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Dayaram Methani
  • Male
  • Bhilwara - rajsthan
  • India
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Dayaram Methani's Page

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Dayaram Methani replied to Admin's discussion ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 125 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय लक्ष्मण धामी जी, प्रोत्साहन के लिए हार्दिक आभार।"
Tuesday
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"आदरणीय वंदना जी, आपने जो जानकारी अर्ध व्यंजन बाबात दी है उसमें आपने यदि अर्ध व्यंजन बाद वाले वर्ण के साथ संयुक्त हो तो = दीर्घ = 2 मात्राएँ जैसे कि:शब्द प्यार में प्या = 2 मात्राएँशब्द त्याग में त्या = 2 मात्राएँशब्द म्लान में म्ला = 2 मात्राएँशब्द…"
Tuesday
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"आदरणीय अमीरुद्दीन 'अमीर' जी, प्रोत्साहन के लिए हार्दिक धन्यवाद।"
Tuesday
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"आदरणीय आशीष यादव जी, सुंदर सृजन के लिए हार्दिक बाधई स्वीकार करें।"
Tuesday
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"आदरणीय आदरणाीय दीपांजलि दुबे जी, सुंदर सृजन के लिए हार्दिक बाधई स्वीकार करें।"
Tuesday
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"आदरणीय  लक्ष्मण धामी जी,, सुंदर सृजन के लिए हार्दिक बाधई स्वीकार करें।"
Tuesday
Dayaram Methani replied to Admin's discussion ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 125 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय समर कबीर जी, सुंदर सृजन के लिए हार्दिक बाधई स्वीकार करें।"
Tuesday
Dayaram Methani replied to Admin's discussion ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 125 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणाीय दीपांजलि दुबे जी, प्रोत्साहन के लिए बहुत बहुत धन्यवाद।"
Tuesday
Dayaram Methani replied to Admin's discussion ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 125 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय सौरभ पांडे जी, समीक्षा व सुझाव के लिए बहुत बहुत आभार। आपकी टिप्पणी से प्रोत्साहन मिला है। सादर।"
Tuesday
Dayaram Methani replied to Admin's discussion ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 125 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणाीय आशीष यादव जी, प्रोत्साहन के लिए बहुत बहुत धन्यवाद।"
Tuesday
Dayaram Methani replied to Admin's discussion ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 125 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय समर कबीर जी, समीक्षा एवं सुझाव के लिए बहुत बहुत आभार।"
Tuesday
Dayaram Methani replied to Admin's discussion ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 125 in the group चित्र से काव्य तक
"सवेरे सवेरे कहाँ जा रही हैबुलाया किसी ने वहाँ जा रही है सखी है न कोई सहेली खड़ी हैकड़ी साधना है, पहेली बड़ी है निजी काम कोई निभाने चली हैअकेली किसी को बताने चली हैपढ़े या लिखे वो सही काम होगामिटेगा अँधेरा बड़ा नाम होगा सुनी जन्म से ही कहानी पुरानीकहे…"
Monday
Dayaram Methani replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-131
"जीवन की भागमभाग पर सुंदर सृजन। वस्तुत: सभी भाग रहे बिना किसी विशेष उद्देश्य के। बहुत बहुत बधाई आपको।"
Sep 12
Dayaram Methani replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-131
"प्रोत्साहन के लिए बहुत अहुत आभार आदरणीय डॉ. विजय शंकर जी।"
Sep 12
Dayaram Methani replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-131
"आदरणीय लक्ष्मण धामी जी, प्रोत्साहन के लिए बहुत अहुत आभार।"
Sep 12
Dayaram Methani replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-131
"अति सुंदर सीख भरे दोहे आदरणीय लक्ष्मण धामी जी। हार्दिक बधाई स्वीकार करें।"
Sep 12

Profile Information

Gender
Male
City State
BHILWARA
Native Place
BHILWARA
Profession
journlist and writer
About me
I like to read and write kavita, gazal, short stories and artical.

