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Mahendra Kumar
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Mahendra Kumar commented on दिनेश कुमार's blog post ग़ज़ल --- इक फ़रिश्ता है मेहरबाँ मुझ पर / दिनेश कुमार / ( इस्लाह हेतु )
"लाजवाब ग़ज़ल के लिए हार्दिक बधाई स्वीकार कीजिए आदरणीय दिनेश जी. सादर."
3 hours ago
Mahendra Kumar commented on Sushil Sarna's blog post स्मृति ...
"बढ़िया कविता है आदरणीय सुशील सरना जी. हार्दिक बधाई स्वीकार कीजिए. सादर."
3 hours ago
Mahendra Kumar commented on Er. Ganesh Jee "Bagi"'s blog post ग़ज़ल (गणेश जी बागी)
"उम्दा ग़ज़ल है आदरणीय गणेश जी "बागी" जी. हार्दिक बधाई प्रेषित है. सादर."
4 hours ago
Mahendra Kumar commented on मेघा राठी's blog post लघुकथा
"उम्दा लघुकथा है आदरणीया मेघा राठी जी. हार्दिक बधाई प्रेषित है. सादर."
4 hours ago
Mahendra Kumar commented on Sheikh Shahzad Usmani's blog post चाय पर चर्चा (लघुकथा)
"बढ़िया लघुकथा है आदरणीय शेख़ शहज़ाद उस्मानी जी. हार्दिक बधाई स्वीकार कीजिए. सादर."
4 hours ago
Mahendra Kumar commented on amod shrivastav (bindouri)'s blog post आज खुद को आज कहकर जानता है ..गजल
"बढ़िया ग़ज़ल है आदरणीय आमोद जी. हार्दिक बधाई स्वीकार कीजिए.  1. मतला स्पष्ट नहीं है या मैं समझ नहीं सका.  2. किसका कितना पेट भूखा रह गया है  3. कैसा बीता है शरद और ग्रीष्म कैसी 4. दर्द के किस दौर से गुजरा हुआ हूँ    आह से…"
4 hours ago
Mahendra Kumar commented on Sheikh Shahzad Usmani's blog post छोटा वकील (लघुकथा)
"'बड़े' वकीलों पर अच्छा व्यंग्य किया है आपने आदरणीय शेख़ शहज़ाद उस्मानी जी. हार्दिक बधाई प्रेषित है. सादर."
4 hours ago
Mahendra Kumar commented on Sushil Sarna's blog post नमक सी जलन...
"उम्दा कविता है आदरणीय सुशील सरना जी. हार्दिक बधाई स्वीकार कीजिए. सादर."
4 hours ago
Mahendra Kumar commented on Sheikh Shahzad Usmani's blog post समय की लाठियां (लघुकथा)
"सही कहा आपने, मुँह पर "सही नीयत और सही तरक़्क़ी" और दिल में "शाही नीयत और शाही तरक़्क़ी". यही है आजकल की राजनीति का चेहरा. इस बढ़िया लघुकथा हेतु हार्दिक बधाई स्वीकार कीजिए आदरणीय शेख़ शहजाद उस्मानी जी.  1. //लहरा सी रही…"
4 hours ago
Mahendra Kumar commented on TEJ VEER SINGH's blog post आपसी सहयोग - लघुकथा –
"जीवन में आपसी सहयोग के महत्त्व को दर्शाती बढ़िया लघुकथा है आदरणीय तेज वीर सिंह जी. हार्दिक बधाई स्वीकार कीजिए. सादर."
5 hours ago
Mahendra Kumar replied to योगराज प्रभाकर's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-37 में स्वीकृत सभी लघुकथाएँ
"समयाभाव के कारण इस बार न तो मैं साथी रचनाकारों की लघुकथाओं पर टिप्पणी कर पाया और न ही अपनी लघुकथा पर आयी टिप्पणियों का प्रत्युत्तर. इस हेतु मैं सभी से क्षमाप्रार्थी हूँ. मेरी लघुकथा को लेकर एक आम राय यह रही कि यह अस्पष्ट है. इसलिए इसे मैंने संशोधित…"
May 14
Mahendra Kumar replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-37 (विषय: भारत)
"अधूरे ख़्वाब अंग्रेज़ सैनिकों की टुकड़ी इमारत में प्रवेश कर चुकी थी। “न्याय की देवी वो द्रौपदी है जिसकी अस्मत कृष्ण ने ही लूट ली।’’ बूढ़े चित्रकार ने उस न्यायाधीश पर कूची फेरते हुए कहा जो एक औरत की साड़ी उतार रहा था। औरत की हालत…"
Apr 29
Mahendra Kumar commented on Sheikh Shahzad Usmani's blog post तज़ुर्बे (लघुकथा)
"कम शब्दों में शानदार लघुकथा कही है आपने आदरणीय शेख़ शहज़ाद उस्मानी जी। प्रतीकों का उम्दा प्रयोग करते हुए बढ़िया व्यंग्य किया है आपने। ढेर सारी बधाई स्वीकार कीजिए। सादर। "
Apr 9
Mahendra Kumar replied to योगराज प्रभाकर's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-36 में स्वीकृत लघुकथाएं
"हार्दिक आभार आदरणीय वीर मेहता जी. वैसे इस सूची में आप अपनी लघुकथा का नाम लेना भूल गए. सादर."
Apr 6
Mahendra Kumar replied to योगराज प्रभाकर's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-36 में स्वीकृत लघुकथाएं
"आदरणीय योगराज प्रभाकर सर, लघुकथा गोष्ठी अंक 36 के सफल आयोजन, कुशल संचालन और त्वरित संकलन हेतु हार्दिक बधाई स्वीकार कीजिए. आपसे निवेदन है कि क्रमांक 14 पर अंकित लघुकथा "विष बेल" को निम्न लघुकथा से प्रतिस्थापित कर दें. सादर धन्यवाद. विष…"
Apr 6
Mahendra Kumar replied to Admin's discussion खुशियाँ और गम, ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार के संग...
"ओबीओ की आठवी वर्षगाँठ की ओबीओ परिवार के सभी सदस्यों को हार्दिक बधाई व शुभकामनाएँ. "
Apr 1

