For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

Sheikh Shahzad Usmani
  • Male
  • SHIVPURI M.P.
  • India
Share

Sheikh Shahzad Usmani's Friends

  • Anjuman Mansury 'Arzoo'
  • mirza javed baig
  • प्रदीप देवीशरण भट्ट
  • Anamika singh Ana
  • Archana Gangwar
  • Mohammed Arif
  • Mirza Hafiz Baig
  • surender insan
  • Usha
  • Kalipad Prasad Mandal
  • Tasdiq Ahmed Khan
  • Rahila
  • सतविन्द्र कुमार राणा
  • Ravi Shukla
  • pratibha pande
 

Sheikh Shahzad Usmani's Page

Latest Activity

Sheikh Shahzad Usmani commented on Sushil Sarna's blog post ताकत (लघुकथा )
"आदाब। एक ज्वलंत समस्या और कड़वे सच को उभारती बढ़िया रचना। हार्दिक बधाई जनाब सुशील सरना जी। इस विधा में भी आपकी सक्रियता हमें प्रभावित व आकर्षित करती है। इस रचना में आपने सब कुछ स्वयं या पात्रों के माध्यम से कह दिया है। बहुत कुछ पाठक स्वयं समझ लेते…"
May 1
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-85 (विषय: अहसास)
"आदाब। शुक्रिया मार्गदर्शन हेतु आदरणीया कल्पना भट्ट जी।"
Apr 30
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-85 (विषय: अहसास)
"आदाब। विषयांतर्गत बिल्कुल भिन्न अहसास कराती बहुत तंजदार रचना। हार्दिक बधाई आदरणीया रचना भाटिया जी। हालाँकि 'कथनी और कथनी' पर लिखना एक आम शैली हो चुकी है। लेकिन ऑनलाइन शिक्षा संबंधित शिकायतें और बालश्रमिकों की पीड़ाओं को छूती रचना अन्य…"
Apr 30
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-85 (विषय: अहसास)
"कृपया बताइएगा कि यह चुटकुलानुमा व्यंग्य रूपी रचना क्यों नहीं कही जा सकती?"
Apr 30
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-85 (विषय: अहसास)
"सादर नमस्कार। हार्दिक बधाई जनाब चेतन प्रकाश जी। संयुक्त परिवार की सकारात्मकता और बड़प्पन को, आपसी समझदारी को उभारती इसअच्छी रचना में पात्रों के नामों और पाँच संतानों के होने से प्रवाह और प्रभाव बाधित होता लगा। क्या यही बात दो संतान लेकर नहीं कही जा…"
Apr 30
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-85 (विषय: अहसास)
"सादर नमस्कार। जी, इसे डायरी शैली में भी लिख सकता था। मार्गदर्शन प्रदान करने व रचना के मर्म का अनुमोदन करने हेतु शुक्रिया। हमारे यहाँ अंतिम कालखण्ड भी किसी विषय शिक्षक का विषय पीरियड होता है। ... और उस समय  शिक्षक मैं ही था। इसी पखवाड़े की…"
Apr 30
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-85 (विषय: अहसास)
"रचना पर समय देकर टिप्पणी व.राय हेतु हार्दिक धन्यवाद आदरणीया नयना (आरती) कानिटकर जी। हमारे यहाँ अंतिम कालखण्ड भी किसी विषय शिक्षक का विषय पीरियड होता है। ... और उस समय  शिक्षक मैं ही था। सच्ची घटना पर लेखक का एक लघुकथा प्रयास था विवरणात्मक शैली…"
Apr 30
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-85 (विषय: अहसास)
"कृपया बताइएगा कि मेरी प्रविष्टि पटल पर आप सभी को स्पष्ट प्रकाशित या नहीं या दोबारा पोस्ट करूँ। राय की प्रतीक्षा रहेगी।"
Apr 30
Sheikh Shahzad Usmani commented on Er. Ganesh Jee "Bagi"'s blog post लघुकथा : बँटवारा (गणेश जी बाग़ी)
"आदाब। मैं इसे समसामयिक और सर्वकालिक भी कह सकता हूं, क्योंंकि  समाज के मध्यम या कमज़ोर वर्ग में ऐसी परिस्थितियाँ आज भी बनती हैं और पिता जी ऐसी राय या समाधान सुझाते हैं और ऐसे मामले झगड़ों का मनमुटाव का क़ानूनी उलझनों का कारण बनते हैं। बेहतरीन रचना…"
Apr 30
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-85 (विषय: अहसास)
"सादर नमस्कार। सांकेतिक रूप से कही गई रचना समझने में मुझे थोड़ा समय लग सकता है।"
Apr 29
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-85 (विषय: अहसास)
"आदाब। विषयांतर्गत भूख को भी परिभाषित करती भावपूर्ण रचना। कहा और अनकहा भी। हार्दिक बधाई आदरणीया नयना (आरती) कानिटकर जी।"
Apr 29
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-85 (विषय: अहसास)
"आदाब। विषयांतर्गत जज़्बात से परिपूर्ण प्रवाहमय बेहतरीन रचना। हार्दिक बधाई आदरणीया दीपाली ठाकुर जी।"
Apr 29
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-85 (विषय: अहसास)
"अहसास अनायास (लघुकथा) : अभी हाल ही की, विद्यालय की, कक्षा नौ की बात। प्रार्थना सभा में एक सदन की पाठ्येत्तर गतिविधि प्रस्तुति में सैनिक फैंसी ड्रेस में बेहतरीन सहभागिता करने वाले छात्र सक्षम की बात। अंतिम कालखण्ड की बात।छुट्टी की घंटी बजी। बच्चे…"
Apr 29
Sheikh Shahzad Usmani commented on मनोज अहसास's blog post अहसास की ग़ज़ल::; मनोज अहसास
"आदाब। बेहतरीन विचारोत्तेजक। हार्दिक बधाई आदरणीय मनोज अहसास साहिब।"
Apr 29
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion खुशियाँ और गम, ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार के संग...
"विनम्र श्रद्धांजलि।"
Apr 28
Sheikh Shahzad Usmani commented on मिथिलेश वामनकर's blog post पंख था कतरा हुआ : ग़ज़ल (मिथिलेश वामनकर)
"आदाब। विभिन्न पहलुओं पर बढ़िया प्रतिक्रिया सहित बढ़िया ग़ज़ल। हार्दिक बधाई आदरणीय वामनकर साहब।"
Apr 2

