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Chetan Prakash
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Chetan Prakash replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-163
"आदरणीय नीलेश 'नूर' साहब ग़ज़ल तक पहुँचने के लिए  आपका आभार  ! " दुश्मन-ए-जाँ तूने  कभी  हम से  वफ़ा नहीं किया" // वफ़ा स्त्रीलिंग शब्द हैअत: वाक्य नहीं बनता है .. तूने  में  तू को गिराकर …"
Jan 26
Chetan Prakash replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-163
"ग़ज़ल 2112 1212 2112 1212 दुश्मन ए जाँ तूने कभी हम से वफ़ा नहीं किया वादा किया उधार पी कर्ज़ अदा नहीं किया आज हमें नसीहतें देते हैं लोग शान से उनको कभी हमीं ने कुछ भी तो अता नहीं किया दुनिया रही खिलाफ़ फिर तुमने ही साथ कब दिया चलते रहे डगर…"
Jan 26
Sushil Sarna commented on Chetan Prakash's blog post एक ताज़ा ग़ज़ल
"वाह आदरणीय जी बहुत खूबसूरत ग़ज़ल बनी है । हार्दिक बधाई सर"
Jan 11
Chetan Prakash replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-162
"आभार,  आदरणीय  !"
Dec 29, 2023
Chetan Prakash replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-162
" आदाब,  मेहता साहब, किन्तु कहना चाहूँगा एक बार  पुन: ग़ज़ल पर ग़ौर फ़रमा  हों  !"
Dec 29, 2023
Chetan Prakash replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-162
"आदरणीय भाई अमित जी, ग़ज़ल तक पहुंचने हेतु आपका आभार  !  "221    2121    1221    212 दबंगई का ज़माना रवायत है आजकल  है दौर तीरगी का वो गफ़लत है  आजकल  अमित जी, सोलह रुकनी बह्र में 121 को 22…"
Dec 29, 2023
suryajeet kumar singh commented on Chetan Prakash's blog post ग़ज़ल
"बहुत खूब"
Dec 28, 2023
Chetan Prakash replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-162
"221 2121 1221 212 महफिल जमी है अपनी सदारत है आजकल ऐ दोस्त शेर कह तुझे राहत है आजकल दबंगई का ज़माना रवायत है आजकल है दौर तीरगी का वो गफ़लत है आजकल सरकारें थ्यान देती नहीं रोज़गार पर चल कर तू रोज़गार ए शिकायत है आजकल खुशरंग प्यार तेरा हसीना है इन…"
Dec 28, 2023
Chetan Prakash replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 152 in the group चित्र से काव्य तक
"चौपाई ः छंद गाँव ..हाट ..माल नहीं बिकता । बिकता तो अनाज ही मिलता ।। शहर ..हाट सामान.. बिका है । मिला अगर धन काम चला है ।। मर्द-बीर ये बड़े.. सयाने । एक द्वैत हैं एक निशाने ।। साथ - साथ ..चलते हैं दोनों । माल दिखाते सभी दुकानों ।। हुई प्रात ..तब..…"
Dec 24, 2023
Sushil Sarna commented on Chetan Prakash's blog post ग़ज़ल
"वाह आदरणीय जी बहुत ही खूबसूरत ग़ज़ल बनी है । हार्दिक बधाई सर"
Dec 23, 2023
Chetan Prakash posted a blog post

