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बाल साहित्य

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बाल साहित्य

यहाँ पर बाल साहित्य लिखा जा सकता है |

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Latest Activity: Apr 2

इस समूह में सभी रचनाकारों द्वारा बाल साहित्य के साथ-साथ ही, बच्चों द्वारा रचित कवितायेँ, कहानियाँ और चित्र भी सादर आमंत्रित है.

Discussion Forum

कोयल (बाल कविता) 4 Replies

ताटंक छंद (16, 14 पर यति, अंत मे तीन गुरु)कोयल वसन्त ऋतु की रानी, सात सुरों की ज्ञाता हैगाती है जब अपनी धुन में,मन मधुरस हो जाता है।।दिखने में है काली लेकिन,लगती कितनी भोली हैस्वर्ग लोक से सीखी इसनेमिसरी जैसी बोली है।1।आम्र कुंज में उड़ती फिरती,लुक…Continue

Started by सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप'. Last reply by सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' Apr 2.

बाल प्रार्थना (शक्ति छंद) 2 Replies

शक्ति छंद:122 122 122 12 (11=2 मांन्य)करें प्रार्थना प्रभु जरा ध्यान दोदया प्रेम दिल में भरा ज्ञान दोजुड़ें ना कभी हम किसी पाप सेबचें हम बुरे कर्म सन्ताप से।।जलाएँ न घर हम किसी और कासजाएँ वतन मिल नए दौर का।।लगे हर जगह आज घर द्वार साअखिल देश हो एक…Continue

Started by सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप'. Last reply by सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' Apr 2.

गौरैया (विश्व गौरेया दिवस पर बाल कविता) 2 Replies

घर आँगन की राज दुलारी,प्यारी चुनमुन गौरैयाकभी अकेले कभी झुंड मेंकरती है ता ता थैया ।।चोंच दबाकर तिनका तिनका,अपना नीड़ बनाती हैफुदक फुदक कर घर आँगन के,कीड़े चट कर जाती है।।कभी नाचती कभी झगड़तीइधर इधर बलखाती हैछोटे छोटे पर है लेकिन,कभी पकड़ ना आती…Continue

Started by सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप'. Last reply by सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' Apr 2.

चन्द बाल कविताएं ( शक्ति छंद) 2 Replies

बड़ा जग भरा नीर जूठा कियामगर घूँट भर ही लिया औ पियाउँडेला गया सब,बचा जो, उसेजरूरत कहाँ है न मन में घुसेखुले में जला फूँस करते धुआँरहे खोद खुद के लिए यूँ कुआँजहर से भरी वायु होगी जहाँभला ठीक साँसें मिलेंगी कहाँचलाएं पटाखे खुशी में सभीन सोचें सही ये न…Continue

Started by सतविन्द्र कुमार राणा. Last reply by Sheikh Shahzad Usmani Apr 1.

तुम भी तो कुछ किया करो

माँ कितना कुछ करती तुमकोतुम भी तो कुछ किया करोवह जब कामों से थक बैठेपानी, पीने को दिया करोपापा जब ऑफिस से आएँबैग हाथ में लिया करोछोटे-छोटे कामों कोअपने हाथों तुम किया करोअपना बस्ता आप सहेजोकाॅपी पेंसिल लिया करोजब शाला से वापस आओसही जगह पर धरा करोयदि…Continue

Started by Usha Awasthi Feb 28.

बाल कविता

      गौरैया              - उषा अवस्थी      छोटे छोटे पर फैलाकर      फुर-फुर कर वह उड़ जाती      कभी मुँडेर, कभी डाली पर       चहक-चहक कर इठलाती       एक काम तुम करो जरा       चावल या काकुन ले आओ        जो गौरैया को प्रिय लगता         खुली जगह पर…Continue

Started by Usha Awasthi Feb 12.

लघुकथा 1 Reply

......नव वर्ष.....नव वर्ष की पूर्व सन्ध्या की पार्टी में जाने के लिए, पलाश ने, सुबह से ही अपने पिता के पीछे भुन भुन शुरू कर दी थी, "पापा, चलिए न प्लीज़। मेरे सारे दोस्त हर साल पार्टी मनाते हैं। एक हम ही हैं जो कहीं नही जाते।""लेकिन बेटा...." मीनू कुछ…Continue

Started by Anagha Joglekar. Last reply by Sheikh Shahzad Usmani Jan 21.

ग़ज़ल ( यह मासूम हैं सब की आँखों के तारे )

ग़ज़ल ( यह मासूम हैं सब की आँखों के तारे )----------------------------------------------------------(फऊलन-फऊलन-फऊलन-फऊलन)यह मासूम हैं सब की आँखों के तारे |ख़ुदा को भी बच्चे निहायत हैं प्यारे | सवेरे लड़ें शाम को साथ खेलेंतखैउल हैं बच्चों के सब से…Continue

Started by Tasdiq Ahmed Khan Nov 16, 2017.

बाल कविता 4 Replies

नहीं मिठाई मोबाइल परदेनी हो तो सच्ची दो1- जाया होता वक्त हमाराइन भ्रमजालों में पड़करपढ़ें पाठशाला में जाएँबुद्धि हमें तुम पक्की दोनहीं---------------2- दूर रहें ऐसे खेलों सेगलत राह ले जाएँ जोतोड़ तिलस्मों की दुनियाँ कोसीख हमें कुछ अच्छी…Continue

Started by Usha Awasthi. Last reply by Usha Awasthi Nov 1, 2017.

गजल(पानी)

कहते हैं मुझको सब पानी मेरी भी है एक कहानी।1 दो गैसों का मेल कराता धरती को करता मैं धानी।2 जीवन का पर्याय बनूँगा बस इतनी-सी मैंने ठानी।3 खूब सँजोकर रखना मुझको वरना याद करोगे नानी।4 बेमतलब बर्बाद करोगे, चिल्लाओगे पानी-पानी।5 टूटेंगे तटबंध कहीं फिर हो…Continue

Started by Manan Kumar singh Aug 26, 2017.

 
 
 

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"किसी के दिल में भी चाहत मचल तो सकती है निगाह-ए-इश्क से शम्मा पिघल तो सकती है ये माना हो न…"
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"गर आप चाहें तबीअत बहल तो सकती है कोई मिलाप की सूरत निकल तो सकती है इसी यक़ीन पे कोई अमल नहीं…"
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