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Manan Kumar singh
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Manan Kumar singh replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-78 (विषय: 'विजय)
"आभार आ.लक्ष्मण भाई।"
Sep 30
Manan Kumar singh replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-78 (विषय: 'विजय)
"आभार आदरणीय उस्मानी जी।"
Sep 30
Manan Kumar singh replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-78 (विषय: 'विजय)
"आभार आदरणीय चेतन जी।"
Sep 30
Manan Kumar singh replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-78 (विषय: 'विजय)
"आभार आदरणीया रचना जी।"
Sep 30
Manan Kumar singh replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-78 (विषय: 'विजय)
"मैं जीत गई ---सुहाग की सेज पर लाल जोड़े में लिपटी बैठी झुनकी अपने अतीत में खोई हुई है। चेहरे पर घूंघट नहीं है।आज पहली रात अपने साजन को क्या सौगात भेंट करेगी,यह सवाल उसे कुरेदे जा रहा है।मन उद्विग्न है,मस्तिष्क भावशून्य।मद्धिम ध्वनि के साथ दरवाजा…"
Sep 29
Manan Kumar singh commented on Manan Kumar singh's blog post निर्भरता(लघुकथा)
"आभार आ. चेतन जी।"
Sep 10
Manan Kumar singh commented on Manan Kumar singh's blog post निर्भरता(लघुकथा)
"आभार आ. समर जी।"
Sep 10
Chetan Prakash commented on Manan Kumar singh's blog post निर्भरता(लघुकथा)
"नमस्कार, मनन कुमार सिंह, एक अच्छी सुगठित लघुकथा के लिए बधाई स्वीकार करें! बात कुछ ज्यादा गहरी किन्तु वास्तविकता है! विकास यात्रा निश्चित रूप से उर्ध्वगामी है! आनंद का विषय है.... "
Sep 10
Samar kabeer commented on Manan Kumar singh's blog post निर्भरता(लघुकथा)
"जनाब मनन कुमार सिंह जी आदाब, लघुकथा का अच्छा प्रयास है, बधाई स्वीकार करें ।"
Sep 7
Manan Kumar singh posted a blog post

निर्भरता(लघुकथा)

मलाई की मिठाई बेचते बेचते मंगनी हलवाई का नाम चल निकला था।वह दूधवालों से खास मौकों पर दूध लेता।मिठाई बनाता।बेचता। बानगी के तौर थोड़ा थोड़ा दूध देनेवालों को चखने भर दे देता। वाह वाह होती।क्या खूब मिठाई बनाता है अपुन का मंगनी,ऐसा सब कहते फिरते।मंगनी की शोहरत बढ़ती।मिठाई की मांग में इजाफा होता।वह मालामाल होता। आज फिर उसने दूधवालों से दूध पहुंचाने की अपील कर डाली।शर्तें हैं कि हर दूधवाला खुद उसके यहां दूध पहुंचाए।पेठवना नहीं चलेगा। और हां,अब जो मिठाई बनेगी उसे दूध देने वाले भी खरीदेंगे।पहले की तरह…See More
Sep 6
Manan Kumar singh replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-77
"मानव मन की विचार तरंगों को निरूपित करती लघुकथा हुई है आ.भाई विनय जी।हार्दिक बधाई।"
Aug 30
Manan Kumar singh replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-77
"भाव विभोर करने वाली लघुकथा हुई है भाई तेज वीर जी।आज के युग का अधिकांशतः तौर पर प्रतिनिधित्व करती हुई रचना है।आपको दिली शुभकामनाएं।"
Aug 30
Manan Kumar singh replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-77
"आपका हार्दिक आभार भाई तेजवीर जी।"
Aug 30
Manan Kumar singh replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-77
"आपका दिली आभार आ.भाई विनय जी।"
Aug 30
Manan Kumar singh replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-77
"अपनी अपनी बारी 'रात सिर में बहुत दर्द था।बेटे से दवा ली थी।' 'मुझे नहीं बताई।'पति दुखी भाव से बोला। 'दवा खाकर सोए थे न,इसीलिए।' 'ओह,शर्मिंदा हूं।आप सोने जाने के पहले आईं थी कहने कि सर में दर्द है,सोने जाती हूं।मैने…"
Aug 30

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Manan Kumar singh's blog post जाति गणना
"एक पक्षीय कथा-सूत्र को संवादों में बाँधा जाना कई व्यतिक्रमों का जनक हो सकता है, आदरणीय मनन कुमार जी.  ऐसी सोच के बहुतेरे जन हैं जो जातीय जनगणना की प्रासंगिकता पर तार्किक बहस कर सकते हैं.  बाकी आपकी लघुकथा की प्रस्तुति संवादपरक होने से…"
Aug 25

Profile Information

Gender
Male
City State
Mumbai
Native Place
E 52 Krishna Apt , Patna
Profession
Service
About me
A poet/ Writer

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निर्भरता(लघुकथा)

मलाई की मिठाई बेचते बेचते मंगनी हलवाई का नाम चल निकला था।वह दूधवालों से खास मौकों पर दूध लेता।मिठाई बनाता।बेचता। बानगी के तौर थोड़ा थोड़ा दूध देनेवालों को चखने भर दे देता। वाह वाह होती।क्या खूब मिठाई बनाता है अपुन का मंगनी,ऐसा सब कहते फिरते।मंगनी की शोहरत बढ़ती।मिठाई की मांग में इजाफा होता।वह मालामाल होता।

