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लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
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लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s Page

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लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on मनोज अहसास's blog post अहसास की ग़ज़ल:मनोज अहसास
"आ. भाई मनेज जी, अभिवादन। अच्छी गजल हुई है। हार्दिक बधाई।"
Feb 14
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-160
"आ. भाई अजय जी, सादर अभिवादन। दोहों पर उपस्थिति और उत्साहवर्धन के लिए आभार।"
Feb 11
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-160
"विषय - विरह मिलनविधा - दोहा छंद****जीवन की चक्की लिए, विरह मिलन दो पाटजो मानव इस में  पिसा, लघु  हो हुआ विराट।१।*बिछड़े जो भी मीत से, लिए मिलन की आसनिज में भरते हैं वही, पल-पल नवल उजास।२।*अंतहीन  हो  यदि  मिलन, नीरस  लगे…"
Feb 10
Shyam Narain Verma replied to लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s discussion सदियों का वनवास अंत कर in the group धार्मिक साहित्य
"नमस्ते जी, बहुत ही सुंदर गीत, हार्दिक बधाई l सादर"
Jan 25
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' added a discussion to the group धार्मिक साहित्य
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सदियों का वनवास अंत कर

गीतपुलकित तन से पुलकित मन से, नाच रहे है जन जन सारे।सदियों  का  वनवास  अंत  कर, सकल  राष्ट्र में राम पधारे।**राजनीति ने करवट  ली  तो, हर  सोया विश्वास जगा है।सच है राजा रंक सभी के, मन में बस उल्लास दिखा है।।घटघट वासी राम भले हों, घटघट उन में आज बसा है।होकर एकाकार  सनातन, अद्भुत यह इतिहास रचा है।।**सिर्फ न देशी  लोग  विदेशी, दर्शन  को  निष्काम पधारे।सदियों का वनवास अंत कर, सकल राष्ट्र में राम पधारे।।**सुख हो, दुख हो, या दुविधा हो, ज्यों मर्यादा में राम रहे।त्यों मर्यादित जीवन  जीना, जन जन वाणी आज कहे।।पराधीन थे पुरखे जब तक, नित सदियों चाहे कष्ट सहे।रामराज्य सी  चहुँदिश  अब तो, हर  मर्यादित हवा बहे।।***महज नहीं अब मूर्ति रूप में, आत्मरूप हर धाम पधारे।सदियों का वनवास अंत कर, सकल राष्ट्र में राम पधारे।।***मौलिक/अप्रकाशितलक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'See More
Jan 22
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 153 in the group चित्र से काव्य तक
"आ. भाई अशोक जी, सादर अभिवादन। हर बार की तरह इस बार भी श्रेष्ठ छंदो में चित्र को परिभाषित किया है। हार्दिक बधाई।"
Jan 21
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 153 in the group चित्र से काव्य तक
"नगर से दूर दृश्य गाँव का, भले ही न उस से नातामगर खूबियों से यह अपनी, सभी का मन है लुभाता।।भरी दुपहरी गर्मी की यह, जब नगरों में दम घोटेबाग बगीचे गाँवों में तब, हैं नित शीतलता बोते।।***गर्मीं के मौसम में फिर से, लदी आम से हर डाली बच्चे जुटकर सब आये…"
Jan 21
Aazi Tamaam commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post दिल तो बेचैन उस की बातों से- लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
"आपका अनोखा लेखन मुझे बहुत अच्छा लगता है सुंदर ग़ज़ल हुई बधाई आ"
Jan 18
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-159
"आ. भाई सुरेश जी, सादर अभिवादन। दोहोंपर उपस्थिति व उत्साहवर्धन के लिए आभार।"
Jan 14
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-159
"आ. भाई सुरेश जी, सादर अभिवादन। प्रदत्त विषय पर सुन्दर दोहे हुए हैं। बहुत बहुत हार्दिक बधाई।"
Jan 14
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-159
"दोहे (प्रतिशोध)***घृणा जिस की मात है, और तात है क्रोधहिंसा भगिनी लाड़ली, इठलाता प्रतिशोध।१।*द्वेष-द्वंद प्रतिशोध की, जहाँ अग्नि भरपूरसुख से वह जीवन सदा, रहता कोसों दूर।२।*रावण सा प्रतिशोध जो, मन में रखता पालकर देता  निज  गेह  का,…"
Jan 14
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-159
"सादर अभिवादन।"
Jan 14
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' posted blog posts
Jan 2
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post लौटा है कौन देख के जन्नत हरी भरी-लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
"आ. भाई सुशील जी, सादर अभिवादन। गजल पर उपस्थिति और उत्साहवर्धन के लिए हार्दिक बधाई। "
Jan 1
Sushil Sarna commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post लौटा है कौन देख के जन्नत हरी भरी-लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
"वाह आदरणीय लक्ष्मण धामी जी बहुत ही खूबसूरत ग़ज़ल बनी है । हार्दिक बधाई सर ।नववर्ष की हार्दिक शुभकामनाऐं सर"
Jan 1
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Sushil Sarna's blog post दोहा पंचक. . . . क्रोध
"आ. भाई सुशील जी सादर अभिवान। सुंदर दोहे हुए हैं। हार्दिक बधाई।"
Jan 1
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Sushil Sarna's blog post दोहा त्रयोदशी
"आ. भाई सुशील जी, सादर अभिवादन। अच्छे दोहे हुए हैं। हार्दिक बधाई।"
Jan 1
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on amita tiwari's blog post हर साल ,जाते हुए साल
"आ. अमिता जी, अच्छी प्रस्तुति हुई है। हार्दिक बधाई।"
Jan 1
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on दिनेश कुमार's blog post ग़ज़ल दिनेश कुमार -- अंधेरा चार सू फैला दमे-सहर कैसा
"आ. भाई दिनेश जी, अभिवादन। सुंदर गजल हुई है। हार्दिक बधाई।"
Jan 1
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Md. Anis arman's blog post ग़ज़ल
"आ. भाई अनीस जी, अच्छी गजल हुई है। हार्दिक बधाई।"
Jan 1

