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Mahendra Kumar
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  • India
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Latest Activity

Mahendra Kumar commented on Manan Kumar singh's blog post रूप(लघुकथा)
"व्यक्ति के कई रूप होते हैं। इस बात को रेखांकित करती हुई अच्छी लघुकथा लिखी है आपने आ. मनन जी। हार्दिक स्वीकार कीजिए।"
23 hours ago
Mahendra Kumar commented on अमीरुद्दीन 'अमीर' बाग़पतवी's blog post ग़ज़ल (उठाओ जितनी भी चाहे क़सम ज़माने की)
"कोई बात नहीं। रचना पर अन्तिम निर्णय लेखक का ही होता। एक बार पुनः बधाई। "
23 hours ago
Mahendra Kumar commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post मरती हुई नदी (नवगीत)
"पर्यावरणीय चिन्ताओं पर बढ़िया नवगीत लिखा है आपने आ. धर्मेन्द्र जी। हार्दिक बधाई स्वीकार कीजिए। कृपया गुणीजनों का संज्ञान लें।"
yesterday
Mahendra Kumar commented on अमीरुद्दीन 'अमीर' बाग़पतवी's blog post ग़ज़ल (उठाओ जितनी भी चाहे क़सम ज़माने की)
"वैसे दूसरा शेर बेहतर हो सकता है।"
yesterday
Mahendra Kumar commented on अमीरुद्दीन 'अमीर' बाग़पतवी's blog post ग़ज़ल (उठाओ जितनी भी चाहे क़सम ज़माने की)
"अच्छी ग़ज़ल हुई है आ. अमीरुद्दीन जी। हार्दिक बधाई प्रेषित है। "
yesterday
Mahendra Kumar commented on जयनित कुमार मेहता's blog post इक वह्म ऐतबार से आगे की चीज़ है (ग़ज़ल)
"संशोधन के बाद ख़ूब ग़ज़ल हुई है आदरणीय जयनित जी। हार्दिक बधाई स्वीकार कीजिए। "
yesterday
Mahendra Kumar commented on Ashok Kumar Raktale's blog post ग़ज़ल
"अच्छी ग़ज़ल है कही है आपने आदरणीय अशोक रक्ताले जी। हार्दिक बधाई स्वीकार कीजिए। सादर।"
yesterday
Mahendra Kumar replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-90 (विषय: प्रतीक्षा)
"आदरणीय शेख़ शहज़ाद उस्मानी जी, हिन्दी की दशा-दुर्दशा पर अच्छी लघुकथा कही है आपने। हार्दिक बधाई स्वीकार कीजिए। हालांकि लघुकथा प्रदत्त विषय को लेकर कितना न्याय कर पाई है इसमें मुझे सन्देह है। सादर। "
Friday
Mahendra Kumar replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-90 (विषय: प्रतीक्षा)
"आदरणीय तस्दीक़ जी, भारतीय रेल की लेटलतीफ़ी को प्रदत्त विषय से जोड़ते हुए आपने जो लघुकथा कही है उस पर हार्दिक बधाई स्वीकार कीजिए।  1. //अजय रेल्वे स्टेशन पर ट्रेन रवाना होने के समय सुबह 8 बजे से आधा घंटा पहले ही पहुंच गया l//  मुझे नहीं लगता…"
Friday
Mahendra Kumar replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-90 (विषय: प्रतीक्षा)
"आ. प्रतिभा पाण्डेय जी, पौराणिक कथ्य का आधार बना कर विषयानुकूल बढ़िया लघुकथा लिखी है आपने। मेरी तरफ़ से दिल से बधाई स्वीकार कीजिए। आ. योगराज सर ने जिन बिन्दुओं की बात की है उनसे मेरी भी सहमति है। //ये 'मिर्ची' थी। दो दिन पहले ही यहाँ आई…"
Friday
Mahendra Kumar replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-90 (विषय: प्रतीक्षा)
"प्रणाम सर ! अनुमोदन हेतु दिल से आभारी हूँ। सादर।"
Friday
Mahendra Kumar replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-90 (विषय: प्रतीक्षा)
"आदरणीय चेतन प्रकाश जी, सादर अभिवादन!एक सुझाव देने की धृष्टता कर रहा हूँ, //कोई अजीब सा नाम// की जगह "कोई अस्पष्ट-सा शब्द" कर दीजिए। समस्या कम हो जाएगी।सादर।"
Friday
Mahendra Kumar replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-90 (विषय: प्रतीक्षा)
"आदरणीय तेज वीर सिंह जी, इच्छा मृत्यु जैसी जटिल नैतिक समस्या को प्रदत्त विषय से जोड़कर बेहद उम्दा लघुकथा लिखी है आपने। दिल से ढेर सारी बधाई स्वीकार कीजिए। सादर।"
Friday
Mahendra Kumar replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-90 (विषय: प्रतीक्षा)
"आदरणीय रवि भसीन 'शाहिद' जी, 1. //लघुकथा किसी दार्शनिकता को ले कर चल रही थी, इसका मुझे ज्ञान नहीं है, हाँ चौहान साहिब ज़रूर जीवन का फ़लसफ़ा राजू को समझा रहे थे// एक तरफ़ आप यह कह रहे हैं कि लघुकथा किस दार्शनिकता को लेकर चल रही है इसका आपको…"
Friday
Mahendra Kumar replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-90 (विषय: प्रतीक्षा)
"आ. रवि भसीन 'शाहिद' जी, लघुकथा का बढ़िया प्रयास हुआ है जिस हेतु मेरी हार्दिक बधाई प्रेषित है। 1. 'प्रयास' इसलिए कह रहा हूँ कि जो रचना अपने अन्त से उत्कृष्ट लघुकथाओं की श्रेणी में शामिल हो सकती थी उसी के अन्त ने उसका नुक़सान कर…"
Friday
Mahendra Kumar replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-90 (विषय: प्रतीक्षा)
"आदरणीय चेतन प्रकाश जी, 1. //मानसी को कुछ अस्फुट ध्वनियाँ मात्र ही तो प्राप्त हुई ं है और वह भी आनंद की मदहोशी में, उसे तो कोई नाम भी नहीं सुना// फिर यह क्या है : //मदहोशी में कोई अजीब सा नाम लेकर कहता, "आई लव यू "।// आप अपनी टिप्पणी…"
Friday