Profile Information

Gender
Male
City State
Shivpuri M.P.
Native Place
Shivpuri
Profession
Radio Announcer
About me
A Private School- teacher, Freelancer and a Casual Radio Announcer. Simlple living, high thinking, fond of reading and writing.

Sheikh Shahzad Usmani's Blog

मुंगेरीलाल के वैक्सीन सपने (कहानी) /शेख़ शहज़ाद उस्मानी :

मुंगेरीलाल और कोरोनाकाल... सबके बहुत बुरे हालचाल! लॉकडाउन पर लॉकडाउन... घर में क़ैद सब जॉब डाउन, रोज़गार डाउन! बेचारे मुंगेरीलाल ने अपनी कम्पनी की नौकरी छोड़कर बड़ी मुसीबत कर ली थी सात साल पहले। उनका काम और रुझान दिलचस्प और संतोषजनक था, फ़िर भी सपनों और दिवास्वप्नों में खोये रहने और बड़ी-बड़ी बातें फैंकने के कारण दफ़्तर, घर, बाज़ार और ससुराल सभी जगह लोग उनका मज़ाक उड़ा-उड़ा कर मौज-मस्ती कर लिया करते थे। उन सबकी बातों को मुंगेरीलाल कभी हल्के में, तो कभी बहुत गंभीरता से ले लेते थे।