Profile Information

Gender
Male
City State
Delhi
Native Place
Dharchaula,uttarakhand
Profession
teaching

लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s Blog

जाते वर्ष के दोहे

करुण  रुदन  करता  नहीं, कोई  जाता देख

चाहे लिखता वो रहा, हर दिन सुख का लेख।१।

*

कैसे मुख अब फेर  लूँ, मन में लिए सवाल

इस से भी बदतर कहीं, ना हो आगत साल।२।

*

यादें छोड़ तमाम फिर, गया और इक वर्ष

लाभ हानि का लोग क्यों, करते हैं निष्कर्ष।३।

*

स्वागत को हर्षित  हुए, करें  विदा तो हर्ष

क्या बोलूँ अब मैं भला, कैसा था यह वर्ष।४।

*

साथ समय के नित जिसे, कोसा दसियों बार

वही  बिछड़ते  दे   रहा,  नया  साल  उपहार।५।

*

नये …

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Posted on December 31, 2023 at 10:00pm

दिल तो बेचैन उस की बातों से- लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'

2122/१२१२/२२

***

दिल की कालिख सँवार आँखों में

कह  रहे  सब  खुमार  आँखों में।१।

*

फिर सुहाता न कोई भी उस को

उग गया जिस के खार आँखों में।२।

*

वार  करती  है  जानलेवा  वो

क्या लिए है  कटार  आँखों में।३।

*

दिल तो बेचैन उस की बातों से

दिख रहा पर  करार  आँखों में।४।

*

सिर्फ दुख से न होती नम लोगो

हर्ष भी  लाता  धार  आँखों में।५।

*

मन की चाहत सुबास सरसों की

खिल गयी  पर …

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Posted on December 31, 2023 at 7:29pm — 1 Comment

लौटा है कौन देख के जन्नत हरी भरी-लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'

२२१/२१२१/१२२१/२१२



रहती हो जिसके साथ मुसीबत हरी भरी

कैसे हो उस की  यार  तबीयत हरी भरी।१।

*

वो भाग्यवान तात से जिसको मिले सदा

आशीष  लाड़  डाँट  नसीहत  हरी भरी।२।

*

सबने है आग द्वेष की सुलगा रखी बहुत

रखता है मन में  कौन मुहब्बत हरी भरी।३।

*

बढ़ता न ताप दुनिया का ऐसे कभी नहीं

रखते धरा को लोग जो औसत हरी भरी।४।

*

बाँटें दुखों के बोझ को मिलके सदा यहाँ

दो ईश खूब सब को ही…

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Posted on December 31, 2023 at 7:22pm — 2 Comments

उस मुसाफिर के पाँव मत बाँधो - लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'

२१२२/१२१२/२२

*

सूनी आँखों  की  रोशनी बन जा

ईद आयी सी फिर खुशी बन जा।१।

*

अब भी प्यासा हूँ इक सदी बीती

चैन  पाऊँ  कि  तू  नदी  बन  जा।२।

*

हो गया जग  ये  शीत का मौसम

धूप सी  तू  तो  गुनगुनी  बन जा।३।

*

मौत आकर खड़ी है द्वार अपने

एक पल को ही ज़िन्दगी बन जा।४।

*

मुग्ध कर दू फिर से हर महफिल

आ के अधरों  पे  शायरी बन जा।५।

*

इस नगर  में  तो  सिर्फ  मसलेंगे

फूल जाकर  तू  जंगली  बन जा।६।…

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Posted on December 2, 2023 at 7:00am — 3 Comments

Comment Wall (17 comments)

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At 10:59am on January 25, 2023, Anita Bhatnagar said…

सादर आभार आदरणीय 

At 3:37pm on December 21, 2021, KullarSaddik said…

अपने आतिथ्य के लिए धन्यवाद :)

At 8:45am on January 16, 2021, Aazi Tamaam said…

मुसाफिर सर प्रणाम स्वीकार करें आपकी ग़ज़लें दिल छू लेती हैं

At 8:39pm on December 3, 2020,
सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey
said…

जन्मदिन की शुभकामनाओं के लिए हार्दिक धन्यवाद, आदरणीय लक्ष्मण धामी ’मुसाफिर’ जी 

At 11:39pm on November 22, 2020, DR ARUN KUMAR SHASTRI said…

प्रिय भ्राता धामी जी सप्रेम नमन
आपके शब्द सहरा में नखलिस्तान जैसे - हैं

At 8:37am on May 14, 2020, Om Prakash Agrawal said…
आदरणीय
सराहना हेतु सहृदय आभार एवं धन्यवाद
At 4:12pm on May 7, 2020, सालिक गणवीर said…
हौसला अफजाई के लिए आपका ममनून हूँ आदरणीय
At 4:04pm on August 8, 2018, babita garg said…

शुक्रिया लक्ष्मण जी

At 11:44am on March 3, 2018, Sanjay Kumar said…
बहुत बहुत धन्यवाद और आभार। कोशिश करूंगा कि कुछ योगदान कर सकूं। बस हौसला अफजाई करते रहिएगा और जहां जरूरी हो तो कुछ सिखा दीजियेगा। सादर
At 7:27pm on March 10, 2016, TEJ VEER SINGH said…

हार्दिक आभार आदरणीय लक्ष्मण धामी जी!आपने मुझे इस क़ाबिल समझा!

 
 
 

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