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लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
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लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s Page

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लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post केवल बहाना खोज के जलती हैं बस्तियाँ - लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"
"आ. भाई चेतन जी सादर अभिवादन। गजल पर उपस्थिति व स्नेह के लिए आभार। गजल को बेहतर करने का प्रयास कर रहा हूँ। यदि आपकी ओर से कोई बेहतर सुझाव हों तो दीजिएगा। प्रयास के बाद उपस्थित होता हूँ । सादर.."
15 hours ago
अमीरुद्दीन 'अमीर' बाग़पतवी commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post केवल बहाना खोज के जलती हैं बस्तियाँ - लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"
"आदरणीय लक्ष्मण धामी भाई मुसाफ़िर जी आदाब, सुंदर भावों से सुसज्जित अच्छी ग़ज़ल हुई है मुबारकबाद पेश करता हूँ। मतले के मिसरा-ए-सानी के लिए एक सुझाव -  सीमित से दायरे में न पल भर उड़ान हो उड़ने के वास्ते तो खुला आसमान हो।१। दूसरे शे'र में…"
yesterday
Chetan Prakash commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post केवल बहाना खोज के जलती हैं बस्तियाँ - लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"
"नमस्कार,  आ. भाई लक्ष्मण सिंह धामी 'मुसाफिर' क्षमा करें, यह ग़ज़ल आपकी  प्रतिभा  से  न्याय  नहीं कर पाई  !  मुझे  लगता है,  आप  इस  प्रस्तुति  को किंचित  और समय दें , …"
Saturday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-144
"आ. भाई नवीन जी, सादर अभिवादन। तरही मिसरे पर सुंदर गजल हुई है । हार्दिक बधाई। जैसा कि आपने भाई अमित जी, व भाई चेतन जी की बातों के जवाव में कहा है कि गिरह लगाना समय की बरबादी है। पर इस सीखने सिखाने के मंच पर ऐसा कहना मेरे हिसाब से ठीक नहीं है। गिरह…"
Saturday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-144
"आ. भाई नवीन जी, सादर आभार।"
Saturday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-144
"आ. भाई अमीरुद्दीन जी, सादर अभिवादन। अच्छी गजल हुई है। हार्दिक बधाई।"
Saturday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-144
"आ. रचना बहन, सादर अभिवादन। अच्छी गजल हुई है। हार्दिक बधाई।"
Saturday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-144
"आ. भाई अमीरुद्दीन जी, सादर अभिवादन। गजल पर उपस्थिति और उत्साहवर्धन के लिए आभार। ज़माना यहाँ समय के लिए प्रयुक्त किया है। अतः को का प्रयोग उचित नहीं होगा। क्योंकि यहाँ पर कहन का अर्थ सदियों के अर्थ में प्रयुक्त है। सादर..."
Saturday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' posted a blog post

केवल बहाना खोज के जलती हैं बस्तियाँ - लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"

