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नाथ सोनांचली
  • Male
  • वाराणसी, उत्तर प्रदेश
  • India
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नाथ सोनांचली replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-94
"आद0 नयना जी सादर अभिवादन। आभार"
Jan 31
नाथ सोनांचली replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-94
"आद0 अजय जी सादर अभिवादन। आभार आपका"
Jan 31
नाथ सोनांचली replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-94
"आद0 मनन कुमार सिंह जी सादर अभिवादन। क्या कहने,, प्रतीकों में कोई बात कहना आप से सीखे। मैं तो एकदम नया हूँ पर आपसे बहुत कुछ सीखने को मिल रहा है। बधाई इस लघुकथा पर"
Jan 31
नाथ सोनांचली replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-94
"आद0 प्रतिभा पांडेय जी सादर अभिवादन। बेहद गम्भीर विषय पर उत्तम लेखनी। क्या कहने। वाह वाह। बधाई इस लघुकथा पर"
Jan 31
नाथ सोनांचली replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-94
"आद0 बबिता जी सादर अभिवादन। मुझे लघुकथा के बारे में उतना तो नहीं मालूम परन्तु मुझे आपकी लघुकथा सोचने पर विवश करती हुई विषय आधारित नजर आयी। बधाई स्वीकार कीजिए।"
Jan 31
नाथ सोनांचली replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-94
"आद0 बबिता गुप्ता जी सादर अभिवादन। हृदयतल से आभार आपका।"
Jan 31
नाथ सोनांचली replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-94
"आद0 मनन जी सादर अभिवादन। शीर्षक समझ में ही नहीं आया कि क्या लिखा। आपकी हरेक बात सिर आखों पर। मैं इस बार लघुकथा में हास्य का पुट देना चाहता था। बस यही सोचकर इस कथानक को बुना था। मैं बहुत गम्भीर नहीं लिख पाता। हृदयतल से आभार आपका"
Jan 31
नाथ सोनांचली replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-94
"आद0 शेख़ शहज़ाद उस्मानी साहब सादर अभिवादन। आपदा केवल प्राकृतिक आपदाएं ही नहीं होतीं, कभी-कभी कुछेक चीजें व्यवहार में भी आपदा जैसी ही होती हैं। ख़ैर आपकी प्रतिक्रिया और प्यार का हृदयतल से शुक्रिया। स्नेह बनाये रखें"
Jan 31
नाथ सोनांचली replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-94
"यह घटना तब कि है जब प्रवेश पाण्डेय जी सऊदिया (सऊदी अरब) से दो महीने के छुट्टी पर घर (हिंदुस्तान) आये थे। एक बार घर से थोड़ी दूरी पर स्थित पंपिंग सेट पर जा रहे थे। रास्ते में खरपत्तू चच्चा मिल गए। दुःख सुख की औपचारिकता के उपरांत उन्होंने पूछा कि…"
Jan 30
नाथ सोनांचली replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-151
"आद0 संजय शुक्ल जी सादर अभिवादन। बढ़िया ग़ज़ल हुई है। बधाई स्वीकार कीजिए"
Jan 28
नाथ सोनांचली replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-151
"आद0 चेतन प्रकाश जी सादर अभिवादन। अच्छी कोशिश है। बधाई स्वीकार कीजिये"
Jan 28
नाथ सोनांचली replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-151
"आद0 ऋचा यादव जी सादर अभिवादन। अच्छी ग़ज़ल हुई है। शेष सुझाव भी अच्छे आये हैं। बधाई स्वीकार कीजिए"
Jan 28
नाथ सोनांचली replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-151
"आद0 दंडपाणि नाहक जी सादर अभिवादन। बधाई इस खूबसूरत ग़ज़ल के लिए"
Jan 28
नाथ सोनांचली replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-151
"आद0 दिनेश जी सादर अभिवादन। अच्छी ग़ज़ल हुई है। आभार आपका"
Jan 28
नाथ सोनांचली replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-151
"आद0 संजय शुक्ल जी सादर अभिवादन। आभार आपका"
Jan 28
नाथ सोनांचली replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-151
"आद0 रचना भाटिया जी सादर अभिवादन। आभार आपका"
Jan 28

Profile Information

Gender
Male
City State
Varanasi
Native Place
Varanasi
Profession
Teacher
About me
I am a simple leaving man, having hobby to write poems

