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Mahendra Kumar
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  • India
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Mahendra Kumar replied to Admin's discussion खुशियाँ और गम, ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार के संग...
"हमारी दुआऍं आपके साथ हैं सर। आपको कुछ नहीं होगा। "
yesterday
Mahendra Kumar replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-77
"प्रदत्त विषय पर अच्छी प्रेरणास्पद लघुकथा कही है आपने आदरणीया प्रतिभा पाण्डे जी। हार्दिक बधाई स्वीकार कीजिए।"
Aug 31, 2021
Mahendra Kumar replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-77
"शुरुआत बढ़िया है पर अन्त थोड़ा भटक गया है। लिव इन रिलेशन में रहने वालों का कोर्ट मैरिज को एकदम से नकारना अटपटा लगता है। हार्दिक बधाई स्वीकार कीजिए।"
Aug 31, 2021
Mahendra Kumar replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-77
"प्रदत्त विषय पर अच्छे कथानक का चयन किया है आपने आदरणीया रचना भाटिया जी। हार्दिक बधाई स्वीकार कीजिए। बाकी कॉमा, उद्धरण चिह्नों और टंकण त्रुटियों को देख लीजिएगा।"
Aug 31, 2021
Mahendra Kumar replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-77
"कथानक पूरी तरह स्पष्ट नहीं हो पाया आदरणीय मोहन बेगोवाल जी। क्षमा कीजिए। आयोजन में सहभागिता हेतु हार्दिक बधाई प्रेषित है। "
Aug 31, 2021
Mahendra Kumar replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-77
"अच्छा विषय उठाया है आपने आदरणीय विनय कुमार जी पर ट्रीटमेण्ट बेहतर हो सकता था। बाकी तथ्य इस कथ्य के विपरीत कुछ और ही गवाही देते हैं। फिलहाल हार्दिक बधाई स्वीकार कीजिए।"
Aug 31, 2021
Mahendra Kumar replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-77
"अच्छी लघुकथा है आदरणीय मनन कुमार सिंह जी। थोड़े सम्पादन की आवश्यकता प्रतीत हो रही है। हार्दिक बधाई स्वीकार कीजिए।"
Aug 31, 2021
Mahendra Kumar replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-77
"वृद्धावस्था पर केन्द्रित प्रदत्त विषय को सार्थक करती अच्छी लघुकथा है। हार्दिक बधाई स्वीकार कीजिए आदरणीय तेजवीर सिंह जी।"
Aug 31, 2021
Mahendra Kumar replied to Admin's discussion खुशियाँ और गम, ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार के संग...
"जब से यह समाचार सुना है तब से स्तब्ध हूँ। अभी भी कुछ कह पाने में समर्थ नहीं हो पा रहा हूँ। अलिवदा सर! आपकी बहुत याद आएगी।"
May 25, 2021
Mahendra Kumar replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-60 (विषय: धरोहर)
"अच्छी लघुकथा है आदरणीय सतविन्द्र कुमार जी पर और बेहतर हो सकती थी जिस ओर गुणीजनों ने इशारा कर दिया है। हार्दिक बधाई स्वीकार कीजिए। सादर।"
Mar 31, 2020
Mahendra Kumar replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-60 (विषय: धरोहर)
"अच्छी लघुकथा है आदरणीया प्रतिभा जी किन्तु प्रदत्त विषय से यह कैसे न्याय कर रही है मैं नहीं समझ सका। मेरी तरफ़ से हार्दिक बधाई स्वीकार कीजिए। सादर।"
Mar 31, 2020
Mahendra Kumar replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-60 (विषय: धरोहर)
"आपकी लघुकथा पढ़ कर हमेशा कुछ न कुछ सीखने को मिलता है सर। साम्प्रदायिकता जैसे संवेदनशील मुद्दे पर कैसे एक गम्भीर लघुकथा लिखनी चाहिए यह रचना उसका सटीक उदाहरण है। एक चीज़ है जिसकी तरफ़ अक्सर लेखक नहीं ध्यान देते वो है तार्किकता। किसी का हृदय परिवर्तन इतनी…"
Mar 31, 2020
Mahendra Kumar replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-60 (विषय: धरोहर)
"बढ़िया लघुकथा है आदरणीय मोहन बेगोवाल जी। थोड़े से सम्पादन से और बढ़िया हो जाएगी। हार्दिक बधाई स्वीकार कीजिए। सादर।"
Mar 31, 2020
Mahendra Kumar replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-60 (विषय: धरोहर)
"आदरणीय ओम प्रकाश क्षत्रिय जी, आपकी लघुकथा पर आदरणीय योगराज सर की टिप्पणी से मैं भी सहमत हूँ। आयोजन में सहभगिता हेतु हार्दिक बधाई स्वीकार कीजिए। सादर।"
Mar 31, 2020
Mahendra Kumar replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-60 (विषय: धरोहर)
"//मेरा सदैव यह मानना रहा है कि समसामयिक विषयों पर लिखते समय इस बात का ध्‍यान रखना चाहिए कि सामयिक प्रयोजन सिद्ध होने के बाद भी रचना की प्रासंगिकता बनी रहे।// पूर्णतः सहमत। "
Mar 31, 2020
Mahendra Kumar replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-60 (विषय: धरोहर)
"प्रदत्त विषय को अलग तरह से परिभाषित और उसके साथ पूरी तरह न्याय करती एक बढ़िया लघुकथा के लिए हार्दिक बधाई स्वीकार कीजिए आदरणीय गणेश जी "बाग़ी" जी। शीर्षक भी सटीक है। सादर।"
Mar 31, 2020