आज फिर उसने दूधवालों से दूध पहुंचाने की अपील कर डाली।शर्तें हैं कि हर दूधवाला खुद उसके यहां दूध पहुंचाए।पेठवना नहीं चलेगा। और हां,अब जो मिठाई बनेगी उसे दूध…

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Posted on September 6, 2021 at 3:00pm — 4 Comments

हिस्सा (लघुकथा)

आखिरकार जंगल के पेड़ों की गिनती के उपरांत पक्षियों और पशुओं की, उनकी जाति आधारित गिनती प्रारंभ हुई।कौवे कांव कांव करने लगे कि हम भी संख्या में कम नहीं हैं। गिद्ध अलग ही राग छेड़े हुए थे कि हम लुप्तप्राय हैं तो क्या,हमारी हिस्सेदारी जंगल की चीजों में कम क्यों हो?तीतर -बटेर,गौरैए आदि हर तरह के पक्षी जंगल की चीजों पर अपना हक जमाने के लिए बेताबी से अपने अपने तर्क रखते।कोई संख्या,तो कोई समझ पर जोर देता।कोई मुफ्तखोरी के चलते आलसी हो चुके परिंदों के हाथ पांख चलाने,खाना चुगने की जुगत पर…

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Posted on August 24, 2021 at 8:00am — 5 Comments

जाति गणना

'हम जातीय आधार पर विकास की योजनाएं बनाएंगे।'

'क्या अमीर -गरीब जाति के आधार पर होते हैं?' बाबा ने सवाल ठोका।

'नहीं,पर पता तो चले कि किस जाति में कितने गरीब हैं।'

'कमीने!जिससे तुमलोगों को अपनी कारस्तानी फैलाने का मौका मिले,यही न? वोटजात ससुर!भागता है कि नहीं हियां से?'गांव के बूढ़े बाबा ने विधायक प्रतिनिधि को खदेड़ा।

"मौलिक व अप्रकाशित"

Posted on July 29, 2021 at 7:00am — 4 Comments

लघुकथा(आजादी)

' आजादी के झंडे बिक रहे हैं।'

' पिछले साल वाले भी?'

' क्या?'

' महकमों के पुराने झंडे नये दाम में बिकते हैं। बिल बन जाती ।'

' जाने दो।आजादी का जश्न है,धूम से मने।'

' मिलेगी कब?'

' अबे बुरबक! कब की मिल चुकी, सन सैंतालीस में।'

'सरकारी राशन का पर्याय बनी जिंदगी,मिलावट का जहर और आदमी का खून पीता आदमी!यही आजादी है?'

"मौलिक व अप्रकाशित"

Posted on January 10, 2021 at 9:09am — 2 Comments

Comment Wall (7 comments)

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At 12:51pm on January 23, 2020, TEJ VEER SINGH said…

जन्म दिन की हार्दिक बधाई एवम शुभ कामनायें आदरणीय मनन कुमार सिंह जी।

At 2:33pm on September 28, 2019, dandpani nahak said…
आदरणीय मनन कुमार सिंह जी आदाब बहुत शुक्रिया आपने समय निकाला और मेरा हौसला बढ़ाया मैं ह्रदय से शुक्रगुज़ार हूँ| बहुत शुक्रिया!
At 11:05pm on June 27, 2019, dandpani nahak said…
आदरणीय मनन कुमार सिंह जी बहुत शुक्रिया आपने जो हौसला बढ़ाया है
At 11:03pm on September 17, 2016,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…
आदरणीय
श्री मनन कुमार सिंह जी,
सादर अभिवादन,
यह बताते हुए मुझे बहुत ख़ुशी हो रही है कि ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार में विगत माह आपकी सक्रियता को देखते हुए OBO प्रबंधन ने आपको "महीने का सक्रिय सदस्य" (Active Member of the Month) घोषित किया है, बधाई स्वीकार करें | प्रशस्ति पत्र उपलब्ध कराने हेतु कृपया अपना पता एडमिन ओ बी ओ को उनके इ मेल admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध करा दें | ध्यान रहे मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई है |
हम सभी उम्मीद करते है कि आपका सहयोग इसी तरह से पूरे OBO परिवार को सदैव मिलता रहेगा |
सादर ।
आपका
गणेश जी "बागी"
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक
ओपन बुक्स ऑनलाइन
At 8:47pm on May 24, 2015, kanta roy said…
स्वागत आपका दोस्त
At 5:20pm on April 12, 2015, Manan Kumar singh said…
आदरणीय गोपालजी, आपकी मित्रता मेरे लिए अमूल्य है।
At 8:29pm on April 7, 2015, डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव said…

आ0 मनन जी

आपकी मित्रता मेरा गौरव है . सादर .

 
 
 

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"आदरणीय दीपांजलि जी,  आपकी संलग्नता श्लाघनीय है. मैं आपकी रचनाओं के विन्यास से मुग्ध रहता हूँ.…"
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"जी, सही कहा आपने, आदरणीय. "
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"शुभातिशुभ "
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"सचेत रहने की बाध्यता है, निर्वहन करना होगा, आदरणीय.  जय-जय"
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सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक-126 in the group चित्र से काव्य तक
"आपकी स्पष्टोक्ति एवं मुखर स्वीकारोक्ति का सादर धन्यवाद, आदरणीय"
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"आ. दीपांजलि जी, सादर आभार।"
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लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक-126 in the group चित्र से काव्य तक
"आ. दीपान्जलि जी, छन्दों का सुन्दर प्रयास हुआ है । हार्दिक बधाई।"
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