For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

'ग़ालिब'की ज़मीन में एक ग़ज़ल

फ़ाइलातुन फ़ाइलातुन फाइलुन

दूर कितनी शादमानी और है
कुछ दिनों की जाँ फिशानी और है

मेरे फ़न की दाद सबने दी मुझे
आपकी बस क़द्रदानी और है

हो चुकीं सब मौत की तैयारियाँ
दोस्तों की नोहा ख़्वानी और है

है ख़बर सबको बहादुर वो नहीं
उसकी वज्ह-ए-कामरानी और है

दास्तान-ए-इश्क़ तो तुम सुन चुके
ज़िन्दगानी की कहानी और है

दोस्तों से तो मुआफ़ी मिल गई
मुझको ख़ुद से सरगरानी और है

लग रहा है उनकी बातों से "समर"
उनके दिल में बदगुमानी और है
---
शादमानी-ख़ुशी
जाँ फिशानी-कोशिश
नोहा ख़्वानी-रोना पीटना,मातम करना
कामरानी-जीत
सरगरानी-नाराज़गी
समर कबीर
मौलिक/अप्रकाशित

Views: 1453

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by SALIM RAZA REWA on October 24, 2017 at 1:02pm
जनाब समर साहब,
ख़ूबसूरत ग़ज़ल के लिए मुबारक़बाद बहुत ही खूबसूरत ग़ज़ल हुई है.
Comment by जयनित कुमार मेहता on October 24, 2017 at 12:40pm
बहुत ही ख़ूबसूरत अशआर से सजी हुई क़माल की ग़ज़ल हुई है आदरणीय समर कबीर जी। आपकी रचना पर ज़ियादा क्या कहूँ, आप तो हमारे मार्गदर्शक, गुरु और आदर्श है। हार्दिक बधाई आपको।।
Comment by Mahendra Kumar on October 23, 2017 at 10:38pm

कमाल की ग़ज़ल है आ. समर सर. दिल से ढेर सारी बधाई स्वीकार कीजिए.

हो चुकीं सब मौत की तैयारियाँ
दोस्तों की नोहा ख़्वानी और है

दास्तान-ए-इश्क़ तो तुम सुन चुके
ज़िन्दगानी की कहानी और है

इन दो अशआर पर अलग से दाद. सादर.

 


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on October 23, 2017 at 7:07pm

वाह्ह्ह्ह वाह्ह्ह्ह बहुत शानदार ग़ज़ल हुई भाई जी क्या कहने 

दास्तान-ए-इश्क़ तो तुम सुन चुके
ज़िन्दगानी की कहानी और है----वाह्ह्ह्ह 

दोस्तों से तो मुआफ़ी मिल गई
मुझको ख़ुद से सरगरानी और है---गज़ब 

शेर दर शेर मुबारकबाद क़ुबूल करें भाई जी 

Comment by Nilesh Shevgaonkar on October 23, 2017 at 4:12pm

वाह वा,,आ. समर सर .. कमाल ग़ज़ल हुई है ..
.
बहुत बहुत बधाई 

Comment by Ajay Tiwari on October 23, 2017 at 1:28pm

आदरणीय समर साहब,

बहुत उम्दा ग़ज़ल हुई है. इसमें एक व्यक्तिगत स्पर्श है जो बहुत प्रभावी है. 

हार्दिक बधाईयाँ.

सादर  

Comment by नाथ सोनांचली on October 23, 2017 at 8:45am
है ख़बर सबको बहादुर वो नहीं
उसकी वज्ह-ए-कामरानी और है
दास्तान-ए-इश्क़ तो तुम सुन चुके
ज़िन्दगानी की कहानी और है

