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Samar kabeer
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Md. Anis arman commented on Samar kabeer's blog post 'कि भाई भाई का दुश्मन है क्या किया जाए'
"बहुत अच्छी ग़ज़ल हुई है सर हर शेर लाजवाब है लफ़्ज़ों की कमाल की कलाकारी की है आपने बहुत कुछ सीखा जा सकता है इससे बहुत बहुत मुबारक "
20 minutes ago
Chetan Prakash commented on Samar kabeer's blog post 'कि भाई भाई का दुश्मन है क्या किया जाए'
"आदरणीय  समर कबीर साहब,  आदाब! सर, 'चितवन' बिल्कुल ठीक है, मैं उक्त मिसरा में चितवन के विकल्प के बारे  में पूछ  रहा था!  मेरी आप में आस्था है,  मैं काफिया 'चितवन' पर कोई  प्रश्न चिन्ह नहीं…"
yesterday
Samar kabeer commented on रोहित डोबरियाल "मल्हार"'s blog post अहसास
"जनाब रोहित जी आदाब, सुंदर प्रस्तुति हेतु बधाई स्वीकार करें ।तो"
yesterday
Samar kabeer commented on Sushil Sarna's blog post मौसम को .......
"जनाब सुशील सरना जी आदाब, अच्छी रचना हुई है, बधाई स्वीकार करें । 'सुइयाँ' या "सूइयाँ"?"
yesterday
Samar kabeer commented on Dharmendra Kumar Yadav's blog post एक सजनिया चली अकेली
"जनाब धर्मेन्द्र कुमार यादव जी आदाब, अच्छी रचना हुई है, बधाई स्वीकार करें । कृपया मंच पर अपनी सक्रियता बनाएँ ।"
yesterday
Samar kabeer commented on Samar kabeer's blog post 'कि भाई भाई का दुश्मन है क्या किया जाए'
"//मेरा  आशथ , मौसम  सम्बंधित कुछ जैसे, कानन, अथवा, प्रेयसी इंगित बिम्ब है, तो आपकी  भाषानुसार 'जोबन ( यौवन )// भाई, 'चितवन' शब्द आपको क्यों ठीक नहीं लग रहा?,कृपया स्पष्ट करने का कष्ट करें । "
yesterday
अमीरुद्दीन 'अमीर' commented on Samar kabeer's blog post 'कि भाई भाई का दुश्मन है क्या किया जाए'
"मुहतरम कबीर साहिब आदाब, जी बेशक, दुरुस्त फ़रमाया आपने। वज़ाहत के लिए बहुत बहुत शुक्रिया।  सादर। "
yesterday
Samar kabeer commented on Rachna Bhatia's blog post ग़ज़ल-है कहाँ
"मुहतरमा रचना भाटिया जी आदाब, ग़ज़ल का अच्छा प्रयास है, और गुणीजनों ने सुझाव भी अच्छे दिये हैं, बधाई स्वीकार करें । 'आदतें यूँ तो मिलेंगी एक सी लोगों में पर उनके दिल में एक सा एहसास होता है कहाँ' ऊला मिसरे में भाई धामी जी के सुझाव के मुताबिक़…"
yesterday
Chetan Prakash commented on Samar kabeer's blog post 'कि भाई भाई का दुश्मन है क्या किया जाए'
"आदाब, आदरणीय समर कबीर साहब नमन, टंकण में कुछ भूल हुई, मेरा  आशथ , मौसम  सम्बंधित कुछ जैसे, कानन, अथवा, प्रेयसी इंगित बिम्ब है, तो आपकी  भाषानुसार 'जोबन ( यौवन ) ! सादर  "
yesterday
Samar kabeer commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post हमने तो देखा बीज न खेतों में डालकर -लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
"जनाब लक्ष्मण धामी 'मुसाफ़िर' जी आदाब, ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है, बधाई स्वीकार करें । 'अब क्या रखोगे बोलिए उस को सँभालकर' इस मिसरे में 'रखोगे' को "रखेंगे" करना उचित होगा ।"
yesterday
Samar kabeer commented on Samar kabeer's blog post 'कि भाई भाई का दुश्मन है क्या किया जाए'
"जनाब लक्ष्मण धामी 'मुसाफ़िर' जी आदाब, ग़ज़ल की सराहना के लिये आपका आभारी हूँ ।"
yesterday
Samar kabeer commented on Samar kabeer's blog post 'कि भाई भाई का दुश्मन है क्या किया जाए'
"जनाब चेतन प्रकाश जी आदाब, ग़ज़ल की सराहना के लिये आपका आभारी हूँ । //लगता है, छठे शे'र में, 'चितवन' के बजाए 'मौसम' बहतर होता! // भाई, 'चितवन' क़ाफ़िया है, इसकी जगह 'मौसम' शब्द कैसे ले सकता है:-)))"
yesterday
Samar kabeer commented on Samar kabeer's blog post 'कि भाई भाई का दुश्मन है क्या किया जाए'
"जनाब अमीरुद्दीन 'अमीर' जी आदाब, ग़ज़ल आप बहुत ग़ौर से पढ़ते हैं,आपकी ये आदत मुझे पसंद है । //जो तू नहीं है तो तेरे बग़ैर ऐ जानम' में लफ़्ज़ 'ऐ जानम' पर एक बार फिर से विचार किया जा सकता है क्या?// इस मिसरे पर सिर्फ़ इतना…"
yesterday
Samar kabeer commented on Samar kabeer's blog post 'कि भाई भाई का दुश्मन है क्या किया जाए'
"मुहतरमा रचना भाटिया जी आदाब, ग़ज़ल की सराहना के लिये आपका आभारी हूँ ।"
yesterday
Samar kabeer commented on Samar kabeer's blog post 'कि भाई भाई का दुश्मन है क्या किया जाए'
"जनाब तेजवीर सिंह जी आदाब, ग़ज़ल की सराहना के लिये आपका आभारी हूँ ।"
yesterday
Samar kabeer commented on Samar kabeer's blog post एक ताज़ा ग़ज़ल
"जनाब लक्ष्मण धामी 'मुसाफ़िर' जी आदाब, ग़ज़ल की सराहना के लिये आपका आभारी हूँ ।"
yesterday