एक बार…

Continue

Posted on November 12, 2020 at 8:30am — 2 Comments

गार्गी की बार्बी (लघुकथा)/शेख़ शहज़ाद उस्मानी

भगवान देता है, तो छप्पर फाड़ कर देता है। लेता है, तो एक झटके में ले लेता है। देकर ले लेता है, तो हँसाने के बाद रुला-रुला कर। राजन, रंजीता और गंगा का ज़िन्दगीनामा भी यही साबित करता रहा; गार्गी और गार्गी की बार्बी का भी! बार्बी के साथ कब, क्या, कैसे और क्यूँ होगा; बार्बी ने कभी सोचा न था। सोचती भी कैसे? उसकी सोच तो उसकी मम्मी पर निर्भर थी। उसकी मम्मी ने भी तो न सोचा था वह सब। यही हाल गार्गी का था। गार्गी के साथ कब, क्या, कैसे और क्यूँ होगा; गार्गी ने कभी सोचा न था। सोचती भी कैसे? उसकी सोच तो…

Continue

Posted on November 10, 2020 at 8:30am — 4 Comments

दिल के हाल सुने दिलवाला (लघुकथा)

"अपनी पैरों से रौंदें, दूजी जो भा जाये!"



"घर की मुर्ग़ी दाल बराबर; नयी पीढ़ी को कौन समझाये!"



अपनापन त्याग कर ख़ुदग़र्ज़ी, मनमर्ज़ी, दोगलापन, पागलपन, बचकानापन दिखाती अपने मुल्क की नई पीढ़ी की सोच और पलायन-गतिविधियों पर दो बुजुर्गों ने अपनी-अपनी राय यूं ज़ाहिर की।



"... 'ओल्ड इज़ गोल्ड' कहावत को छोड़ो जी; ओल्ड इज़ सोल्ड! नई पीढ़ी है सो बोल्ड! उन्हें ज़मीनी स्टोरीज़ टोल्ड हों या अनटोल्ड! हम बुड्ढे तो हुए क्लीन-बोल्ड!" उनमें से एक ने दूसरे से कहा, लेकिन ख़ुद के…

Continue

Posted on March 10, 2020 at 2:34pm — 4 Comments

हिताय और सुखाय (संस्मरण)

Continue

Posted on November 23, 2019 at 1:00pm — 7 Comments

Comment Wall (13 comments)

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

At 12:50am on October 5, 2018, mirza javed baig said…

आली जनाब शहज़ाद उस्मानी साहिब आदाब, 

मुझे अपनी दोस्तों की फ़ेहरिस्त में जोड़ने का शुक्रिया 

At 6:43am on July 2, 2018, राज़ नवादवी said…

"आदरणीय Sheikh Usmani साहब, तरही मुशायरे में मेरी ग़ज़ल में शिरकत का दिल से शुक्रिया. समयाभाव था, कमेंट बॉक्स बंद हो चुका है. इसलिए यहाँ से आभार प्रकट कर रहूँ हूँ.सादर "

At 11:59am on April 12, 2018, MD SHAFIQUE ASHRAF said…

जी बहूत  बहुत शुक्रिया जनाब ... नया हूँ .... थोड़ा सीखने का मौका दीजिये  

At 10:23am on January 8, 2017, Dr Ashutosh Mishra said…
आदरणीय शेख भाई जी आपके मित्रों की सूची में खुद को शामिल पाकर मैं सुखद अनुभूति कर रहा हूँ आपकी लघु कथाएं इस मंच पर मेरे बिशेष आकर्षण का केंद्र है आपकी हर लघु कथा मैं पढता हूँ आपकी कलम सृजन के नए आयाम स्थापित करती रहे ऐसी अपनी शुभकामनाओं के साथ सादर
At 8:23pm on August 5, 2016, pratibha pande said…

आपको जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएँ  आदरणीय उस्मानी जी  ,आपका रचनाकर्म हर दिन नई बुलंदियां छुएँ ,ये कामना करती हूँ 

At 7:30am on June 20, 2016, सुरेश कुमार 'कल्याण' said…
श्रद्धेय शेख शहजाद उस्मानी साहब ये सब तो आप जैसे मित्रों के सहयोग से ही हुआ है और आशा करता हूं कि भविष्य में भी मेरा मार्गदर्शन करते रहेंगे। हृदय की गहराईयों से धन्यवाद ।
At 8:42am on May 24, 2016, महिमा वर्मा said…

आभार आपका आ.शेख उस्मानी सर जी,अभी जानकारी  पूरी नहीं है ,तो आपको जवाब देने में देर हो गई.पुनः आभार आपका .

