

कण्ठ गरल मुख पर मुस्कान ,

सरल हृदय मुख कांतिमान ,

दो काष्ठों के संधि बीच ,

प्रलय निशा है रही खींच ,

बने अमरता की प्रतीक तूँ ,

परिवर्तन की अग्रदूत तूँ ,

मृत्यु सदृश्य शीतल निराश ,

विश्व देव का तू प्रकाश ,

हे प्रकृति की चंचल तुरंग ,

निर्बाध भ्रमण कर तूँ विहंग ,,

Views: 628

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by विन्ध्येश्वरी प्रसाद त्रिपाठी on March 16, 2012 at 9:05pm
पर आपने द्वितीय पंक्ति में बावरी मतवारी शब्द का प्रयोग किया है जिस पर मेरी टिप्पणी में लिखा धीरोदात्त नायक शब्द सटीक नहीं बैठता पर उसे नायिका के संदर्भ में देखे।

सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on March 16, 2012 at 9:03pm

पुरानी शैली की रचनाओं की याद हो आयी. सकारात्मकता को प्रति शब्द स्थापित करती रचना.

सार्थक प्रयास के लिये बधाई, अश्विनीजी.

Comment by विन्ध्येश्वरी प्रसाद त्रिपाठी on March 16, 2012 at 9:01pm
अश्विनी जी अच्छी कविता है।आपकी रचना का प्रतिपाद्यय धीरोदात्त नायक जैसा लगता है जो वीर भी है।अच्छी सी कविता के लिए खूबसूरत बधाई।
सादर!
Comment by Chaatak on March 16, 2012 at 8:39pm

स्नेही अग्रज, सादर अभिवादन, इस बेहद खूबसूरत रचना के लिए हार्दिक बधाई!

Comment by MAHIMA SHREE on March 16, 2012 at 3:49pm
उस पल को तूँ विस्मृत कर दे ,
जीवन मे विष को जो भर दे ,

अश्विनी जी नमस्कार ...
भाव बड़े ही सुंदर है......बधाई.
Comment by PRADEEP KUMAR SINGH KUSHWAHA on March 16, 2012 at 2:22pm

संपूर्ण कृति. समस्त बधाई स्वीकार करें  महोदय जी ,

Comment by संदीप द्विवेदी 'वाहिद काशीवासी' on March 16, 2012 at 11:34am

बहुत ही सुंदर कविता| स्वागत है आपका, :)

Comment by AVINASH S BAGDE on March 16, 2012 at 11:02am

बने अमरता की प्रतीक तूँ ,

परिवर्तन की अग्रदूत तूँ ,...sunder kavita Ashwini  ji

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' posted a blog post

घर के रिवाज चौक में जब दान हो गये -लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'

२२१/२१२१/१२२१/२१२ ****** घर के रिवाज चौक में जब दान हो गये उघड़े  शरीर  आप  ही  सम्मान  हो गये।१। *…See More
16 hours ago
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा पंचक. . . दिल

दोहा पंचक. . . . . दिलरात गुजारी याद में, दिन बीता बेचैन । फिर से देखो आ गई, दिल की दुश्मन रैन…See More
yesterday
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"क्षमा कीजियेगा 'मुसाफ़िर' जी "
Thursday
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय भाई लक्ष्मण धामी 'मुसफ़िर' जी सादर अभिवादन बहुत शुक्रिया आपने वक़्त निकाला आपकी…"
Thursday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"आ. भाई जयहिंद जी, सादर अभिवादन। सुंदर गजल हुई है। भाई रवि जी की सलाह से यह और निखर गयी है । हार्दिक…"
Thursday
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा पंचक. . . दिल

दोहा पंचक. . . . . दिलरात गुजारी याद में, दिन बीता बेचैन । फिर से देखो आ गई, दिल की दुश्मन रैन…See More
Wednesday
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"ग़ज़ल 2122   1212  22 आ कभी देख तो ले फ़ुर्सत में क्या से क्या हो गए महब्बत में मैं…"
Wednesday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Saurabh Pandey's blog post नवगीत - भैंस उसी की जिसकी लाठी // सौरभ
"  आपका हार्दिक धन्यवाद, आदरणीय लक्ष्मण धामी ’मुसाफिर’ जी   "
Wednesday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Sushil Sarna's blog post दोहा एकादश. . . . . पतंग
"आदरणीय सुशील सरनाजी, पतंग को लगायत दोहावलि के लिए हार्दिक बधाई  सुघड़ हाथ में डोर तो,…"
Wednesday
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय रवि भसीन 'शहीद' जी सादर अभिवादन बहुत शुक्रिया आपने वक़्त निकाला ग़ज़ल तक आए और हौसला…"
Wednesday
Sushil Sarna posted blog posts
Tuesday
रवि भसीन 'शाहिद' commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय Jaihind Raipuri जी,  अच्छी ग़ज़ल हुई। बधाई स्वीकार करें। /आयी तन्हाई शब ए…"
Tuesday

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service