Dayaram Methani's Blog

ग़ज़ल

 2122 2122 2122 212

नाव है मझधार में नाविक नशे में चूर है

सांझ है होने लगी मंजिल नज़र से दूर है

संकटों से आदमी क्या देव भी बचते नहीं

वक्त के आगे सभी होते यहां मजबूर है

जिन्दगी की कशमकश में जीना’ जिसको आ गया

यों समझ लो हौसलों से वो बहुत भरपूर है

दोष है अपना समय के साथ चल पाये नहीं

बंद मुट्ठी से फिसलना वक्त का दस्तूर है

हाल ‘‘मेठानी’’ बतायंे क्या किसी को अब यहां

आदमी सुनता नहीं अब हो गया मगरूर…

Continue

Posted on August 27, 2019 at 10:00pm — 2 Comments

गज़ल सीख लो

2122 2122 212

दर्द को दिल में दबाना सीख लो

ज़िन्दगी में मुस्कराना सीख लो

आंख से आंसू बहाना छोड़िये

हर मुसीबत को भगाना सीख लो

ज़िन्दगी है खेल, खेलो शान से

खेल में खुद को जिताना सीख लो

फूल को दुनिया मसल कर फैंकती

खुद को कांटों सा दिखाना सीख लो

छोड़ दें अब गिड़गिड़ाना आप भी

कुछ तो कद अपना बढ़ाना सीख लो

थी जवानी जोश भी था स्वप्न भी

दिन पुराने अब भुलाना सीख लो

कौन…

Continue

Posted on July 4, 2019 at 9:30pm — 8 Comments

झूठ का व्यापार - ग़ज़ल

मापनी: 2122 2122 2122 212

झूठ का व्यापार बढ़ता जा रहा है आजकल,

और हर इक पर नशा ये छा रहा है आजकल

है लड़ाई का नजारा हर तरफ देखें जिधर,

आदमी ही आदमी को खा रहा है आजकल

इस प्रगति के नाम पर ही मिट रहे संस्कार सब

झूठ को हर आदमी अपना रहा है आजकल

बाँटकर भगवान को नेता खुशी से झूमकर

काबा’ तेरा काशी’ मेरी गा रहा है आजकल

जाग ‘मेठानी’ बचायें आग से अपना चमन

नित नया जालिम जलाने आ रहा है…

Continue

Posted on April 8, 2019 at 2:01pm — 7 Comments

ग़ज़ल

ग़ज़ल

मापनी: 2122 2122 2122 212

आंख से आंसू कभी यों ही बहाया ना करो

दर्द दिल का भी जमाने को बताया ना करो

हर किसी को मुफ्त में कोई खुशी मिलती नहीं

मेहनत से आप अपना जी चुराया ना करो

जिन्दगी ले जब परीक्षा हौसलों से काम लो

आपदा के सामने खुद को झुकाया ना करो

हैं सफलता और नाकामी समय का खेल ही 

लक्ष्य से अपनी नजर को तो हटाया ना करो

जीत लेंगे जिन्दगी की जंग ’मेठानी‘ सुनो

तुम निराशा को कभी मन में बसाया ना…

Continue

Posted on March 15, 2019 at 1:14pm — 5 Comments

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At 10:09pm on May 24, 2019, dandpani nahak said…
आदरणीय दयाराम मेथानि जी आदाब बहुत बहुत शुक्रिया जनाब
 
 
 

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"आदरणीय ऋचा यादव जी सादर प्रणाम। जी अवश्य सुधार करती हूं सादर धन्यवाद आपका।"
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Deepanjali Dubey replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-135
"आदरणीय संजय शुक्ला जी सादर प्रणाम। आप के सुझाव अनुसार पुनः ग़ज़ल सुधार करने के बाद पेश करुंगी।…"
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Deepanjali Dubey replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-135
"आदरणीय अमित कुमार जी सादर प्रणाम। आपकी टिप्पणी के लिए हार्दिक आभार सर।"
1 hour ago

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