नाथ सोनांचली's Blog

राष्ट्र (कविता)

भाल जिसका है हिमालय औ तिरंगा शान है

देश  प्यारा  वह  हमारा   नाम   हिन्दुस्तान है

हर सुबह जिसकी सुहानी सुरमई औ' शाम है

स्वर्ग सा यह देश अपना मोक्ष का यह धाम है

खेत  गिरि मैदान जंगल लहकतीं हरियालियाँ

भोर  की आहट मिले  तो स्वर्ग सी हो वादियाँ।

पूर्व  में आसाम  मेघालय  मिजोरम  ख़ास  है

साथ में बंगाल सिक्किम का अमर इतिहास है

गन्ध  फूलों  की  बिखरती  है  हवाओं  में वहाँ

गीत गाते खग  ख़ुशी  के …

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Posted on January 2, 2023 at 7:42am

गीत : कोई चाहे कुछ भी कह ले, जीवन पथ आसान नहीं है

कोशिश  है जीवन  पाने की

सबकी चाह  प्रथम आने की

कई  करोड़ों  लड़ते   लेकिन

कोई - कोई  विजयी  निकले

शेष  कहाँ जा खो जाते हैं, इसका  कुछ अनुमान नहीं है

कोई  चाहे कुछ भी  कह ले, जीवन पथ  आसान नहीं है

शाम  सुबह  या  जेठ  दुपहरी, भूख  मिटाते  जीवन  बीते

कल जैसा ही कल होगा क्या, इस असमंजस में हम जीते

रेत  सरीखे  अपने  सपने,  कब   ढह  जाए  नहीं  भरोसा

जीने  की  उम्मीद  लिए  सब, बूँद  जहर  का  चेतन  पीते

दो  रोटी  पाने  की …

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Posted on June 17, 2022 at 9:59pm — 2 Comments

मदिरा सवैया आधारित दो छन्द

1

माँ गुरु थी पहली अपनी जिसका तप पावन ज्ञान लिखूँ

छाँव मिली जिस आँचल में उसको सब वेद पुरान लिखूँ

गर्भ  पला जिसके  तन में  उसको अपना भगवान लिखूँ

मात  सनेह  समान  यहाँ कुछ  और नहीं  उपमान लिखूँ

2

साजन  जो परदेश  गए  करके   मकरन्द  विहीन कली

अश्रु गिरें दिन रात यहाँ  बरसे  जस  सावन  की  बदली

बात रही दिल में जितनी दिल ने दिल से दिल में कह ली

हाल  हुआ  दिल का अपने जस नीर बिना तड़पे मछली

नाथ…

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Posted on June 15, 2022 at 7:54am — 4 Comments

गीत (सोचना क्या, छोड़ना क्या, कुछ नहीं बस में हमारे)

तृप्ति भी मिलती नहीं औ द्वंद भी कुछ इस तरह है

सोचना क्या? छोड़ना क्या? कुछ नहीं बस में हमारे

साथ किसके क्या रहा है छोड़कर धरती गगन को

फूल  जो  भी  आज  हैं वे छोड़ देंगे कल चमन को

मौत  पर  होवें  दुखी  या  जन्म पर खुशियाँ मनाएँ

हार   से  हम  हार  जाएँ  या   लड़े  औ जीत जाएँ

ज़िन्दगी   के  राज़  गहरे   दूर   जितने   चाँद   तारे

सोचना क्या? छोड़ना क्या? कुछ नहीं बस में हमारे

हर  पतन  के  बाद  ही  होता जगत उत्थान  भी है

शांति  की  ही  गोद  में …

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Posted on June 13, 2022 at 11:10am — 6 Comments

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At 7:03pm on April 11, 2019, Vivek Pandey Dwij said…
आदरणीय सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' जी आभार आप को इस उत्साह वर्धन के लिए।
At 7:39pm on November 20, 2016,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीय सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' जी.
सादर अभिवादन !
मुझे यह बताते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी ग़ज़ल "हाथ से सारे फिसल गए" को "महीने की सर्वश्रेष्ठ रचना" सम्मान के रूप मे सम्मानित किया गया है | इस शानदार उपलब्धि पर बधाई स्वीकार करे |

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आपका
गणेश जी "बागी
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक 
ओपन बुक्स ऑनलाइन

 
 
 

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