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बाल साहित्य

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बाल साहित्य

यहाँ पर बाल साहित्य लिखा जा सकता है |

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Latest Activity: Nov 19

इस समूह में सभी रचनाकारों द्वारा बाल साहित्य के साथ-साथ ही, बच्चों द्वारा रचित कवितायेँ, कहानियाँ और चित्र भी सादर आमंत्रित है.

Discussion Forum

ग़ज़ल ( यह मासूम हैं सब की आँखों के तारे )

ग़ज़ल ( यह मासूम हैं सब की आँखों के तारे )----------------------------------------------------------(फऊलन-फऊलन-फऊलन-फऊलन)यह मासूम हैं सब की आँखों के तारे |ख़ुदा को भी बच्चे निहायत हैं प्यारे | सवेरे लड़ें शाम को साथ खेलेंतखैउल हैं बच्चों के सब से…Continue

Started by Tasdiq Ahmed Khan Nov 16.

बाल कविता 4 Replies

नहीं मिठाई मोबाइल परदेनी हो तो सच्ची दो1- जाया होता वक्त हमाराइन भ्रमजालों में पड़करपढ़ें पाठशाला में जाएँबुद्धि हमें तुम पक्की दोनहीं---------------2- दूर रहें ऐसे खेलों सेगलत राह ले जाएँ जोतोड़ तिलस्मों की दुनियाँ कोसीख हमें कुछ अच्छी…Continue

Started by Usha Awasthi. Last reply by Usha Awasthi Nov 1.

गजल(पानी)

कहते हैं मुझको सब पानी मेरी भी है एक कहानी।1 दो गैसों का मेल कराता धरती को करता मैं धानी।2 जीवन का पर्याय बनूँगा बस इतनी-सी मैंने ठानी।3 खूब सँजोकर रखना मुझको वरना याद करोगे नानी।4 बेमतलब बर्बाद करोगे, चिल्लाओगे पानी-पानी।5 टूटेंगे तटबंध कहीं फिर हो…Continue

Started by Manan Kumar singh Aug 26.

आलस ( कथा) 1 Reply

अनुष्का एक आलसी लड़की थी | लाख समझाने पर भी वह टस से मस नहीं होती थी | सुबह देर से उठना ,अपने कमरे में ही चाय दूध पीना , नाश्ता करना , और फिर सब बर्तन वहीँ रख देना | कमरे की न तो वह सफाई करती और सामान भी सब अस्तव्यस्त रखती थी |उसकी माँ और भाभी उसके…Continue

Started by KALPANA BHATT ('रौनक़'). Last reply by KALPANA BHATT ('रौनक़') Aug 24.

मोबाइल संस्कृति ( कथा) 1 Reply

सन्देश ने अपने पापा से मोबाइल की जिद्द की , उन्होंने बहुत समझाया -" बेटा , अभी तुम बहुत छोटे हो , अभी तो तुम पाँचवी में हो , अभी से मोबाइल का क्या करोगे ?"सन्देश ने पापा को समझाते हुए कहा , " पापा, मेरे बहुत सारे दोस्तों के पास मोबाइल है , आज कल तो…Continue

Started by KALPANA BHATT ('रौनक़'). Last reply by KALPANA BHATT ('रौनक़') Aug 24.

गजल(कद्दू)

#गजल#(कद्दू)^^^^^सब्जी चाहे सूप बनाओकद्दू खाओ, रोग भगाओ।1कहता--सेवन कर लो साथी!दिल का रोगी मत कहलाओ।2चाप चढ़ायेगा क्या बीपी?डाईबीटिज को भी सरकाओ।3कब्ज-हरण कर लेगा कद्दू,मुखड़े पर खुशियाँ बिखराओ।4नींद नहीं आती है,फिर तोबीज चबाओ, पास बुलाओ।5लौह…Continue

Started by Manan Kumar singh Jul 5.

गजल(पेड़)

बच्चो! मीठी बोली बोलोबातों में कुछ मिसरी घोलो।1काँटे लाख तुम्हे भटकायें,फूलों का उपहार सँजो लो।2पेड़ लगाओ,पानी दो फिरउनके अच्छे साथी हो लो।3फल-फूलों से घर भर देंगेछाँव तले मस्ती में डोलो।4पी जाते जहरीली गैसेंऑक्सीजन में खुद को तोलो।5काट रहे जो, उनको…Continue

Started by Manan Kumar singh Jun 19.

गजल(आम)

22 22 22 22आम बनाता काम सुनो जीरोग रहें सुरधाम सुनो जी।1भिन्न बने सब,रंग अलग हैंइनके कितने नाम, सुनो जी।2बीजू की बलिहारी जाऊँबंबइया अभिराम सुनो जी।3पेड़ झुके जाते हैं लदकरटपकें, खाओ आम सुनो जी।4लटके ऊँचे,ढ़ेला मारो,गिरते,पूरनकाम सुनो जी।5रखवाला…Continue

Started by Manan Kumar singh Jun 13.

‘गिलहरी दोहे’ (बाल रचना )

एक गिलहरी चुनमुनी,पहने भूरा कोट|कुट कुट करके शान से ,खाती है अखरोट|| बच्चों को प्यारी बहुत,लगती उनको ख़ास|   आती मटक मटक कभी,फुदक-फुदक कर पास||   कतरन कपड़े की मिले ,या धागों का जाल|मुँह में लेकर भागती ,इस डाली उस डाल|| बिस्तर सुन्दर गदबदा,अच्छा…Continue

Started by rajesh kumari Jun 13.

गजल(सेबों की है बात निराली)

22 22 22 22सेबों की है बात निरालीइनके बिन कब पूरी थाली?1इनका सेवन कर लो,वरनाडॉक्टर करते हैं घर खाली।2कहते,एक अगर नित खाओरोगों की बज जाये ताली।3खेती भी कर सकते इनकीसुधरेगी हालत यूँ माली।4लाल लटकते,पात हरे सबकरते रहते हैं रखवाली।5झोंके खाकर गिरते…Continue

Started by Manan Kumar singh Jun 11.

 
 
 

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"समय देकर उत्साह बढ़ाने के लिए बहुत बहुत आभार आ सुरेन्द्र इंसान भाई जी"
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"बहुत खूब बधाई"
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"आदरणीय कालीपद प्रसाद मंडल जी,हौंसलाफ़ज़ाई के लिए तहेदिल आभार"
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