Profile Information

Gender
Male
City State
Allahabad
Native Place
Fatehpur

Mahendra Kumar's Blog

ग़ज़ल : इक दिन मैं अपने आप से इतना ख़फ़ा रहा

अरकान : 221 2121 1221 212

इक दिन मैं अपने आप से इतना ख़फ़ा रहा

ख़ुद को लगा के आग धुआँ देखता रहा

दुनिया बनाने वाले को दीजे सज़ा-ए-मौत

दंगे में मरने वाला यही बोलता रहा

मेरी ही तरह यार भी मेरा अजीब है

पहले तो मुझको खो दिया फिर ढूँढता रहा

रोता रहा मैं हिज्र में और हँस रहे थे तुम

दावा ये मुझसे मत करो, मैं चाहता रहा

कुछ भी नहीं कहा था अदालत के सामने

वो और बात है कि मैं सब जानता…

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Posted on December 10, 2019 at 10:00am — 4 Comments

ग़ज़ल : ख़ून से मैंने बनाए आँसू

अरकान : 2122 1122 22

चाहा था हमने न आए आँसू

उम्र भर फिर भी बहाए आँसू

कोई तो हो जो हमारी ख़ातिर

पलकों पे अपनी सजाए आँसू

मार के अपने हसीं सपनों को

ख़ून से मैंने बनाए आँसू

वक़्त बेवक़्त कहीं भी आ कर

याद ये किसकी दिलाए आँसू

कोई भी तेरा न दुनिया में हो

रात दिन तू भी गिराए आँसू

दुनिया में इनकी नहीं कोई क़द्र

इसलिए मैंने छुपाए आँसू

आपसे मिल के ये पूछूँगा मैं

आपने…

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Posted on December 3, 2019 at 5:46pm — 4 Comments