वआह वाह वाह,
आद0 समर कबीर साहब सादर प्रणाम। बहुत बढ़िया ग़ज़ल कही आपने, लब्ज़ नही पास मेरे की तारीफ के लिए। बहुत बहुत बधाई इस ग़ज़ल पर। बहुत खूब।
Comment by Dr Ashutosh Mishra on October 22, 2017 at 9:13pm
आदरणीय समर सर आपकी रचना से हमेशा की तरह बहत कुछ सीखने को मिला है हमेशा की तरह शानदार एक और रचना मेरी हार्दिक बधाई स्वीकार करें सादर प्रणाम के साथ
Comment by KALPANA BHATT ('रौनक़') on October 22, 2017 at 8:29pm

हो चुकीं सब मौत की तैयारियाँ
दोस्तों की नोहा ख़्वानी और है | बहुत खूब आदरणीय समर भाई जी आदाब , बहुत खूबसूरत ग़ज़ल कही है आपने हर शे'र लाजवाब है पर मुझे यह शे'र ज्यादा पसंद आया | सादर |

Comment by Mohammed Arif on October 22, 2017 at 8:06pm
हो चुकीं सब मौत की तैयारियाँ
दोस्तों की नोहा ख़्वानी और है । वाह! वाह!! बहुत साहस चाहिए ऐसा शे'र कहने के लिए ।
हर शे'र लाजवाब है । शे'र दर शे'र दाद के साथ मुबारकबाद क़ुबूल कीजिए आली जनाब मोहतरम समर कबीर साहब ।

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Blogs

Latest Activity

लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-182
"आ. भाई सुशील जी , सादर अभिवादन। प्रदत्त विषय पर सुंदर दोहा मुक्तक रचित हुए हैं। हार्दिक बधाई। "
Sunday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-182
"आदरणीय अजय गुप्ताअजेय जी, रूपमाला छंद में निबद्ध आपकी रचना का स्वागत है। आपने आम पाठक के लिए विधान…"
Sunday
Sushil Sarna replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-182
"आदरणीय सौरभ जी सृजन के भावों को आत्मीय मान से अलंकृत करने का दिल से आभार आदरणीय जी ।सृजन समृद्ध हुआ…"
Sunday
Sushil Sarna replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-182
"आदरणीय सौरभ जी सृजन आपकी मनोहारी प्रतिक्रिया से समृद्ध हुआ । आपका संशय और सुझाव उत्तम है । इसके लिए…"
Sunday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-182
"  आदरणीय सुशील सरना जी, आयोजन में आपकी दूसरी प्रस्तुति का स्वागत है। हर दोहा आरंभ-अंत की…"
Sunday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-182
"  आदरणीय सुशील सरना जी, आपने दोहा मुक्तक के माध्यम से शीर्षक को क्या ही खूब निभाया है ! एक-एक…"
Sunday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' posted a blog post

देवता क्यों दोस्त होंगे फिर भला- लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"

२१२२/२१२२/२१२ **** तीर्थ  जाना  हो  गया  है सैर जब भक्ति का हर भाव जाता तैर जब।१। * देवता…See More
Sunday
अजय गुप्ता 'अजेय replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-182
"अंत या आरंभ  --------------- ऋषि-मुनि, दरवेश ज्ञानी, कह गए सब संतहो गया आरंभ जिसका, है अटल…"
Saturday
Sushil Sarna replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-182
"दोहा पंचक  . . . आरम्भ/अंत अंत सदा  आरम्भ का, देता कष्ट  अनेक ।हरती यही विडम्बना ,…"
Saturday
Sushil Sarna replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-182
"दोहा मुक्तक. . . . . आदि-अन्त के मध्य में, चलती जीवन रेख ।साँसों के अभिलेख को, देख सके तो देख…"
Saturday
vijay nikore commented on vijay nikore's blog post सुखद एकान्त है या है अकेलापन
"नमस्ते, सुशील जी। आप से मिली सराहना बह्त सुखदायक है। आपका हार्दिक आभार।"
Saturday
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा एकादश. . . . . पतंग

मकर संक्रांति के अवसर परदोहा एकादश   . . . . पतंगआवारा मदमस्त सी, नभ में उड़े पतंग । बीच पतंगों के…See More
Jan 14

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service