२२१/२१२१/१२२१/२१२ * सीमित से दायरे  में  न पल भर उड़ान हो उनको भी अब तो एक बड़ा आसमान हो।१। * दुत्कार अब न तुम लिखो हिस्से अनाथ के राजन सभी के नाथ हो सब को समान हो।२। * केवल हों कर्म ध्यान में नित मान के लिए इस को  नहीं  जरूरी  बड़ा  खानदान हो।३। * मन्जिल की दूरियों को अभी पाटना इन्हें इतनी अधिक न पाँव के हिस्से थकान हो।४। * जनता को खुद ही चाहिए उनको न ताज दे जिस की भी लोकराज में कड़वी जबान हो।५। * हिस्से में आये पंख जो कुदरत से रोक मत पन्छी को चन्द  रोज  न  सदियों उड़ान हो।६। * बारूद बम की फस्ल को अब गौंण कीजिए दुनिया में सब की और न साँसत में जान हो।७। * केवल बहाना खोज के जलती हैं बस्तियाँ सबकी जुबाँ पे आज तो सुलझा बयान हो।८। * इन्सानियत के खून को पनपे न सोच अब कोशिश करो कि और न कोई बुहान हो।९। * मौलिक/अप्रकाशित लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"See More
Saturday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-144
"आ. भाई अस्फाक जी, तरही मिसरे पर बहुत खूबसूरत गजल हुई है । हार्दिक बधाई।"
Friday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-144
"आ. भाई दयाराम जी, सादर अभिवादन। तरही मिसरे पर गजल का प्रयास अच्छा है। हार्दिक बधाई।  कुछ जगहों पर सुधार की आवश्यकता है- हम नहीं जान सके होती अदावत क्या है ये मिसरा बह्र में नहीं है देखिएगा। अब कहोगे कि ये सारी जलालत क्या है"
Friday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-144
"आ. भाई संजय जी, सादर अभिवादन।सुन्दर गजल हुई है । हार्दिक बधाई। मतले में कुछ सुधार की गुंजाईस है। हार्दिक बधाई।"
Friday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-144
"आ. भाई दयारामजी , सादर अभिवादन। गजल पर उपस्थिति और स्नेह के लिए हार्दिक धन्यवाद।"
Friday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-144
"आ. भाई तस्दीक अहमद जी, सादर अभिवादन। गजल पर उपस्थिति और प्रशंसा के लिए हार्दिक धन्यवाद।"
Friday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-144
"आ. रिचा जी, हार्दिक धन्यवाद।"
Friday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-144
"आ. भाई चेतन जी, सादर अभिवादन। गजल पर उपस्थिति और प्रशंसा के लिए धन्यवाद।"
Friday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-144
"आ. भाई अमित जी , हार्दिक धन्यवाद।"
Friday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-144
"आ. भाई तस्दीक अहमद जी, सादर अभिवादन। तरही मिसरे पर अच्छी गजल हुई है । हार्दिक बधाई।"
Friday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-144
"आ. रिचा जी, सादर अभिवादन। सुन्दर गिरह के साथ अच्छी गजल हुई है। हार्दिक बधाई।"
Friday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-144
"आ. भाई चेतन जी, सादर अभिवादन। तरही मिसरे पर अच्छी गजल हुई है। हार्दिक बधाई।"
Friday

Profile Information

Gender
Male
City State
Delhi
Native Place
Dharchaula,uttarakhand
Profession
teaching

लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s Blog

केवल बहाना खोज के जलती हैं बस्तियाँ - लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"

२२१/२१२१/१२२१/२१२

*

सीमित से दायरे  में  न पल भर उड़ान हो

उनको भी अब तो एक बड़ा आसमान हो।१।

*

दुत्कार अब न तुम लिखो हिस्से अनाथ के

राजन सभी के नाथ हो सब को समान हो।२।

*

केवल हों कर्म ध्यान में नित मान के लिए

इस को  नहीं  जरूरी  बड़ा  खानदान हो।३।

*

मन्जिल की दूरियों को अभी पाटना इन्हें

इतनी अधिक न पाँव के हिस्से थकान हो।४।

*

जनता को खुद ही चाहिए उनको न ताज दे

जिस की भी लोकराज में कड़वी जबान हो।५।

*

हिस्से में…

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Posted on June 25, 2022 at 7:00am — 3 Comments

इन के बिना तो व्यर्थ है सँस्कार मजहबी - लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"



२२१/२१२१/१२२१/२१२

*

खंडित करे न देश को तलवार मजहबी

आँगन खड़ी न कीजिए दीवार मजहबी।।

*

मन्शा उन्हीं की देश को हर बार तोड़ना

करते रहे हैं लोग  जो  व्यापार मजहबी।।

*

जीवन न जाने कितने ही बर्बाद कर रहा

इन्सानियत से  दूर  हो  सन्सार मजहबी।।

*

माटी का मोल प्रेम की भाषा भी साथ हो

इन के बिना तो व्यर्थ है सँस्कार मजहबी।।

*

समरसता ज्ञान और न आपस का मेल है

बच्चों को जो भी देते हैं आधार मजहबी।।

*

करती नहीं है धर्म का कोई भी काम…

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Posted on June 22, 2022 at 10:00am — 2 Comments