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'कि भाई भाई का दुश्मन है क्या किया जाए'

ग़ज़ल

1212 1122 1212 22 / 112

यही समाज की उलझन है क्या किया जाए

कि भाई भाई का दुश्मन है क्या किया जाए

हर एक शख़्स गरानी के दौर में देखो

ख़ुद अपने आप से बदज़न है क्या किया जाए

सभी ये कहते हैं यारो हम आशिक़ों के लिये

ये शब अज़ल ही से बैरन है क्या किया जाए

सफ़र प जाने से पहले ये सोचना है हमें

हर एक गाम प रहज़न है क्या किया जाए

जो तू नहीं है तो…

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Posted on August 2, 2021 at 3:59pm — 16 Comments

एक ताज़ा ग़ज़ल

ग़ज़ल

1212 1122 1212 22/112

सुख़न में पैदा तेरे किस तरह कमाल हुआ

हज़ार बार यही मुझसे इक सवाल हुआ

 

तमाम उम्र गुज़ारेंगे किस तरह यारो

हमें तो साँस भी लेना यहाँ मुहाल हुआ

 

लिखा न जाएगा ख़त में ख़ुद आके देख लो तुम

तुम्हारे इश्क़ में जो भी हमारा हाल हुआ

 

हुनर नहीं ये हमारा अता ख़ुदा की है

कि शे'र जो भी कहा हमने बेमिसाल हुआ

 

ज़बाँ से कह न सके वो मगर सुना ये है

हमारे जाने का उनको बहुत मलाल…

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Posted on July 24, 2021 at 6:30pm — 17 Comments

"ओ बी ओ" की ग्यारहवीं सालगिरह का तुहफ़ा

ग़ज़ल

22 22 22 22 22 2

जिसने देखा वो ये बोला ओबीओ

कोई नहीं है तेरे जैसा ओबीओ

जब तक ज़िंदा हूँ मैं साथ निभाऊँगा

है ये तुझ से मेरा वादा ओबीओ

'बाग़ी' जी के साथ सभी ने मिलजुल कर

नाज़ों से तुझको है पाला ओबीओ

दुनिया के कोने कोने में फैल गया

तू ने जो भी पाठ पढ़ाया ओबीओ

तेरा नाम शिखर पर दुनिया लिखती थी

मैंने कल शब ख़्वाब में देखा…

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Posted on April 1, 2021 at 2:52pm — 18 Comments

तरही ग़ज़ल

दोस्तो गर ज़िन्दगी में कामरानी चाहिए

ज़ह्न-ओ-दिल से गर्द नफ़रत की हटानी चाहिए



अर्ज़ कर दूँ आख़िरी ख़्वाहिश इजाज़त हो अगर

एक शब मुझको तुम्हारी मेज़बानी चाहिए



ज़िल्ल-ए-सुब्हानी अगर कुछ आपसे बच पाए तो

हम ग़रीबों को भी थोड़ी शादमानी चाहिए



मूँद कर आँखें न चलना याद रखना ये सबक़

ज़िन्दगी में हर क़दम पर सावधानी चाहिए



ज़िन्दगी में लाज़मी तो है मगर इंसान को

दफ़्न करने के लिये भी माल पानी चाहिए



फ़ज़्ल से रब के मुकम्मल हो गई मेरी ग़ज़ल

दोस्तो…

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Posted on November 9, 2020 at 5:30pm — 23 Comments