At 2:11pm on May 1, 2016, pratibha pande said…

मित्रता के लिए आभार 

At 8:41am on November 18, 2015, pratibha pande said…

हार्दिक आभार आपका आदरणीय 

At 9:27am on November 4, 2015, kanta roy said…

देखी वफ़ा-ए-फ़ुरसत-ए-रंज-ओ-निशात-ए-दहर

ख़मियाज़ा यक दराज़ी-ए-उमर-ए-ख़ुमार था---- 

मिर्ज़ा ग़ालिब साहब का ये शेर आज आपके लिए
असीम शुभकामनाएँ आपको आदरणीय शहजाद जी।

 

 
 
 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Sushil Sarna posted a blog post

रोला छंद. . . . .

रोला छंद. . . .विगत पलों की याद, हृदय  को  लगे  सुहानी।छलक-छलक ये नैन, गाल पर लिखें कहानी । मौन…See More
10 hours ago
Samar kabeer replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-143
""ओबीओ लाइव तरही मुशाइर:"अंक-143 को सफल बनाने के लिए सभी ग़ज़लकारों और पाठकों का हार्दिक…"
17 hours ago
अमीरुद्दीन 'अमीर' commented on Sushil Sarna's blog post आँधियों से क्या गिला. . . . .
"आदरणीय सुशील सरना जी आदाब, क्या बहतरीन अंदाज़ के साथ ख़ूबसूरत अहसासात से लबरेज़ ग़ज़ल कही है, वाह!…"
17 hours ago
dandpani nahak replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-143
"आदरणीय अमीरुद्दीन अमीर साहब सादर अभिवादन बहुत-बहुत शुक्रिया आपका "
17 hours ago
अमीरुद्दीन 'अमीर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-143
"//आदरणीय मैंने "और" को 2 में लिया है 21 में नहीं// ठीक है। "
18 hours ago
अमीरुद्दीन 'अमीर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-143
"मुहतरमा ऋचा यादव जी आदाब तरही मिसरे पर ग़ज़ल का उम्दा प्रयास है मुबारकबाद पेश करता हूँ। किनारा कर…"
18 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-143
"आ. भाई अमीरूद्दीन जी, सादर अभिवादन। गजल पर उपस्थिति, प्रशंसा व स्नेह के लिए आभार।"
18 hours ago
अमीरुद्दीन 'अमीर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-143
"आदरणीय दयाराम मेठाणी जी आदाब, तरही मिसरे पर अच्छी ग़ज़ल हुई है, गिरह भी उम्दा लगी है, बधाई स्वीकार…"
18 hours ago
अमीरुद्दीन 'अमीर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-143
"आदरणीय दण्डपाणि नाहक़ जी आदाब तरही मिसरे पर अच्छी ग़ज़ल कही है आपने मुबारकबाद पेश करता हूँ। गिरह…"
18 hours ago
Dayaram Methani replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-143
"आदरणीय दण्डपाणि नाहक जी, प्रोत्साहन के लिए हार्दिक धन्यवाद।"
18 hours ago
अमीरुद्दीन 'अमीर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-143
"आदरणीय सूबे सिंह जी आदाब, तरही मिसरे पर ग़ज़ल का अच्छा प्रयास है बधाई स्वीकार करें।"
18 hours ago
Dayaram Methani replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-143
"आदरणीय चेतन प्रकाश जी, पोस्ट पर आने व कमियां बताने के लिए हार्दिक धन्यवाद। आपके सुझाव पर ध्यान…"
18 hours ago

© 2022   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service