Profile Information

Gender
Male
City State
Allahabad
Native Place
Fatehpur

Mahendra Kumar's Blog

विद्वता के पैमाने /लघुकथा

एथेन्स के प्रसिद्ध चैराहे पर सुकरात जोकर बन कर खड़ा था। जो भी आता उसके ठिगने कद, चपटी नाक, मैले-कुचैले पुराने कपड़े, निकली हुई तोंद और नंगे पैर को देख कर हँसे बिना न रह पाता। ‘‘कौन हो तुम?’’ भीड़ में से किसी ने पूछा।



‘‘एक दार्शनिक।’’ उसे लगा कि नाम बताने की अपेक्षा यदि वह दार्शनिक कहेगा तो लोग उसे कुछ गंभीरता से लेंगे मगर वह गलत था। चैराहा एक बार पुनः ठहाकों से गूँज उठा।

‘‘वो देखो, दार्शनिक उन्हें कहते हैं।’’ विश्वविद्यालय से दर्शनशास्त्र के प्रोफेसर्स को बाहर आते देख…

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Posted on January 16, 2018 at 5:22pm — 10 Comments

बे-आवाज़ सिक्के /लघुकथा

‘अगर मैंने पाँच का यह सिक्का पाखाने में ख़र्च कर दिया और मुझे आज भी काम नहीं मिला तो फिर मैं क्या करूँगा?’ सार्वजनिक शौचालय के बाहर खड़ा जमाल अपनी हथेली पर रखे उस पाँच के सिक्के को देखकर सोच रहा था। तभी उसके पेट में फिर से दर्द उभरा। वह चीख उठा, ‘‘उफ! अल्लाह ने पाखाने और भूख का सिस्टम बनाया ही क्यों?’’



जिस उम्र में जवानी शुरु होती है उस उम्र में उसके चेहरे पर बुढ़ापा था। लेबर चैराहे के कुछ अन्य मजदूरों की तरह पिछले कई दिनों से जमाल को भी कोई काम नहीं मिला था। घर भेजने के बाद जो…

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Posted on January 14, 2018 at 1:00pm — 12 Comments

ग़ज़ल : अब दवाओं का नहीं मुझ पे असर होने को है

अरकान : 2122 2122 2122 212

एक तरफ़ा इश्क़ मेरा बेअसर होने को है

ख़त्म यानी ज़िन्दगी का ये सफ़र होने को है

कहने को तो सर पे सूरज आ गया है दोस्तो

ज़िन्दगी में पर हमारी कब सहर होने को है

हर किसी ने हाथ में पत्थर उठाये देखिये

और फिर उनका निशाना मेरा सर होने को है

आपको चाहा था मैंने बेतहाशा टूट कर

अब यही तकलीफ़ मुझको उम्र भर होने को है

करना है कुछ आपको तो बस दुआएँ कीजिए

अब दवाओं का कहाँ मुझ पे असर होने को…

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Posted on December 26, 2017 at 10:00pm — 18 Comments

मृत्यु : पूर्व और पश्चात्

मृत्यु...

जीवन का वह सत्य

जो सदियों से अटल है

शिला से कहीं अधिक।

मृत्यु पूर्व...

मनुष्य बद होता है

बदनाम होता है

बुरी लगती हैं उसकी बातें

बुरा उसका व्यवहार होता है।

मृत्यु पूर्व...

जीवन होता है

शायद जीवन

नारकीय

यातनीय

उलाहनीय

अवहेलनीय।

मृत्यु पूर्व...

मनुष्य, मनुष्य नहीं होता

हैवान होता है

हैवान, जो हैवानियत की सारी हदें

पार कर देना चाहता…

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Posted on October 22, 2017 at 9:33am — 18 Comments

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"आदरणीय तजवीर सिंह जी, आपसी सहयोग के महत्व का संदेश देती अच्छी लघुकथा । प्रस्तुति के लिए हार्दिक…"
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"आदरणीय सुशील सरना जी, अच्छी रचना । प्रस्तुति के लिए बधाई ।"
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