Profile Information

Gender
Male
City State
Allahabad
Native Place
Fatehpur

Mahendra Kumar's Blog

ग़ज़ल : इक दिन मैं अपने आप से इतना ख़फ़ा रहा

अरकान : 221 2121 1221 212

इक दिन मैं अपने आप से इतना ख़फ़ा रहा

ख़ुद को लगा के आग धुआँ देखता रहा

दुनिया बनाने वाले को दीजे सज़ा-ए-मौत

दंगे में मरने वाला यही बोलता रहा

मेरी ही तरह यार भी मेरा अजीब है

पहले तो मुझको खो दिया फिर ढूँढता रहा

रोता रहा मैं हिज्र में और हँस रहे थे तुम

दावा ये मुझसे मत करो, मैं चाहता रहा

कुछ भी नहीं कहा था अदालत के सामने

वो और बात है कि मैं सब जानता…

Continue

Posted on December 10, 2019 at 10:00am — 4 Comments

ग़ज़ल : ख़ून से मैंने बनाए आँसू

अरकान : 2122 1122 22

चाहा था हमने न आए आँसू

उम्र भर फिर भी बहाए आँसू

कोई तो हो जो हमारी ख़ातिर

पलकों पे अपनी सजाए आँसू

मार के अपने हसीं सपनों को

ख़ून से मैंने बनाए आँसू

वक़्त बेवक़्त कहीं भी आ कर

याद ये किसकी दिलाए आँसू

कोई भी तेरा न दुनिया में हो

रात दिन तू भी गिराए आँसू

दुनिया में इनकी नहीं कोई क़द्र

इसलिए मैंने छुपाए आँसू

आपसे मिल के ये पूछूँगा मैं

आपने…

Continue

Posted on December 3, 2019 at 5:46pm — 4 Comments

ग़ज़ल : मैं अपने आप को दफ़ना रहा हूँ

बह्र : 1222 1222 122

तुम्हारे शहर से मैं जा रहा हूँ

बिछड़ने से बहुत घबरा रहा हूँ

 

वहाँ दुनिया को तू अपना रही है

यहाँ दुनिया को मैं ठुकरा रहा हूँ

 

उठा कर हाथ से ये लाश अपनी

मैं अपने आप को दफ़ना रहा हूँ

 

तुम्हारे इश्क़ में बन कर मैं काँटा

सभी की आँख में चुभता रहा हूँ

 

नहीं मालूम जाना है कहाँ पर

न जाने मैं कहाँ से आ रहा हूँ

 

मुहब्बत रात दिन करनी थी तुमसे

तुम्हीं से…

Continue

Posted on January 31, 2019 at 7:51pm — 8 Comments

ग़ज़ल : मुझसे मत बोलिए मंज़ूर-ए-ख़ुदा होता है

बह्र : 2122 1122 1122 22/112

मैंने देखा है कि दुनिया में क्या क्या होता है

मुझसे मत बोलिए मंज़ूर-ए-ख़ुदा होता है

 

इश्क़ ही सबसे बड़ा ज़ुर्म है इस दुनिया में

ये ख़ता कर लो तो हर शख़्स ख़फ़ा होता है

 

जो गलत करते हैं, वो लोग सही होते हैं

और जो अच्छा करे तो वो बुरा होता है

 

मैं भी इस ज़ख़्म को नासूर बना डालूँगा

दर्द बतलाओ मुझे कैसे दवा होता है

 

कभी दिखता था ख़ुदा मुझको भी मेरे अन्दर

और अब इस पे भी…

Continue

Posted on January 27, 2019 at 11:30am — 10 Comments

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At 9:45am on January 27, 2019, dandpani nahak said…
आदरणीय महेंद्र जी
बहुत शुक्रिया
 
 
 

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