ग़ज़ल

2122 1122 1122 22 / 112अंधा आँखों का है हर शख़्स बता देगा तुम्हें ख़ार खाया है ये जन्मों का दग़ा देगा तुम्हेंगुरु वो घंटाल ज़माने कभी सय्याद रहा काट कर पर वो रखेगा जो सज़ा देगा तुम्हेंझाँसे में उसके न आया करो जानाँ कभी तुम रहती दुनिया का दरिन्दा वो क़जा देगा तुम्हेंहै नशा उसको सदारत का कई बज़्म सुना ना तुम्हारा न वो मेरा ही जता देगा तुम्हेंहै वो ख़ुदगर्ज़ निहायत कहीं हद से ज़ियादा ख़ुद में खोया रहे हर वक्त मिटा देगा तुम्हेंघर के हालात नहीं अच्छे हैं चेतन सुनो जाँबदल डालो वो मुहाफ़िज़ डुबा देगा…See More
Dec 20, 2023
Chetan Prakash replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-158
"अलविदा...... ! (छंद मुक्त ) किससे कहोगे अलविदा जाते पलों से या रूठते रिश्तों से छोड़ कर जाते अपनों से किसी दुःस्वप्न से भूसी बिसरी यादों से अथवा विदा लेते वर्ष की तन्हाइयों से ......  रोज बढ़ती वासनाओं से असफलताओं से जरा बताओ तो ! सच तो ये…"
Dec 17, 2023
Chetan Prakash replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-158
"अलविदा...... 221 2121 1221 212 लो सो गई है शर्म इरादा भी मर गया जो बोलता बहुत था वो आदम किधर गया इस आदमी की जुस्तजू जाने कहाँ मिटी बक़वादी हो गया है वो जज़्बा भी मर गया ज़ालिम की सारी हैंकड़ी यारो हवा हुई सामान सारा दरिन्दगी या रब किधर गया आशिक शब ए…"
Dec 16, 2023
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Chetan Prakash's blog post एक ताज़ा ग़ज़ल
"आ. भाई चेतन जी, सादर अभिवादन। गजल का प्रयास अच्छा हुआ है। हार्दिक बधाई।"
Dec 3, 2023
Chetan Prakash posted a blog post

एक ताज़ा ग़ज़ल

2122 1122 1122 22ख़्वाब से जाग उठे शाह सदा दी जाए पकड़े जायें अभी क़ातिल वो सज़ा दी जाएबख़्श दी जाए कहीं जान ख़वातीनों की अब तो ज़ालिम को कड़ी कोई सज़ा दी जाएघूमते हैं वो दरिन्दे भी नकाबों में अब तो जितना जल्दी हो उन्हें मौत बजा दी जाएलोग अच्छे ही परेशान हैं वहशी दरिन्दों इन्तिहाँ हो गयी अब लौ वो बुझा दी जाएज़ात इन्साँ की पशेमाँ है ज़रायम से 'चेतन' तूफाँ कोई तो उठा कर वो दवा दी जाएमौलिक व अप्रकाशित प्रोफ. चेतन प्रकाश 'चेतन'See More
Nov 27, 2023
Chetan Prakash replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-161
"1222 1222 122 ज़माने से हमेशा आशना हूँ ख़ुदा या मैं यहाँ आया भला हूँ मैं अपने आप में ही मुब्तिला हूँ सदा खोया ख़ुदी वो गुमशुदा हूँ जो भी मिलता है मुझसे ख़ुश रहा है कि मैं तो सब से मीठा बोलता हूँ मिरी आवारगी ना पूछ तू यार ! कभी भँवरा कभी हारा…"
Nov 24, 2023

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Gender
Male
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Hapur
Profession
Teaching
About me
I'm a poet rather born than made or trained since my childhood

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ग़ज़ल

2122 1122 1122 22 / 112

अंधा आँखों का है हर शख़्स बता देगा तुम्हें

ख़ार खाया है ये जन्मों का दग़ा देगा तुम्हें

गुरु वो घंटाल ज़माने कभी सय्याद रहा

काट कर पर वो रखेगा जो सज़ा देगा तुम्हें

झाँसे में उसके न आया करो जानाँ कभी तुम

रहती दुनिया का दरिन्दा वो क़जा देगा तुम्हें

है नशा उसको सदारत का कई बज़्म सुना

ना तुम्हारा न वो मेरा ही जता देगा तुम्हें

है वो ख़ुदगर्ज़ निहायत कहीं हद से ज़ियादा

ख़ुद…

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Posted on December 20, 2023 at 6:00pm — 2 Comments

एक ताज़ा ग़ज़ल

2122 1122 1122 22

ख़्वाब से जाग उठे शाह सदा दी जाए

पकड़े जायें अभी क़ातिल वो सज़ा दी जाए

बख़्श दी जाए कहीं जान ख़वातीनों की

अब तो ज़ालिम को कड़ी कोई सज़ा दी जाए

घूमते हैं वो दरिन्दे भी नकाबों में अब तो

जितना जल्दी हो उन्हें मौत बजा दी जाए

लोग अच्छे ही परेशान हैं वहशी दरिन्दों

इन्तिहाँ हो गयी अब लौ वो बुझा दी जाए

ज़ात इन्साँ की पशेमाँ है ज़रायम से 'चेतन'

