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मृत्यु : पूर्व और पश्चात्

मृत्यु...

जीवन का वह सत्य

जो सदियों से अटल है

शिला से कहीं अधिक।

मृत्यु पूर्व...

मनुष्य बद होता है

बदनाम होता है

बुरी लगती हैं उसकी बातें

बुरा उसका व्यवहार होता है।

मृत्यु पूर्व...

जीवन होता है

शायद जीवन

नारकीय

यातनीय

उलाहनीय

अवहेलनीय।

मृत्यु पूर्व...

मनुष्य, मनुष्य नहीं होता

हैवान होता है

हैवान, जो हैवानियत की सारी हदें

पार कर देना चाहता है।

मृत्यु पश्चात्...

विश्राम, विश्रान्ति

आनन्द, परमानन्द।

मृत्य पश्चात्...

मनुष्य की सारी भूलें

भुला दी जाती हैं

याद रहती हैं

तो सिर्फ उसकी अच्छाइयाँ

अच्छाइयाँ, जो शायद उसने          

कभी की भी नहीं थीं।

मृत्यु पश्चात्...

आजीवन रहा हैवान

बन जाता है भगवान

भगवान, क्योंकि अब वह

कुछ कर नहीं सकता

और जो कुछ कर नहीं सकता

वही तो भगवान होता है।

अन्ततः इस मृत्यु का

जाने यह कैसा सार है

पूर्व में दूसरों का जीवन

जिसने बना दिया था नारकीय

मृत्यु पश्चात् उसे भी

स्वर्गीय कहलाने का अधिकार है।

 

(मौलिक व अप्रकाशित)

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Comment by SALIM RAZA REWA on October 24, 2017 at 1:00pm
आ. ख़ूबसूरत रचना के लिए बधाई.
Comment by लक्ष्मण रामानुज लडीवाला on October 24, 2017 at 11:33am

अन्ततः इस मृत्यु का

जाने यह कैसा सार है

पूर्व में दूसरों का जीवन

जिसने बना दिया था नारकीय

मृत्यु पश्चात् उसे भी

स्वर्गीय कहलाने का अधिकार है।  - वाह ! किन्तु म्रत्यु पश्चात स्वर्गीय को उसके कर्मानुसार ही सम्मान मिलता है साहब !

Comment by Samar kabeer on October 23, 2017 at 5:42pm
जनाब महेन्द्र कुमार जी आदाब,बहतरीन अतुकान्त कविता दावत-ए-फ़िक्र देती हुई,इस प्रस्तुति पर दिल से बधाई स्वीकार करें ।
Comment by नाथ सोनांचली on October 23, 2017 at 1:07pm
अद्भुत सास्वत सत्य, बेहतरीन अतुकांत पढ़ने को मिला, इस प्रस्तुति पर बहुत बहुत बधाई।
Comment by Dr Ashutosh Mishra on October 22, 2017 at 9:06pm
आदरणीय महेंद्र जी सच को अपने शब्दों की तूलिका से बहुत ही खूबसूरती से आपने व्यक्त किया है इस रचना के लिए आपको हार्दिक बधाई सादर
Comment by KALPANA BHATT ('रौनक़') on October 22, 2017 at 8:32pm

साश्वत सच्चाई | बहुत सुंदर रचना हुई है आदरणीय महेंद्र कुमार जी | बधाई स्वीकारें |

Comment by Sheikh Shahzad Usmani on October 22, 2017 at 7:42pm
अद्भुत सत्य को समझाती और मानवीय संवेदनाओं व प्रवृत्तियों को समझाती व्यंग्यात्मक/कटाक्षपूर्ण बेहतरीन रचना के लिए सादर हार्दिक बधाई आदरणीय महेंद्र कुमार जी।
Comment by Mohammed Arif on October 22, 2017 at 1:49pm
आदरणीय महेंद्र कुमार जी आदाब, शाश्वत सच्चाई , सनातन सच्चाई मृत्यु के पूर्व और पश्चात की स्थिति को परिभाषित करती , मृत्यु की भयावह सच्चाई को प्रदर्शित करती बेहतरीन कविता । हार्दिक बधाई स्वीकार करें ।

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