Comment Wall (40 comments)

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At 9:30pm on January 31, 2021, DR ARUN KUMAR SHASTRI said…

प्रिय मित्र समीर साहिब जी गज़ब लिखा ख़ास कर ये पंक्तियाँ मुझे बेहद सुकून दे गई

आग तो सर्द हो चुकी कब की

क्यों अबस राखदान फूँकता है

हुक्म से रब के ल'अल मरयम का

देखो मुर्दे में जान फूँकता है





डॉ अरुण कुमार शास्त्री // एक अबोध बालक // अरुण अतृप्त

At 10:27am on June 27, 2020, Chetan Prakash said…

आदरणीय, मोहतरम समीर कबीर साहब प्रत्युत्तर के लिए आपका आभारी हूँ। रू का शाब्दिक
अर्थ आपने चहरा, (उक्त मिसरे में ) बता या , लेकिन मैंने मूल प्रति में रूह लिखा था। लेकिन कुछ लोग वहाँ ह की गणना कर ले ते हैं, सो मैंने रू चुना। एक और बात रू , वहाँ आत्मा की प्रतिच्छाया है न कि चहरा।आदरणीय, बिम्ब की दृष्टिसे रू का प्रयोग सर्वथा उचित है। माननीय, कवि का संसार ( काव्य ) बिम्ब के माध्यम से अभिव्यक्त होता है, जो लक्षणा और
व्य्ंजना से ही बोध गम्य है। शब्द ही ब्रह्म है, इसी हेतु मनीषियों ने कहा है। और, दूसरे मिसरे की बह्र से खारिज...बतायाआपने, मेहरबानी होगी, आपकी, तक्तीअ कर मार्ग- दर्शन करें!

At 7:03am on May 10, 2020, सालिक गणवीर said…
आदरणीय समर कबीर साहब
आदाब
यह जानकर खुशी हुई कि आपके अनुज और बेटे की सेहत ठीक है. ओबीओ पर आपकी उपस्थिती से हम जैसे नये शायरों को संबल मिलता है. एक ताज़ा ग़ज़ल पोस्ट की है. वक़्त मिलने पर पढ़कर सलाह दें तो मेहरबानी होगी.
At 11:04pm on May 7, 2020, सालिक गणवीर said…
आदरणीय समर कबीर साहब
बहुत ममनून हूँ कि इतनी जल्दी शंका समाधान कर दिया. एक दफा फिर शुक्रिया.
At 9:38am on May 5, 2020, सालिक गणवीर said…
आदरणीय समर कबीर साहब
आदाब
बहुत दिनों बाद अपनी एक ग़ज़ल पोस्ट कर रहा हूँ, आपकी नज़रे इनायत की दरकार है. समय मिलने पर पढ़ कर सलाह एवं प्रतिक्रिया देकर अनुग्रहित करें.
सालिक गणवीर
At 6:04pm on April 23, 2020, सालिक गणवीर said…

आदरणीय समर कबीर साहब

अपने ब्लाग पर एक ग़ज़ल पोस्ट की है, प्रतिक्रिया एवं सुझाव अपेक्षित है. समय निकाल कर मुझे भी पढ़कर आवश्यक सुझाव देंं.

At 12:25pm on April 1, 2020, सालिक गणवीर said…
आदरणीय कबीर साहब
अपने ब्लॉग में एक ग़ज़ल पोस्ट कर रहा हूँ. साथ ही साथ आपको फ्रैंड रिक्वेस्ट भी भेजा है. कृपया स्वीकार करें. ग़ज़ल पर प्रतिक्रिया एवं सुझाव अपेक्षित है. पहले तरही ग़ज़ल,ज़रूरी रद्दोबदल के साथ पोस्ट किया था, प्रभाकर जी का मेल आने के बाद इसे हटा दिया है.
शुभेच्छु
सालिक गणवीर
At 1:52pm on March 29, 2020, Bhupender singh ranawat said…

shri maan aapki hosla afjayI k liye aabhar

At 7:06pm on March 9, 2020, अमीरुद्दीन 'अमीर' said…

शुक्रिया जनाब.

At 8:18am on January 21, 2020, Bhupender singh ranawat said…

आदरणीय Samar Kabeer साहब रचना की सराहना  के लिए आपका बहुत बहुत आभार । आपने जो advice दी हैं उनका में ध्यान रखूँगा। पुनः आपका आभार ।

 
 
 

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