तूफाँ कोई तो उठा कर…

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Posted on November 27, 2023 at 12:57pm — 2 Comments

एक ताज़ा गज़ल

2121 2122 2121 212

खो गया सुकून दिल का कार हो गया जहाँ

गुम गया सनम भँवर में ख़ार हो गया जहाँ

कामयाबी तौलती दुनिया भरोसे जऱ ज़मी

फार्म जिनके हैं नहीं गुड़मार हो गया जहाँ

ज़िन्दगी जिसे कहा हमने कहीं छुपा गया

है निशान अपने ज़ालिम पार हो गया जहाँ

कार-ए-दुनिया और कुछ हैं और कुछ दिखें ख़ुदा

मारकाट हाल कारोबार हो गया जहाँ

तोड़ हद रहे सभी अब तो अदब जहान में

लाज लुट रही घरों मुरदार हो गया…

Continue

Posted on November 8, 2023 at 8:30pm

एक और ग़जल ः

2121 2122 2122 212



ढूढ़ ले हबीब कोई ज़िन्दगी तो हो सके

साथ हो नसीब कोई ज़िन्दगी तो हो सके



छोड़ देता रोना-धोना मस्त जीता ज़िन्दगी

दोस्त हो करीब कोई ज़िन्दगी तो हो सके



मरता जीता मुश्किलों तू आदमी है बदगुमाँ

साध ले सलीब कोई ज़िन्दगी तो हो सके



ज़ीस्त बोझ बन गई हर शख़्स वो है झींकता

जाम हो अजीब कोई जिन्दगी तो हो सके



खो चुका ख़ुलूस आदम हो गया बे होश है

दोस्त हो ग़रीब कोई ज़िन्दगी तो हो सके



उम्र सारी वो गँवा दी… Continue

Posted on September 24, 2023 at 9:46am — 1 Comment

Comment Wall (3 comments)

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At 6:35am on July 22, 2021, रणवीर सिंह 'अनुपम' said…
आदरणीय, चेतन जी, "दोहे : कैसे- कैसे  लोग" शीर्षक के तहत लिखे गए दोहे बहुत सुंदर हैं और बहुत अच्छे लगे।

निम्न चरण विधान में न होने से इनमें लय भंग है। जिसे दूर करने की जरूरत है।

जन्म-भूमि स्वर्ग सम हो
(कारण-नवीं मात्रा पर शब्द पूरा हो रहा है जो नहीं होना चाहिए)

कृतघ्न पक्के लोग
(कारण-आरंभ में जगण "कृतघ्न"आ रहा है, जो नहीं होना चाहिए)

कर रहे बस भोग
(कारण-एक मात्राभार कम है, साथ ही पाँचवीं मात्रा पर शब्द पूरा हो रहा है जो नहीं होना चाहिए)

न हों कभी बदनाम
(कारण-पहली मात्रा पर शब्द पूरा हो रहा है जो नहीं होना चाहिए)

विद्या  हमें  सिखाती है,
(कारण-13 मात्राओं की जगह 14 मात्राएँ हैं, जो नहीं होनी चाहिए)

कर अन्याय प्रतिकार
(कारण-11 की जगह 12 मात्राएँ हैं जो नहीं होनी चाहिए)
At 11:46pm on November 22, 2020, DR ARUN KUMAR SHASTRI said…

भाई चेतन जी
नमन -
इस्लाह का
सलीका आ जायेगा
मैंने आज तलक
मुकम्मल तो कोई देखा नहीं
गलतियां निकालोगे-
तो सीखूंगा ही ।।
मैं तो अधूरा था
अधूरा रहा
और हूँ अब तलक
आज आया हूँ आपकी बज्म में
कुछ सिखा दोगे -
तो सीखूंगा भी ।।

At 11:59am on June 27, 2020, Samar kabeer said…

जनाब चेतन प्रकाश जी,ये टिप्पणी आप मुशाइर: में दें,तो मुझे जवाब देने में आसानी होगी ।

 
 
 

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