जलाया घर अमावस ने -- लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"

१२२२/१२२२/१२२२/१२२२

*

नहीं ऐसा स्वयं यूँ ही सभी को दीप जलते हैं

दुआ माँ की फलित होती तभी तो दीप जलते हैं।।

*

तमस की रात कितनी हो ये सूरज ही करेगा तय

मगर सब को उजाला हो इसी को दीप जलते हैं।।

*

हवा से यारियाँ उन की उसी से साँस चलती है

सदा तूफान से लड़कर बली हो दीप जलते हैं।।

*

तुम्हारे जन्म से यौवन खुशी को जो लड़े तम से

बुढ़ापे में तके पथ को वही दो दीप जलते हैं।।

*

जलाया घर अमावस ने है लेकर नाम उनका ही

कहेगा कौन अब ऐसा सभी को दीप जलते…

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Posted on June 21, 2022 at 5:21am

पिता - दोहे

दोहे -पिता

*****

पिता एक उम्मीद सह, हैं जीवन की आस

वो हिम्मत परिवार की, हैं मन का विश्वास।१।

*

जीवन जग में तात ही, केवल ऐसा गाँव

सघन शीत जो धूप दें, और धूप में छाँव।२।

*

जो करते सुत को सरल, जीवन की हर राह

अनुभव से अर्जित हमें, देकर सीख अथाह।२।

*

डाँट-डपट करते भले, भोर, दिवस या रात

सम्बल सबके पर रहे, कठिन समय में तात।४।

*

नित सुख में परिवार हो, होती मन में चाह

हँसते -हँसते झेलते, इस को पीर अथाह।५।

*

पत्थर से व्यवहार…

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Posted on June 18, 2022 at 3:53pm — 4 Comments

Comment Wall (21 comments)

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At 3:37pm on December 21, 2021, KullarSaddik said…

अपने आतिथ्य के लिए धन्यवाद :)

At 8:45am on January 16, 2021, Aazi Tamaam said…

मुसाफिर सर प्रणाम स्वीकार करें आपकी ग़ज़लें दिल छू लेती हैं

At 8:39pm on December 3, 2020,
सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey
said…

जन्मदिन की शुभकामनाओं के लिए हार्दिक धन्यवाद, आदरणीय लक्ष्मण धामी ’मुसाफिर’ जी 

At 11:39pm on November 22, 2020, DR ARUN KUMAR SHASTRI said…

प्रिय भ्राता धामी जी सप्रेम नमन
आपके शब्द सहरा में नखलिस्तान जैसे - हैं

At 8:37am on May 14, 2020, Om Prakash Agrawal said…
आदरणीय
सराहना हेतु सहृदय आभार एवं धन्यवाद
At 4:12pm on May 7, 2020, सालिक गणवीर said…
हौसला अफजाई के लिए आपका ममनून हूँ आदरणीय
At 10:58am on October 18, 2019, dandpani nahak said…
आदरणीय लक्ष्मण धामी जी बहुत शुक्रिया
At 2:30pm on September 28, 2019, dandpani nahak said…
आदरणीय लक्ष्मण धामी ' मुसाफिर' जी बहुत बहुत शुक्रिया हौसला अफ़जाई का आपने समय निकाला मैं बहुत शुक्रगुज़ार हूँ
At 10:47am on August 24, 2019, dandpani nahak said…
बहुत शुक्रिया आदरणीय लक्षमण धामी जी
At 10:03pm on May 24, 2019, dandpani nahak said…
आदरणीय भाई लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' जी आदाब
बहुत बहुत शुक्रिया हौसला बढ़ने के लिए!
 
 
 

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