ग़ज़ल : मैं अपने आप को दफ़ना रहा हूँ

बह्र : 1222 1222 122

तुम्हारे शहर से मैं जा रहा हूँ

बिछड़ने से बहुत घबरा रहा हूँ

 

वहाँ दुनिया को तू अपना रही है

यहाँ दुनिया को मैं ठुकरा रहा हूँ

 

उठा कर हाथ से ये लाश अपनी

मैं अपने आप को दफ़ना रहा हूँ

 

तुम्हारे इश्क़ में बन कर मैं काँटा

सभी की आँख में चुभता रहा हूँ

 

नहीं मालूम जाना है कहाँ पर

न जाने मैं कहाँ से आ रहा हूँ

 

मुहब्बत रात दिन करनी थी तुमसे

तुम्हीं से…

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Posted on January 31, 2019 at 7:51pm — 8 Comments

ग़ज़ल : मुझसे मत बोलिए मंज़ूर-ए-ख़ुदा होता है

बह्र : 2122 1122 1122 22/112

मैंने देखा है कि दुनिया में क्या क्या होता है

मुझसे मत बोलिए मंज़ूर-ए-ख़ुदा होता है

 

इश्क़ ही सबसे बड़ा ज़ुर्म है इस दुनिया में

ये ख़ता कर लो तो हर शख़्स ख़फ़ा होता है

 

जो गलत करते हैं, वो लोग सही होते हैं

और जो अच्छा करे तो वो बुरा होता है

 

मैं भी इस ज़ख़्म को नासूर बना डालूँगा

दर्द बतलाओ मुझे कैसे दवा होता है

 

कभी दिखता था ख़ुदा मुझको भी मेरे अन्दर

और अब इस पे भी…

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Posted on January 27, 2019 at 11:30am — 10 Comments

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At 9:45am on January 27, 2019, dandpani nahak said…
आदरणीय महेंद्र जी
बहुत शुक्रिया
 
 
 

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Manan Kumar singh commented on Manan Kumar singh's blog post रूप(लघुकथा)
"आदरणीय महेंद्र जी, लघुकथा को आपने इज्जत बख्शी। आपका शुक्रिया। "
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Mahendra Kumar commented on Manan Kumar singh's blog post रूप(लघुकथा)
"व्यक्ति के कई रूप होते हैं। इस बात को रेखांकित करती हुई अच्छी लघुकथा लिखी है आपने आ. मनन जी।…"
23 hours ago
Mahendra Kumar commented on अमीरुद्दीन 'अमीर' बाग़पतवी's blog post ग़ज़ल (उठाओ जितनी भी चाहे क़सम ज़माने की)
"कोई बात नहीं। रचना पर अन्तिम निर्णय लेखक का ही होता। एक बार पुनः बधाई। "
23 hours ago
अमीरुद्दीन 'अमीर' बाग़पतवी commented on अमीरुद्दीन 'अमीर' बाग़पतवी's blog post ग़ज़ल (उठाओ जितनी भी चाहे क़सम ज़माने की)
"आदरणीय महेंद्र कुमार जी आदाब, ग़ज़ल पर आपकी आमद और ज़र्रा नवाज़ी का तह-ए-दिल से शुक्रिया, जनाब…"
23 hours ago
Mahendra Kumar commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post मरती हुई नदी (नवगीत)
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Mahendra Kumar commented on अमीरुद्दीन 'अमीर' बाग़पतवी's blog post ग़ज़ल (उठाओ जितनी भी चाहे क़सम ज़माने की)
"अच्छी ग़ज़ल हुई है आ. अमीरुद्दीन जी। हार्दिक बधाई प्रेषित है। "
yesterday

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